मराठी वाङ्मयाचा इतिहास अत्यंत समृद्ध आणि गौरवशाली आहे. शिक्षक पात्रता परीक्षा (Maha TET) आणि इतर स्पर्धा परीक्षांमध्ये मराठी व्याकरण आणि साहित्याशी संबंधित घटकांवर निश्चितपणे प्रश्न विचारले जातात. या घटकांमध्ये मराठी कवी व लेखकांची टोपणनावे, त्यांना मिळालेले राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय पुरस्कार, तसेच अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाचा इतिहास आणि त्यांचे अध्यक्ष यांवर प्रामुख्याने प्रश्न असतात. हा अभ्यासक्रम गुणांच्या दृष्टीने अत्यंत महत्त्वाचा असल्याने, आपण या सर्व उपघटकांची सविस्तर आणि सखोल माहिती घेणार आहोत.
१. मराठी कवी व लेखकांची टोपणनावे (Marathi Authors & Pen Names)
मराठी साहित्यात अनेक लेखकांनी आणि कवींनी स्वतःचे मूळ नाव न वापरता एका विशिष्ट नावाने लेखन केले, ज्याला आपण 'टोपणनाव' असे म्हणतो. परीक्षेमध्ये मूळ नाव देऊन टोपणनाव विचारले जाते किंवा टोपणनाव देऊन मूळ नाव ओळखायला सांगितले जाते. खालील तक्त्यामध्ये अत्यंत महत्त्वाचे प्राचीन व अर्वाचीन साहित्यिक, त्यांचे मूळ नाव आणि टोपणनाव यांची सविस्तर यादी दिली आहे:
| क्र. | लेखकाचे/कवीचे मूळ नाव | टोपणनाव |
| 1 | विष्णू वामन शिरवाडकर | कुसुमाग्रज |
| 2 | त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे | बालकवी |
| 3 | राम गणेश गडकरी | गोविंदाग्रज / बाळराम (नाटकासाठी) |
| 4 | प्रल्हाद केशव अत्रे | केशवकुमार |
| 5 | कृष्णाजी केशव दामले | केशवसुत (आधुनिक मराठी काव्याचे जनक) |
| 6 | गोपाळ हरी देशमुख | लोकहितवादी |
| 7 | चिंतामण त्र्यंबक खानोलकर | आरती प्रभू |
| 8 | दिनकर गंगाधर केळकर | अज्ञातवासी |
| 9 | नारायण सूर्याजी पंत ठोसर | समर्थ रामदास स्वामी |
| 10 | विनायक जनार्दन करंदीकर | विनायक |
| 11 | माणिक सीताराम पंत बंड | राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज |
| 12 | डेबुजी झिंगराजी जाणोरकर | संत गाडगे महाराज |
| 13 | नागोराव घनश्याम देशपांडे | ना. घ. देशपांडे |
| 14 | शंकर काशिनाथ गर्गे | दिवाकर (नाट्यछटाकार) |
| 15 | काशिनाथ हरी मोडक | माधवानुज |
| 16 | नारायण मुरलीधर गुप्ते | बी |
| 17 | भवानीशंकर श्रीधर पंडित | भाऊसाहेब पंडित |
| 18 | दत्तात्रय कोंडो घाटे | दत्त |
| 19 | माधव त्र्यंबक पटवर्धन | माधव ज्युलियन |
| 20 | दादोबा पांडुरंग तळखडकर | मराठी भाषेचे पाणिनी |
| 21 | मोरो विठ्ठल वाळंबे | मो. वि. वाळंबे |
| 22 | सौ. ताराबाई सदाशिव शिर्के | पाडस |
| 23 | सौ. मालतीबाई बेडेकर | विभावरी शिरूरकर |
| 24 | बाळकृष्ण भगवंत बोरकर | बा. भ. बोरकर / बाकीबाब |
| 25 | वसंत वामन बापट | वसंत बापट |
| 26 | मोरेश्वर रामचंद्र पराडकर | मोरोपंत |
| 27 | आत्माराम रावजी देशपांडे | अनिल |
| 28 | गजानन दिगंबर माडगूळकर | गदिमा (आधुनिक वाल्मिकी) |
| 29 | यशवंत दिनकर पेंढारकर | कवी यशवंत (महाराष्ट्र कवी) |
| 30 | गोपाळ नरहर नातू | मनमोहन |
| 31 | धोडो वासुदेव गद्रे | काव्यविहारी |
| 32 | शांताराम आठवले | शांताराम |
| 33 | शाहीर ग्यानबा तुकाराम पठारे | शाहीर पठारे |
| 34 | मुरलीधर नारायण गुप्ते | कवी बी |
| 35 | निवृत्ती रामनाथ राव | पी. सावळाराम |
| 36 | नागेश वासुदेव शेगावकर | कवी नागेश |
| 37 | रघुनाथ चंदावरकर | रघुनाथ पंडित |
| 38 | मुकुंदराज | आद्यकवी |
| 39 | विठ्ठल भगवंत घुले | कवी विठ्ठल |
| 40 | आनंदराव आत्माराम सांगवडेकर | कवी आनंद |
२. साहित्यिक पुरस्कार (Literary Awards)
मराठी साहित्याला समृद्ध करणाऱ्या लेखकांना राष्ट्रीय आणि राज्य पातळीवर विविध पुरस्कारांनी सन्मानित केले जाते. या पुरस्कारांबद्दल आणि संबंधित साहित्यकृतींबद्दल परीक्षेत वारंवार प्रश्न विचारले जातात.
अ) ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award)
ज्ञानपीठ पुरस्कार हा भारतातील साहित्यासाठीचा सर्वोच्च नागरी पुरस्कार आहे. आतापर्यंत एकूण 4 मराठी साहित्यिकांना हा बहुमान मिळाला आहे.
1. विष्णू सखाराम खांडेकर (वि. स. खांडेकर):
वर्ष: 1974
कादंबरी: 'ययाती' (या कादंबरीला मराठी साहित्यातील पहिला ज्ञानपीठ पुरस्कार मिळाला).
2. विष्णू वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज):
वर्ष: 1987
विशेष: त्यांच्या एकूण साहित्यिक योगदानासाठी आणि 'नटसम्राट' सारख्या अजरामर नाटकासाठी हा पुरस्कार देण्यात आला. कुसुमाग्रज यांचा जन्मदिवस 27 फेब्रुवारी हा 'मराठी भाषा गौरव दिन' म्हणून साजरा केला जातो.
3. गोविंद विनायक करंदीकर (विंदा करंदीकर):
वर्ष: 2003
विशेष: त्यांच्या समग्र वाङ्मयीन योगदानासाठी हा पुरस्कार देण्यात आला. 'अष्टदर्शने' हा त्यांचा अत्यंत गाजलेला काव्यसंग्रह आहे.
4. भालचंद्र वणजी नेमाडे (भालचंद्र नेमाडे):
वर्ष: 2014
विशेष: त्यांच्या समग्र साहित्यिक योगदानासाठी आणि 'हिंदू: जगण्याची समृद्ध अडगळ' या महाकादंबरीसाठी त्यांना हा सर्वोच्च पुरस्कार मिळाला.
ब) साहित्य अकादमी पुरस्कार (Sahitya Akademi Awards)
केंद्रीय साहित्य अकादमीद्वारे दरवर्षी मराठीतील उत्कृष्ट साहित्यकृतीला हा पुरस्कार दिला जातो. खाली काही अत्यंत महत्त्वाचे पुरस्कार विजेते आणि त्यांच्या उत्कृष्ट साहित्यकृतींची यादी दिली आहे:
| वर्ष | लेखक / साहित्यिक | साहित्यकृतीचे नाव | साहित्याचा प्रकार |
| 1955 | लक्ष्मणशास्त्री जोशी | वैदिक संस्कृतीचा विकास | वैचारिक |
| 1956 | बा. सी. मर्ढेकर | सौंदर्य आणि साहित्य | रसस्वाद |
| 1958 | चिंतामणराव कोल्हटकर | बहुरूपी | आत्मचरित्र |
| 1959 | ग. त्र्यं. माडखोलकर | दोन घडी | कादंबरी |
| 1960 | वि. स. खांडेकर | ययाती | कादंबरी |
| 1961 | डी. एन्. शिखरे | डॉ. धोंडो केशव कर्वे | चरित्र |
| 1962 | पु. य. देशपांडे | अनामिकाची चिंतनिका | तत्त्वज्ञान |
| 1964 | रं. शं. वाळंबे | कोंकणी भाषेचे व्याकरण | व्याकरण |
| 1965 | पु. ल. देशपांडे | व्यक्ती आणि वल्ली | व्यक्तीचित्रे |
| 1967 | ना. घ. देशपांडे | शीळ | काव्यसंग्रह |
| 1968 | इरावती कर्वे | युगांत | वैचारिक |
| 1969 | श्री. ज. जोशी | श्रीनिवास | कादंबरी |
| 1970 | ना. सं. इनामदार | झेप | कादंबरी |
| 1971 | दुर्गा भागवत | पैस | ललित निबंध |
| 1973 | जी. ए. कुलकर्णी | काजळमाया | कथासंग्रह |
| 1975 | रा. भा. पाटणकर | सौंदर्य मिमांसा | रसस्वाद |
| 1976 | मारुती चितमपल्ली | रानवाटा | निसर्ग लेखन |
| 1977 | अत्रे प्रल्हाद केशव | मी कसा झालो | आत्मचरित्र |
| 1978 | महादबा विठ्ठल धोंड | ज्ञानेश्वरीतील लौकिक सृष्टी | समीक्षा |
| 1979 | प्र. के. अत्रे | साष्टांग नमस्कार | नाटक |
| 1980 | मंगेज पाडगावकर | सलाम | काव्यसंग्रह |
| 1981 | लक्ष्मण माने | उपरा | आत्मचरित्र |
| 1982 | प्रभाकर पाध्ये | सौंदर्यशास्त्र | समीक्षा |
| 1983 | व्यंकटेश माडगूळकर | सत्तांतर | कादंबरी |
| 1984 | इंदिरा संत | गर्भरेशीम | काव्यसंग्रह |
| 1985 | विश्राम बेडेकर | एक झाड आणि दोन पक्षी | कादंबरी |
| 1986 | ना. धों. महानोर | पळसखेडची गाणी | लोकसाहित्य |
| 1988 | लक्ष्मण गायकवाड | उचल्या | आत्मचरित्र |
| 1990 | आनंद यादव | झोंबी | कादंबरी |
| 1991 | भालचंद्र नेमाडे | टीकास्वयंवर | समीक्षा |
| 1993 | म. ना. वांनखडे | दलित साहित्य: स्वरूप व भूमिका | समीक्षा |
| 1995 | नामदेव ढसाळ | गोलपिठा | काव्यसंग्रह |
| 1996 | गंगाधर गाडगीळ | एका मुंगीचे महाभारत | आत्मचरित्र |
| 1998 | सदानंद मोरे | तुकाराम दर्शन | समीक्षा |
| 2000 | नामदेव कांबळे | राघववेळ | कादंबरी |
| 2001 | राजन गवस | तणकट | कादंबरी |
| 2003 | त्र्यं. वि. सरदेशमुख | डांगोरा एका नगरीचा | कादंबरी |
| 2005 | अरुण कोलटकर | भिजकी वही | काव्यसंग्रह |
| 2007 | अनुराधा पाटील | कदाचित अजूनही | काव्यसंग्रह |
| 2009 | वसंत आबाजी डहाके | चित्रलिपी | काव्यसंग्रह |
| 2011 | ग्रेस (माणिक गोडघाटे) | वाऱ्याने हलते रान | ललित निबंध |
| 2013 | सतीश काळसेकर | वाचणाऱ्याची रोजनिशी | ललित निबंध |
| 2015 | अरुण खोपकर | चालत-बोलत प्रकाश | चित्रपट समीक्षा |
| 2017 | श्रीकांत देशमुख | बोलावे ते आम्ही | काव्यसंग्रह |
| 2019 | अनुराधा प्रभूदेसाई | कर्माचा सिद्धांत | वैचारिक |
| 2020 | आसावरी काकडे | आरशाचा संवाद | काव्यसंग्रह |
| 2021 | किरण गुरव | बाळूच्या अवस्थांतराची डायरी | कथासंग्रह |
| 2022 | प्रविण दशरथ बांदेकर | उजव्या सोंडेच्या बाहुल्या | कादंबरी |
| 2023 | कृष्णात खोत | रिंगाण | कादंबरी |
| 2024 | नंदा खरे | उद्या | कादंबरी |
क) महाराष्ट्र राज्य वाङ्मय पुरस्कार (Maharashtra State Literary Awards)
महाराष्ट्र शासनाच्या वतीने दरवर्षी विविध उत्कृष्ट साहित्यकृतींना 'प्रौढ वाङ्मय', 'बाल वाङ्मय' अशा विविध श्रेणींमध्ये पुरस्कार दिले जातात. यामध्ये खालील पुरस्कार अत्यंत प्रतिष्ठेचे मानले जातात:
१. यशवंतराव चव्हाण जीवनगौरव पुरस्कार: साहित्यातील प्रदीर्घ योगदानासाठी दिला जातो.
२. कवी केशवसुत पुरस्कार: उत्कृष्ट काव्यसंग्रहासाठी दिला जातो.
३. हरि नारायण आपटे पुरस्कार: उत्कृष्ट कादंबरीसाठी दिला जातो.
४. राम गणेश गडकरी पुरस्कार: उत्कृष्ट नाट्यलेखनासाठी दिला जातो.
३. अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन (All India Marathi Sahitya Sammelan)
अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन ही मराठी भाषेतील लेखक, कवी आणि रसिकांची एकत्र येणारी एक अत्यंत मोठी सांस्कृतिक आणि साहित्यिक घटना आहे. स्पर्धा परीक्षांच्या दृष्टीने संमेलनाचा इतिहास, प्रमुख स्थळे आणि त्यांचे अध्यक्ष अतिशय महत्त्वाचे आहेत.
अ) ऐतिहासिक पार्श्वभूमी आणि महत्त्व:
पहिले संमेलन: न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानडे यांच्या पुढाकाराने 11 मे 1878 रोजी पुणे येथे पहिले मराठी ग्रंथकार संमेलन (जे पुढे अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन म्हणून ओळखले गेले) भरले होते.
उद्देश: मराठी भाषेचा प्रसार करणे, लेखकांच्या समस्यांवर चर्चा करणे, आणि नवीन साहित्याला प्रोत्साहन देणे.
ब) महत्त्वाच्या ऐतिहासिक संमेलनांची यादी:
खालील तक्त्यामध्ये आतापर्यंतच्या काही अत्यंत महत्त्वाच्या ऐतिहासिक, वैशिष्ट्यपूर्ण आणि अलीकडील अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनांची संपूर्ण माहिती दिली आहे:
| संमेलन क्र. | वर्ष | स्थळ (स्थान) | संमेलनाध्यक्ष |
| 1 | 1878 | पुणे | न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानडे |
| 2 | 1885 | पुणे | कृष्णशास्त्री राजवाडे |
| 3 | 1905 | सातारा | रघुनाथ पां. करंदीकर |
| 4 | 1906 | पुणे | बाळकृष्ण विष्णू भिडे |
| 5 | 1907 | पुणे | विष्णू मोरेश्वर महाजनी |
| 6 | 1908 | पुणे | चिंतामण विनायक वैद्य |
| 7 | 1912 | अकोला | काशिनथ नारायण साने |
| 8 | 1915 | मुंबई | श्रीपाद कृष्ण कोल्हटकर |
| 12 | 1926 | मुंबई | माधव श्रीहरी अणे |
| 15 | 1930 | मडगाव (गोवा) | वामन मल्हार जोशी |
| 19 | 1934 | बडोदे (गुजरात) | न. चिं. केळकर |
| 23 | 1938 | मुंबई | स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर |
| 26 | 1941 | सोलापूर | प्रल्हाद केशव अत्रे |
| 33 | 1950 | पंढरपूर | यशवंत दिनकर पेंढारकर (कवी यशवंत) |
| 36 | 1954 | दिल्ली | लक्ष्मणशास्त्री जोशी |
| 41 | 1959 | मिरज | विष्णू सखाराम खांडेकर |
| 45 | 1964 | मडगाव (गोवा) | विष्णू वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) |
| 50 | 1974 | इचलकरंजी | पु. ल. देशपांडे |
| 51 | 1975 | कराड | दुर्गा भागवत (पहिल्या महिला अध्यक्ष) |
| 60 | 1987 | पुणे | विश्राम बेडेकर |
| 65 | 1992 | कोल्हापूर | रमेश मंतरी |
| 70 | 1997 | अहमदनगर | ना. धों. महानोर |
| 75 | 2002 | सातारा | नारायण सुर्वे |
| 80 | 2007 | नागपूर | मारुती चितमपल्ली |
| 85 | 2012 | चंद्रपूर | वसंत आबाजी डहाके |
| 90 | 2017 | डोंबिवली | डॉ. अक्षयकुमार काळे |
| 91 | 2018 | बडोदे (गुजरात) | लक्ष्मीकांत देशमुख |
| 92 | 2019 | यवतमाळ | डॉ. अरूणा ढेरे |
| 93 | 2020 | उस्मानाबाद (धाराशिव) | फादर फ्रान्सिस दिब्रिटो |
| 94 | 2021 | नाशिक | डॉ. जयंत नारळीकर |
| 95 | 2022 | उदगीर (लातूर) | भारत सासणे |
| 96 | 2023 | वर्धा | न्यायमूर्ती नरेंद्र चपळगावकर |
| 97 | 2024 | अमळनेर (जळगाव) | डॉ. रवींद्र शोभणे |
| 98 | 2025 | दिल्ली | तारा भवाळकर |
४. परीक्षेच्या दृष्टीने काही महत्त्वाचे विशेष मुद्दे (Key Highlights for TET)
पहिल्या महिला अध्यक्षा: दुर्गा भागवत यांनी 1975 च्या कराड येथील 51 व्या साहित्य संमेलनाचे अध्यक्षपद भूषवले होते. त्या संमेलनाच्या पहिल्या महिला अध्यक्षा होत्या. आतापर्यंत शांता शेळके, अरूणा ढेरे आणि तारा भवाळकर यांनीही हे पद भूषवले आहे.
महाराष्ट्राबाहेर झालेली संमेलने: मराठी भाषेचा विस्तार दर्शवण्यासाठी दिल्ली, बडोदे (गुजरात), मडगाव (गोवा), हैदराबाद, इंदूर इत्यादी ठिकाणी देखील अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलने पार पडली आहेत.
आद्यकवी मुकुंदराज: मराठी साहित्यातील पहिले कवित्व मानले जाणारे 'विवेकसिंधू' हे पुस्तक मुकुंदराज यांनी लिहिले, म्हणून त्यांना मराठीचे आद्यकवी म्हटले जाते.
परीक्षा देणाऱ्या विद्यार्थ्यांनी या सर्व नावांची, पुरस्कारांची आणि संमेलनांची वारंवार उजळणी (Revision) करावी, जेणेकरून वस्तुनिष्ठ प्रश्नांची उत्तरे चुकणार नाहीत.
मराठी साहित्य: टोपणनावे, साहित्यिक पुरस्कार व साहित्य संमेलन
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