क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

Sunil Sagare
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1. चेर और मलयालम भाषा का विकास

भारत में क्षेत्रीय संस्कृतियों की समझ अक्सर भाषा से शुरू होती है। चेर साम्राज्य इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एक शासक वंश ने क्षेत्रीय भाषा को राजकाज का हिस्सा बनाया।

महोदयपुरम का चेर राज्य

  • स्थापना: चेर राज्य की स्थापना $9^{th}$ शताब्दी में हुई थी।

  • स्थान: यह प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग (वर्तमान केरल) में स्थित था।

  • भाषा का प्रयोग: चेर शासकों ने अपने अभिलेखों में मलयालम भाषा और लिपि का प्रयोग किया।

  • महत्व: यह उपमहाद्वीप के सरकारी अभिलेखों में किसी क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग के सबसे शुरुआती उदाहरणों में से एक है।

संस्कृत से संबंध

  • चेर लोगों ने संस्कृत की परंपराओं से भी बहुत कुछ ग्रहण किया।

  • केरल का मंदिर-रंगमंच (Temple Theatre), जिसकी परंपरा इस काल तक खोजी जा सकती है, संस्कृत महाकाव्यों पर आधारित था।

  • मलयालम भाषा की पहली साहित्यिक कृतियाँ ($12^{th}$ शताब्दी) प्रत्यक्ष रूप से संस्कृत की ऋणी हैं।

लीलातिलकम (Lilatilakam)

  • यह $14^{th}$ शताब्दी का एक ग्रंथ है।

  • विषय: यह व्याकरण और काव्यशास्त्र पर लिखा गया ग्रंथ है।

  • शैली: यह मणिप्रवालम् (Manipravalam) शैली में लिखा गया है।

  • मणिप्रवालम् का अर्थ: इसका शाब्दिक अर्थ है "हीरा और मूंगा"। यहाँ यह दो भाषाओं—संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा (मलयालम)—के साथ-साथ प्रयोग को दर्शाता है।


2. शासक और धार्मिक परंपराएँ: जगन्नाथ संप्रदाय

कई क्षेत्रों में क्षेत्रीय संस्कृतियाँ धार्मिक परंपराओं के इर्द-गिर्द विकसित हुईं। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पुरी (ओडिशा) का जगन्नाथ संप्रदाय है।

जगन्नाथ का अर्थ

  • जगन्नाथ का शाब्दिक अर्थ है "दुनिया का मालिक" (Lord of the World), जो भगवान विष्णु का पर्यायवाची है।

  • स्थानीय से विशिष्ट: मूल रूप से जगन्नाथ एक स्थानीय जनजातीय देवता थे। बाद में इन्हें विष्णु का रूप मान लिया गया।

  • आज भी जगन्नाथ की काष्ठ (लकड़ी) प्रतिमा स्थानीय जनजातीय लोगों द्वारा बनाई जाती है, जो उनके मूल स्वरूप को दर्शाता है।

गंग वंश और मंदिर निर्माण

  • राजा अनंतवर्मन: $12^{th}$ शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन ने पुरी में पुरुषोत्तम जगन्नाथ के लिए एक मंदिर बनवाने का निश्चय किया।

  • राजा अनंगभीम तृतीय: $1230$ ई. में राजा अनंगभीम तृतीय ने अपना पूरा राज्य भगवान को समर्पित कर दिया और स्वयं को उनका 'राउत' (उप-शासक) घोषित किया।

राजनीतिक महत्व

  • जैसे-जैसे मंदिर का महत्व तीर्थस्थल के रूप में बढ़ा, इसका सामाजिक और राजनीतिक मामलों में प्रभाव भी बढ़ गया।

  • मुगलों, मराठों और अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी—सभी ने ओडिशा जीतने पर इस मंदिर पर नियंत्रण करने का प्रयास किया।

  • उनका मानना था कि मंदिर पर नियंत्रण से स्थानीय जनता में उनका शासन स्वीकार्य हो जाएगा।


3. राजपूत और शूरवीरता की परंपराएँ

$19^{th}$ शताब्दी में ब्रिटिश लोग जिसे आज राजस्थान कहते हैं, उसे अक्सर 'राजपूताना' कहते थे। यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट संस्कृति और वीरता के लिए जाना जाता है।

राजपूत कौन हैं?

  • राजपूत शब्द 'राजा-पुत्र' से निकला है।

  • ये स्वयं को सूर्यवंशी या चंद्रवंशी मानते थे।

  • पृथ्वीराज चौहान जैसे शासक राजपूत वीरता के आदर्श उदाहरण हैं।

शूरवीरता की संस्कृति

  • आदर्श: राजपूतों के लिए युद्धभूमि में लड़ते हुए मर जाना बेहतर था, बजाय पीठ दिखाकर भागने के।

  • चारण और भाट: ये विशेष प्रकार के गायक-कवि होते थे जो शासकों की उपलब्धियों और वीरता की कहानियों को गीतों के रूप में गाते थे। ये गीत अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए होते थे।

  • कहानियों में अक्सर स्वामिभक्ति, मित्रता, प्रेम और क्रोध जैसे प्रबल संवेगों का चित्रण होता था।

महिलाओं की स्थिति और सती प्रथा

  • स्त्रियाँ भी इन कहानियों का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।

  • अक्सर वे युद्ध या विवाद का कारण होती थीं (विवाह या अपहरण के रूप में)।

  • सती प्रथा: राजपूत कहानियों में स्त्रियों द्वारा अपने पतियों के जीवन या मृत्यु का अनुसरण करने का उल्लेख मिलता है। विधवाएँ अपने पति की चिता पर आत्मदाह कर लेती थीं, जिसे 'सती' कहा जाता था।


4. क्षेत्रीय सीमाओं से परे: कथक नृत्य की कहानी

नृत्य भी क्षेत्रीय संस्कृतियों का एक प्रमुख अंग है। उत्तर भारत का 'कथक' नृत्य इसका प्रमुख उदाहरण है।

कथक का उद्भव

  • 'कथक' शब्द कथा से निकला है, जिसका प्रयोग संस्कृत और अन्य भाषाओं में कहानी के लिए होता है।

  • मूल रूप से, कथक उत्तर भारत के मंदिरों में कथाकार (कहानी सुनाने वाले) की एक जाति थी।

  • ये कथाकार हाव-भाव और संगीत के साथ महाकाव्यों की कहानियाँ सुनाते थे।

विकास के चरण

  1. भक्ति आंदोलन ($15^{th}-16^{th}$ शताब्दी): रास लीला (राधा-कृष्ण की कहानियाँ) के प्रसार के साथ कथक एक विशिष्ट नृत्य शैली बनने लगा। इसमें लोकनृत्य और कथाकार के हाव-भाव मिल गए।

  2. मुगल दरबार: मुगल बादशाहों के शासन में कथक दरबार में किया जाने लगा। यहाँ इसने अपनी विशिष्ट तकनीक और घराने विकसित किए।

  3. दो प्रमुख घराने:

    • जयपुर घराना (राजस्थान)

    • लखनऊ घराना (अवध के नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में)

विशेषताएँ

  • इसमें तीव्र पद-संचालन (Footwork), वेशभूषा और अभिनय पर जोर दिया जाता है।

  • $19^{th}$ और $20^{th}$ शताब्दी में यह 'शास्त्रीय नृत्य' के रूप में स्थापित हुआ।

नोट: स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने 6 नृत्यों को 'शास्त्रीय' (Classical) माना (भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और कथक)। बाद में सत्त्रिया (असम) को भी जोड़ा गया।


5. संरक्षकों के लिए चित्रकला: लघुचित्रों की परंपरा

लघुचित्र (Miniatures) क्षेत्रीय कला का एक और अद्भुत उदाहरण हैं।

लघुचित्र क्या हैं?

  • ये छोटे आकार के चित्र होते हैं।

  • इन्हें आमतौर पर कपड़े या कागज पर जलरंगों (Water Colours) से बनाया जाता है।

  • प्राचीनतम लघुचित्र ताड़ के पत्तों या लकड़ी पर बनाए गए थे।

मुगल प्रभाव और उसका पतन

  • अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ ने कुशल चित्रकारों को संरक्षण दिया।

  • मुगल चित्रकला में यथार्थवाद, शिकार के दृश्य और दरबारी शान-ओ-शौकत प्रमुख थे।

  • $18^{th}$ शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद, ये चित्रकार क्षेत्रीय राज्यों (जैसे राजस्थान और हिमालय की पहाड़ियों) में चले गए।

बसोहली शैली (Basohli Style)

  • स्थान: हिमालय की तलहटी (वर्तमान हिमाचल प्रदेश)।

  • $17^{th}$ शताब्दी के अंत तक यहाँ एक साहसपूर्ण और भावप्रवण शैली विकसित हुई।

  • प्रमुख कृति: भानुदत्त की रसमंजरी का चित्रण यहाँ की सबसे प्रसिद्ध कृति है।

कांगड़ा शैली (Kangra Style)

  • कारण: $1739$ में नादिर शाह के आक्रमण के कारण दिल्ली के कलाकार पहाड़ों की ओर पलायन कर गए।

  • $18^{th}$ शताब्दी के मध्य तक कांगड़ा शैली विकसित हुई।

  • प्रेरणा: वैष्णव परंपराएँ।

  • विशेषता: ठंडे नीले और हरे रंगों का प्रयोग, और विषयों का काव्यात्मक निरूपण।


6. बंगाल: एक क्षेत्रीय संस्कृति का नज़दीकी नज़रिए से अध्ययन

अक्सर हम मानते हैं कि बंगाल के लोग हमेशा से बंगाली बोलते थे, लेकिन यह इतिहास बहुत रोचक है।

भाषा का उद्भव

  • प्राचीन काल ($4^{th}-3^{rd}$ शताब्दी ई.पू.) में बंगाल और मगध (दक्षिण बिहार) के बीच वाणिज्यिक संबंध थे, जिससे संस्कृत का प्रभाव बढ़ा।

  • चौथी शताब्दी में गुप्त वंश ने उत्तरी बंगाल पर अधिकार कर लिया और ब्राह्मणों को बसाया, जिससे भाषाई और सांस्कृतिक प्रभाव और गहरा हुआ।

  • $7^{th}$ शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने पाया कि पूरे बंगाल में संस्कृत से संबंधित भाषाओं का प्रयोग हो रहा था।

बंगाली भाषा का विकास

  • आठवीं शताब्दी से पाल शासकों के अंतर्गत एक क्षेत्रीय भाषा का ढांचा बना।

  • $14^{th}-16^{th}$ शताब्दी के बीच बंगाल पर सुल्तानों का शासन रहा (जो दिल्ली से स्वतंत्र थे)।

  • $1586$ में अकबर ने बंगाल को जीता (सूबा बनाया)। उस समय प्रशासन की भाषा फारसी थी, लेकिन बंगाली एक क्षेत्रीय भाषा के रूप में विकसित होती रही।

  • $15^{th}$ शताब्दी तक आते-आते विभिन्न बोलियाँ मिलकर एक मानक साहित्यिक भाषा बन गईं।

बंगाली साहित्य के दो भाग

  1. संस्कृत-आधारित: इसमें मंगलकाव्य और भक्ति साहित्य (जैसे चैतन्य महाप्रभु की जीवनियाँ) शामिल हैं। इसका काल $15^{th}-18^{th}$ शताब्दी के बीच है।

  2. नाथ साहित्य: यह संस्कृत से स्वतंत्र है। इसमें 'मैनामती-गोपीचंद्र' के गीत, धर्म ठाकुर की पूजा, और परियों की कहानियाँ शामिल हैं।

मंगलकाव्य: इसका शाब्दिक अर्थ है 'शुभ काव्य'। ये स्थानीय देवी-देवताओं से संबंधित हैं।

पीर और मंदिर (Pirs and Temples)

  • $16^{th}$ शताब्दी में पश्चिमी बंगाल से लोग दक्षिण-पूर्वी बंगाल (दलदली इलाकों) में बसने लगे।

  • मुगलों ने यहाँ मस्जिदों की स्थापना की और धार्मिक परिवर्तन हुआ।

  • पीर: सामुदायिक नेताओं को 'पीर' कहा गया, जिनमें अलौकिक शक्तियाँ मानी जाती थीं। इसमें हिंदू और बौद्ध देवी-देवता भी पीर के रूप में पूजे जाने लगे (समन्वयवादी संस्कृति)।

मंदिर स्थापत्य: टेराकोटा

  • बंगाल में ईंटों और टेराकोटा (पकी मिट्टी) की मदद से कई मंदिर बने।

  • दोचाला और चौचाला: यह बंगाल की झोपड़ियों जैसी छत वाली स्थापत्य शैली थी।

    • दोचाला: दो छतों वाली।

    • चौचाला: चार छतों वाली।

  • विष्णुपुर (बांकुरा जिले) के मंदिर इस शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।


CTET परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms)

  • लघुचित्र (Miniature): छोटे आकार की पेंटिंग।

  • कथक: कथा (कहानी) कहने वाला।

  • रास लीला: राधा-कृष्ण की पौराणिक कहानियाँ।

  • मणिप्रवालम्: संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा का मिश्रण (शाब्दिक अर्थ: हीरा और मूंगा)।

  • मंगलकाव्य: बंगाल के स्थानीय देवी-देवताओं पर आधारित साहित्य।

  • पीर: फारसी भाषा का शब्द जिसका अर्थ है 'आध्यात्मिक मार्गदर्शक'।

  • घराना: संगीत या नृत्य की परंपरा/शैली (जैसे जयपुर, लखनऊ)।

प्रमुख तिथियां और कालक्रम

  • 1200 ई. के आसपास: चेर साम्राज्य में मलयालम का विकास।

  • 1230 ई.: राजा अनंगभीम तृतीय ने उड़ीसा राज्य जगन्नाथ को समर्पित किया।

  • 14वीं शताब्दी: लीलातिलकम की रचना।

  • 1586 ई.: अकबर द्वारा बंगाल को जीतना।

  • 1739 ई.: नादिर शाह का दिल्ली पर आक्रमण (पहाड़ी चित्रकला के विकास का कारण)।



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