1. जनसुविधाएँ: परिचय और अर्थ
जनसुविधाएँ वे सेवाएँ हैं जो किसी भी समाज के सुचारु रूप से चलने और नागरिकों के गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक होती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनता की भलाई है।
मूलभूत आवश्यकताएँ: इसमें पानी, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बिजली, परिवहन, विद्यालय और कॉलेज जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
साझा लाभ: जनसुविधाओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि एक बार इनका निर्माण हो जाने पर इनका लाभ बहुत से लोग उठा सकते हैं।
उदाहरण: यदि किसी गाँव में एक विद्यालय बनता है, तो उससे बहुत से बच्चों को शिक्षा मिलती है।
उदाहरण: बिजली की आपूर्ति से किसान, विद्यार्थी, और उद्योग सभी लाभान्वित होते हैं।
सरकार की जिम्मेदारी: भारतीय संविधान के अनुसार, लोगों को ये सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
2. जल और चेन्नई के लोग (NCERT केस स्टडी)
NCERT में चेन्नई के जल संकट के माध्यम से असमानता को समझाया गया है। यह CTET का एक पसंदीदा विषय है। यहाँ शहर के अलग-अलग इलाकों में पानी की उपलब्धता का विवरण दिया गया है:
क. अन्ना नगर (संपन्न इलाका):
यहाँ रामगोपाल जैसे उच्च अधिकारी रहते हैं।
यहाँ चौबीस घंटे नल में पानी आता है।
पानी की कमी होने पर नगर निगम को फोन करके तुरंत टैंकर मँगवा लिया जाता है।
यहाँ के निवासी पानी की पर्याप्तता के कारण हरे-भरे बगीचे बनाए रखते हैं।
ख. मायलापुर (मध्यम वर्गीय इलाका):
सुब्रमण्यम जैसे लोग यहाँ रहते हैं।
यहाँ दो दिन में एक बार पानी आता है।
लोग अपनी जरूरतों के लिए बोरवेल का पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वह खारा है।
पीने के लिए लोग पानी के कैन (बोतलें) खरीदते हैं।
ग. मडीपक्कम (पानी की कमी वाला क्षेत्र):
यहाँ शिवा जैसे लोग किराए पर रहते हैं।
यहाँ चार दिनों में एक बार पानी मिलता है।
पानी की कमी के कारण शिवा अपने परिवार को चेन्नई नहीं ला पा रहा है।
वह सिर्फ पीने के लिए बोतल का पानी खरीदता है।
घ. स्लम/झुग्गी-बस्ती (सैदापेट):
पद्मा जैसी घरेलू नौकरानी यहाँ रहती है।
यहाँ की स्थिति सबसे खराब है।
यहाँ झुग्गी वालों के लिए नल नहीं है, बल्कि 30 झुग्गियों के लिए एक ही कॉमन नल है।
रोजाना केवल 20 मिनट के लिए बोरवेल का पानी आता है।
एक परिवार को अधिकतम 3 बाल्टियाँ भरने का मौका मिलता है।
गर्मियों में स्थिति और भयावह हो जाती है, और लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ता है।
निष्कर्ष: पानी की उपलब्धता में भारी असमानता है। संपन्न लोगों के पास विकल्प हैं, जबकि गरीब पूरी तरह से सरकार पर निर्भर हैं।
3. जीवन के अधिकार के रूप में पानी (अनुच्छेद 21)
भारतीय संविधान में पानी को केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना गया है।
अनुच्छेद 21: संविधान का अनुच्छेद $21$ जीवन के अधिकार की गारंटी देता है।
न्यायालय का दृष्टिकोण: उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने कई मुकदमों में यह स्पष्ट किया है कि "जीवन के अधिकार" में "साफ पानी पीने का अधिकार" भी शामिल है।
सार्वभौमिक पहुँच: इसका अर्थ है कि पानी तक सभी की पहुँच होनी चाहिए, चाहे वह अमीर हो या गरीब। पानी "सस्ता" और "पर्याप्त" होना चाहिए।
महत्वपूर्ण अदालती फैसला:
2007 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले (महबूब नगर के किसान द्वारा प्रदूषण के खिलाफ याचिका) में फैसला सुनाया था कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, क्योंकि यह जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
4. जनसुविधाएँ और सरकार की भूमिका
निजी कंपनियाँ और सरकार की कार्यप्रणाली में बुनियादी अंतर होता है, जिसे समझना CTET के लिए जरूरी है।
निजी कंपनियाँ क्यों रुचि नहीं लेतीं?
निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है।
नालियाँ साफ करने या मलेरिया रोधी अभियान चलाने जैसे कामों में कोई सीधा मुनाफा नहीं है, इसलिए निजी कंपनियाँ ये काम नहीं करेंगी।
स्कूल और अस्पताल जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियाँ रुचि लेती हैं, लेकिन उनकी फीस इतनी अधिक होती है कि गरीब व्यक्ति उसका लाभ नहीं उठा सकता।
सरकार की जिम्मेदारी क्यों है?
लोकतंत्र में सरकार नागरिकों के प्रति जवाबदेह होती है।
संविधान में लोक कल्याणकारी राज्य की कल्पना की गई है।
भले ही मुनाफा न हो, सरकार को करों (Taxes) से प्राप्त धन का उपयोग करके ये सुविधाएँ देनी पड़ती हैं।
5. सरकार को धन कहाँ से मिलता है? (बजट और कर)
जनसुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार से काम करती है:
संसद में बजट: हर साल सरकार संसद में अपना बजट पेश करती है। इसमें पिछले साल के खर्चों का ब्यौरा और आने वाले साल की योजनाओं का विवरण होता है।
कर राजस्व: सरकार की आय का मुख्य स्रोत जनता से वसूला गया 'कर' (Tax) है।
करों के प्रकार:
आयकर (Income Tax)
वस्तु एवं सेवा कर (GST)
निगम कर (Corporate Tax)
संपत्ति कर, आदि।
उदाहरण: पानी की आपूर्ति के लिए सरकार को पानी निकालने, उसे शुद्ध करने, पाइपलाइन बिछाने और गंदे पानी को ठिकाने लगाने पर खर्च करना पड़ता है। सरकार पानी की जो कीमत वसूलती है, वह खर्च से बहुत कम होती है, ताकि गरीब भी इसका इस्तेमाल कर सकें। बाकी अंतर की भरपाई करों से की जाती है।
6. शहरी जल आयोग के मानक बनाम वास्तविकता
शहरी जलापूर्ति में मानकों और वास्तविकता में बहुत बड़ा अंतर है।
मानक: शहरी जल आयोग ने तय किया है कि शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन करीब $135$ लीटर (लगभग 7 बाल्टी) पानी मिलना चाहिए।
आलीशान होटल: पाँच सितारा होटलों में यह खपत प्रतिदिन $1,600$ लीटर (लगभग 80 बाल्टी) तक हो सकती है।
झुग्गी-बस्तियाँ: यहाँ के लोगों को प्रतिदिन $20$ लीटर (1 बाल्टी) से भी कम पानी मिलता है।
नोट: इसे 'जल उपलब्धता में असमानता' कहते हैं, जो सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
7. क्या निजीकरण (Privatization) समाधान है?
अक्सर यह बहस होती है कि क्या जल आपूर्ति निजी कंपनियों को सौंप देनी चाहिए। इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क:
विश्व बैंक की सलाह:
कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और विश्व बैंक सलाह देते हैं कि जलापूर्ति का काम निजी कंपनियों को दिया जाना चाहिए क्योंकि सरकारें अक्षम साबित हो रही हैं।
निजीकरण के परिणाम (केस स्टडी - बोलीविया):
बोलीविया (दक्षिण अमेरिका) के एक शहर 'कोचाबांबा' में पानी का निजीकरण किया गया।
परिणामस्वरूप पानी की कीमतें इतनी बढ़ गईं कि आम जनता के लिए पानी खरीदना मुश्किल हो गया।
वहाँ भारी दंगे हुए (Water War), और अंततः सरकार को निजी कंपनी से अनुबंध रद्द करना पड़ा और व्यवस्था वापस अपने हाथ में लेनी पड़ी।
भारत में स्थिति:
भारत में भी कई शहरों में पानी का काम निजी कंपनियों को दिया जा रहा है, जिससे कीमतें बढ़ने और गरीबों की पहुँच से दूर होने का खतरा बना रहता है।
8. सफलता की कहानियाँ: पोर्टो एलेग्रे (ब्राजील)
ब्राजील का शहर 'पोर्टो एलेग्रे' जनसुविधाओं के सरकारी प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
इस शहर में बहुत से गरीब लोग रहते हैं, लेकिन यहाँ शिशु मृत्यु दर बहुत कम है।
कारण: नगर निगम ने शुद्ध पेयजल को सभी नागरिकों तक पहुँचाना सुनिश्चित किया है।
यहाँ पानी की कीमत बहुत कम रखी गई है और गरीबों से सामान्य दर से भी आधी कीमत ली जाती है।
जल विभाग को जो मुनाफा होता है, उसका इस्तेमाल जलापूर्ति में सुधार के लिए किया जाता है।
यहाँ के बजट निर्माण में जनता की भागीदारी होती है।
9. स्वच्छता और जनसुविधाएँ (Sanitation)
पीने के पानी के साथ-साथ स्वच्छता भी जनसुविधा का एक अभिन्न अंग है।
स्वास्थ्य प्रभाव: गंदे पानी और खराब स्वच्छता के कारण हैजा, पेचिश और डायरिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं।
आँकड़े: भारत में प्रतिदिन लगभग $1,600$ से अधिक बच्चों की मौत डायरिया जैसी बीमारियों से होती है, जिसे साफ पानी और स्वच्छता से रोका जा सकता है।
2011 की जनगणना: जनगणना $2011$ के अनुसार, भारत में केवल $53\%$ घरों में ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध थी (ग्रामीण और शहरी मिलाकर)। $2001$ में यह आँकड़ा केवल $36\%$ था।
सुलभ इंटरनेशनल (Sulabh International):
यह एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो स्वच्छता के क्षेत्र में पिछले कई दशकों से काम कर रहा है।
इसने निम्न जाति और गरीब वर्ग के लोगों के लिए सामुदायिक शौचालय बनाए हैं।
$8,500$ से अधिक सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं।
यह 'भुगतान करो और इस्तेमाल करो' (Pay and Use) मॉडल पर काम करता है, जो सरकारी और निजी सहयोग का एक उदाहरण हो सकता है।
10. मुंबई की लोकल ट्रेन (परिवहन सुविधा)
मुंबई की लोकल ट्रेन सार्वजनिक परिवहन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह लाखों लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है।
रेलवे जैसा भारी परिवहन नेटवर्क बनाना और चलाना निजी कंपनियों के बस की बात नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता होती है और टिकट की कीमतें कम रखनी होती हैं।
सस्ती परिवहन सुविधा मजदूरों और कामगारों को शहर में दूर से आकर काम करने में मदद करती है।
11. शिक्षण और शिक्षाशास्त्र (Pedagogy Tips)
CTET में प्रश्न केवल तथ्यों पर नहीं, बल्कि इसे पढ़ाने के तरीकों पर भी आते हैं।
अनुभव आधारित शिक्षा: इस विषय को पढ़ाते समय छात्रों से उनके घर और स्कूल में पानी/बिजली के बिलों पर चर्चा करनी चाहिए।
सर्वेक्षण: छात्रों को अपने मोहल्ले में यह पता लगाने के लिए कहा जा सकता है कि कितनी बार पानी आता है और लोग इसका संग्रह कैसे करते हैं।
समानता पर चर्चा: कक्षा में यह चर्चा होनी चाहिए कि क्या सभी को समान रूप से सुविधाएँ मिल रही हैं? अगर नहीं, तो क्यों?
संवैधानिक जागरूकता: छात्रों को अनुच्छेद $21$ के महत्व और अदालतों की भूमिका के बारे में संवेदनशील बनाना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य एक नज़र में (Quick Recap for Exam)
जीवन का अधिकार: अनुच्छेद $21$।
जल का अधिकार: जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
जनसुविधा की विशेषता: एक बार निर्माण, अनेक लोगों को लाभ।
शहरी मानक (पानी): $135$ लीटर प्रति व्यक्ति/प्रतिदिन।
जिम्मेदारी: सरकार की (केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय)।
सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रदूषण मुक्त हवा और पानी का अधिकार जीवन के अधिकार में शामिल है।
सतत विकास लक्ष्य (SDG): लक्ष्य संख्या $6$ (साफ पानी और स्वच्छता)।
जनसुविधाएँ
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes