1. हाशियाकरण: एक परिचय
परिभाषा और अवधारणा
अर्थ: 'हाशिये' का मतलब होता है किनारे या किनारे पर ढकेल दिया जाना। जिस तरह कॉपी के पन्नों पर बाईं ओर खाली जगह (हाशिया) छोड़ी जाती है जहाँ मुख्य लेख नहीं लिखा जाता, उसी तरह समाज में कुछ ऐसे समुदाय होते हैं जिन्हें मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया गया है।
हाशियाकरण के कारण:
अलग भाषा या बोली बोलना।
अलग रीति-रिवाज या धर्म का पालन करना।
गरीबी और निम्न सामाजिक दर्जा।
शिक्षा और संसाधनों तक पहुंच न होना।
प्रभाव: हाशियाकृत समूह समाज के केंद्र में नहीं रह पाते। वे शक्तिहीनता का अनुभव करते हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में असमर्थ महसूस करते हैं।
2. आदिवासी और हाशियाकरण
आदिवासी कौन हैं?
शाब्दिक अर्थ: 'मूल निवासी'। ये वे समुदाय हैं जो जंगलों के साथ जीते आए हैं और आज भी उसी तरह जी रहे हैं।
जनसंख्या: भारत की कुल आबादी का लगभग $8\%$ हिस्सा आदिवासियों का है।
प्रमुख क्षेत्र:
खनन और औद्योगिक क्षेत्र अक्सर आदिवासी इलाकों में स्थित हैं।
राज्य: छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व के राज्य।
अकेले ओडिशा में $60$ से ज्यादा अलग-अलग जनजातीय समूह रहते हैं।
समानता: आदिवासियों में ऊंच-नीच या जाति-व्यवस्था का भेदभाव बहुत कम होता है। ये समाज राजा-प्रजा वाली व्यवस्था से अलग होते हैं।
धार्मिक मान्यताएं
आदिवासी अक्सर अपने पुरखों की, गांव की और प्रकृति की उपासना करते हैं।
प्रकृति पूजा: पर्वत, नदी, पशु आदि की आत्माओं को पूजा जाता है।
वे आसपास के धर्मों (शाक्त, बौद्ध, वैष्णव, ईसाई) से प्रभावित भी हुए हैं।
उदाहरण: जगन्नाथ पंथ (ओडिशा) और शक्ति-तांत्रिक परंपराएं आदिवासियों के इतिहास का हिस्सा रही हैं।
19वीं सदी में बड़ी संख्या में आदिवासियों ने ईसाई धर्म अपनाया।
आदिवासी और प्रचलित छवियां (Stereotypes)
स्कूली उत्सवों या सरकारी कार्यक्रमों में आदिवासियों को हमेशा रंग-बिरंगे कपड़े पहने, सिर पर मुकुट लगाए और नाचते-गाते दिखाया जाता है।
नकारात्मक रूढ़ि: लोगों को लगता है कि वे 'पिछड़े' हैं, आगे नहीं बढ़ना चाहते और नई चीजों से दूर भागते हैं। इस सोच के कारण उनके साथ भेदभाव होता है।
3. आदिवासी, विकास और विस्थापन
वन और संसाधन
19वीं सदी तक भारत का बड़ा हिस्सा जंगलों से ढका था।
कीमती लकड़ी, धातु, अयस्क (लोहा, तांबा, सोना, चांदी), कोयला, हीरे और जड़ी-बूटियां सब जंगलों से मिलती थीं।
नदियां भी जंगलों से ही निकलती हैं।
अंग्रेजों के शासन से पहले तक आदिवासियों का इन जंगलों पर पूरा नियंत्रण था।
विस्थापन की समस्या
बीते 200 वर्षों में आर्थिक बदलावों और राज्य की नीतियों के कारण आदिवासियों को उनके जंगलों से बेदखल किया गया।
कारण:
रेलवे और उद्योगों का निर्माण।
खनन गतिविधियां (झारखंड और आसपास के इलाके)।
बाध परियोजनाएं (आजादी के बाद)।
वन्यजीव अभयारण्य और नेशनल पार्क बनाना।
आंकड़े: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खनन और खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वालों में $50\%$ से अधिक केवल आदिवासी हैं।
नियमगिरि पहाड़ी का मामला
स्थान: ओडिशा का कालाहांडी जिला।
निवासी: डोंगरिया कोंध नामक आदिवासी समुदाय।
महत्व: नियमगिरि को वे अपनी पवित्र पर्वत और आराध्य देव मानते हैं।
विवाद: एक बड़ी एल्युमीनियम कंपनी यहाँ खान और रिफाइनरी लगाना चाहती थी, जिससे यह पहाड़ नष्ट हो जाता। आदिवासियों ने इसका कड़ा विरोध किया और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।
शहरीकरण और गरीबी
जंगल छूटने के बाद आदिवासी काम की तलाश में शहरों में जाने को मजबूर हुए।
वहां वे निर्माण कार्य या घरेलू नौकर के रूप में कम वेतन पर काम करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में $45\%$ और शहरी क्षेत्रों में $35\%$ आदिवासी समूह गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करते हैं।
कुपोषण इन समुदायों में एक गंभीर समस्या है।
4. अल्पसंख्यक और हाशियाकरण
संवैधानिक प्रावधान
संविधान में धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की गई है।
अल्पसंख्यक शब्द: यह केवल संख्या के बारे में नहीं है। यह सत्ता, संसाधनों तक पहुंच और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है।
बहुसंख्यक समुदाय की संस्कृति अक्सर राष्ट्रीय संस्कृति का रूप ले लेती है, जिससे अल्पसंख्यक दब सकते हैं।
मुस्लिम और हाशियाकरण
भारत में मुसलमानों को हाशियाकृत समुदाय माना गया है।
अन्य समुदायों के मुकाबले साक्षरता, सरकारी नौकरी और सुविधाओं में उनकी स्थिति कमजोर रही है।
सच्चर समिति रिपोर्ट ($\text{2005}$)
गठन: प्रधानमंत्री द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया।
अध्यक्ष: न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर।
उद्देश्य: भारत में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का जायजा लेना।
प्रमुख निष्कर्ष:
मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के समान है।
शिक्षा: 7 से 16 साल के मुस्लिम बच्चे अन्य सामाजिक समूहों के मुकाबले कम साल स्कूल जा पाते हैं।
बुनियादी सुविधाएं: बिजली, पक्के घर और पाइप के पानी तक उनकी पहुंच औसत से कम है।
सांप्रदायिकता और बस्तीकरण (Ghettoisation)
भेदभाव और हिंसा के डर से अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर एक ही इलाके में सिमट कर रहने लगते हैं। इसे बस्तीकरण (Ghettoisation) कहते हैं।
इससे उनका मुख्यधारा से जुड़ाव और कम हो जाता है।
5. हाशियाकरण से निपटना: मौलिक अधिकार
संविधान के मौलिक अधिकार सभी नागरिकों के लिए समान हैं, लेकिन हाशियाकृत समूह इनका उपयोग दो तरह से करते हैं:
अपने मौलिक अधिकारों पर जोर देकर सरकार को अन्याय पहचानने पर मजबूर करना।
सरकार पर नए कानून बनाने के लिए दबाव डालना।
महत्वपूर्ण अनुच्छेद (CTET के लिए अति महत्वपूर्ण)
$\text{अनुच्छेद 17}$ (अस्पृश्यता का उन्मूलन)
इसके द्वारा छुआछूत या अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है।
अब किसी भी दलित को मंदिर में जाने, सार्वजनिक नल से पानी भरने या स्कूल में पढ़ने से नहीं रोका जा सकता।
यह एक दंडनीय अपराध है।
$\text{अनुच्छेद 15}$
धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
दुकानों, होटेलों, कुओं, तालाबों आदि के उपयोग में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार ($\text{अनुच्छेद 29}$ और $\text{30}$)
अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और भाषा बचाने का अधिकार है।
वे अपने शिक्षण संस्थान खोल सकते हैं ताकि उनकी संस्कृति सुरक्षित रहे।
6. सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन: सरकारी नीतियां
सरकार संविधान को लागू करने के लिए विशेष नीतियां और योजनाएं बनाती है।
आरक्षण की नीति
उद्देश्य: सदियों से शिक्षा और काम से वंचित रहे समुदायों (SC/ST/OBC) को समान अवसर देना।
प्रक्रिया:
सरकार के पास अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ी जातियों की सूची होती है।
छात्रों या नौकरी के आवेदकों को अपना जाति प्रमाण पत्र देना होता है।
कट-ऑफ: आरक्षित सीटों के लिए योग्यता के अंक (Cut-off marks) सामान्य वर्ग से कम रखे जाते हैं ताकि इन वर्गों के लोग प्रवेश पा सकें।
विशेष योजनाएं
दलितों और आदिवासियों के लिए छात्रावास (Hostels) की व्यवस्था।
शिक्षा के लिए वजीफा (Scholarships)।
7. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, $\text{1989}$
यह कानून दलितों और आदिवासियों की मांगों के जवाब में बनाया गया था। 1970 और 80 के दशक में इन समूहों ने संगठित होकर हिंसा और भेदभाव का विरोध किया था।
अधिनियम की आवश्यकता क्यों पड़ी?
जब दलितों ने अपने हक मांगे, तो शक्तिशाली समूहों ने उन पर हिंसा की।
सामान्य कानून इन अपराधों को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे थे।
इस कानून में अपराधों की सूची बहुत लंबी और भयानक है, जो यह दर्शाती है कि मनुष्य किस हद तक क्रूर हो सकता है।
अपराधों की श्रेणियां और दंड (मुख्य प्रावधान)
इस कानून में अपराधों को तीन स्तरों पर बांटा गया है:
शारीरिक कष्ट और अपमान:
किसी अखाद्य या गंदा पदार्थ (जैसे मैला, कूड़ा) पीने या खाने के लिए मजबूर करना।
कपड़े उतारना, नंगा घुमाना, या चेहरे पर रंग पोतना।
कोई ऐसा कृत्य करना जो मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाए।
संसाधन और संपत्ति छीनना:
दलित या आदिवासी की जमीन पर कब्जा करना।
उन्हें उनकी जमीन से जबरन बेदखल करना।
खेती करने से रोकना।
महिलाओं के खिलाफ अपराध:
दलित या आदिवासी महिला के साथ जबरदस्ती करना या अपमानित करना।
यौन शोषण या हमला करना।
आदिवासियों के लिए विशेष महत्व
आदिवासी कार्यकर्ता (जैसे सी.के. जानू) मानती हैं कि यह कानून आदिवासियों को उनकी जमीन वापस दिलाने में मदद कर सकता है।
संवैधानिक रूप से आदिवासी जमीन किसी गैर-आदिवासी को नहीं बेची जा सकती। जहाँ ऐसा हुआ है, वहां संविधान की गरिमा बनाए रखने के लिए जमीन वापस मिलनी चाहिए।
8. हाथ से मैला उठाने का कलंक (Manual Scavenging)
परिभाषा
सूखे शौचालयों (Dry Latrines) से मानव मल को हाथों से साफ करना, सिर पर ढोना और फेंकने जाना।
यह काम मुख्य रूप से दलित महिलाओं और लड़कियों से कराया जाता है।
उन्हें 'भंगी' या अछूत माना जाता है।
सफाई कर्मचारी आंदोलन
यह संगठन मैला ढोने की प्रथा के खिलाफ काम करता है।
$\text{1993}$ का कानून: सरकार ने 'एम्प्लॉयमेंट ऑफ़ मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड कंस्ट्रक्शन ऑफ़ ड्राई लैटरीन्स (प्रोहिबिशन) एक्ट' पारित किया।
यह कानून सूखे शौचालय बनाने और मैला ढोने वालों को काम पर रखने पर रोक लगाता है।
जनहित याचिका ($\text{2003}$)
सफाई कर्मचारी आंदोलन और अन्य संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की।
उन्होंने तर्क दिया कि 1993 के कानून के बावजूद यह प्रथा जारी है, जो मौलिक अधिकारों ($\text{अनुच्छेद 17, 21}$) का हनन है।
न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया कि वे सर्वेक्षण करें और इसे पूरी तरह समाप्त करें।
नया कानून: $\text{2013}$
पूरा नाम: "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, $\text{2013}$"।
इसमें न केवल मैला ढोने पर रोक है, बल्कि पीड़ित लोगों के पुनर्वास (Rehabilitation) की भी पक्की व्यवस्था है।
9. वन अधिकार अधिनियम, $\text{2006}$
पूरा नाम: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, $\text{2006}$।
प्रावधान:
यह कानून स्वीकार करता है कि आदिवासियों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ है।
यह उन्हें जंगल की जमीन पर खेती करने और रहने का अधिकार देता है।
जंगल के उत्पादों (गोंद, फल, जड़ी-बूटी) को इकट्ठा करने और उपयोग करने का अधिकार।
वन्यजीव संरक्षण के नाम पर उन्हें विस्थापित करने से पहले उनकी सहमति जरूरी है।
10. महत्वपूर्ण तथ्य और शब्दावली (Quick Revision)
कबीर के दोहे: 15वीं सदी के कवि कबीर ने अपनी कविताओं में जाति व्यवस्था और पुरोहित वर्ग के पाखंड को चुनौती दी। उनका उल्लेख हाशियाकरण के संदर्भ में जागरूकता के लिए किया जाता है।
सोयराबाई: 14वीं सदी की कवयित्री और चोखमेला की पत्नी। उन्होंने सवाल उठाया कि "शरीर केवल अशुद्ध नहीं होता, आत्मा शुद्ध होती है" और जाति व्यवस्था पर प्रहार किया।
मुख्यधारा (Mainstream): वह विचार या धारा जो समाज में सबसे ज्यादा प्रचलित और शक्तिशाली हो।
पदानुक्रम (Hierarchy): एक सीढ़ीनुमा व्यवस्था जिसमें सबसे नीचे के लोगों के पास सबसे कम शक्ति और ऊपर वालों के पास सबसे अधिक शक्ति होती है।
11. शिक्षण और शिक्षाशास्त्र संबंधी मुद्दे (Pedagogical Points for CTET)
कक्षा में हाशियाकरण पढ़ाते समय शिक्षक को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
छात्रों को अपने आसपास के उदाहरण देने के लिए प्रेरित करें।
'दलित' शब्द का अर्थ है 'दबाया गया' या 'कुचला गया'। यह शब्द दर्शाता है कि सामाजिक पूर्वाग्रहों ने कैसे एक समूह को दबा रखा है।
नियमगिरि और विस्थापन जैसे वास्तविक केस स्टडीज का उपयोग करके अवधारणा को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
CTET अभ्यर्थियों के लिए नोट: परीक्षा में अक्सर $\text{अनुच्छेद 15, 17}$, $\text{1989}$ का एक्ट, और $\text{सच्चर समिति}$ से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। इन तथ्यों को कंठस्थ करें।
हाशियाकरण
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes