CTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में 'व्यापारिक गणित' (Commercial Mathematics) एक अत्यंत महत्वपूर्ण खंड है। यह न केवल गणितीय क्षमता का परीक्षण करता है, बल्कि दैनिक जीवन की वित्तीय समस्याओं को सुलझाने की समझ भी विकसित करता है। इस लेख में हम लाभ-हानि (Profit and Loss) और ब्याज (Simple and Compound Interest) के सभी महत्वपूर्ण सूत्रों, अवधारणाओं और शॉर्टकट्स का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
1. लाभ और हानि (Profit and Loss)
लाभ और हानि की गणना किसी भी व्यापार का आधार है। परीक्षा में इस विषय से सीधे सूत्र आधारित प्रश्न और व्यावहारिक समस्याएँ (Word Problems) दोनों पूछे जाते हैं।
1.1 मुख्य शब्दावली (Key Terminology)
प्रश्नों को हल करने से पहले इन पदों को समझना अनिवार्य है:
क्रय मूल्य (Cost Price - CP): वह मूल्य जिस पर कोई वस्तु खरीदी जाती है। यदि वस्तु को खरीदने के बाद उस पर मरम्मत या परिवहन का खर्च किया जाता है, तो वह भी क्रय मूल्य में जुड़ जाता है। इसे उपरिव्यय (Overheads) कहते हैं।
वास्तविक क्रय मूल्य = खरीद मूल्य + ऊपरी खर्च
विक्रय मूल्य (Selling Price - SP): वह मूल्य जिस पर कोई वस्तु बेची जाती है।
लाभ (Profit/Gain): जब वस्तु का विक्रय मूल्य उसके क्रय मूल्य से अधिक होता है।
हानि (Loss): जब वस्तु का विक्रय मूल्य उसके क्रय मूल्य से कम होता है।
अंकित मूल्य (Marked Price - MP): वस्तु के पैकेट पर छपा हुआ मूल्य (MRP)।
बट्टा (Discount): अंकित मूल्य पर दी गई छूट। बट्टा हमेशा अंकित मूल्य पर दिया जाता है।
1.2 आधारभूत सूत्र (Basic Formulas)
गणितीय रूप से लाभ और हानि की स्थिति निम्न प्रकार होती है:
स्थिति 1: लाभ की दशा में ($SP > CP$)
- $$\text{Profit} = SP - CP$$
- $$SP = CP + \text{Profit}$$
- $$CP = SP - \text{Profit}$$
स्थिति 2: हानि की दशा में ($CP > SP$)
- $$\text{Loss} = CP - SP$$
- $$SP = CP - \text{Loss}$$
- $$CP = SP + \text{Loss}$$
1.3 प्रतिशत लाभ और हानि (Percentage Profit and Loss)
यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण नियम है: लाभ या हानि का प्रतिशत हमेशा क्रय मूल्य (CP) पर ही निकाला जाता है, जब तक कि प्रश्न में विशेष रूप से विक्रय मूल्य पर गणना करने को न कहा गया हो।
सूत्र:
लाभ प्रतिशत:
$$\text{Profit}\% = \frac{\text{Profit}}{CP} \times 100$$हानि प्रतिशत:
$$\text{Loss}\% = \frac{\text{Loss}}{CP} \times 100$$
उदाहरण (स्पष्टीकरण सहित):
एक दुकानदार ने एक घड़ी ₹ 500 में खरीदी और उसे ₹ 600 में बेच दिया।
यहाँ, $CP = 500$, $SP = 600$
लाभ = $600 - 500 = 100$
लाभ प्रतिशत = $\frac{100}{500} \times 100 = 20\%$
1.4 क्रय मूल्य और विक्रय मूल्य ज्ञात करना (Finding CP and SP)
जब हमें लाभ या हानि का प्रतिशत दिया गया हो, तो हम सीधे अंतिम मूल्य निकाल सकते हैं।
1. विक्रय मूल्य (SP) ज्ञात करना:
यदि $CP$ और $\text{Profit}\%$ या $\text{Loss}\%$ दिया हो:
लाभ की स्थिति में:
$$SP = CP \times \left( \frac{100 + \text{Profit}\%}{100} \right)$$हानि की स्थिति में:
$$SP = CP \times \left( \frac{100 - \text{Loss}\%}{100} \right)$$
उदाहरण:
एक वस्तु का क्रय मूल्य ₹ 800 है। इसे 25% लाभ पर बेचा गया। विक्रय मूल्य क्या होगा?
अतः विक्रय मूल्य ₹ 1000 होगा।
2. क्रय मूल्य (CP) ज्ञात करना:
यदि $SP$ और लाभ/हानि प्रतिशत दिया हो:
लाभ की स्थिति में:
$$CP = SP \times \left( \frac{100}{100 + \text{Profit}\%} \right)$$हानि की स्थिति में:
$$CP = SP \times \left( \frac{100}{100 - \text{Loss}\%} \right)$$
महत्वपूर्ण नोट: छात्र अक्सर यहाँ गलती करते हैं। यदि विक्रय मूल्य ₹ 1200 है और लाभ 20% है, तो क्रय मूल्य ₹ 1000 होगा, न कि 1200 का 80%। गणना सूत्र के अनुसार ही करें।
1.5 बट्टा और अंकित मूल्य (Discount and Marked Price)
छूट (Discount) हमेशा अंकित मूल्य (Marked Price) पर दी जाती है, और छूट देने के बाद जो मूल्य प्राप्त होता है, वह विक्रय मूल्य (SP) होता है।
- $$\text{Discount} = MP - SP$$
- $$\text{Discount}\% = \frac{\text{Discount}}{MP} \times 100$$
- $$SP = MP \times \left( \frac{100 - \text{Discount}\%}{100} \right)$$
1.6 परीक्षा उपयोगी विशेष ट्रिक्स (Exam Specific Tricks)
ट्रिक 1: दो वस्तुओं का समान विक्रय मूल्य
यदि दो वस्तुओं को समान विक्रय मूल्य (Same Selling Price) पर बेचा जाता है, जिसमें एक पर $x\%$ का लाभ और दूसरी पर $x\%$ की हानि होती है, तो इस सौदे में हमेशा हानि होती है।
हानि प्रतिशत सूत्र:
$$\text{Loss}\% = \left( \frac{x}{10} \right)^2$$
उदाहरण:
एक व्यक्ति दो कुर्सियाँ ₹ 990 प्रति कुर्सी की दर से बेचता है। एक पर उसे 10% लाभ और दूसरी पर 10% हानि होती है।
कुल हानि % = $(\frac{10}{10})^2 = (1)^2 = 1\%$ हानि।
ट्रिक 2: बेईमान दुकानदार (Dishonest Dealer)
यदि कोई दुकानदार क्रय मूल्य पर ही वस्तु बेचने का दावा करता है, लेकिन 1 किग्रा के स्थान पर कम वजन (जैसे 900 ग्राम) का प्रयोग करता है।
लाभ प्रतिशत सूत्र:
$$\text{Profit}\% = \frac{\text{Error}}{\text{True Value} - \text{Error}} \times 100$$या
$$\text{Profit}\% = \frac{\text{बचत मात्रा}}{\text{बेची गई मात्रा}} \times 100$$
2. ब्याज (Interest)
जब हम किसी से धन उधार लेते हैं या बैंक में जमा करते हैं, तो उस धन के प्रयोग के बदले जो अतिरिक्त राशि दी या ली जाती है, उसे ब्याज कहते हैं। ब्याज दो प्रकार का होता है: साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज।
2.1 साधारण ब्याज (Simple Interest - SI)
साधारण ब्याज वह ब्याज है जो केवल मूलधन (Principal) पर एक निश्चित अवधि के लिए एक ही दर पर लगाया जाता है। इसमें हर साल ब्याज की राशि समान रहती है।
शब्दावली:
मूलधन (P): उधार दी गई या ली गई राशि।
दर (R): प्रति ₹ 100 पर प्रति वर्ष दिया जाने वाला ब्याज (% में)।
समय (T): वह अवधि जिसके लिए धन उधार दिया गया (वर्षों में)।
मिश्रधन (A): मूलधन + ब्याज।
सूत्र:
साधारण ब्याज:
$$SI = \frac{P \times R \times T}{100}$$मिश्रधन (Amount):
$$A = P + SI$$या
$$A = P \left( 1 + \frac{RT}{100} \right)$$
समय और दर निकालने के लिए पक्षांतरण:
- $$P = \frac{SI \times 100}{R \times T}$$
- $$R = \frac{SI \times 100}{P \times T}$$
- $$T = \frac{SI \times 100}{P \times R}$$
उदाहरण (स्पष्टीकरण सहित):
₹ 5000 की राशि पर 10% वार्षिक दर से 3 वर्ष का साधारण ब्याज ज्ञात कीजिए।
$P = 5000, R = 10, T = 3$
- $$SI = \frac{5000 \times 10 \times 3}{100} = 50 \times 30 = 1500$$
अतः ब्याज ₹ 1500 होगा।
2.2 चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest - CI)
चक्रवृद्धि ब्याज में "ब्याज पर ब्याज" लगता है। यानी, पहले वर्ष का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और दूसरे वर्ष के लिए यह नया मूलधन बन जाता है।
आधारभूत सूत्र (वार्षिक संयोजन):
यदि ब्याज वार्षिक (Annually) रूप से संयोजित होता है:
जहाँ:
$A$ = चक्रवृद्धि मिश्रधन
$P$ = मूलधन
$R$ = वार्षिक ब्याज दर
$n$ = वर्षों की संख्या (समय)
चक्रवृद्धि ब्याज (CI) केवल ब्याज की राशि:
2.3 ब्याज संयोजन के विशेष नियम (Rules for Compounding)
परीक्षा में अक्सर ऐसे प्रश्न आते हैं जहाँ ब्याज वार्षिक न होकर छमाही या तिमाही संयोजित होता है।
1. अर्द्धवार्षिक / छमाही संयोजन (Half-Yearly Compounding):
जब ब्याज हर 6 महीने पर जोड़ा जाता है। एक वर्ष में 2 छमाही होती हैं।
दर (Rate): आधी हो जाती है ($\frac{R}{2}$)।
समय (Time): दोगुना हो जाता है ($2n$ या $2T$).
सूत्र:
$$A = P \left( 1 + \frac{R/2}{100} \right)^{2n} = P \left( 1 + \frac{R}{200} \right)^{2n}$$
2. त्रैमासिक / तिमाही संयोजन (Quarterly Compounding):
जब ब्याज हर 3 महीने पर जोड़ा जाता है। एक वर्ष में 4 तिमाही होती हैं।
दर (Rate): एक-चौथाई हो जाती है ($\frac{R}{4}$)।
समय (Time): चार गुना हो जाता है ($4n$ या $4T$).
सूत्र:
$$A = P \left( 1 + \frac{R/4}{100} \right)^{4n} = P \left( 1 + \frac{R}{400} \right)^{4n}$$
उदाहरण:
₹ 10,000 पर 20% वार्षिक दर से 1 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज ज्ञात करें, यदि ब्याज अर्द्धवार्षिक (Half-yearly) संयोजित हो।
मूलधन ($P$) = 10,000
दर ($R$) = $20\%$ (वार्षिक) $\rightarrow$ नई दर = $\frac{20}{2} = 10\%$ (प्रति छमाही)
समय ($n$) = 1 वर्ष $\rightarrow$ नया समय = $1 \times 2 = 2$ छमाही
गणना:
$$A = 10000 \left( 1 + \frac{10}{100} \right)^2$$$$A = 10000 \left( \frac{11}{10} \right)^2$$$$A = 10000 \times \frac{121}{100} = 12100$$ब्याज ($CI$) = $12100 - 10000 = 2100$ रुपये।
2.4 साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज में अंतर (Difference between SI and CI)
यह CTET का सबसे पसंदीदा प्रश्न प्रारूप है। 2 वर्ष और 3 वर्ष के अंतर के लिए सीधे सूत्रों का प्रयोग करें।
1. दो वर्ष के लिए अंतर:
यदि समय 2 वर्ष है, तो CI और SI का अंतर ($D$):
2. तीन वर्ष के लिए अंतर:
यदि समय 3 वर्ष है:
2.5 गुना वाले प्रश्न (Multiplication/Doubling Problems)
साधारण ब्याज (SI) के लिए:
यदि कोई राशि साधारण ब्याज पर $T$ वर्षों में अपने आप की $n$ गुना हो जाती है, तो दर ($R$) ज्ञात करने का सूत्र:
उदाहरण:
कोई राशि 10 वर्षों में साधारण ब्याज पर दोगुनी ($n=2$) हो जाती है। दर क्या है?
चक्रवृद्धि ब्याज (CI) के लिए:
यदि कोई राशि चक्रवृद्धि ब्याज पर $t_1$ वर्षों में $x$ गुना हो जाती है, तो $t_2$ वर्षों में $y$ गुना होने के लिए शक्तियों (powers) की तुलना की जाती है।
नियम: यदि $t$ वर्ष में $x$ गुना, तो $x^2$ गुना होने में $2t$ वर्ष लगेंगे।
3. अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण सुझाव
भिन्न से प्रतिशत (Fraction to Percentage): लाभ-हानि के प्रश्नों को तेजी से हल करने के लिए भिन्नों को प्रतिशत में याद रखें।
$\frac{1}{2} = 50\%$
$\frac{1}{3} = 33.33\%$
$\frac{1}{4} = 25\%$
$\frac{1}{5} = 20\%$
गणना में सावधानी: साधारण ब्याज निकालते समय 'दिनों' को 'वर्ष' में बदलना न भूलें (दिन/365)।
इकाई का ध्यान रखें: लाभ-हानि में यदि वस्तुएं दर्जन में खरीदी गई हैं और प्रति पीस बेची जा रही हैं, तो पहले दोनों की इकाई समान (या तो दर्जन या पीस) करें।
लाभ-हानि और ब्याज
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
