भाग 1: औसत (Average) - अवधारणा, सूत्र और अनुप्रयोग
1.1 औसत की अवधारणा और परिभाषा
अंकगणित में औसत एक ऐसी संख्या है जो आंकड़ों के एक समूह के केंद्रीय या संतुलित मान का प्रतिनिधित्व करती है। सामान्य भाषा में इसे 'माध्य' भी कहा जाता है। जब हम कहते हैं कि किसी कक्षा के छात्रों की औसत आयु 15 वर्ष है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक छात्र ठीक 15 वर्ष का है। इसका अर्थ यह है कि यदि सभी छात्रों की आयु को जोड़ दिया जाए और फिर उसे बराबर-बराबर सभी छात्रों में बांट दिया जाए, तो प्रत्येक के हिस्से में 15 वर्ष आएंगे।
गणितीय रूप से, औसत को निम्नलिखित सूत्र द्वारा परिभाषित किया जाता है:
इसी सूत्र को हम पक्षांतर करके अन्य मान ज्ञात करने के लिए भी प्रयोग कर सकते हैं:
राशियों का योग = औसत $\times$ राशियों की संख्या
राशियों की संख्या = राशियों का योग $\div$ औसत
उदाहरण:
यदि एक क्रिकेट खिलाड़ी ने तीन मैचों में क्रमशः 45, 55 और 50 रन बनाए, तो उसका औसत स्कोर क्या होगा?
हल:
1.2 संख्याओं पर आधारित महत्वपूर्ण सूत्र और उनके अनुप्रयोग
प्रतियोगी परीक्षाओं में लंबी गणनाओं से बचने के लिए विशिष्ट संख्या शृंखलाओं के लिए सीधे सूत्रों का उपयोग किया जाता है। नीचे प्रत्येक महत्वपूर्ण स्थिति का विस्तृत विवरण और उदाहरण दिया गया है।
(i) प्रथम 'n' प्राकृत संख्याओं का औसत
प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होकर अनंत तक जाती हैं (1, 2, 3, 4...)। यदि हमें शुरुआत से $n$ तक की लगातार संख्याओं का औसत निकालना हो, तो हमें उन्हें जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
सूत्र:
तर्क: प्रथम $n$ प्राकृत संख्याओं का योग $\frac{n(n+1)}{2}$ होता है। औसत निकालने के लिए जब हम इस योग को $n$ से भाग देते हैं, तो $n$ कट जाता है और $\frac{n+1}{2}$ शेष बचता है।
हल सहित उदाहरण:
प्रथम 100 प्राकृत संख्याओं का औसत ज्ञात कीजिए।
यहाँ $n = 100$ है।
सूत्र का प्रयोग करने पर:
$$ \text{औसत} = \frac{100 + 1}{2} = \frac{101}{2} = 50.5$$
(ii) प्रथम 'n' सम संख्याओं का औसत
सम संख्याएँ वे हैं जो 2 से पूर्णतः विभाजित होती हैं (2, 4, 6...)। यदि शृंखला 2 से शुरू हो रही है, तो औसत निकालना अत्यंत सरल है।
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
प्रथम 25 सम संख्याओं का औसत क्या होगा?
ध्यान दें: यहाँ 'प्रथम 25' का अर्थ है कि हम 25 सम संख्याओं की बात कर रहे हैं (जो 2 से शुरू होकर 50 तक जाएंगी)।
यहाँ $n = 25$ है।
- $$\text{औसत} = 25 + 1 = 26$$
(iii) प्रथम 'n' विषम संख्याओं का औसत
विषम संख्याएँ वे हैं जो 2 से विभाजित नहीं होतीं (1, 3, 5...)। यह गणित का सबसे सरल सूत्र है। जितनी संख्याएँ होती हैं, औसत भी उतना ही होता है।
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
प्रथम 60 विषम संख्याओं का औसत ज्ञात करें।
चूँकि विषम संख्याओं की गिनती ($n$) 60 है।
अतः औसत भी 60 ही होगा।
(iv) क्रमागत संख्याओं का औसत (समानांतर श्रेणी)
यह नियम तब लागू होता है जब संख्याओं के बीच का अंतर समान हो। यह नियम प्राकृत संख्याओं, सम संख्याओं, विषम संख्याओं, या किसी पहाड़े (गुणज) पर समान रूप से लागू होता है। ऐसी स्थिति में औसत हमेशा पहली और आखिरी संख्या के ठीक बीच में होता है।
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
21 से लेकर 79 तक की सभी विषम संख्याओं का औसत ज्ञात कीजिए।
प्रथम संख्या: 21 (विषम है)
अंतिम संख्या: 79 (विषम है)
गणना:
$$ \text{औसत} = \frac{21 + 79}{2} = \frac{100}{2} = 50$$
(v) 1 से लेकर 'n' तक की सम संख्याओं का औसत
यह स्थिति 'प्रथम n सम संख्याओं' से थोड़ी अलग है। यहाँ $n$ अंतिम सीमा है। उदाहरण के लिए, "1 से 10 तक की सम संख्याएँ"। यहाँ $n=10$ है, लेकिन सम संख्याओं की गिनती केवल 5 है (2, 4, 6, 8, 10)।
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
1 से लेकर 80 तक की सम संख्याओं का औसत ज्ञात करें।
यहाँ अंतिम सम संख्या 80 है।
$$ \text{औसत} = \frac{80 + 2}{2} = \frac{82}{2} = 41$$
(vi) 1 से लेकर 'n' तक की विषम संख्याओं का औसत
यहाँ भी $n$ अंतिम सीमा को दर्शाता है।
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
1 से 99 तक की विषम संख्याओं का औसत क्या होगा?
अंतिम विषम संख्या 99 है।
$$ \text{औसत} = \frac{99 + 1}{2} = \frac{100}{2} = 50$$
1.3 वर्गों और घनों के औसत (Squares and Cubes)
गणित के प्रश्नों को कठिन बनाने के लिए अक्सर संख्याओं के वर्गों या घनों का औसत पूछा जाता है। इनके लिए निम्नलिखित सूत्रों का प्रयोग करें:
(i) प्रथम 'n' प्राकृत संख्याओं के वर्गों का औसत
शृंखला: $1^2, 2^2, 3^2, \dots, n^2$
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
प्रथम 10 प्राकृत संख्याओं के वर्गों का औसत ज्ञात करें।
यहाँ $n = 10$ है।
$$ \begin{aligned} \text{औसत} &= \frac{(10+1)(2 \times 10 + 1)}{6} \\ &= \frac{11 \times 21}{6} \\ &= \frac{231}{6} = 38.5 \end{aligned}$$
(ii) प्रथम 'n' प्राकृत संख्याओं के घनों का औसत
शृंखला: $1^3, 2^3, 3^3, \dots, n^3$
सूत्र:
हल सहित उदाहरण:
प्रथम 5 प्राकृत संख्याओं के घनों का औसत क्या है?
यहाँ $n = 5$ है।
$$ \begin{aligned} \text{औसत} &= \frac{5(5+1)^2}{4} \\ &= \frac{5 \times 36}{4} \\ &= 5 \times 9 = 45 \end{aligned}$$
1.4 गुणजों (Multiples) का औसत
जब प्रश्न किसी संख्या के पहाड़े (Table) या गुणजों के बारे में हो, जैसे "3 के प्रथम 5 गुणज" या "7 के प्रथम 10 गुणज"।
सामान्य विधि: संख्याओं को लिखें (जैसे 3, 6, 9, 12, 15), जोड़ें और भाग दें।
सूत्र विधि:
$$ \text{औसत} = \text{संख्या} \times \frac{(n + 1)}{2}$$(जहाँ 'संख्या' वह है जिसका पहाड़ा पढ़ा जा रहा है, और '$n$' गुणजों की गिनती है।)
हल सहित उदाहरण:
8 के प्रथम 9 गुणजों का औसत ज्ञात कीजिए।
संख्या = 8, गुणजों की संख्या ($n$) = 9
$$ \begin{aligned} \text{औसत} &= 8 \times \frac{9 + 1}{2} \\ &= 8 \times \frac{10}{2} \\ &= 8 \times 5 = 40 \end{aligned}$$
1.5 औसत के मूलभूत गुणधर्म (Properties of Average)
औसत के कुछ ऐसे गुण हैं जो बिना लंबी गणना किए उत्तर निकालने में मदद करते हैं।
जोड़ का प्रभाव: यदि आँकड़ों की प्रत्येक संख्या में एक निश्चित संख्या '$x$' जोड़ दी जाए, तो पुराने औसत में भी '$x$' जुड़ जाता है।
उदाहरण: 5 संख्याओं का औसत 20 है। यदि प्रत्येक संख्या में 2 जोड़ दिया जाए, तो नया औसत $20 + 2 = 22$ होगा।
घटाव का प्रभाव: यदि प्रत्येक संख्या में से '$x$' घटा दिया जाए, तो औसत में से भी '$x$' घट जाता है।
उदाहरण: 10 संख्याओं का औसत 50 है। यदि प्रत्येक संख्या से 5 घटा दें, तो नया औसत $50 - 5 = 45$ होगा।
गुणा का प्रभाव: यदि प्रत्येक संख्या को '$x$' से गुणा किया जाए, तो औसत भी '$x$' से गुणा हो जाता है।
उदाहरण: 8 संख्याओं का औसत 12 है। यदि प्रत्येक संख्या को 3 से गुणा करें, तो नया औसत $12 \times 3 = 36$ होगा।
भाग का प्रभाव: यदि प्रत्येक संख्या को '$x$' से भाग दिया जाए, तो औसत भी '$x$' से विभाजित हो जाता है।
1.6 समूह में परिवर्तन पर आधारित प्रश्न (Inclusion and Exclusion)
परीक्षाओं में अक्सर ऐसे प्रश्न आते हैं जहाँ समूह में कोई नया व्यक्ति शामिल होता है या कोई व्यक्ति समूह छोड़ देता है।
(i) जब कोई नया व्यक्ति समूह में शामिल हो
स्थिति: यदि नए व्यक्ति के आने से औसत बढ़ता है, तो नए व्यक्ति का मान पुराने औसत से अधिक है। यदि औसत घटता है, तो उसका मान कम है।
सूत्र:
$$ \text{नए व्यक्ति का मान} = \text{पुराना औसत} + (\text{कुल संख्या} \times \text{औसत में वृद्धि})$$(यदि कमी हो रही है, तो $+$ की जगह $-$ का प्रयोग करें।)
उदाहरण:
10 छात्रों की औसत आयु 15 वर्ष है। यदि अध्यापक की आयु भी शामिल कर ली जाए, तो औसत 1 वर्ष बढ़ जाता है। अध्यापक की आयु ज्ञात करें।
हल:
पुराना औसत = 15 वर्ष
नई कुल संख्या = 10 छात्र + 1 अध्यापक = 11
औसत में वृद्धि = 1 वर्ष
$$ \begin{aligned} \text{अध्यापक की आयु} &= 15 + (11 \times 1) \\ &= 15 + 11 = 26 \text{ वर्ष} \end{aligned}$$
(ii) जब कोई व्यक्ति समूह छोड़कर चला जाए
सूत्र:
$$ \text{गए व्यक्ति का मान} = \text{पुराना औसत} + (\text{गए व्यक्ति के बाद की संख्या} \times \text{औसत में कमी})$$(नोट: यदि जाने से औसत बढ़ता है, तो यहाँ $-$ का प्रयोग होगा, और यदि घटता है तो $+$ का प्रयोग होगा।)
भाग 2: प्रतिशत (Percentage) - अवधारणा, सूत्र और अनुप्रयोग
2.1 प्रतिशत की अवधारणा
प्रतिशत गणित का वह आधारभूत उपकरण है जिसका उपयोग तुलना करने के लिए किया जाता है। 'प्रतिशत' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'प्रति' (हर एक) और 'शत' (सौ)। इसका अर्थ है "प्रत्येक 100 में से"।
इसे $\%$ चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है।
गणितीय रूप से, $x\%$ का अर्थ है एक ऐसा भिन्न जिसका अंश $x$ है और हर 100 है।
दैनिक जीवन में उदाहरण:
यदि किसी छात्र को परीक्षा में 75% अंक मिले हैं, तो इसका अर्थ है कि यदि परीक्षा 100 अंकों की होती, तो उसे 75 अंक मिलते। यदि परीक्षा 200 अंकों की है, तो उसे $200 \text{ का } \frac{75}{100} = 150$ अंक मिले।
2.2 भिन्न और प्रतिशत का परस्पर रूपांतरण
अंकगणित के प्रश्नों को तेजी से हल करने के लिए भिन्नों को प्रतिशत में और प्रतिशत को भिन्न में बदलने की कला आना अनिवार्य है।
(A) भिन्न को प्रतिशत में बदलना
किसी भी भिन्न (Fraction) या दशमलव को प्रतिशत में बदलने के लिए उसमें 100 से गुणा किया जाता है और $\%$ का चिह्न लगाया जाता है।
सूत्र:
उदाहरण:
$\frac{1}{2}$ को प्रतिशत में बदलें:
$$\frac{1}{2} \times 100 = 50\%$$$\frac{3}{4}$ को प्रतिशत में बदलें:
$$\frac{3}{4} \times 100 = 75\%$$$\frac{1}{8}$ को प्रतिशत में बदलें:
$$\frac{1}{8} \times 100 = 12.5\%$$
(B) प्रतिशत को भिन्न में बदलना
प्रतिशत का चिह्न हटाने के लिए संख्या को 100 से भाग दिया जाता है।
सूत्र:
उदाहरण:
$20\%$ को भिन्न में बदलें:
$$\frac{20}{100} = \frac{1}{5}$$$16\frac{2}{3}\%$ को भिन्न में बदलें:
मिश्रित भिन्न को साधारण भिन्न में बदलें: $16 \times 3 + 2 = \frac{50}{3}\%$
अब 100 से भाग दें: $\frac{50}{3 \times 100} = \frac{50}{300} = \frac{1}{6}$
महत्वपूर्ण भिन्न-प्रतिशत तालिका
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निम्नलिखित मानों को कंठस्थ करना चाहिए:
$\frac{1}{2} = 50\%$
$\frac{1}{3} = 33.33\%$ या $33\frac{1}{3}\%$
$\frac{1}{4} = 25\%$
$\frac{1}{5} = 20\%$
$\frac{1}{6} = 16.66\%$ या $16\frac{2}{3}\%$
$\frac{1}{8} = 12.5\%$ या $12\frac{1}{2}\%$
$\frac{1}{10} = 10\%$
$\frac{1}{20} = 5\%$
2.3 प्रतिशत की आधारभूत गणनाएँ
प्रतिशत के प्रश्न मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
टाइप 1: किसी राशि का प्रतिशत निकालना
प्रश्न: $500$ का $30\%$ कितना होगा?
हल:
'का' (of) का अर्थ गणित में गुणा होता है।
टाइप 2: एक राशि दूसरी राशि का कितना प्रतिशत है?
यह तुलनात्मक प्रश्न है। इसमें ध्यान देना होता है कि आधार (Base) कौन है। जिसके साथ 'का' या 'से' लगा हो, वह राशि हर (Denominator) में आती है।
सूत्र:
उदाहरण:
20 ग्राम, 1 किलोग्राम का कितना प्रतिशत है?
नोट: तुलना करने के लिए दोनों राशियाँ समान इकाई में होनी चाहिए।
1 किलोग्राम = 1000 ग्राम।
तुलना 1000 ग्राम से हो रही है।
$$ \text{प्रतिशत} = \frac{20}{1000} \times 100 = \frac{2000}{1000} = 2\%$$
टाइप 3: प्रतिशत वृद्धि या कमी (Percentage Increase/Decrease)
जब किसी राशि के मान में बदलाव होता है, तो प्रतिशत परिवर्तन निकाला जाता है।
सूत्र:
उदाहरण:
एक वस्तु की कीमत 80 रुपये से बढ़कर 100 रुपये हो गई। प्रतिशत वृद्धि ज्ञात करें।
अंतर = $100 - 80 = 20$
प्रारम्भिक मान = 80 (क्योंकि वृद्धि 80 से शुरू हुई थी)
$$ \text{वृद्धि } \% = \frac{20}{80} \times 100 = \frac{1}{4} \times 100 = 25\%$$
2.4 उन्नत अनुप्रयोग (Advanced Applications)
(i) A, B से x% अधिक है
अक्सर प्रश्न पूछा जाता है: "यदि A की आय B से $25\%$ अधिक है, तो B की आय A से कितने प्रतिशत कम है?"
छात्र अक्सर गलती से $25\%$ ही उत्तर दे देते हैं, जो गलत है।
सूत्र (अधिक दिया हो, कम निकालना हो):
उदाहरण का हल:
यहाँ $x = 25$ है।
अतः B की आय A से 20% कम है।
सूत्र (कम दिया हो, अधिक निकालना हो):
यदि A, B से $x\%$ कम है, तो B, A से कितना अधिक है?
(ii) क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन (Successive Percentage Change)
जब किसी राशि में लगातार दो बार बदलाव होता है (जैसे पहले 10% वृद्धि, फिर 20% वृद्धि), तो कुल प्रभाव $10+20=30\%$ नहीं होता, बल्कि उससे अधिक होता है। इसे 'चक्रवृद्धि प्रभाव' कहते हैं।
सूत्र:
यदि किसी राशि में पहले $a\%$ और फिर $b\%$ का परिवर्तन हो, तो:
(वृद्धि के लिए धनात्मक और कमी के लिए ऋणात्मक मान रखें।)
उदाहरण:
एक आयत की लंबाई में $20\%$ की वृद्धि और चौड़ाई में $10\%$ की वृद्धि की गई। क्षेत्रफल में कुल कितने प्रतिशत वृद्धि होगी?
हल:
यहाँ $a = 20$ और $b = 10$ है।
(iii) मूल्य और खपत का संबंध (Price and Consumption)
यदि किसी वस्तु के मूल्य में वृद्धि हो जाए, तो खर्च को अपरिवर्तित रखने के लिए खपत में कमी करनी पड़ती है।
सिद्धांत:
यदि खर्च स्थिर है, तो मूल्य और खपत एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होते हैं।
उदाहरण:
चीनी के मूल्य में $25\%$ की वृद्धि हो गई। एक गृहिणी को अपनी खपत कितने प्रतिशत कम करनी चाहिए ताकि खर्च न बढ़े?
हल:
यह वही स्थिति है जो "A, B से x% अधिक है" वाली थी।
(iv) जनसंख्या आधारित प्रश्न
जनसंख्या सामान्यतः चक्रवृद्धि ब्याज की दर से बढ़ती है।
यदि वर्तमान जनसंख्या $P$ है और वृद्धि दर $R\%$ वार्षिक है, तो $n$ वर्ष बाद जनसंख्या:
निष्कर्ष
औसत और प्रतिशत गणित की वह भाषा है जिसमें अधिकांश डेटा की व्याख्या की जाती है। औसत हमें समूह के व्यवहार को एक संख्या में समेटने की क्षमता देता है, जबकि प्रतिशत हमें अलग-अलग पैमानों (Scales) पर राशियों की तुलना करने की शक्ति प्रदान करता है। उपरोक्त सूत्रों और अवधारणाओं का नियमित अभ्यास करने से इन अध्यायों पर मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है।
औसत और प्रतिशत
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
