1. हमें संसद की आवश्यकता क्यों है? (Why do we need a Parliament?)
लोकतंत्र में निर्णय लेने की शक्ति जनता के पास होनी चाहिए। संसद वह माध्यम है जिसके द्वारा नागरिक सरकार के निर्णयों में भाग लेते हैं।
निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी: 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, भारतीय जनता ने अपनी सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त किया।
सहमति का विचार: लोकतंत्र का मूल विचार 'सहमति' (Consent) है, यानी लोगों की इच्छा और उनकी भागीदारी।
प्रतिनिधित्व: नागरिक सीधे तौर पर शासन नहीं करते, बल्कि वे चुनावों के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों (Representatives) को चुनते हैं।
सर्वोच्च संस्था: संसद भारतीय लोकतंत्र की धुरी है। यह सरकार को नियंत्रित करती है, मार्गदर्शन देती है और कानून बनाती है।
2. संसद की संरचना (Composition of Parliament)
भारतीय संसद मुख्य रूप से तीन अंगों से मिलकर बनी है: राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
A. राज्यसभा (Rajya Sabha - Council of States)
राज्यसभा को 'उच्च सदन' (Upper House) भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
भूमिका: यह राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करती है। यह लोकसभा द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा (Review) करती है और यदि आवश्यक हो तो उनमें संशोधन का सुझाव देती है।
कुल सदस्य संख्या: संविधान के अनुसार अधिकतम संख्या 250 हो सकती है, लेकिन वर्तमान में 245 सदस्य हैं।
चुनाव प्रक्रिया:
233 सदस्य: इनका चुनाव विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं (Legislative Assemblies) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। (अप्रत्यक्ष चुनाव)।
12 सदस्य: इन्हें राष्ट्रपति (President) द्वारा मनोनीत (Nominated) किया जाता है। ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से होते हैं।
सभापति: भारत का उपराष्ट्रपति (Vice President) राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
स्थायी सदन: राज्यसभा कभी पूरी तरह भंग नहीं होती। इसके एक-तिहाई ($\frac{1}{3}$) सदस्य हर दो साल बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
B. लोकसभा (Lok Sabha - House of the People)
लोकसभा को 'निम्न सदन' (Lower House) या 'लोगों का सदन' कहा जाता है।
कुल सदस्य संख्या: अधिकतम 552 हो सकती है। वर्तमान में 543 निर्वाचित सदस्य हैं। (पहले 2 एंग्लो-इंडियन सदस्य मनोनीत होते थे, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है)।
चुनाव प्रक्रिया:
पूरे देश को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) में बांटा गया है।
जनता सीधे अपने प्रतिनिधि को वोट देती है। इसे 'सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार' (Universal Adult Franchise) कहते हैं।
प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से एक व्यक्ति संसद के लिए चुना जाता है।
कार्यकाल: लोकसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। 5 साल बाद इसे भंग कर दिया जाता है और नए चुनाव होते हैं।
अध्यक्ष (Speaker): लोकसभा की कार्यवाही का संचालन 'लोकसभा अध्यक्ष' करता है, जो इसी सदन का सदस्य होता है।
3. संसद के प्रमुख कार्य (Functions of Parliament)
संसद केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं है, इसके कार्य बहुआयामी हैं।
कार्य 1: राष्ट्रीय सरकार का चुनाव करना
चुनाव के बाद, संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सरकार बनाना है।
बहुमत (Majority): लोकसभा में जिस राजनीतिक दल के पास आधे से अधिक सांसद होते हैं, वह सरकार बनाता है।
कुल सीटें: 543
सरकार बनाने के लिए आवश्यक सीटें:
$$\frac{543}{2} + 1 \approx 272$$अतः किसी भी दल को कम से कम 272 सदस्यों का समर्थन चाहिए।
कार्यपालिका (The Executive): बहुमत प्राप्त दल के सांसद अपने नेता को चुनते हैं जो प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनता है। प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों (शिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, आदि) का चुनाव करते हैं। ये लोग मिलकर कानूनों को लागू करते हैं और शासन चलाते हैं। इसे ही 'कार्यपालिका' कहते हैं।
गठबंधन सरकार (Coalition Government): जब किसी एक दल को 272 सीटें नहीं मिलतीं, तो विभिन्न राजनीतिक दल मिलकर बहुमत का आंकड़ा छूते हैं और सरकार बनाते हैं। इसे गठबंधन सरकार कहते हैं।
विपक्ष (Opposition): वह सबसे बड़ा दल जो सरकार में शामिल नहीं है, 'विपक्ष' कहलाता है। इसका कार्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना और जनहित के मुद्दे उठाना है।
कार्य 2: सरकार को नियंत्रित करना, मार्गदर्शन देना और जानकारी देना
संसद सत्र के दौरान कार्यपालिका पर लगाम कसने के लिए कई तंत्रों का उपयोग करती है।
प्रश्नकाल (Question Hour):
संसद सत्र की शुरुआत अक्सर प्रश्नकाल से होती है।
यह एक महत्वपूर्ण तंत्र है जिसके माध्यम से सांसद सरकार के कामकाज के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।
महत्व: इसके जरिए सरकार को अपनी कमियों के प्रति आगाह किया जाता है। सरकार को भी जनता की राय (सांसदों के माध्यम से) जानने का मौका मिलता है।
विपक्ष की भूमिका यहाँ सबसे अहम होती है क्योंकि वे सवाल पूछकर सरकार को निरंकुश होने से रोकते हैं।
संसदीय समितियां: विभिन्न मुद्दों की गहराई से जांच करने के लिए समितियां बनाई जाती हैं।
वित्तीय नियंत्रण: सरकार को कोई भी नया टैक्स लगाने या पैसा खर्च करने के लिए संसद की मंजूरी (बजट) लेनी पड़ती है।
कार्य 3: कानून बनाना (Law Making)
यह संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। कानून बनाने की प्रक्रिया एक निश्चित संवैधानिक ढांचे का पालन करती है।
4. कानून कैसे बनता है? (How Laws are Made)
कानून बनाने की पहल समाज के विभिन्न वर्गों, नागरिकों या राजनीतिक दलों द्वारा की जा सकती है, लेकिन इसे पारित संसद ही करती है।
चरण-दर-चरण प्रक्रिया:
विधेयक की प्रस्तुति (Introduction of Bill):
कानून का प्रस्ताव 'विधेयक' (Bill) कहलाता है।
यह लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर)।
धन विधेयक (Money Bill): केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
चर्चा और बहस (Discussion):
सदन में विधेयक पर विस्तृत चर्चा होती है। सांसद इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क देते हैं।
जरूरत पड़ने पर इसे 'संसदीय समिति' के पास विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है।
मतदान (Voting):
चर्चा के बाद विधेयक पर वोटिंग होती है। यदि उपस्थित सदस्यों का बहुमत इसके पक्ष में हो, तो इसे पारित माना जाता है।
दूसरे सदन में भेजना:
एक सदन से पास होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में जाता है। वहाँ भी यही प्रक्रिया (चर्चा और मतदान) दोहराई जाती है।
यदि दूसरा सदन सुझाव देता है, तो उसे पहले सदन को वापस भेजा जा सकता है।
राष्ट्रपति की स्वीकृति (President's Assent):
जब दोनों सदन विधेयक पारित कर देते हैं, तो उसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही 'विधेयक' (Bill), 'कानून' (Act) बनता है।
5. विशेष उदाहरण: घरेलू हिंसा कानून (Domestic Violence Act 2005)
NCERT में यह उदाहरण कानून बनने की प्रक्रिया में नागरिकों की भूमिका को समझाने के लिए दिया गया है।
मुद्दा: 1990 के दशक में महिलाओं के संगठनों ने घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कानून की मांग उठाई।
जन सुनवाई: वकीलों, कानून के छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक मसौदा (Draft) तैयार किया।
संसदीय स्थायी समिति: 2002 में पेश किए गए विधेयक में कमियां थीं। महिला संगठनों ने संसदीय समिति को ज्ञापन दिए। समिति ने उनकी सिफारिशों को स्वीकार किया।
कानून पारित: अंततः 2005 में संसद ने एक नया विधेयक पेश किया जो 2006 में लागू हुआ।
सीख: यह उदाहरण दिखाता है कि कानून बनाने में जनता की आवाज़ (Civil Society) कितनी महत्वपूर्ण है।
6. अलोकप्रिय और विवादास्पद कानून (Unpopular and Controversial Laws)
कभी-कभी संसद ऐसे कानून पारित कर देती है जो संवैधानिक रूप से सही (Legal) होते हैं, लेकिन जनता उन्हें स्वीकार नहीं करती क्योंकि वे अनुचित या हानिकारक लगते हैं।
अलोकप्रिय कानून: ऐसे कानून जो जनता के हितों के विरुद्ध हों। लोग इनके खिलाफ रैलियां निकालते हैं, मीडिया में आलोचना करते हैं।
दमनकारी कानून (Repressive Laws):
उदाहरण: ब्रिटिश काल का रौलट एक्ट (Rowlatt Act) या राजद्रोह अधिनियम 1870 (Sedition Act)। इन कानूनों का उद्देश्य बिना मुकदमे के लोगों को गिरफ्तार करना था।
स्वतंत्र भारत में भी यदि कोई कानून किसी समूह के अधिकार छीनता है (जैसे - पटरी पर दुकान लगाने वालों का आजीविका का अधिकार बनाम सड़क साफ रखने का नियम), तो वह विवादास्पद हो जाता है।
न्यायपालिका की भूमिका: यदि लोगों को लगता है कि कोई कानून संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है, तो वे अदालत (Court) जा सकते हैं। अदालत के पास कानून को रद्द करने या उसमें संशोधन का आदेश देने की शक्ति है।
7. संसद में कौन लोग होते हैं? (Diversity in Parliament)
प्रतिनिधि लोकतंत्र (Representative Democracy) तभी सफल है जब वह समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करे।
आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र (Reserved Constituencies):
दलितों (SC) और आदिवासियों (ST) को संसद में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए कुछ सीटें आरक्षित की गई हैं।
वर्तमान में लोकसभा में:
अनुसूचित जाति (SC) के लिए: 84 सीटें
अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए: 47 सीटें
महिलाओं का प्रतिनिधित्व:
संसद में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम रही है (अक्सर 10-15% के बीच)।
हाल ही में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया है, जो भविष्य में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करेगा (यह अभी पूरी तरह लागू होने की प्रक्रिया में है)।
8. महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terminology for Exam)
निर्वाचन क्षेत्र (Constituency): एक निर्धारित क्षेत्र जहाँ से मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
ई.वी.एम (EVM): इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन। 2004 के आम चुनावों से इसका पूरे देश में इस्तेमाल शुरू हुआ।
प्रश्नकाल (Question Hour): संसद के सत्र का वह समय जब मंत्री सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हैं।
विपक्ष (Opposition): बहुमत वाले दल के अलावा संसद में मौजूद अन्य सभी दल।
अधिनियम (Act): संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित कानून।
सारांश (Summary)
संसद भारतीय लोकतंत्र का हृदय है। यह न केवल कानून बनाती है, बल्कि कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है और सुनिश्चित करती है कि सरकार संविधान के अनुसार कार्य करे। एक जागरूक नागरिक के रूप में, संसद की कार्यवाही और निर्णयों पर नजर रखना लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
संसद और कानूनों का निर्माण
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