1. संविधान क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
संविधान नियमों और कानूनों का एक लिखित दस्तावेज है जिसके आधार पर किसी देश का शासन चलाया जाता है।
संविधान की आवश्यकता के मुख्य कारण:
आदर्शों का दस्तावेज: यह उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी इच्छा और सपनों के अनुसार रच सकते हैं।
राजनीतिक व्यवस्था का स्वरूप: यह तय करता है कि देश की राजनीतिक व्यवस्था कैसी होगी (जैसे - लोकतंत्र या राजशाही)।
शक्ति का दुरुपयोग रोकना: लोकतांत्रिक समाजों में, संविधान ऐसे नियम तय करता है जो नेताओं द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को रोकते हैं।
बहुसंख्यकों के वर्चस्व से बचाव: यह सुनिश्चित करता है कि ताकतवर समूह किसी कम ताकतवर समूह या लोगों के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रयोग न करे।
उदाहरण (NCERT): कक्षा में अगर लड़कों की संख्या ज्यादा है और वे क्रिकेट खेलना चाहते हैं, जबकि लड़कियां बैडमिंटन, तो शिक्षक को बहुमत के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, अन्यथा अल्पसंख्यकों (लड़कियों) की बात कभी नहीं सुनी जाएगी। संविधान इसी 'बहुसंख्यक की निरंकुशता' (Tyranny of Majority) को रोकता है।
खुद से बचाव: कई बार हम ऐसे निर्णय ले सकते हैं जो लंबे समय में हमारे हितों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। संविधान हमें ऐसे फैसलों से बचाता है।
2. भारतीय संविधान का निर्माण: मुख्य तथ्य
संविधान सभा: भारत का संविधान 'संविधान सभा' द्वारा बनाया गया था।
गठन: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा।
स्थायी अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (11 दिसंबर 1946 को चुने गए)।
प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. अंबेडकर। इन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
समय: संविधान बनने में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा।
स्वीकृति: 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया।
लागू होना: 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू हुआ।
3. भारतीय संविधान के मुख्य लक्षण (Key Features)
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान राष्ट्रवादियों ने जिस स्वतंत्र भारत की कल्पना की थी, उसे संविधान में उतारा गया। इसके 5 मुख्य आयाम हैं:
I. संघवाद (Federalism)
इसका अर्थ है देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकार का होना।
भारत में तीन स्तर:
केंद्र स्तर (राष्ट्रीय सरकार)
राज्य स्तर (प्रांतीय सरकार)
स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज और नगर निगम)
शक्तियों का बंटवारा: संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ दी गई हैं ताकि यह स्पष्ट रहे कि कौन किस मुद्दे पर कानून बनाएगा:
संघ सूची: रक्षा, विदेशी मामले (केंद्र सरकार)।
राज्य सूची: पुलिस, कृषि (राज्य सरकार)।
समवर्ती सूची: शिक्षा, वन (दोनों सरकारें)।
महत्वपूर्ण: भारत में सभी राज्य केंद्र के केवल एजेंट नहीं हैं, बल्कि उन्हें संविधान से ही अपनी ताकत और अधिकार मिलते हैं।
II. संसदीय शासन पद्धति (Parliamentary Form of Government)
भारत में सरकार के सभी स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव लोग खुद करते हैं।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: संविधान सभी वयस्क नागरिकों (18 वर्ष या उससे अधिक) को वोट देने का अधिकार देता है, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
जवाबदेही: चुनी हुई सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है।
III. शक्तियों का बंटवारा (Separation of Powers)
सरकार की किसी भी एक शाखा के पास निरंकुश शक्तियां न आ जाएं, इसलिए संविधान ने सरकार को तीन अंगों में बांटा है।
विधायिका (Legislature): इसमें जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। इसका काम कानून बनाना है।
कार्यपालिका (Executive): यह ऐसे लोगों का समूह है जो कानूनों को लागू करने और शासन चलाने का काम करते हैं (जैसे- प्रधानमंत्री, मंत्री, आईएएस अधिकारी)।
न्यायपालिका (Judiciary): इसका काम कानूनों की व्याख्या करना और विवादों का निपटारा करना है। भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र है।
संतुलन: यह बंटवारा सुनिश्चित करता है कि कोई भी अंग सत्ता का दुरुपयोग न करे और तीनों अंगों के बीच संतुलन बना रहे।
4. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
मौलिक अधिकारों को भारतीय संविधान की 'अंतरात्मा' (Conscience) कहा जाता है। ये अधिकार नागरिकों को राज्य की सत्ता के मनमाने और निरंकुश इस्तेमाल से बचाते हैं।
मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे, लेकिन वर्तमान में 6 मौलिक अधिकार हैं (संपत्ति के अधिकार को हटा दिया गया है)।
1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
कानून की नजर में सभी लोग समान हैं।
धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
सार्वजनिक स्थानों (होटल, पार्क, कुएं) पर जाने की सबको आजादी है।
अस्पृश्यता का उन्मूलन: अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत को गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
इसमें कई तरह की स्वतंत्रताएं शामिल हैं:
भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
शांतिपूर्वक सभा करने की स्वतंत्रता।
संगठन बनाने की स्वतंत्रता।
देश के किसी भी भाग में आने-जाने और रहने की स्वतंत्रता।
कोई भी व्यवसाय या कारोबार करने की स्वतंत्रता।
जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21): किसी भी नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
मानव दुर्व्यापार: इंसानों की खरीद-फरोख्त और जबरन मजदूरी (बेगार) पर रोक।
बाल श्रम निषेध: 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों, खदानों या खतरनाक कामों में लगाना अपराध है।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
प्रत्येक व्यक्ति को अपने पसंद का धर्म अपनाने, उसका प्रचार-प्रसार करने और उसके अनुसार आचरण करने का अधिकार है।
राज्य किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देगा।
5. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
यह मुख्य रूप से अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करता है।
धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार है।
उन्हें अपने शिक्षण संस्थान खोलने और चलाने का अधिकार है।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
यदि किसी नागरिक को लगता है कि राज्य द्वारा उसके किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है, तो वह अदालत (सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट) जा सकता है।
डॉ. अंबेडकर ने इसे 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा है।
5. धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
धर्मनिरपेक्ष राज्य वह होता है जिसमें राज्य अधिकृत रूप से किसी भी धर्म को 'राजकीय धर्म' के रूप में बढ़ावा नहीं देता।
भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएं (NCERT परिप्रेक्ष्य):
कोई राजकीय धर्म नहीं: भारत का अपना कोई धर्म नहीं है (जैसे पाकिस्तान का इस्लाम है)।
दूरी बनाना: राज्य खुद को धर्म से दूर रखता है। कचहरी, थाने, सरकारी स्कूलों में किसी खास धर्म का प्रदर्शन नहीं किया जाता।
हस्तक्षेप न करना: राज्य सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करता है।
उदाहरण: पगड़ी पहनना सिख धर्म का हिस्सा है, इसलिए उन्हें हेलमेट पहनने के कानून से छूट दी गई है।
हस्तक्षेप करना: अगर धर्म के नाम पर किसी के मौलिक अधिकारों का हनन हो, तो राज्य हस्तक्षेप कर सकता है।
उदाहरण: छुआछूत को खत्म करने के लिए संविधान ने हिंदू धर्म की प्रथाओं में हस्तक्षेप किया।
अमेरिका और भारत में अंतर: अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता में धर्म और राज्य एक-दूसरे के मामले में बिल्कुल हस्तक्षेप नहीं कर सकते। जबकि भारतीय धर्मनिरपेक्षता में 'सिद्धांतवादी हस्तक्षेप' की गुंजाइश है (सुधार के लिए)।
6. राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSP)
उद्देश्य: सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना।
ये सरकारों के लिए 'निर्देश' हैं कि वे कानून बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें।
ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं (Non-justiciable)। यानी अगर सरकार इन्हें लागू न करे, तो आप कोर्ट नहीं जा सकते।
उदाहरण: समान कार्य के लिए समान वेतन, ग्राम पंचायतों का गठन, पर्यावरण सुरक्षा।
7. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
मूल संविधान में मौलिक कर्तव्य नहीं थे।
इन्हें 42वें संशोधन (1976) द्वारा संविधान में जोड़ा गया।
यह अनुच्छेद 51A में वर्णित हैं।
वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं (11वां कर्तव्य 86वें संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया - 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा दिलाना)।
प्रमुख कर्तव्य: संविधान का पालन करना, राष्ट्रगान/राष्ट्रध्वज का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।
महत्वपूर्ण शब्दावली और तथ्य (Quick Revision)
संप्रभुता (Sovereign): इसका मतलब है कि भारत अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में निर्णय लेने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है; कोई विदेशी शक्ति उस पर हुकूमत नहीं कर सकती।
गणराज्य (Republic): देश का प्रमुख (राष्ट्रपति) वंशानुगत (राजा का बेटा) नहीं होगा, बल्कि जनता द्वारा (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) चुना जाएगा।
संविधान का रक्षक: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को संविधान का अंतिम व्याख्याकार और रक्षक माना जाता है।
नेपाल का उदाहरण (NCERT): 1990 के नेपाल के संविधान में सारी शक्ति राजा के पास थी। 2006 में लोकतंत्र आंदोलन के बाद, नेपाल को एक नया संविधान लिखना पड़ा क्योंकि पुराना संविधान नए लोकतांत्रिक आदर्शों को नहीं दर्शाता था। यह बताता है कि संविधान देश की 'तासीर' तय करता है।
हाशियाकरण (Marginalisation): जब किसी समूह को समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया जाता है। संविधान ऐसे समूहों (आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक) को विशेष सुरक्षा (आरक्षण और अधिकारों के माध्यम से) प्रदान करता है।
क्या करें (Next Step for You)
इन नोट्स को एक बार पढ़ने के बाद, नीचे दी गई क्विज़ को हल करें ताकि आप अपनी समझ को परख सकें। CTET में अक्सर व्यावहारिक उदाहरण (Application based questions) पूछे जाते हैं, इसलिए सिद्धांतों को रटने की जगह उनके अर्थ पर ध्यान दें।
भारतीय संविधान
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes