राज्य, राजा और प्राचीन गणराज्य

Sunil Sagare
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1. शासक बनने की बदलती प्रक्रिया (लगभग 3000 वर्ष पूर्व)

प्रारंभिक वैदिक काल में राजा का चुनाव अक्सर 'जन' (आम लोगों) द्वारा किया जाता था, लेकिन $3000$ साल पहले इसमें बड़ा बदलाव आया। अब राजा अपनी शक्ति का प्रदर्शन बड़े यज्ञों के माध्यम से करने लगे।

अश्वमेध यज्ञ

यह राजा की सर्वोपरि सत्ता स्थापित करने का एक अनुष्ठान था।

  • प्रक्रिया: राजा एक घोड़े को अपने सैनिकों की देखरेख में स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ देता था।

  • चुनौती: यदि यह घोड़ा किसी दूसरे राजा के राज्य से गुजरता और वह उसे रोकता, तो उसे अश्वमेध करने वाले राजा से युद्ध करना पड़ता था।

  • अधीनता: यदि उन्होंने घोड़े को जाने दिया, तो इसका अर्थ था कि वे अश्वमेध करने वाले राजा की श्रेष्ठता और शक्ति को स्वीकार करते हैं।

  • यज्ञ: अंत में, घोड़े को वापस लाया जाता था और विशिष्ट पुरोहितों द्वारा यज्ञ संपन्न किया जाता था।

  • राजा का स्थान: इस यज्ञ में राजा का स्थान सबसे विशिष्ट होता था। उसे राजसिंहासन या बाघ की खाल पर बैठाया जाता था।

  • सारथी की भूमिका: राजा का सारथी, जो युद्ध में उसका सहचर होता था, यज्ञ के अवसर पर राजा की विजय और गुणों का गान करता था।

  • प्रतिबंध: शूद्रों को इस अनुष्ठान में शामिल होने की अनुमति नहीं थी।


2. वर्ण व्यवस्था (Varna System)

इस काल में उत्तर भारत (विशेषकर गंगा-यमुना क्षेत्र) में कई ग्रंथ रचे गए, जिन्हें 'उत्तर वैदिक ग्रंथ' कहा जाता है (जैसे- सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद)। पुरोहितों ने समाज को चार वर्गों में विभाजित किया, जिसे 'वर्ण' कहा गया। यह विभाजन 'जन्म' के आधार पर निर्धारित होने लगा था।

वर्णकार्य और भूमिकाअधिकार/प्रतिबंध
ब्राह्मणवेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करना।समाज में सर्वोच्च स्थान, उपहार प्राप्त करना।
क्षत्रिययुद्ध करना और लोगों की रक्षा करना।शासक वर्ग, यज्ञ करने का अधिकार।
वैश्यकृषि, पशुपालन और व्यापार।यज्ञ करने का अधिकार प्राप्त था।
शूद्रउपरोक्त तीनों वर्णों की सेवा करना।वेदों के अध्ययन से वंचित, कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे।
  • स्त्रियों की स्थिति: महिलाओं को भी शूद्रों के समान माना गया। उन्हें भी वेदों के अध्ययन का अधिकार नहीं था।

  • अस्पृश्यता की शुरुआत: बाद के काल में कुछ वर्गों (जैसे- शिल्पकार, शिकारी, भोजन संग्राहक और शव दफनाने/जलाने वाले) को 'अस्पृश्य' माना जाने लगा।

चित्रित धूसर पात्र (Painted Grey Ware): इस काल के पुरास्थलों से विशेष प्रकार के बर्तन मिले हैं। ये आमतौर पर थालियां और कटोरियां हैं। इन पर सरल रेखाओं और ज्यामितीय आकृतियों का चित्रांकन है। इनका प्रयोग संभवतः खास मौकों पर महत्वपूर्ण लोगों को भोजन परोसने के लिए किया जाता था।


3. जनपद (Janapadas)

'जनपद' का शाब्दिक अर्थ है- जन (लोग) के बसने की जगह।

जब कोई राजा बड़े यज्ञों (जैसे अश्वमेध) का आयोजन करता था, तो वह केवल एक कबीले (जन) का राजा न होकर उस पूरे क्षेत्र (जनपद) का राजा माना जाने लगा।

प्रमुख पुरास्थल (पुरातत्वविदों द्वारा खुदाई):

  1. पुराना किला: दिल्ली

  2. हस्तिनापुर: मेरठ के पास (उत्तर प्रदेश)

  3. अतरंजीखेड़ा: एटा के पास (उत्तर प्रदेश)

जनपद जीवन की विशेषताएं:

  • लोग झोपड़ियों में रहते थे।

  • मवेशियों और अन्य जानवरों को पालते थे।

  • फसलें: वे चावल, गेहूं, धान, जौ, दालें, गन्ना, तिल और सरसों उगाते थे।

  • मृदभांड: लोग मिट्टी के बर्तन बनाते थे, जिनमें कुछ धूसर और कुछ लाल रंग के होते थे।


4. महाजनपद (Mahajanapadas)

लगभग $2500$ वर्ष पूर्व, कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली हो गए। इन्हें 'महाजनपद' कहा जाने लगा। बौद्ध और जैन ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।

महाजनपदों की मुख्य विशेषताएं:

  1. राजधानी: अधिकतर महाजनपदों की एक राजधानी होती थी।

  2. किलेबंदी: राजधानियों के चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊंची दीवारें बनाई जाती थीं।

    • सुरक्षा: बाहरी राजाओं के आक्रमण से बचने के लिए।

    • शक्ति प्रदर्शन: राजा अपनी समृद्धि और ताकत दिखाने के लिए विशाल दीवारें बनवाते थे।

    • नियंत्रण: चारदीवारी के भीतर रहने वाले लोगों और क्षेत्र पर नियंत्रण रखना सरल था।

    • उदाहरण: कौशांबी (इलाहाबाद) में मिली ईंट की दीवार, जो लगभग $2500$ साल पुरानी है।

  3. नई सेना (Army):

    • राजा अब नियमित सेना रखने लगे थे।

    • सैनिकों को पूरे साल वेतन दिया जाता था।

    • वेतन का भुगतान संभवतः 'आहत सिक्कों' (Punch Marked Coins) के रूप में होता था।


5. कर प्रणाली (Taxation System)

विशाल किले बनवाने और बड़ी सेना रखने के लिए राजाओं को प्रचुर संसाधनों की आवश्यकता थी। इसके लिए कर्मचारियों की भी जरूरत थी। अतः राजाओं ने समय-समय पर लाए गए उपहारों पर निर्भर रहने के बजाय नियमित कर वसूलना शुरू किया।

$$\text{कर के प्रमुख स्रोत}$$
  • 1. फसलों पर कर (सबसे महत्वपूर्ण):

    • चूंकि अधिकांश लोग किसान थे, इसलिए यह मुख्य आय थी।

    • इसे 'भाग' कहा जाता था।

    • दर: उपज का $\frac{1}{6}$ हिस्सा।

    • उदाहरण: यदि $100$ किलो अनाज हुआ, तो राजा का हिस्सा $\approx 16.6$ किलो।

  • 2. कारीगरों पर कर:

    • यह प्रायः श्रम के रूप में चुकाया जाता था।

    • उदाहरण: एक बुनकर, लोहार या सुनार को महीने में एक दिन राजा के लिए काम करना पड़ता था।

  • 3. पशुपालकों पर कर:

    • जानवरों या उनके उत्पादों (जैसे दूध, घी, ऊन) के रूप में कर देना पड़ता था।

  • 4. व्यापारियों पर कर:

    • सामान खरीदने और बेचने पर कर लगाया जाता था।

  • 5. आखेटकों और संग्राहकों पर कर:

    • उन्हें जंगल से प्राप्त वस्तुएं (जैसे लकड़ी, जड़ी-बूटियां, हाथी दांत) राजा को देनी होती थीं।


6. कृषि में परिवर्तन (Agricultural Changes)

इस युग (लगभग $2500$ वर्ष पूर्व) में कृषि के क्षेत्र में दो बड़े तकनीकी और पद्धतिगत परिवर्तन हुए, जिससे उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।

क. लोहे के फाल (Iron Ploughshare)

  • पहले लकड़ी के फाल का प्रयोग होता था। अब लोहे के फाल का प्रयोग शुरू हुआ।

  • लाभ: कठोर जमीन को आसानी से जोता जा सकता था। इससे फसलों की उपज बढ़ गई।

ख. धान की रोपाई (Paddy Transplantation)

  • पहले धान के बीज छिड़क कर खेती होती थी। अब धान के छोटे पौधे (तैयार पौध) रोप कर खेती शुरू हुई।

  • प्रक्रिया: पहले बीज बोकर पौध तैयार की जाती थी, फिर उन्हें खेतों में रोपा जाता था।

  • लाभ: इससे ज्यादा पौधे जीवित रहते थे और पैदावार बहुत ज्यादा बढ़ गई।

  • श्रम: यह काम बहुत कमरतोड़ था। इसे मुख्य रूप से दास, दासी और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों (कम्मकार) द्वारा किया जाता था।


7. सूक्ष्म निरीक्षण: मगध (Magadha)

लगभग $200$ सालों के भीतर मगध (वर्तमान दक्षिण बिहार) सबसे महत्वपूर्ण महाजनपद बन गया।

मगध के उत्कर्ष (सफलता) के कारण:

  1. नदियां: गंगा और सोन नदियाँ मगध से होकर बहती थीं।

    • यातायात: जलमार्ग से व्यापार और आवागमन सस्ता और सुगम था।

    • जल वितरण: खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध था।

    • उपजाऊपन: बाढ़ के मैदानों की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी।

  2. वन संपदा: मगध के एक हिस्से में घने जंगल थे।

    • हाथी: सेना के लिए हाथियों को पकड़कर प्रशिक्षित किया जाता था।

    • लकड़ी: घर, गाड़ियां और रथ बनाने के लिए लकड़ी मिलती थी।

  3. खनिज संसाधन: इस क्षेत्र (वर्तमान झारखंड सहित) में लोहे की खदानें थीं। इससे मजबूत औजार और हथियार बनाना संभव हुआ।

प्रमुख शासक:

  • बिंबिसार और अजातशत्रु: ये बहुत शक्तिशाली शासक थे जिन्होंने अन्य जनपदों को जीतने के लिए हर संभव नीति अपनाई।

  • महापद्म नंद: इन्होंने अपने नियंत्रण का क्षेत्र उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग तक फैला लिया था।

राजधानियां:

  1. राजगृह: (आधुनिक राजगीर, बिहार) - यह कई सालों तक मगध की राजधानी बनी रही। यह पहाड़ियों से घिरी एक सुरक्षित जगह थी।

  2. पाटलिपुत्र: (आधुनिक पटना) - बाद में राजधानी को यहाँ स्थानांतरित किया गया, जो जलदुर्ग के समान सुरक्षित थी।

सिकंदर का आक्रमण (लगभग 2300 वर्ष पूर्व/327BC):

मेसिडोनिया का राजा सिकंदर विश्व विजय करना चाहता था। मिस्र और पश्चिम एशिया को जीतने के बाद जब वह भारतीय उपमहाद्वीप में व्यास नदी के किनारे पहुंचा, तो उसके सैनिकों ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया।

  • कारण: वे भयभीत थे क्योंकि उन्होंने सुन रखा था कि भारत के शासकों के पास पैदल सेना, रथ और हाथियों की बहुत बड़ी सेना है।


8. सूक्ष्म निरीक्षण: वज्जि (Vajji)

मगध के पास ही 'वज्जि' राज्य था, जिसकी शासन व्यवस्था मगध से बिल्कुल अलग थी।

  • राजधानी: वैशाली (बिहार)।

  • शासन प्रणाली: यहाँ 'गण' या 'संघ' नाम की व्यवस्था थी।

गण/संघ की विशेषताएं:

  1. बहुल शासक: इसमें एक राजा नहीं होता था, बल्कि कई शासक होते थे। कभी-कभी हजारों लोग एक साथ शासन करते थे और प्रत्येक व्यक्ति 'राजा' कहलाता था।

  2. सभाएं: ये सभी राजा विभिन्न अनुष्ठान एक साथ करते थे और सभाओं में बैठकर बातचीत, बहस और वाद-विवाद के जरिए निर्णय लेते थे कि क्या करना है और किस तरह करना है।

    • उदाहरण: शत्रु के आक्रमण से निपटने के लिए वे मिलकर चर्चा करते थे।

  3. वर्जित वर्ग: स्त्रियां, दास और कम्मकार इन सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • बुद्ध और महावीर दोनों ही इन्हीं 'गण' या 'संघ' से संबंधित थे।

  • बौद्ध साहित्य (दीघ निकाय) में वज्जि संघ के जीवन का बहुत सजीव वर्णन मिलता है।

अजातशत्रु और वज्जि संघ:

मगध का राजा अजातशत्रु वज्जि संघ पर आक्रमण करना चाहता था। उसने अपने मंत्री वस्सकार को बुद्ध के पास सलाह के लिए भेजा।

  • बुद्ध का उत्तर: बुद्ध ने पूछा कि क्या वज्जि सभाएं नियमित रूप से होती हैं? जब उन्हें पता चला कि ऐसा होता है, तो उन्होंने कहा कि वज्जि तब तक उन्नति करते रहेंगे जब तक:

    1. वे पूर्ण और नियमित सभाएं करते रहेंगे।

    2. आपस में मिल-जुलकर काम करेंगे।

    3. पारंपरिक नियमों का पालन करेंगे।

    4. बड़ों का सम्मान करेंगे।

    5. महिलाओं के साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करेंगे।

    6. चैत्यों (धार्मिक स्थलों) का रखरखाव करेंगे।

गणों का अंत:

कई शक्तिशाली राजा इन संघों को जीतना चाहते थे। इसके बावजूद उनका राज्य लगभग $1500$ वर्ष पूर्व तक चलता रहा। अंततः गुप्त शासकों ने गण और संघ पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपने राज्य में मिला लिया।


महत्वपूर्ण शब्दावली (Quick Revision Keywords)

  • राजा: शासक, जो अब यज्ञों और सेना के बल पर बनता था।

  • अश्वमेध: शक्ति प्रदर्शन का यज्ञ।

  • वर्ण: जन्म आधारित सामाजिक विभाजन (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र)।

  • जनपद: लोग जहाँ बस गए।

  • महाजनपद: बड़े और शक्तिशाली राज्य (किलेबंदी वाले)।

  • किलेबंदी: सुरक्षा के लिए दीवारें।

  • सेना: वेतनभोगी नियमित सैनिक।

  • भाग: कृषि कर ($\frac{1}{6}$ हिस्सा)।

  • कम्मकार: भूमिहीन खेतिहर मजदूर।

  • गण: कई सदस्यों वाला समूह।

  • संघ: संगठन या सभा।

  • प्रजातंत्र/गणतंत्र: वज्जि की शासन प्रणाली।


तिथियां एक नज़र में (Timelines)

  • नए प्रकार के राजा (अश्वमेध वाले): लगभग $3000$ वर्ष पूर्व।

  • महाजनपदों का निर्माण: लगभग $2500$ वर्ष पूर्व।

  • सिकंदर का आक्रमण: लगभग $2300$ वर्ष पूर्व।

  • गण/संघ राज्यों का अंत: लगभग $1500$ वर्ष पूर्व (गुप्त काल)।



राज्य, राजा और प्राचीन गणराज्य

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