नए प्रश्न और विचार

Sunil Sagare
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1. पृष्ठभूमि: बदलाव का समय

लगभग $2500$ वर्ष पूर्व (उत्तर वैदिक काल के अंत में) समाज में बड़े बदलाव हो रहे थे।

  • महाजनपदों का उदय: कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण हो गए थे जिन्हें महाजनपद कहा गया (जैसे मगध, वज्जि)।

  • शहरीकरण: नए नगरों का विकास हो रहा था और जीवन शैली बदल रही थी।

  • विचारकों का उदय: बुद्ध और महावीर जैसे चिंतक जीवन के सच्चे अर्थ को समझना चाहते थे। वे वैदिक कर्मकांडों और वर्ण व्यवस्था की जटिलता से परे जाकर उत्तर ढूंढ रहे थे।


2. बौद्ध धर्म (Buddhism)

गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। उनका जीवन और शिक्षाएं CTET के लिए महत्वपूर्ण हैं।

जीवन परिचय

  • बचपन का नाम: सिद्धार्थ।

  • जन्म: लगभग $2500$ वर्ष पूर्व लुंबिनी (नेपाल) में।

  • गण (Clan): वे शाक्य गण से संबंधित थे।

  • वर्ण: क्षत्रिय।

  • गृहत्याग: युवावस्था में ही ज्ञान की खोज में घर के सुखों को त्याग दिया। इसे महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है।

ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment)

  • उन्होंने कई वर्षों तक भ्रमण किया और अन्य विचारकों से चर्चा की।

  • अंततः बोध गया (बिहार) में एक पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या की।

  • वहीं उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बुद्ध (जागृत या ज्ञानी व्यक्ति) कहलाए।

उपदेश और निर्माण

  • प्रथम उपदेश: ज्ञान प्राप्ति के बाद वे वाराणसी के निकट सारनाथ गए। यहाँ उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया। इस घटना को धर्मचक्रप्रवर्तन कहा जाता है।

  • मृत्यु (महापरिनिर्वाण): कुशीनारा (देवरिया, उत्तर प्रदेश) में उनकी मृत्यु हुई।

बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएं

बुद्ध ने सामान्य लोगों की भाषा प्राकृत में उपदेश दिया ताकि सब लोग उसे समझ सकें।

1. चार आर्य सत्य (The Four Noble Truths):

  1. दुःख: जीवन दुःखों और कष्टों से भरा हुआ है।

  2. दुःख समुदाय: इन दुःखों का कारण हमारी इच्छाएं और लालसा हैं। बुद्ध ने इस लालसा को तृष्णा (Tanha/Thirst) कहा है।

  3. दुःख निरोध: इच्छाओं पर विजय प्राप्त करके दुःख को दूर किया जा सकता है।

  4. दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा: दुःखों को दूर करने के लिए अष्टांगिक मार्ग अपनाना चाहिए।

2. मध्यम मार्ग:

  • बुद्ध ने न तो अत्यधिक तपस्या और न ही अत्यधिक भोग-विलास का समर्थन किया। उन्होंने बीच का रास्ता (मध्यम मार्ग) अपनाने को कहा।

3. आत्म-संयम:

  • उन्होंने लोगों को दयालु होने और मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों के जीवन का भी सम्मान करने की शिक्षा दी।

4. कर्म का सिद्धांत:

  • हमारे कर्मों (भले या बुरे) का परिणाम हमें इस जीवन में और बाद के जीवन में भी प्रभावित करता है।

5. आत्मा और ईश्वर पर विचार:

  • बुद्ध ने वेदों की सत्ता को अस्वीकार किया। वे ईश्वर और आत्मा के अस्तित्व पर मौन रहे (अनीश्वरवादी)।

किसा गौतमी की कहानी (प्रसिद्ध उदाहरण)

NCERT में यह कहानी यह समझाने के लिए दी गई है कि मृत्यु अटल है।

  • किसा गौतमी का बेटा मर गया था। वह बुद्ध के पास गई।

  • बुद्ध ने कहा, "मुझे एक मुट्ठी सरसों के बीज ला दो, लेकिन उस घर से जहाँ किसी की मृत्यु न हुई हो।"

  • किसा गौतमी को ऐसा कोई घर नहीं मिला। उसे समझ आ गया कि मृत्यु जीवन का सत्य है।


3. उपनिषद (Upanishads)

जिस समय बुद्ध उपदेश दे रहे थे, उसी समय या उससे थोड़ा पहले, अन्य चिंतक भी कठिन प्रश्नों का उत्तर ढूंढ रहे थे। इन विचारों का संकलन उपनिषदों में मिलता है।

शब्द का अर्थ

  • उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है: गुरु के समीप बैठना

  • इन ग्रंथों में अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच बातचीत (संवाद) का संकलन है।

मुख्य विषय

उपनिषदों का मुख्य केंद्र बिंदु "आत्मा" और "ब्रह्म" का संबंध है।

  1. आत्मा: व्यक्तिगत आत्मा (Individual Soul)।

  2. ब्रह्म: सार्वभौमिक आत्मा (Universal Soul)।

  • विचारकों का मानना था कि अंततः आत्मा और ब्रह्म एक ही हैं।

उपनिषदों के विचारक

  • अधिकांश विचारक पुरुष, ब्राह्मण और राजा होते थे।

  • महिला विचारक: कुछ अपवाद भी थे, जैसे गार्गी। गार्गी अपनी विद्वता के लिए प्रसिद्ध थी और राजदरबारों में होने वाले वाद-विवाद में भाग लेती थी।

  • निर्धन व्यक्ति: निर्धन व्यक्तियों का इन चर्चाओं में भाग लेना बहुत कम था।

    • अपवाद: सत्यकाम जाबाल। उसका नाम उसकी दासी माँ (जाबाली) के नाम पर पड़ा।

    • उसे गौतम नामक एक ब्राह्मण ऋषि ने विद्यार्थी के रूप में स्वीकार किया।

    • सत्यकाम जाबाल अपने समय के प्रसिद्ध विचारकों में से एक बन गए।

लेखन और विकास

  • कई विचारों का विकास बाद में प्रसिद्ध विचारक शंकराचार्य ने किया।

  • उपनिषद, उत्तर वैदिक ग्रंथों का हिस्सा माने जाते हैं।


4. व्याकरणविद् पाणिनी (Panini)

इस युग में कुछ अन्य विद्वान भी खोज कर रहे थे। उन्हीं में से एक प्रसिद्ध विद्वान पाणिनी थे।

  • इन्होंने संस्कृत भाषा के व्याकरण की रचना की।

  • इन्होंने स्वरों और व्यंजनों को एक विशेष क्रम में रखकर सूत्र बनाए।

  • ये सूत्र बीजगणित (Algebra) के सूत्रों से काफी मिलते-जुलते हैं।

  • इनका प्रयोग कर उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रयोग के नियम लघु सूत्रों (लगभग $3000$) के रूप में लिखे।

  • उनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम अष्टाध्यायी है।


5. जैन धर्म (Jainism)

जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर ने भी लगभग $2500$ वर्ष पूर्व अपने विचारों का प्रसार किया।

जीवन परिचय

  • कुल: वे वज्जि संघ के लिच्छवि कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे।

  • गृहत्याग: $30$ वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे।

  • ज्ञान प्राप्ति (कैवल्य): $12$ वर्ष तक कठिन और एकाकी जीवन व्यतीत करने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

प्रमुख शिक्षाएं

1. अहिंसा (Non-violence):

  • महावीर की शिक्षा बहुत सरल थी, लेकिन अहिंसा के नियमों का पालन बहुत कठोर था।

  • "सभी जीव जीना चाहते हैं, सभी के लिए जीवन प्रिय है।"

  • कीड़े-मकोड़ों को भी नहीं मारना चाहिए।

2. सत्य:

  • सदा सच बोलना चाहिए।

3. अस्तेय:

  • चोरी न करना।

4. अपरिग्रह:

  • संपत्ति इकट्ठा न करना।

5. ब्रह्मचर्य:

  • पुरुषों को स्त्रियों और वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागना पड़ता था। उन्हें पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना होता था।

भाषा और प्रसार

  • महावीर और उनके अनुयायियों ने प्राकृत भाषा का प्रयोग किया ताकि जनसामान्य समझ सके।

  • प्रचलन क्षेत्र के आधार पर प्राकृत के अलग-अलग नाम थे (जैसे मगध में बोली जाने वाली प्राकृत मागधी कहलाती थी)।

समाज पर प्रभाव

  • व्यापारी वर्ग: इन्होंने जैन धर्म का सबसे अधिक समर्थन किया।

  • किसान: किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था, क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकोड़ों को मारना पड़ता था।

  • धीरे-धीरे जैन धर्म उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी फैल गया।

ग्रंथों का लेखन

  • जैन धर्म की शिक्षाएं कई शताब्दियों तक मौखिक रूप में चलती रहीं।

  • वर्तमान में उपलब्ध लिखित रूप में ये शिक्षाएं लगभग $1500$ वर्ष पूर्व वल्लभी (गुजरात) में लिखी गईं।


6. संघ (The Sangha)

महावीर और बुद्ध दोनों का मानना था कि घर का त्याग करने पर ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए उन्होंने संघ नामक संगठन बनाया।

संघ क्या था?

  • यह उन लोगों का संगठन था जिन्होंने ज्ञान के लिए घर छोड़ा था।

  • यहाँ वे एक साथ रहते थे और ध्यान-साधना करते थे।

विनय पिटक (Vinaya Pitaka)

  • बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए नियम विनय पिटक नामक ग्रंथ में मिलते हैं।

  • इस ग्रंथ से पता चलता है कि संघ में पुरुषों और स्त्रियों के रहने के लिए अलग-अलग व्यवस्था थी।

प्रवेश के नियम

संघ में प्रवेश लेने के लिए विभिन्न वर्गों को अनुमति लेनी पड़ती थी:

  • बच्चे: अपने माता-पिता से।

  • दास: अपने स्वामी से।

  • राजा के कर्मचारी: राजा से।

  • कर्जदार: अपने देनदारों से।

  • स्त्री: अपने पति से अनुमति लेनी होती थी।

जीवन शैली (भिक्षु और भिक्षुणी)

  • वे बहुत सादा जीवन जीते थे।

  • अधिकांश समय ध्यान करने में बिताते थे।

  • दिन के एक निश्चित समय में वे शहरों और गांवों में जाकर भिक्षा मांगते थे।

  • यही कारण है कि उन्हें भिक्षु (साधु के लिए प्राकृत शब्द) कहा गया।

  • वे आम लोगों को शिक्षा देते थे और एक-दूसरे की सहायता करते थे।


7. विहार (Monasteries)

शुरुआत में भिक्षु-भिक्षुणी साल भर भ्रमण करते थे, केवल वर्षा ऋतु में यात्रा करना कठिन होने पर वे एक स्थान पर रुकते थे।

  • धीरे-धीरे स्थायी शरणस्थलों की आवश्यकता महसूस हुई।

  • इन शरणस्थलों को विहार कहा गया।

निर्माण

  • आरंभिक विहार लकड़ी के बनाए गए।

  • बाद में ईंटों का प्रयोग होने लगा।

  • पश्चिमी भारत (विशेषकर महाराष्ट्र) में पहाड़ियों को खोदकर गुफा विहार बनाए गए (जैसे कार्ले की गुफा)।

भूमि दान

  • प्रायः किसी धनी व्यापारी, राजा या भू-स्वामी द्वारा दान में दी गई भूमि पर विहार का निर्माण होता था।

  • स्थानीय लोग भिक्षुओं के लिए भोजन, वस्त्र और दवाइयां लेकर आते थे, जिसके बदले भिक्षु उन्हें शिक्षा देते थे।


8. आश्रम व्यवस्था (The System of Ashramas)

जैन और बौद्ध धर्म के प्रसार के समय ही ब्राह्मणों ने आश्रम व्यवस्था का विकास किया। यहाँ 'आश्रम' का अर्थ रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवन के एक चरण से है।

इस व्यवस्था में जीवन को चार चरणों में बांटा गया:

  1. ब्रह्मचर्य (Brahmacharya):

    • जीवन का पहला चरण।

    • इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सादा जीवन बिताकर वेदों का अध्ययन करें।

  2. गृहस्थ (Grihastha):

    • विवाह करके एक गृहस्थ के रूप में रहना।

  3. वानप्रस्थ (Vanaprastha):

    • जंगल में रहकर साधना करना।

  4. संन्यास (Samnyasa):

    • सब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाना।

नियम:

  • आश्रम व्यवस्था ने लोगों को अपने जीवन का कुछ हिस्सा ध्यान में लगाने पर बल दिया।

  • प्रायः स्त्रियों को वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी। उन्हें अपने पतियों द्वारा पालन किए जाने वाले आश्रमों का ही अनुसरण करना होता था।


9. अन्यत्र: जरथुस्त्र (Zoroaster)

NCERT में समकालीन विश्व के संदर्भ में ईरानी पैगंबर जरथुस्त्र का उल्लेख है।

  • धर्म: पारसी धर्म।

  • ग्रंथ: जेंद अवेस्ता (Zend Avesta)।

  • भाषा और रीति-रिवाज: वेदों से काफी मिलते-जुलते हैं।

  • मूल शिक्षा: सद्विचार, सद्वचन और सत्कर्म।

  • ईरान से आए पारसी भारत के गुजरात और महाराष्ट्र में बसे। वे आज के पारसियों के पूर्वज हैं।


परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Recap Table)

विषयमहत्वपूर्ण बिंदु
गौतम बुद्धशाक्य गण, क्षत्रिय, जन्म: लुंबिनी, ज्ञान: बोध गया, उपदेश: सारनाथ, मृत्यु: कुशीनारा।
महावीरलिच्छवि कुल (वज्जि संघ), 24वें तीर्थंकर, त्रिरत्न, कठोर अहिंसा।
उपनिषदअर्थ: पास बैठना। विषय: आत्मा-ब्रह्म। गार्गी (महिला विदुषी), सत्यकाम जाबाल।
पाणिनीसंस्कृत व्याकरण, अष्टाध्यायी।
त्रिपिटकविनय पिटक (नियम), सुत्त पिटक (उपदेश), अभिधम्म पिटक (दर्शन)।
संघघर त्यागने वालों का संगठन, विनय पिटक में नियम।

10. CTET विशेष: तुलनात्मक अध्ययन

जैन और बौद्ध धर्म में समानताएं:

  1. दोनों ने वेदों की प्रमाणिकता को नकारा।

  2. दोनों ने कर्मकांडों और पशुबलि का विरोध किया।

  3. दोनों ने अहिंसा पर बल दिया (जैन धर्म में अधिक कठोरता)।

  4. दोनों ने जनसाधारण की भाषा (प्राकृत/पाली) का प्रयोग किया।

  5. दोनों का मानना था कि निर्वाण/मोक्ष के लिए गृहत्याग आवश्यक है।

असमानताएं:

  1. जैन धर्म ने कठोर तपस्या और कायाक्लेश पर बल दिया, जबकि बुद्ध ने मध्यम मार्ग अपनाया।

  2. जैन धर्म में मोक्ष के बाद भी आत्मा का अस्तित्व रहता है (अनंत चतुष्टय), बौद्ध धर्म में आत्मा का अस्तित्व समाप्त हो जाता है (शून्यवाद की ओर)।


11. महत्वपूर्ण शब्दावली (Glossary)

  • तृष्णा (Tanha): लगातार कुछ पाने की इच्छा, जो दुःख का कारण है।

  • प्राकृत: जनसामान्य की भाषा।

  • भिक्षु: साधु जो भोजन मांगकर जीवन यापन करते थे।

  • आश्रम: जीवन के चरण।

  • तीर्थंकर: जैन धर्म में वे महापुरुष जो जीवन रूपी नदी को पार करने का मार्ग दिखाते हैं।



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