प्रस्तावना (Introduction)
पृथ्वी पर मौजूद सभी सजीव प्राणियों के जीवन का आधार भोजन है। जिस प्रकार एक मशीन को चलाने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मानव शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने, वृद्धि करने और स्वस्थ रहने के लिए ऊर्जा (Energy) की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा हमें भोजन से प्राप्त होती है।
भोजन वह खाद्य पदार्थ है जो शरीर में गृहीत और अवशोषित होकर शारीरिक कार्यों को संचालित करता है। मुख्य रूप से भोजन के दो स्रोत होते हैं: पादप उत्पाद (जैसे- अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल) और जन्तु उत्पाद (जैसे- दूध, अंडा, मांस, मछली)। CTET की दृष्टि से, हमें भोजन के घटकों, उनकी कमी से होने वाले रोगों, खाद्य संरक्षण और भारत की सांस्कृतिक खाद्य विविधता को समझना अत्यंत आवश्यक है।
खंड 1: भोजन के पोषक तत्व (Nutrients)
भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने का माध्यम है। भोजन के मुख्य अवयव निम्नलिखित हैं, जिन्हें हम पोषक तत्व (Nutrients) कहते हैं:
1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
यह हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का सबसे मुख्य और सस्ता स्रोत है। शरीर की कुल ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 50-75% भाग कार्बोहाइड्रेट से पूरा होता है।
कार्य: शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करना।
प्रकार:
सरल कार्बोहाइड्रेट: जैसे- ग्लूकोज, चीनी (गन्ने का रस), शहद। यह तुरंत ऊर्जा देते हैं।
जटिल कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च): जैसे- आलू, चावल, अरबी, मक्का। इनका पाचन धीरे-धीरे होता है।
प्रमुख स्रोत: चावल, गेहूं, आलू, शकरकंद, गन्ना, पपीता, तरबूज, मक्का, बाजरा।
विशेष नोट: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट के पूर्ण ऑक्सीकरण से लगभग 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. वसा (Fats)
वसा शरीर में ऊर्जा का संचित भंडार (Energy Bank) है। यह कार्बोहाइड्रेट की तुलना में दोगुने से अधिक ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन इसका पाचन कठिन होता है।
कार्य:
शरीर को ऊर्जा देना और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखना।
कोमल अंगों (जैसे- हृदय, किडनी) को बाहरी आघातों से बचाना (गद्दी की तरह कार्य करना)।
कोशिका झिल्ली के निर्माण में सहायता करना।
प्रमुख स्रोत:
पादप स्रोत: मूंगफली, तिल, सोयाबीन, सरसों का तेल, नारियल का तेल, सूखे मेवे (बादाम, काजू)।
जन्तु स्रोत: घी, मक्खन, दूध, मलाई, मांस, मछली, अंडे।
हानि: अत्यधिक वसा युक्त भोजन खाने से मोटापा बढ़ता है और हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं।
3. प्रोटीन (Proteins)
प्रोटीन को 'शरीर निर्माणक' (Body Building Food) कहा जाता है। यह अमीनो अम्ल (Amino Acids) का बहुलक है।
कार्य:
शरीर की वृद्धि और विकास करना।
टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत करना।
एंजाइम और हार्मोन के निर्माण में सहायता करना।
रोगों से लड़ने के लिए एंटीबॉडी (Antibody) बनाना।
प्रमुख स्रोत:
पादप स्रोत: सभी दालें (अरहर, मूंग, चना), मटर, राजमा। सोयाबीन प्रोटीन का सबसे समृद्ध स्रोत है (लगभग 42-43%)।
जन्तु स्रोत: दूध, पनीर, मांस, मछली, अंडा (अंडे का सफेद भाग)।
आवश्यकता: बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि उनके शरीर में उत्तकों का निर्माण तेजी से हो रहा होता है।
4. विटामिन (Vitamins)
इन्हें 'रक्षात्मक खाद्य' (Protective Food) कहा जाता है। यद्यपि इनकी आवश्यकता शरीर को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन इनकी कमी से विभिन्न रोग हो जाते हैं। विटामिन ऊर्जा प्रदान नहीं करते, बल्कि शरीर की उपापचय (Metabolism) क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
विटामिनों को घुलनशीलता के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है:
जल में घुलनशील (Water Soluble): विटामिन B समूह और विटामिन C। ये शरीर में जमा नहीं होते, पसीने या मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं, अतः इन्हें प्रतिदिन लेना आवश्यक है।
वसा में घुलनशील (Fat Soluble): विटामिन A, D, E और K। ये यकृत और वसा ऊतकों में संचित रहते हैं।
5. खनिज लवण (Minerals)
ये अकार्बनिक तत्व हैं जो शरीर के उचित विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
लौह (Iron):
कार्य: हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक, जो शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
कमी: एनीमिया (अरक्तता)।
स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी), गुड़, आंवला, सेब, केला, रागी। (CTET में यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है)।
कैल्शियम (Calcium):
कार्य: हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाना, खून का थक्का जमाना।
स्रोत: दूध और दूध से बने उत्पाद, अंडे, हरी सब्जियाँ।
फॉस्फोरस (Phosphorus):
कार्य: हड्डियों की मजबूती।
स्रोत: दूध, केला, हरी मिर्च, अनाज।
आयोडीन (Iodine):
कार्य: थाइरॉइड ग्रंथि के कार्य और मानसिक विकास के लिए आवश्यक।
स्रोत: आयोडीन युक्त नमक, समुद्री भोजन (मछली, केकड़ा)।
6. रुक्षांश/आहारी रेशे (Roughage)
ये पादप उत्पादों से प्राप्त होने वाले रेशेदार पदार्थ हैं।
कार्य: ये पोषक तत्व नहीं देते, लेकिन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं। ये बिना पचे भोजन को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करते हैं और कब्ज से बचाते हैं।
स्रोत: साबुत अनाज, दालें, ताजे फल, सब्जियाँ, सलाद।
7. जल (Water)
मानव शरीर का लगभग 60-70% भाग जल है।
कार्य:
पोषक तत्वों का अवशोषण और परिवहन करना।
शरीर के तापमान को नियंत्रित करना (पसीने के द्वारा)।
विषाक्त पदार्थों को मूत्र और पसीने के रूप में बाहर निकालना।
खंड 2: संतुलित आहार एवं कुपोषण (Balanced Diet & Malnutrition)
संतुलित आहार: वह भोजन जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, जल और रेशे) सही अनुपात और उचित मात्रा में उपलब्ध हों, संतुलित आहार कहलाता है। यह आयु, लिंग और कार्य (शारीरिक श्रम) पर निर्भर करता है।
कैलोरी की आवश्यकता (प्रतिदिन औसत):
10-12 वर्ष: 2000 कैलोरी
वयस्क पुरुष (कठिन श्रम): 2500 से 4000 कैलोरी
66-75 वर्ष: 2300 कैलोरी
अभावजन्य रोग (Deficiency Diseases):
पोषक तत्वों की लंबे समय तक कमी रहने से होने वाले रोगों को अभावजन्य रोग कहते हैं।
विटामिन की कमी से होने वाले रोग (तालिका):
| विटामिन | रासायनिक नाम | कमी से होने वाले रोग | मुख्य लक्षण |
| Vit A | रेटिनॉल | रतौंधी (Night Blindness) | कम रोशनी में दिखाई न देना। |
| Vit B1 | थायमिन | बेरी-बेरी | पेशियों का कमजोर होना, काम करने में ऊर्जा की कमी। |
| Vit B2 | राइबोफ्लेविन | त्वचा का फटना | मुंह के कोने फटना, जीभ पर छाले। |
| Vit B12 | साइनोकोबालामिन | एनीमिया | खून की कमी, तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी। |
| Vit C | एस्कॉर्बिक एसिड | स्कर्वी (Scurvy) | मसूड़ों से खून आना, घाव भरने में अधिक समय लगना। (खट्टे फलों में पाया जाता है)। |
| Vit D | कैल्सिफेरॉल | रिकेट्स (Rickets) (बच्चों में) | हड्डियाँ मुलायम होकर मुड़ जाना। |
| Vit E | टोकोफेरॉल | जनन क्षमता में कमी | मांसपेशियों में कमजोरी। |
| Vit K | फिलोक्विनोन | रक्त का थक्का न जमना | चोट लगने पर खून का बहना न रुकना। |
प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण (Protein-Energy Malnutrition - PEM):
क्वाशियोरकोर (Kwashiorkor): मुख्य रूप से प्रोटीन की कमी से होता है। बच्चे का पेट बाहर निकल आता है, त्वचा रूखी हो जाती है।
मरास्मस (Marasmus): प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट (ऊर्जा) दोनों की कमी से होता है। शरीर सूखकर कांटा हो जाता है, पसलियाँ दिखने लगती हैं।
खंड 3: भोजन पकाना और संरक्षण (Cooking & Preservation)
भोजन को पकाने से वह सुपाच्य, स्वादिष्ट और कीटाणुमुक्त हो जाता है।
भोजन पकाने की विधियाँ:
उबालकर (Boiling): चावल, दाल, आलू, अंडा।
भूनकर (Roasting): चना, मूंगफली, मक्का, शकरकंद, आलू, बैंगन (भरता)।
तलकर (Frying): पूरी, समोसा, पापड़, मछली।
सेककर (Baking/Roasting): रोटी, पिज्जा, ब्रेड, केक।
भाप में पकाना (Steaming): इडली, ढोकला, मोमोज।
महत्वपूर्ण नियम:
सब्जियों को काटने के बाद धोना नहीं चाहिए, इससे विटामिन (विशेषकर B और C) नष्ट हो जाते हैं।
दाल-चावल को बार-बार धोने से ऊपरी परत में मौजूद विटामिन और खनिज निकल जाते हैं।
भोजन को विटामिन C की उपस्थिति में बहुत अधिक नहीं पकाना चाहिए क्योंकि गर्मी से विटामिन C नष्ट हो जाता है।
खाद्य संरक्षण (Food Preservation):
भोजन को सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, फफूंद) से बचाने के लिए संरक्षण आवश्यक है।
रेफ्रिजरेशन (Refrigeration): कम तापमान पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि (Growth) धीमी हो जाती है (नष्ट नहीं होते)।
हरा धनिया: गीले कपड़े में लपेटकर रखते हैं।
पके चावल: कटोरे में डालकर पानी के बर्तन में रखते हैं (पुराना तरीका) या फ्रिज में।
आलू, प्याज, लहसुन: नमी से बचाकर खुले में रखते हैं।
निर्जलीकरण (Dehydration/Drying): नमी (Moisture) को हटाना।
उदाहरण: मेथी, आलू चिप्स, पापड़, बड़ियाँ।
विशेष: अचार भरने से पहले कांच के जार को धूप में सुखाया जाता है ताकि नमी पूरी तरह खत्म हो जाए और फफूंद न लगे।
पाश्चुरीकरण (Pasteurization): दूध को संरक्षित करने की विधि (लुई पाश्चर द्वारा खोज)।
प्रक्रिया: दूध को $62.8^\circ\text{C}$ पर 30 मिनट तक या $71.7^\circ\text{C}$ पर 15-30 सेकंड तक गर्म करके अचानक ठंडा किया जाता है। इससे हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
रसायनिक परिरक्षक: सोडियम बेंजोएट, नमक, चीनी, सिरका और तेल का उपयोग अचार, जैम और सॉस में किया जाता है।
खंड 4: भारत के क्षेत्रीय व्यंजन (Regional Food of India)
CTET परीक्षा में राज्यों और उनके मुख्य भोजन के मिलान से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर:
सरसों के तेल में बनी मछली।
तबक माज (भेड़ का मांस), कहवा (बादाम युक्त चाय), राजमा।
गोवा:
नारियल के तेल में बनी समुद्री मछली। (ध्यान दें: कश्मीर में सरसों का तेल, गोवा में नारियल का तेल)।
केरल:
टैपिओका (Tapioca/Kappa): यह जमीन के नीचे उगने वाला कंदमूल है। इसे नारियल की करी के साथ खाया जाता है।
अवियल (मिश्रित सब्जी)।
आंगन में मसाले (तेजपत्ता, काली मिर्च, इलायची) उगाए जाते हैं।
हांगकांग (Hong Kong):
लिंग-हू-फेन (Ling-hu-fen): यह सांप के मांस से बना व्यंजन है।
गुजरात:
ढोकला, खांडवी, लेमन राइस, चटनी।
वलसाड स्टेशन पर 'बटाटा वड़ा' प्रसिद्ध है। दाल में चीनी (मीठा) डालने का प्रचलन है।
महाराष्ट्र:
वड़ा-पाव, पाव-भाजी, पूरन-पोली, शाक-पूरी।
सहजन (Drumstick) के फूलों के पकौड़े।
पंजाब:
सरसों का साग और मक्के की रोटी, लस्सी, छोले-भटूरे।
राजस्थान:
दाल-बाटी-चूरमा, मलाई घेवर।
बिहार:
लिट्टी-चोखा, दाल-भात।
पश्चिम बंगाल:
दाब छिनगरी (झींगा), रसगुल्ला, संदेश, मछली-चावल।
मेघालय:
तुगतप (मछली की चटनी)।
छत्तीसगढ़:
लाल चींटी की चटनी (चापड़ा)।
उत्तर प्रदेश:
कचनार के फूलों की सब्जी।
असम:
बांस (Bamboo shoot), चावल, मसोर टेंगा (मछली)।
खंड 5: पाचन तंत्र और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
पाचन प्रक्रिया (Process of Digestion):
पाचन का सही क्रम है:
अंतर्ग्रहण (Ingestion): भोजन को मुख में लेना।
पाचन (Digestion): जटिल पदार्थों का सरल पदार्थों में टूटना। (मुख $\rightarrow$ ग्रासनली $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ छोटी आंत $\rightarrow$ बड़ी आंत)।
अवशोषण (Absorption): पचे हुए भोजन का रक्त में मिलना (मुख्यतः छोटी आंत में)।
स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित भोजन का शरीर की कोशिकाओं द्वारा उपयोग करना।
बहिष्क्षेपण (Egestion): अपशिष्ट का बाहर निकलना।
महत्वपूर्ण बिंदु:
कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुख से ही शुरू हो जाता है (लार में टायलिन एंजाइम होता है)।
प्रोटीन का पाचन आमाशय (Stomach) से शुरू होता है।
भोजन का सर्वाधिक पाचन और अवशोषण छोटी आंत (Small Intestine) में होता है। छोटी आंत की लंबाई लगभग 7.5 मीटर होती है।
आमाशय का तापमान लगभग $30^\circ\text{C}$ होता है और इसका पाचक रस (Hydrochloric Acid - HCl) अम्लीय होता है।
डॉ. ब्यूमोंट के प्रयोगों ने सिद्ध किया कि भोजन बाहर की अपेक्षा आमाशय के अंदर जल्दी पचता है क्योंकि आमाशय में भोजन का मंथन होता है जिससे एंजाइम की क्रिया के लिए सतह का क्षेत्रफल बढ़ जाता है।
मिड-डे मील (Mid-Day Meal):
यह योजना भारत में 2004 में सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शुरू की गई (तमिलनाडु में यह सबसे पहले शुरू हुई थी)।
उद्देश्य: बच्चों को पोषण देना और स्कूल में उपस्थिति बढ़ाना।
इसमें कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पका हुआ गर्म भोजन दिया जाता है।
स्वच्छ भारत अभियान:
गांधी जी की 150वीं वर्षगांठ पर स्वच्छ भारत का संकल्प लिया गया। इसका उद्देश्य कचरा मुक्त समाज बनाना है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सीटीईटी परीक्षा में सफलता के लिए, न केवल पोषक तत्वों के वैज्ञानिक नामों को याद रखना जरूरी है, बल्कि भारत की क्षेत्रीय विविधता और व्यावहारिक जीवन में भोजन संरक्षण के तरीकों को समझना भी अनिवार्य है। गुड़, आंवला और पालक (लौह तत्व) का समूह और टैपिओका (केरल) जैसे प्रश्न बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान दें।
भोजन एवं पोषण
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
