सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन (Evaluation in Social Science)
सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन केवल छात्रों के अंकों को मापने की प्रक्रिया नहीं है। यह यह जानने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है कि बच्चे ने समाज, इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान की अवधारणाओं को किस हद तक समझा है और क्या वह इन ज्ञान का उपयोग अपने दैनिक जीवन में तार्किक चिंतन के लिए कर पा रहा है या नहीं।
1. मापन, आकलन और मूल्यांकन में अंतर
अक्सर छात्र इन तीनों शब्दों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन CTET के दृष्टिकोण से इनमें सूक्ष्म अंतर है:
मापन (Measurement): यह किसी विशेषता को संख्यात्मक रूप देने की प्रक्रिया है। जैसे - एक परीक्षा में 100 में से 80 अंक प्राप्त करना। यह केवल मात्रा बताता है।
आकलन (Assessment): यह सूचना एकत्र करने की प्रक्रिया है। शिक्षण प्रक्रिया के दौरान जब शिक्षक यह देखता है कि बच्चा कैसे सीख रहा है, उसे क्या कठिनाई आ रही है, तो वह आकलन कर रहा होता है। यह सुधारात्मक होता है।
मूल्यांकन (Evaluation): यह एक व्यापक शब्द है। इसमें मापन और आकलन दोनों शामिल हैं। यह निर्णय लेने की प्रक्रिया है। इसमें यह तय किया जाता है कि शिक्षण उद्देश्य किस सीमा तक प्राप्त हुए हैं।
2. सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन के उद्देश्य
NCERT के अनुसार, सामाजिक विज्ञान शिक्षण में मूल्यांकन के निम्नलिखित उद्देश्य होने चाहिए:
छात्रों में आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) का विकास मापना।
तथ्यों को रटने की बजाय अवधारणाओं की समझ की जाँच करना।
मानचित्र, ग्लोब और चार्ट को पढ़ने और समझने के कौशल की जाँच करना।
सामाजिक मूल्यों जैसे - समानता, न्याय, भाईचारा और विविधता के प्रति सम्मान का आकलन करना।
छात्रों की समस्याओं का निदान (Diagnostic) करना और उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान करना।
शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता की जाँच करना।
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation)
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के तहत CCE को अनिवार्य किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना और बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है।
सतत (Continuous) का अर्थ:
मूल्यांकन केवल साल के अंत में नहीं होना चाहिए।
यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के साथ-साथ निरंतर चलना चाहिए।
इसमें नियमितता और आवधिकता शामिल है।
व्यापक (Comprehensive) का अर्थ:
इसमें केवल शैक्षिक (Scholastic) पक्ष ही नहीं, बल्कि सह-शैक्षिक (Co-Scholastic) पक्ष भी शामिल हैं।
शैक्षिक पक्ष: विषय ज्ञान (इतिहास, भूगोल आदि)।
सह-शैक्षिक पक्ष: जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल-कूद, कला और शारीरिक शिक्षा।
मूल्यांकन के प्रकार (Types of Evaluation)
CTET में इससे सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
1. रचनात्मक / निर्माणात्मक मूल्यांकन (Formative Evaluation)
इसे 'अधिगम के लिए आकलन' (Assessment for Learning) भी कहा जाता है।
समय: यह शिक्षण प्रक्रिया के दौरान किया जाता है।
उद्देश्य: छात्र को प्रतिपुष्टि (Feedback) देना और सुधार करना।
प्रकृति: यह निदानात्मक (Diagnostic) और उपचारात्मक होता है।
उपकरण: मौखिक प्रश्न, क्विज़, चर्चा, प्रोजेक्ट, अवलोकन।
ग्रेडिंग में भार: इसका कुल मूल्यांकन में $40\%$ भार होता है (सामान्यतः)।
उदाहरण: सामाजिक विज्ञान की कक्षा में शिक्षक द्वारा पाठ पढ़ाते समय यह पूछना कि "अगर आप अकबर की जगह होते तो क्या करते?" यह जानने के लिए है कि बच्चे समझ रहे हैं या नहीं।
2. योगात्मक / संकलनात्मक मूल्यांकन (Summative Evaluation)
इसे 'अधिगम का आकलन' (Assessment of Learning) कहा जाता है।
समय: यह सत्र या इकाई के अंत में किया जाता है।
उद्देश्य: छात्र की उपलब्धि का स्तर मापना और ग्रेड/प्रमाण पत्र देना।
प्रकृति: यह निर्णयपरक (Judgmental) होता है।
उपकरण: वार्षिक परीक्षा, अर्धवार्षिक परीक्षा, लिखित परीक्षा।
ग्रेडिंग में भार: इसका कुल मूल्यांकन में $60\%$ भार होता है।
3. अधिगम के रूप में आकलन (Assessment as Learning)
जब छात्र अपना मूल्यांकन स्वयं करते हैं।
इसमें स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment) और सहपाठी-मूल्यांकन (Peer Assessment) शामिल है।
यह छात्रों को अपनी सीखने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करता है।
मूल्यांकन की तकनीकें और उपकरण (Techniques and Tools)
सामाजिक विज्ञान में केवल लिखित परीक्षा पर्याप्त नहीं है। NCERT विभिन्न उपकरणों के प्रयोग की सिफारिश करता है:
1. पोर्टफोलियो (Portfolio)
यह CTET का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक है।
परिभाषा: यह एक निश्चित अवधि में छात्र द्वारा किए गए कार्यों का एक व्यवस्थित संग्रह है।
क्या शामिल होता है: छात्र की ड्राइंग, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कार्यपत्रक (Worksheets), रचनात्मक लेखन, मानचित्र कार्य आदि।
उपयोगिता:
यह बच्चे की प्रगति का क्रमिक प्रमाण देता है।
यह बच्चे की क्षमताओं और कमजोरियों दोनों को दर्शाता है।
यह शिक्षक और अभिभावक दोनों के लिए उपयोगी है।
2. रूब्रिक्स (Rubrics)
यह मूल्यांकन के लिए एक स्कोरिंग गाइड है।
इसमें कार्य के लिए विशिष्ट मानदंड (Criteria) निर्धारित किए जाते हैं।
उदाहरण: अगर किसी छात्र ने 'पर्यावरण संरक्षण' पर पोस्टर बनाया है, तो रूब्रिक्स में अंक ऐसे बंटेंगे:
विषय वस्तु की स्पष्टता: 2 अंक
रचनात्मकता: 2 अंक
प्रस्तुतीकरण: 1 अंक
इससे मूल्यांकन में वस्तुनिष्ठता (Objectivity) आती है।
3. उपाख्यानात्मक अभिलेख (Anecdotal Records)
यह किसी छात्र के जीवन की विशिष्ट घटनाओं या व्यवहारों का लिखित विवरण है।
शिक्षक अवलोकन के दौरान किसी विशेष घटना को नोट करता है।
उदाहरण: "आज राहुल ने खेल के मैदान में अपने सहपाठी की मदद की जबकि वह गिर गया था।"
यह छात्र के सामाजिक और भावनात्मक विकास को समझने में मदद करता है।
4. अवलोकन (Observation)
शिक्षक छात्रों को गतिविधियों, समूह चर्चा या खेल के दौरान देखते हैं।
यह अनौपचारिक होता है लेकिन वास्तविक व्यवहार को मापने के लिए सबसे अच्छा तरीका है।
सामाजिक विज्ञान में समूह चर्चा के दौरान नेतृत्व गुण और सहयोग की भावना का आकलन अवलोकन से ही संभव है।
5. जाँच सूची (Checklist)
यह "हाँ" या "नहीं" प्रारूप में होती है।
इसका उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि कोई विशिष्ट कौशल या व्यवहार मौजूद है या नहीं।
उदाहरण: क्या छात्र भारत के मानचित्र पर दिल्ली को पहचान सकता है? (हाँ/नहीं)।
6. खुली किताब परीक्षा (Open Book Examination)
NCERT रटने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए इसका सुझाव देता है।
इसमें छात्र परीक्षा के दौरान अपनी पाठ्यपुस्तकों का संदर्भ ले सकते हैं।
उद्देश्य: इसका उद्देश्य छात्र की स्मृति की जाँच करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि वह सूचना को खोजकर उसका विश्लेषण और अनुप्रयोग कैसे करता है।
प्रश्न सीधे किताब से नहीं होते, बल्कि समझ और तर्क पर आधारित होते हैं।
ब्लूम का वर्गीकरण (Bloom's Taxonomy) - संज्ञानात्मक पक्ष
सामाजिक विज्ञान में प्रश्न पत्र बनाते समय ब्लूम के वर्गीकरण का ध्यान रखा जाता है। 2001 में एंडरसन और क्रथवोहल ने इसे संशोधित किया। नीचे से ऊपर का क्रम इस प्रकार है:
याद करना (Remembering): तथ्यों को पहचानना या याद रखना। (सबसे निचला स्तर)
प्रश्न: "पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ था?"
समझना (Understanding): अर्थ समझना, व्याख्या करना।
प्रश्न: "लोकतंत्र और राजतंत्र में अंतर स्पष्ट करें।"
लागू करना (Applying): ज्ञान का नई स्थितियों में उपयोग करना।
प्रश्न: "यदि आप अपने जिले के जिलाधिकारी होते, तो जल संकट को कैसे सुलझाते?"
विश्लेषण करना (Analyzing): सूचना को भागों में तोड़ना और संबंध समझना।
प्रश्न: "1857 की क्रांति की विफलता के कारणों का विश्लेषण करें।"
मूल्यांकन करना (Evaluating): निर्णय लेना, आलोचना करना।
प्रश्न: "क्या आपको लगता है कि वैश्वीकरण ने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुँचाया है? अपने तर्क दें।"
रचना/सृजन करना (Creating): नए विचारों या उत्पादों को बनाना। (सबसे उच्च स्तर)
प्रश्न: "अपने सपनों के विद्यालय का एक मॉडल तैयार करें।"
एक अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ (Characteristics of a Good Test)
एक मानकीकृत परीक्षण में तीन मुख्य गुण होने चाहिए:
वैधता (Validity): परीक्षण उसी उद्देश्य को मापे जिसके लिए उसे बनाया गया है। यदि हम इतिहास का ज्ञान मापना चाहते हैं, तो प्रश्न गणितीय क्षमता पर आधारित नहीं होने चाहिए।
विश्वसनीयता (Reliability): यदि एक ही परीक्षण को बार-बार किया जाए, तो परिणाम लगभग समान आने चाहिए। अंकों में निरंतरता होनी चाहिए।
वस्तुनिष्ठता (Objectivity): परीक्षण के परिणाम पर जाँचने वाले (शिक्षक) की व्यक्तिगत राय या पूर्वाग्रह का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण (Diagnostic and Remedial Teaching)
मूल्यांकन का चक्र तब तक पूरा नहीं होता जब तक छात्र की कमियों को दूर न किया जाए।
निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic Test)
उद्देश्य: अधिगम में आ रही कठिनाइयों (Gaps) और उनके कारणों का पता लगाना।
यह डॉक्टर द्वारा बीमारी का पता लगाने जैसा है।
इसमें कोई अंक या ग्रेड नहीं दिया जाता।
उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching)
निदान के बाद, पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए जो शिक्षण दिया जाता है।
इसमें शिक्षक अपनी शिक्षण विधियों में बदलाव करता है।
कठिन अवधारणाओं को पुनः सरल तरीके से समझाया जाता है।
सामाजिक विज्ञान में प्रश्न पूछने की कला
मूल्यांकन में प्रश्नों की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण है।
1. बंद सिरे वाले प्रश्न (Close-ended Questions):
इनका उत्तर निश्चित होता है।
ये अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
उदाहरण: भारत की राजधानी क्या है?
2. खुले सिरे वाले प्रश्न (Open-ended Questions):
इनके एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं।
ये अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं।
सामाजिक विज्ञान में ऐसे प्रश्नों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उदाहरण: यदि पृथ्वी से सारे जंगल खत्म हो जाएं तो क्या होगा?
महत्वपूर्ण स्मरणीय बिंदु (Key Points for Revision)
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया: मूल्यांकन इसका एक अभिन्न अंग है, न कि अंतिम चरण।
भयमुक्त वातावरण: मूल्यांकन ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चों में डर पैदा न हो।
गुणात्मक टिप्पणी: रिपोर्ट कार्ड में केवल अंक नहीं, बल्कि बच्चे के प्रदर्शन पर गुणात्मक टिप्पणी (Qualitative Remarks) होनी चाहिए।
लचीलापन: मूल्यांकन विधियों में लचीलापन होना चाहिए ताकि विभिन्न क्षमताओं वाले बच्चों (समावेशी शिक्षा) का सही आकलन हो सके।
प्रतिपुष्टि (Feedback): मूल्यांकन का मुख्य कार्य छात्र को यह बताना है कि वह कैसे बेहतर कर सकता है, न कि उसे अन्य छात्रों से तुलना करके नीचा दिखाना।
निष्कर्ष
एक आदर्श शिक्षक के रूप में, आपको मूल्यांकन को एक 'छड़ी' के रूप में नहीं, बल्कि एक 'टॉर्च' के रूप में उपयोग करना चाहिए जो छात्र के रास्ते के अंधेरे (कठिनाइयों) को दूर करने में मदद करे। सामाजिक विज्ञान में उद्देश्य एक जागरूक और तर्कशील नागरिक बनाना है, तोता नहीं।
मूल्यांकन
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes