1. प्रस्तावना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परियोजना कार्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। यह विधि पारंपरिक रटंत विद्या (Rote Learning) के विपरीत 'करके सीखने' (Learning by doing) पर जोर देती है।
मूल विचारधारा: इस विधि का आधार जॉन डीवी (John Dewey) की प्रयोजनवाद (Pragmatism) विचारधारा है।
प्रतिपादक: इस विधि को शिक्षण विधि के रूप में विकसित करने का श्रेय डब्ल्यू. एच. किलपैट्रिक (W.H. Kilpatrick) को जाता है, जो जॉन डीवी के शिष्य थे।
परिभाषा (किलपैट्रिक के अनुसार): "प्रोजेक्ट वह सोद्देश्य प्रक्रिया है, जिसे मन लगाकर सामाजिक वातावरण में पूरा किया जाता है।"
स्टीवेन्सन के अनुसार: "प्रोजेक्ट एक समस्यामूलक कार्य है, जिसे स्वाभाविक परिस्थितियों में पूरा किया जाता है।"
2. परियोजना कार्य के मुख्य उद्देश्य
NCF 2005 (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा) के अनुसार, परियोजना कार्य का मुख्य उद्देश्य स्कूली ज्ञान को बच्चे के बाहरी जीवन से जोड़ना है।
करके सीखना: छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना।
सामाजिक कौशल का विकास: समूह में कार्य करने से सहयोग, सहिष्णुता और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करना।
वास्तविक जीवन से जुड़ाव: किताबी ज्ञान को वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने में उपयोग करना।
श्रम के प्रति सम्मान: छात्रों में हाथ से काम करने और श्रम के प्रति आदर भाव पैदा करना।
आत्मनिर्भरता: छात्रों को स्वयं खोजने और सीखने के लिए प्रेरित करना।
प्रजातांत्रिक मूल्यों का विकास: समूह में चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रिया से लोकतांत्रिक भावना मजबूत होती है।
3. परियोजना विधि के आधारभूत सिद्धांत
शिक्षण की यह विधि कुछ मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक सिद्धांतों पर आधारित है:
क. सोद्देश्यता का सिद्धांत (Principle of Purpose)
बच्चे को कार्य का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। जब छात्र को पता होता है कि वे कोई कार्य क्यों कर रहे हैं, तो उनकी रुचि बनी रहती है। बिना उद्देश्य का कार्य केवल समय की बर्बादी है।
ख. क्रियाशीलता का सिद्धांत (Principle of Activity)
इसमें छात्र निष्क्रिय श्रोता नहीं होते, बल्कि सक्रिय भागीदार होते हैं। यह शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की क्रियाशीलता पर जोर देता है।
ग. वास्तविकता का सिद्धांत (Principle of Reality)
प्रोजेक्ट काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जुड़ा होना चाहिए। समस्या कृत्रिम नहीं होनी चाहिए।
घ. स्वतंत्रता का सिद्धांत (Principle of Freedom)
छात्रों को विषय चुनने, योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। शिक्षक केवल मार्गदर्शक होता है, तानाशाह नहीं।
ङ. उपयोगिता का सिद्धांत (Principle of Utility)
प्रोजेक्ट का छात्रों के जीवन में कुछ व्यावहारिक उपयोग होना चाहिए। कार्य ऐसा हो जो समाज या छात्र की आवश्यकताओं को पूरा करे।
च. सह-संबंध का सिद्धांत (Principle of Correlation)
परियोजना के माध्यम से विभिन्न विषयों (जैसे- इतिहास, भूगोल, गणित, विज्ञान) को एक साथ जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए। ज्ञान को टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र रूप में देखा जाता है।
4. परियोजना कार्य के चरण (Steps of Project Method)
किलपैट्रिक और अन्य शिक्षाविदों ने इसके कुछ निश्चित चरण बताए हैं। आपके द्वारा दिए गए क्रम के अनुसार विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
चरण 1: विषय का चयन (Selection of Topic)
यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रारंभिक चरण है।
प्रक्रिया: समस्या या विषय का चुनाव छात्रों द्वारा किया जाना चाहिए, न कि शिक्षक द्वारा थोपा जाना चाहिए।
शिक्षक की भूमिका: शिक्षक छात्रों के सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करता है जिससे छात्र स्वयं समस्याओं की पहचान करें।
चर्चा: कक्षा में विचार-विमर्श होता है कि कौन सा प्रोजेक्ट सबसे उपयुक्त, संभव और उपयोगी है।
ध्यान देने योग्य बातें: विषय छात्रों की क्षमता, रुचि और उपलब्ध संसाधनों के अनुकूल होना चाहिए।
चरण 2: योजना बनाना (Planning)
"एक अच्छी योजना आधी सफलता है।"
प्रक्रिया: विषय चुनने के बाद, उसे कैसे पूरा किया जाएगा, इसकी रूपरेखा तैयार की जाती है।
समूह विभाजन: छात्रों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार छोटे-छोटे समूहों में बांटा जाता है।
कार्य वितरण: कौन सा छात्र क्या काम करेगा (जैसे- आंकड़े जुटाना, चित्र बनाना, रिपोर्ट लिखना) यह तय किया जाता है।
संसाधन: आवश्यक सामग्री, बजट और समय सीमा का निर्धारण किया जाता है।
शिक्षक का दायित्व: शिक्षक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योजना व्यावहारिक हो और प्रत्येक छात्र को भागीदारी का मौका मिले।
चरण 3: क्रियान्वयन (Execution)
यह सबसे लंबा और सक्रिय चरण है।
प्रक्रिया: बनाई गई योजना के अनुसार छात्र कार्य करना शुरू करते हैं।
गतिविधियां: छात्र क्षेत्र भ्रमण करते हैं, आंकड़े एकत्र करते हैं, मॉडल बनाते हैं, साक्षात्कार लेते हैं या प्रयोग करते हैं।
अधिगम: इसी चरण में वास्तविक अधिगम (Learning) होता है। छात्र चुनौतियों का सामना करते हैं और समाधान खोजते हैं।
अनुशासन: छात्र स्व-अनुशासन में रहकर कार्य करते हैं।
चरण 4: रिपोर्ट / आलेखन (Reporting/Recording)
किए गए कार्य का दस्तावेजीकरण आवश्यक है।
प्रक्रिया: छात्र अपने अनुभवों, कार्यविधि और प्राप्त परिणामों को लिखित रूप देते हैं।
विवरण: इसमें परियोजना की योजना, उद्देश्य, आई समस्याएं, समाधान, और निष्कर्ष शामिल होते हैं।
प्रस्तुतीकरण: इसमें चित्र, ग्राफ, सारणी और आंकड़ों का उपयोग किया जाता है ताकि रिपोर्ट आकर्षक और स्पष्ट हो।
चरण 5: मूल्यांकन (Evaluation)
यह अंतिम और निर्णायक चरण है।
स्व-मूल्यांकन: छात्र स्वयं देखते हैं कि उन्होंने अपने उद्देश्यों को किस हद तक प्राप्त किया।
शिक्षक द्वारा मूल्यांकन: शिक्षक देखता है कि छात्रों ने क्या सीखा, कार्य में क्या कमियां रहीं और भविष्य में क्या सुधार हो सकता है।
सामूहिक चर्चा: पूरी कक्षा के सामने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया जाता है और अन्य समूह उस पर अपने सुझाव और प्रश्न रखते हैं।
मानदंड: मूल्यांकन केवल अंतिम उत्पाद का नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया, सहयोग और प्रयास का होना चाहिए।
5. शिक्षक की भूमिका: एक सुगमकर्ता (Facilitator)
परियोजना विधि में शिक्षक का स्थान पारंपरिक 'व्याख्याता' (Lecturer) का नहीं है। NCF 2005 के अनुसार शिक्षक एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) है।
मार्गदर्शक: शिक्षक छात्रों को सही दिशा दिखाता है, लेकिन उत्तर नहीं बताता।
मित्र: वह छात्रों के साथ मित्रवत व्यवहार करता है ताकि वे अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें।
निरीक्षक: शिक्षक दूर से सभी गतिविधियों पर नजर रखता है और जहां छात्र अटकते हैं, वहां मदद करता है।
संसाधन प्रबंधक: आवश्यक सामग्री और वातावरण उपलब्ध कराने में मदद करता है।
प्रेरक: जब छात्र निराश होते हैं, तो शिक्षक उन्हें प्रोत्साहित करता है।
महत्वपूर्ण: शिक्षक को अपनी राय छात्रों पर थोपनी नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें स्वयं निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाना चाहिए।
6. परियोजना कार्य के प्रकार (Types of Projects)
किलपैट्रिक ने प्रोजेक्ट के चार मुख्य प्रकार बताए हैं:
रचनात्मक प्रोजेक्ट (Constructive Project):
उद्देश्य: किसी भौतिक वस्तु का निर्माण करना।
उदाहरण: मॉडल बनाना, चार्ट बनाना, नाटक का मंच तैयार करना, विद्यालय का बगीचा लगाना।
कलात्मक/रसास्वादन प्रोजेक्ट (Aesthetic Project):
उद्देश्य: सौंदर्य अनुभूति या आनंद प्राप्त करना।
उदाहरण: कविता पाठ, संगीत कार्यक्रम, चित्रकारी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
समस्या समाधान प्रोजेक्ट (Problematic Project):
उद्देश्य: किसी बौद्धिक समस्या का हल खोजना।
उदाहरण: "हमारे क्षेत्र में प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है?", "बाढ़ आने के क्या कारण हैं?"
अभ्यास प्रोजेक्ट (Drill Project):
उद्देश्य: किसी कौशल में दक्षता प्राप्त करना।
उदाहरण: मानचित्र भरने का अभ्यास, गणित के फॉर्मूले याद करना (यह प्रकार किलपैट्रिक की सूची में सबसे कम महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें रटने की प्रवृत्ति आ सकती है)।
7. विभिन्न विषयों में परियोजना कार्य के उदाहरण
CTET में अक्सर विषय-विशिष्ट उदाहरण पूछे जाते हैं।
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के लिए:
विषय: जल संरक्षण।
गतिविधि: छात्र अपने घर और पड़ोस में सर्वेक्षण करेंगे कि पानी कैसे बर्बाद होता है। वे टपकते नल की गिनती करेंगे, वर्षा जल संचयन का मॉडल बनाएंगे और पानी बचाने के लिए पोस्टर अभियान चलाएंगे।
सीख: जल का महत्व, डेटा संग्रह, सामाजिक जागरूकता।
सामाजिक विज्ञान (Social Science) के लिए:
विषय: स्थानीय इतिहास।
गतिविधि: छात्र अपने गांव या शहर की किसी ऐतिहासिक इमारत का दौरा करेंगे। वहां के बुजुर्गों से बात करेंगे और इमारत के इतिहास पर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे।
सीख: ऐतिहासिक स्रोतों का उपयोग, साक्षात्कार कौशल, अतीत के प्रति सम्मान।
विज्ञान (Science) के लिए:
विषय: भोजन के घटक।
गतिविधि: छात्र विभिन्न खाद्य पदार्थों (जैसे आलू, दाल, तेल) पर आयोडीन और अन्य रसायनों का परीक्षण करके पता लगाएंगे कि उनमें कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन है या नहीं।
सीख: वैज्ञानिक विधि, अवलोकन, वर्गीकरण।
गणित (Mathematics) के लिए:
विषय: ज्यामिति हमारे आसपास।
गतिविधि: छात्र अपने घर या स्कूल की वस्तुओं (खिड़की, दरवाजा, फर्श) को मापेंगे और उनका क्षेत्रफल व परिमाप निकालेंगे।
सीख: मापन, ज्यामितीय आकृतियों की समझ, गणना।
8. परियोजना विधि के गुण (Merits)
मनोवैज्ञानिक आधार: यह विधि बाल मनोविज्ञान (रुचि, तत्परता) के अनुकूल है।
स्थायी ज्ञान: स्वयं करके सीखा गया ज्ञान अधिक समय तक याद रहता है।
विषयों का एकीकरण: यह विधि विषयों के बीच की दीवारें तोड़ती है। एक प्रोजेक्ट में गणित, भाषा और विज्ञान सभी का उपयोग हो सकता है।
चरित्र निर्माण: इससे सहयोग, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित होते हैं।
लोकतांत्रिक वातावरण: कक्षा में स्वतंत्रता और समानता का माहौल रहता है।
9. परियोजना विधि के दोष (Demerits)
CTET में आलोचनात्मक दृष्टिकोण भी पूछा जाता है।
समय साध्य: इसमें पाठ्यक्रम पूरा करने में बहुत समय लगता है।
खर्चीली विधि: कई प्रोजेक्ट्स के लिए महंगी सामग्री और भ्रमण की आवश्यकता होती है।
सभी विषयों के लिए अनुपयुक्त: हर टॉपिक को प्रोजेक्ट विधि से नहीं पढ़ाया जा सकता (जैसे गणित के जटिल अमूर्त सिद्धांत)।
कुशल शिक्षकों का अभाव: इस विधि के लिए अत्यधिक प्रशिक्षित और सक्रिय शिक्षकों की आवश्यकता होती है।
असंतुलित अधिगम: कई बार छात्र प्रोजेक्ट की सजावट में इतना खो जाते हैं कि मुख्य विषयवस्तु (Content) पीछे छूट जाती है।
10. मूल्यांकन के लिए रूब्रिक्स (Rubrics for Assessment)
परियोजना कार्य का मूल्यांकन करते समय शिक्षक को केवल अंतिम फाइल नहीं देखनी चाहिए। सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर अंक दिए जाने चाहिए:
| मानदंड | विवरण |
| मौलिकता (Originality) | क्या छात्र ने खुद विचार किया है या कहीं से नकल की है? |
| सहयोग (Collaboration) | समूह में छात्र ने दूसरों के साथ कैसा व्यवहार किया? |
| अनुसंधान (Research) | जानकारी जुटाने के लिए किन स्रोतों का उपयोग किया गया? |
| प्रस्तुतीकरण (Presentation) | रिपोर्ट कितनी स्पष्ट, साफ और व्यवस्थित है? |
| मौखिक अभिव्यक्ति (Viva) | छात्र प्रोजेक्ट के बारे में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर कैसे देता है? |
11. सारांश और निष्कर्ष
परियोजना विधि शिक्षा को जीवन से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। यह रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करती है और समझने पर बल देती है। एक सुगमकर्ता के रूप में शिक्षक यदि सही नियोजन और मार्गदर्शन प्रदान करे, तो यह विधि छात्रों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) में मील का पत्थर साबित हो सकती है। CTET अभ्यर्थियों के लिए यह समझना आवश्यक है कि यह विधि बाल-केंद्रित शिक्षा (Child Centered Education) का सर्वोत्तम उदाहरण है।
परियोजना कार्य (Project Work)
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