शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएँ और प्रमुख सिद्धांत

Sunil Sagare
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1. शिक्षण: एक परिचय (Concept of Teaching)

शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य छात्र के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाना है। विभिन्न विद्वानों ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझाया है:

  • जॉन डीवी (John Dewey): इन्होंने शिक्षण को त्रि-ध्रुवीय प्रक्रिया (Tri-polar Process) माना है।

    1. शिक्षक (स्वतंत्र चर)

    2. छात्र (आश्रित चर)

    3. समाज/पाठ्यक्रम (मध्यस्थ चर)

  • एडम्स (Adams): इन्होंने शिक्षण को द्वि-ध्रुवीय प्रक्रिया (Bi-polar Process) कहा, जिसमें केवल शिक्षक और छात्र शामिल होते हैं।

शिक्षण के उद्देश्य:

  • जीविकोपार्जन की क्षमता विकसित करना।

  • ज्ञान और कौशल का हस्तांतरण।

  • बालक का सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक)।


2. अधिगम (Learning) का अर्थ और प्रकृति

अधिगम का सामान्य अर्थ है—सीखना या व्यवहार में परिवर्तन।

मुख्य विशेषताएं:

  • अधिगम जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।

  • अधिगम व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। (थकान, बीमारी या नशें के कारण आया परिवर्तन अधिगम नहीं है)।

  • यह उद्देश्यपूर्ण और लक्ष्य-निर्देशित होता है।

  • यह वातावरण के साथ अनुकूलन है।


3. शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching)

शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए इसे तीन स्तरों में विभाजित किया गया है:

1. स्मृति स्तर (Memory Level):

  • प्रवर्तक: हर्बर्ट (Herbart)

  • यह सबसे निचला स्तर है।

  • इसमें तथ्यों को रटने और याद करने पर जोर दिया जाता है।

  • यह विचारहीन (Thoughtless) होता है। छोटी कक्षाओं के लिए उपयुक्त है।

2. बोध स्तर (Understanding Level):

  • प्रवर्तक: मॉरिसन (Morrison)

  • इसमें रटने की बजाय अर्थ समझने पर जोर दिया जाता है।

  • छात्र तथ्यों के बीच संबंध स्थापित करना सीखते हैं।

  • उदाहरण और गैर-उदाहरणों के माध्यम से संप्रत्यय को समझा जाता है।

3. चिंतन स्तर (Reflective Level):

  • प्रवर्तक: हंट (Hunt)

  • यह शिक्षण का सर्वोच्च स्तर है।

  • यह समस्या-समाधान (Problem Solving) पर आधारित है।

  • छात्र अपनी मौलिक सोच और तर्क का उपयोग करते हैं।


4. ब्लूम का वर्गीकरण (Bloom's Taxonomy)

बेंजामिन ब्लूम ने 1956 में शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण किया। इसे शिक्षण-अधिगम में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्होंने सीखने के तीन पक्ष बताए:

A. ज्ञानात्मक पक्ष (Cognitive Domain):

यह मस्तिष्क और बौद्धिक क्षमताओं से संबंधित है। इसके 6 स्तर हैं (नीचे से ऊपर की ओर):

  1. ज्ञान (Knowledge) - याद करना।

  2. समझ/बोध (Comprehension) - अर्थ समझना।

  3. अनुप्रयोग (Application) - ज्ञान का नई स्थिति में प्रयोग।

  4. विश्लेषण (Analysis) - तोड़कर समझना।

  5. संश्लेषण (Synthesis) - जोड़कर नया बनाना (नए संस्करण में इसे 'रचना करना' कहा गया है)।

  6. मूल्यांकन (Evaluation) - निर्णय लेना।

B. भावात्मक पक्ष (Affective Domain):

यह भावनाओं, अभिरुचियों और मूल्यों से संबंधित है।

C. क्रियात्मक/मनोगत्यात्मक पक्ष (Psychomotor Domain):

यह शारीरिक कौशल और क्रियाओं (जैसे लिखना, खेलना, चित्र बनाना) से संबंधित है।


5. अधिगम के प्रमुख सिद्धांत (Theories of Learning)

CTET में व्यवहारवादी, संज्ञानवादी और रचनावादी सिद्धांतों से सर्वाधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।

A. थार्नडाइक का प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत (Trial and Error Theory)

  • मनोवैज्ञानिक: ई. एल. थार्नडाइक (अमेरिका)

  • प्रयोग: भूखी बिल्ली पर (पिंजरे/पज़ल बॉक्स में)।

  • उद्दीपक (Stimulus): मछली (भोजन)।

  • मुख्य विचार: सीखना संबंध स्थापित करना है। जब व्यक्ति किसी उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया करता है और उसे संतोष मिलता है, तो वह उस क्रिया को सीख लेता है।

अधिगम के नियम (Laws of Learning):

थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य नियम और 5 गौण नियम दिए।

मुख्य नियम:

  1. तत्परता का नियम (Law of Readiness): यदि बच्चा सीखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं है, तो उसे नहीं सिखाया जा सकता। इसे 'रुचि का नियम' भी कहते हैं।

  2. अभ्यास का नियम (Law of Exercise): "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान"। बार-बार दोहराने से अधिगम दृढ़ होता है। इसके दो उप-भाग हैं: उपयोग का नियम और अनुपयोग का नियम।

  3. प्रभाव का नियम (Law of Effect): यदि सीखने के बाद संतोष/सुख मिलता है, तो बच्चा उसे दोबारा करेगा। यदि कष्ट होता है (दण्ड), तो वह उसे नहीं करेगा। इसे 'संतोष/असंतोष का नियम' भी कहते हैं।

शैक्षिक महत्व:

  • मंदबुद्धि बालकों के लिए उपयोगी।

  • गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण।

  • धैर्य और परिश्रम के गुण विकसित करता है।


B. पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत (Classical Conditioning Theory)

  • मनोवैज्ञानिक: इवान पावलव (रूस) - 1904 में नोबेल पुरस्कार।

  • प्रयोग: कुत्ते पर।

  • मुख्य विचार: अस्वाभाविक उद्दीपक (घंटी) के साथ स्वाभाविक उद्दीपक (भोजन) को बार-बार प्रस्तुत करने पर, कुत्ता घंटी बजने पर ही लार टपकाना सीख जाता है।

प्रयोग की शब्दावली :

  1. अनुबंधन से पूर्व:

    $$\text{Food (UCS)} \rightarrow \text{Saliva (UCR)}$$
  2. अनुबंधन के दौरान:

    $$\text{Bell (CS)} + \text{Food (UCS)} \rightarrow \text{Saliva (UCR)}$$
  3. अनुबंधन के बाद:

    $$\text{Bell (CS)} \rightarrow \text{Saliva (CR)}$$
  • UCS: अनानुबंधित उद्दीपक (भोजन)

  • UCR: अनानुबंधित अनुक्रिया (स्वाभाविक लार)

  • CS: अनुबंधित उद्दीपक (घंटी)

  • CR: अनुबंधित अनुक्रिया (घंटी सुनकर लार आना)

महत्वपूर्ण संप्रत्यय:

  • विलोपन (Extinction): यदि घंटी बजाने के बाद लंबे समय तक भोजन न दिया जाए, तो लार आना बंद हो जाएगा।

  • स्वतः पुनर्लाभ (Spontaneous Recovery): विलोपन के कुछ समय बाद यदि अचानक घंटी बजाई जाए, तो हल्की अनुक्रिया दोबारा हो सकती है।

शैक्षिक महत्व:

  • अच्छी आदतों के निर्माण में सहायक (जैसे सुबह जल्दी उठना)।

  • भय और अंधविश्वास को दूर करने में।

  • भाषा सीखने और शब्द-चित्र संबंध जोड़ने में।


C. स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (Operant Conditioning Theory)

  • मनोवैज्ञानिक: बी. एफ. स्किनर (अमेरिका)

  • प्रयोग: चूहे (Skinner Box) और कबूतर पर।

  • मुख्य विचार: व्यवहार के परिणाम सीखने को निर्धारित करते हैं। यदि क्रिया के बाद पुनर्बलन (Reinforcement) मिले, तो क्रिया दोहराई जाती है। इसे R-S Theory भी कहते हैं।

पुनर्बलन के प्रकार:

  1. धनात्मक पुनर्बलन: भोजन, प्रशंसा, पुरस्कार। यह व्यवहार को बढ़ाता है।

  2. ऋणात्मक पुनर्बलन: शोर, तेज रोशनी, डांट से बचना। यह भी व्यवहार को बढ़ाता है (कष्टदायक स्थिति को हटाकर)।

नोट: 'दण्ड' (Punishment) पुनर्बलन नहीं है, यह व्यवहार को दबाता है, खत्म नहीं करता।

पुनर्बलन अनुसूचियां:

  • सतत पुनर्बलन: हर सही क्रिया पर इनाम। (तेजी से सीखना, लेकिन जल्दी भूलना)।

  • आंशिक पुनर्बलन: कभी-कभी इनाम देना। (यह सबसे प्रभावी है, अधिगम स्थायी होता है)।

शैक्षिक महत्व:

  • अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Learning) इसी पर आधारित है।

  • व्यवहार परिवर्तन (Modelling) के लिए सर्वश्रेष्ठ।

  • तत्काल प्रतिपुष्टि (Feedback) का महत्व।


D. कोहलर का अंतर्दृष्टि/सूझ का सिद्धांत (Insight Theory)

  • संप्रदाय: गेस्टाल्टवाद (Gestaltism)।

  • मनोवैज्ञानिक: कोहलर, कोफ्का, वर्दीमर। 'गेस्टाल्ट' एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है - 'समग्र आकृति' या 'पूर्ण आकार'।

  • प्रयोग: 'सुल्तान' नामक चिम्पांजी पर।

  • मुख्य विचार: सीखना प्रयास और त्रुटि से नहीं, बल्कि अचानक आई सूझ (Insight) से होता है। प्राणी पूरी स्थिति को समग्र रूप (Whole) में देखता है।

प्रयोग: सुल्तान ने पिंजरे में रखी छड़ियों को जोड़कर और बक्से के ऊपर बक्सा रखकर ऊंचाई पर लटके केले प्राप्त किए। यह बौद्धिक क्षमता का कार्य था।

शैक्षिक महत्व:

  • समस्या-समाधान विधि के लिए उपयोगी।

  • 'पूर्ण से अंश की ओर' (Whole to Part) शिक्षण सूत्र इसी पर आधारित है।

  • रचनात्मक कार्यों और उच्च कक्षाओं के लिए उपयोगी।


E. अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory)

  • प्रयोग: बोबो डॉल (Bobo Doll) पर।

  • मुख्य विचार: बच्चे दूसरों के व्यवहार का अवलोकन (Observation) और नक़ल करके सीखते हैं। इसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' भी कहते हैं।

सीखने के 4 चरण (क्रमबद्ध):

  1. अवधान (Attention): मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखना।

  2. धारण (Retention): देखे गए व्यवहार को मस्तिष्क में याद रखना।

  3. पुनरुत्पादन (Reproduction): याद किए गए व्यवहार को दोहराना/करके देखना।

  4. अभिप्रेरणा (Motivation): यदि उस कार्य के लिए पुरस्कार मिले, तो उसे आदत बना लेना।

शैक्षिक महत्व:

  • शिक्षक का व्यक्तित्व आदर्श होना चाहिए क्योंकि बच्चे उनका अनुकरण करते हैं।

  • कक्षा में हिंसात्मक दृश्य या कहानियों से बचना चाहिए।


6. अधिगम का स्थानांतरण (Transfer of Learning)

पूर्व में सीखे गए ज्ञान का नई स्थिति में प्रयोग करना अधिगम स्थानांतरण कहलाता है।

प्रकार:

  1. धनात्मक (Positive): जब पुराना ज्ञान नए ज्ञान में सहायता करे। (जैसे: साइकिल चलाने के बाद बाइक चलाना सीखना, हिंदी व्याकरण का संस्कृत में लाभ)।

  2. ऋणात्मक (Negative): जब पुराना ज्ञान बाधा उत्पन्न करे। (जैसे: भारत में गाड़ी चलाने के बाद अमेरिका में बाईं ओर स्टीयरिंग वाली गाड़ी चलाने में कठिनाई)।

  3. शून्य (Zero): जब पुराने ज्ञान का कोई प्रभाव न पड़े। (जैसे: कबीर के दोहे याद करने का कार चलाने पर कोई प्रभाव नहीं)।

अन्य प्रकार:

  • क्षैतिज (Horizontal): एक ही स्तर पर ज्ञान का प्रयोग (गणित के जोड़ का प्रयोग दुकान पर हिसाब करने में)।

  • ऊर्ध्व (Vertical): निचले स्तर के ज्ञान का प्रयोग उच्च स्तर पर (कक्षा 5 का ज्ञान कक्षा 6 में काम आना)।


7. अधिगम वक्र और पठार (Learning Curves and Plateau)

जब सीखने की गति को ग्राफ पेपर पर दर्शाया जाता है, तो अधिगम वक्र बनता है।

वक्र के प्रकार:

  1. सरल रेखीय वक्र: सीखने की गति एक समान (व्यावहारिक रूप से संभव नहीं)।

  2. उन्नतोदर (Convex/Decreasing Return): शुरू में गति तेज, बाद में धीमी। (सबसे सामान्य वक्र)।

  3. नतोदर (Concave/Increasing Return): शुरू में धीमी, बाद में अभ्यास से तेज।

  4. मिश्रित (S-Shaped): कभी तेज, कभी धीमी।

अधिगम पठार (Learning Plateau):

सीखने की प्रक्रिया में जब एक ऐसी स्थिति आती है जहाँ उन्नति बिल्कुल रुक जाती है (न कम, न ज्यादा), उसे पठार कहते हैं।

  • कारण: थकान, रुचि की कमी, गलत शिक्षण विधि, प्रेरणा का अभाव, विषय की जटिलता।

  • निराकरण: विश्राम देना, शिक्षण विधि बदलना, प्रेरित करना।


8. सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)

यह शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) की एक तकनीक है। इसका विकास डी. एलन (Dwight Allen) ने किया।

उद्देश्य: छात्र-अध्यापकों में शिक्षण कौशल विकसित करना।

भारतीय प्रतिमान (NCERT) के अनुसार चक्र और समय:

कुल समय: 36 मिनट

$$\begin{array}{|l|l|} \hline \textbf{चरण (Step)} & \textbf{समय (Time)} \\ \hline \text{1. पाठ योजना (Planning)} & \text{(घर पर - 0 मिनट)} \\ \hline \text{2. शिक्षण (Teaching)} & \text{6 मिनट} \\ \hline \text{3. प्रतिपुष्टि (Feedback)} & \text{6 मिनट} \\ \hline \text{4. पुनः योजना (Re-plan)} & \text{12 मिनट} \\ \hline \text{5. पुनः शिक्षण (Re-teach)} & \text{6 मिनट} \\ \hline \text{6. पुनः प्रतिपुष्टि (Re-feedback)} & \text{6 मिनट} \\ \hline \textbf{कुल समय (Total)} & \textbf{36 मिनट} \\ \hline \end{array}$$

9. अभिप्रेरणा (Motivation)

अभिप्रेरणा वह शक्ति है जो व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कार्य करने को प्रेरित करती है। स्किनर ने इसे "अधिगम का राजमार्ग" (Superhighway of Learning) कहा है।

प्रकार:

  1. आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic): स्व-इच्छा, रुचि, जिज्ञासा के कारण सीखना। यह सर्वोत्तम है।

  2. बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic): पुरस्कार, दण्ड, प्रशंसा, या पास होने के डर से सीखना।

मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम (Hierarchy of Needs):

अब्राहम मैस्लो ने बताया कि व्यक्ति पहले निचली आवश्यकताओं को पूरा करता है, तभी वह अधिगम या आत्म-सिद्धि की ओर बढ़ता है।

  1. शारीरिक आवश्यकताएं (भोजन, पानी, नींद) - सबसे पहले

  2. सुरक्षा (घर, नौकरी)

  3. प्रेम और अपनत्व (परिवार, मित्र)

  4. सम्मान (पद, प्रतिष्ठा)

  5. आत्म-सिद्धि (Self-actualization) - सर्वोच्च स्तर


10. कुछ महत्वपूर्ण सूत्र और तथ्य (Facts & Formulas)

बुद्धि लब्धि (IQ) का सूत्र:

टर्मन द्वारा संशोधित सूत्र:

$$\text{IQ} = \frac{\text{MA (मानसिक आयु)}}{\text{CA (वास्तविक आयु)}} \times 100$$

समीपस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD - Vygotsky):

वाइगोत्स्की के अनुसार, बच्चा जो स्वयं कर सकता है और जो वह किसी की मदद (Scaffolding) से कर सकता है, उसके बीच का अंतर ZPD है।

  • पाड़/ढांचा (Scaffolding): वयस्कों द्वारा दी जाने वाली अस्थायी मदद।

अधिगम अक्षमताएं (Learning Disabilities):

  • डिस्लेक्सिया: पढ़ने में कठिनाई।

  • डिस्ग्राफिया: लिखने में कठिनाई।

  • डिस्कैलकुलिया: गणितीय गणना में कठिनाई।



शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएँ और प्रमुख सिद्धांत

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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