1. आधारभूत ज्यामितीय अवधारणाएँ (Basic Geometric Concepts)
ज्यामिति की शुरुआत कुछ मौलिक तत्वों से होती है जिन्हें परिभाषित करना आवश्यक है।
बिंदु (Point):
यह एक ऐसी स्थिति है जिसकी कोई लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं होती।
यह केवल एक सटीक स्थान (Location) निर्धारित करता है।
इसे अंग्रेजी के बड़े अक्षरों (जैसे $A, B, P$) द्वारा दर्शाया जाता है।
रेखा (Line):
एक सीधा पथ जो दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तृत होता है।
इसकी कोई निश्चित लंबाई नहीं होती और न ही कोई अंत बिंदु (End point) होता है।
इसे $\overleftrightarrow{AB}$ से निरूपित किया जाता है।
संरेखीय बिंदु (Collinear Points): यदि तीन या अधिक बिंदु एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों, तो वे संरेखीय बिंदु कहलाते हैं।
रेखाखण्ड (Line Segment):
रेखा का वह भाग जिसके दो निश्चित अंत बिंदु होते हैं।
इसकी लंबाई मापी जा सकती है।
इसे $\overline{AB}$ से निरूपित किया जाता है।
दो बिंदुओं के बीच की न्यूनतम दूरी एक रेखाखण्ड ही होती है।
किरण (Ray):
रेखा का वह भाग जिसका एक अंत बिंदु निश्चित होता है और दूसरी दिशा में वह अनंत तक बढ़ती है।
उदाहरण: सूर्य की किरणें, टॉर्च की रोशनी।
इसे $\overrightarrow{AB}$ से निरूपित किया जाता है।
2. रेखाओं के प्रकार (Types of Lines)
विभिन्न रेखाओं के आपसी संबंधों के आधार पर उन्हें वर्गीकृत किया जाता है:
समान्तर रेखाएँ (Parallel Lines):
ऐसी दो या अधिक रेखाएँ जो एक ही समतल में हों और एक-दूसरे को कभी न काटें, चाहे उन्हें कितना भी आगे बढ़ाया जाए।
इनके बीच की लंबवत दूरी (Perpendicular distance) सदैव समान रहती है।
संकेत: $AB \parallel CD$
उदाहरण: रेल की पटरियाँ, मेज के आमने-सामने के किनारे।
प्रतिच्छेदी रेखाएँ (Intersecting Lines):
जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को किसी एक उभयनिष्ठ बिंदु पर काटती हैं।
जिस बिंदु पर वे काटती हैं, उसे प्रतिच्छेदन बिंदु कहते हैं।
अंग्रेजी वर्णमाला का अक्षर 'X' इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।
लंबवत रेखाएँ (Perpendicular Lines):
जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को $90^\circ$ (समकोण) पर काटती हैं।
संकेत: $AB \perp CD$
संगामी रेखाएँ (Concurrent Lines):
जब तीन या उससे अधिक रेखाएँ एक ही बिंदु से होकर गुजरती हैं, तो वे संगामी रेखाएँ कहलाती हैं।
उस उभयनिष्ठ बिंदु को संगमन बिंदु कहते हैं।
तिर्यक रेखा (Transversal Line) - [अति महत्वपूर्ण]:
वह रेखा जो दो या अधिक (प्रायः समान्तर) रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर काटती है।
जब एक तिर्यक रेखा दो समान्तर रेखाओं को काटती है, तो बनने वाले कोणों में विशेष संबंध होते हैं।
3. कोण और उनके प्रकार (Angles and Their Types)
जब दो किरणें एक ही उभयनिष्ठ अंत बिंदु (Vertex) से निकलती हैं, तो उनके बीच का झुकाव कोण कहलाता है। कोण को डिग्री ($^\circ$) में मापा जाता है।
परिमाण के आधार पर कोणों का वर्गीकरण:
न्यून कोण (Acute Angle): वह कोण जिसका माप $0^\circ$ से अधिक और $90^\circ$ से कम हो।
उदाहरण: $30^\circ, 45^\circ, 89^\circ$
समकोण (Right Angle): ठीक $90^\circ$ का कोण।
इसमें किरणें एक-दूसरे पर लंबवत होती हैं।
अधिक कोण (Obtuse Angle): वह कोण जिसका माप $90^\circ$ से अधिक और $180^\circ$ से कम हो।
उदाहरण: $91^\circ, 120^\circ, 179^\circ$
ऋजु कोण या सरल कोण (Straight Angle): ठीक $180^\circ$ का कोण।
यह एक सीधी रेखा बनाता है।
प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): वह कोण जो $180^\circ$ से अधिक और $360^\circ$ से कम हो।
उदाहरण: $270^\circ$
नोट: किसी कोण का प्रतिवर्ती कोण ज्ञात करने के लिए उसे $360^\circ$ में से घटाया जाता है।
सूत्र: $\text{Reflex } \angle A = 360^\circ - \angle A$
पूर्ण कोण (Complete Angle): ठीक $360^\circ$ का कोण। यह एक पूरा चक्कर लगाने पर बनता है।
4. कोणों के युग्म और संबंध (Pairs of Angles and Relations)
CTET में प्रश्न अक्सर एकल कोणों के बजाय कोणों के जोड़ों (Pairs) पर आधारित होते हैं।
1. पूरक कोण (Complementary Angles):
जब दो कोणों का योग $90^\circ$ हो।
एक कोण दूसरे का 'पूरक' कहलाता है।
सूत्र: यदि एक कोण $\theta$ है, तो उसका पूरक $(90^\circ - \theta)$ होगा।
उदाहरण: $30^\circ$ और $60^\circ$ एक-दूसरे के पूरक हैं।
2. संपूरक कोण (Supplementary Angles):
जब दो कोणों का योग $180^\circ$ हो।
सूत्र: यदि एक कोण $\theta$ है, तो उसका संपूरक $(180^\circ - \theta)$ होगा।
उदाहरण: $110^\circ$ का संपूरक $70^\circ$ होता है।
3. आसन्न कोण (Adjacent Angles):
दो कोण आसन्न कहलाते हैं यदि:
उनका एक ही शीर्ष (Vertex) हो।
उनकी एक उभयनिष्ठ भुजा (Common arm) हो।
उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत ओर हों।
4. रैखिक युग्म (Linear Pair):
ऐसे दो आसन्न कोण जिनका योग $180^\circ$ हो।
ये एक सीधी रेखा पर बनते हैं।
सूत्र: $\angle 1 + \angle 2 = 180^\circ$
5. शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles):
जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, तो आमने-सामने बने कोण बराबर होते हैं।
उदाहरण: कैंची की आकृति।
5. तिर्यक रेखा द्वारा निर्मित कोण (Angles by Transversal)
माना दो समान्तर रेखाओं ($m \parallel n$) को एक तिर्यक रेखा ($t$) काटती है। यहाँ कुल 8 कोण बनते हैं। इनके नियम परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
संगत कोण (Corresponding Angles):
तिर्यक रेखा के एक ही ओर और समान स्थिति में बने कोण।
ये आपस में बराबर होते हैं।
एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior Angles):
'Z' की आकृति बनाने वाले कोण।
ये आपस में बराबर होते हैं।
एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles):
ये भी आपस में बराबर होते हैं।
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण (Consecutive Interior Angles):
इन्हें 'सह-अंतः कोण' (Co-interior angles) भी कहते हैं।
इनका योग सदैव $180^\circ$ होता है।
$\angle A + \angle B = 180^\circ$
6. वक्र और बहुभुज (Curves and Polygons)
वक्र (Curve):
कागज पर पेंसिल उठाए बिना बनाई गई कोई भी आकृति वक्र कहलाती है।
खुला वक्र (Open Curve): जिसके सिरे मिलते नहीं हैं (जैसे 'U' का आकार)।
बंद वक्र (Closed Curve): जिसके सिरे आपस में मिल जाते हैं (जैसे 'O' या त्रिभुज)।
सरल वक्र: जो स्वयं को कहीं नहीं काटता।
बहुभुज (Polygon):
केवल रेखाखण्डों से बनी एक सरल बंद आकृति को बहुभुज कहते हैं।
उत्तल बहुभुज (Convex Polygon): जिसके सभी अंतः कोण $180^\circ$ से कम हों और सभी विकर्ण अंदर स्थित हों।
अवतल बहुभुज (Concave Polygon): कम से कम एक अंतः कोण $180^\circ$ से अधिक हो।
बहुभुज के महत्वपूर्ण सूत्र (Important Formulas):
यदि किसी बहुभुज में भुजाओं की संख्या $n$ हो:
सभी अंतः कोणों का योग: $(n - 2) \times 180^\circ$
प्रत्येक अंतः कोण (समबहुभुज के लिए): $\frac{(n - 2) \times 180^\circ}{n}$
सभी बाह्य कोणों का योग: सदैव $360^\circ$ होता है (चाहे भुजाएँ कितनी भी हों)।
प्रत्येक बाह्य कोण (समबहुभुज के लिए): $\frac{360^\circ}{n}$
विकर्णों की संख्या: $\frac{n(n - 3)}{2}$
7. त्रिभुज (Triangle)
तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनाई गई बंद आकृति त्रिभुज कहलाती है। इसमें 3 भुजाएँ, 3 शीर्ष और 3 कोण होते हैं।
त्रिभुज के गुण (Properties of Triangle):
कोण योग गुण: त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों का योग $180^\circ$ होता है।
$$\angle A + \angle B + \angle C = 180^\circ$$बाह्य कोण गुण: त्रिभुज की किसी एक भुजा को बढ़ाने पर बना बाह्य कोण, दो विपरीत (सम्मुख) अंतः कोणों के योग के बराबर होता है।
$$\text{Exterior } \angle ACD = \angle A + \angle B$$त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality) - [Most Important for CTET]:
त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग, तीसरी भुजा से सदैव बड़ा होना चाहिए।
- $$AB + BC > AC$$
त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का अंतर, तीसरी भुजा से सदैव छोटा होना चाहिए।
भुजाओं के आधार पर वर्गीकरण:
विषमबाहु त्रिभुज (Scalene): तीनों भुजाएँ असमान और तीनों कोण असमान।
समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles): कोई दो भुजाएँ समान। समान भुजाओं के सामने के कोण भी समान होते हैं।
समबाहु त्रिभुज (Equilateral): तीनों भुजाएँ समान और प्रत्येक कोण $60^\circ$ का होता है।
कोणों के आधार पर वर्गीकरण:
न्यूनकोण त्रिभुज: प्रत्येक कोण $90^\circ$ से कम।
समकोण त्रिभुज: कोई एक कोण $90^\circ$।
अधिककोण त्रिभुज: कोई एक कोण $90^\circ$ से अधिक।
8. पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem)
यह प्रमेय केवल समकोण त्रिभुज पर लागू होती है।
समकोण ($90^\circ$) के ठीक सामने वाली भुजा को कर्ण (Hypotenuse) कहते हैं, जो सबसे लंबी भुजा होती है।
सूत्र:
पाइथागोरियन त्रिक (Pythagorean Triplets):
ऐसी तीन संख्याएँ जो इस नियम को संतुष्ट करती हैं। CTET में समय बचाने के लिए इन्हें याद रखें:
$(3, 4, 5)$
$(5, 12, 13)$
$(6, 8, 10)$
$(8, 15, 17)$
$(7, 24, 25)$
परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण टिप्स (Exam Tips)
घड़ी के सवाल: घड़ी की सुइयों के बीच का कोण अक्सर पूछा जाता है। याद रखें, मिनट की सुई 1 मिनट में $6^\circ$ चलती है और घंटे की सुई 1 मिनट में $0.5^\circ$ चलती है।
शब्दजाल से बचें: प्रश्न में "कोण का पूरक" पूछा है या "संपूरक", इसे ध्यान से पढ़ें। अक्सर छात्र $90-x$ की जगह $180-x$ कर देते हैं।
चित्र बनाना: ज्यामिति के प्रश्नों को हल करते समय हमेशा एक कच्चा चित्र (Rough Sketch) बनाएँ, इससे उत्तर जल्दी और सही मिलता है।
विकर्णों की संख्या: बहुभुज वाले प्रश्नों में सीधे सूत्र $\frac{n(n-3)}{2}$ का प्रयोग करें।
रेखाएँ, कोण और त्रिभुज
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
