भाग 1: शब्द विचार (Word Etymology)
शब्दों का वर्गीकरण उनकी उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर चार मुख्य भागों में किया जाता है। CTET में अक्सर एक शब्द देकर उसका प्रकार पूछा जाता है।
1. तत्सम शब्द (Tatsam)
परिभाषा: संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना किसी परिवर्तन के ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं।
पहचान के नियम:
संयुक्त व्यंजनों (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) का प्रयोग अधिक होता है।
'ऋ' की मात्रा का प्रयोग होता है।
'र्' (रेफ) का प्रयोग (जैसे- कर्म, सूर्य) होता है।
'ष' का प्रयोग प्रायः तत्सम शब्दों में होता है।
प्रमुख तत्सम शब्द सूची:
अग्नि, अमूल्य, अज्ञान, अंधकार, आम्र
कर्पूर, क्षेत्र, गृह, घृत, दुग्ध
दधि, निद्रा, नृत्य, पत्र, मयूर
रात्रि, वानर, विवाह, हस्त, हास्य
ज्येष्ठ, कृष्ण, अर्द्ध, कार्य, उज्ज्वल
2. तद्भव शब्द (Tadbhav)
परिभाषा: वे शब्द जो संस्कृत से उत्पन्न हुए हैं लेकिन हिंदी में आते-आते उनका रूप बदल गया है। ये उच्चारण की सुविधा के अनुसार ढल गए हैं।
महत्वपूर्ण तत्सम - तद्भव युग्म (परीक्षा उपयोगी):
| तत्सम (संस्कृत) | तद्भव (हिंदी रूप) | तत्सम (संस्कृत) | तद्भव (हिंदी रूप) |
| अग्नि | आग | अद्य | आज |
| अमूल्य | अमोल | अंधकार | अँधेरा |
| आश्चर्य | अचरज | अक्षि | आँख |
| आम्र | आम | उलूक | उल्लू |
| उष्ट्र | ऊँट | उच्च | ऊँचा |
| कंकण | कंगन | कच्छप | कछुआ |
| कर्पूर | कपूर | काक | कौआ |
| क्षेत्र | खेत | गृह | घर |
| गर्दभ | गधा | ग्राम | गाँव |
| घृत | घी | घट | घड़ा |
| चंद्र | चाँद | चर्म | चमड़ा |
| चूर्ण | चूरन | जिह्वा | जीभ |
| ज्येष्ठ | जेठ | दधि | दही |
| दंत | दाँत | दीपशलाका | दियासलाई |
| दीपावली | दीवाली | दुग्ध | दूध |
| धैर्य | धीरज | नग्न | नंगा |
| नयन | नैन | निद्रा | नींद |
| पक्षी | पंछी | पत्र | पत्ता |
| पाद | पैर | प्रस्तर | पत्थर |
| पिपासा | प्यास | पुत्र | पूत |
| भिक्षा | भीख | भ्राता | भाई |
| मयूर | मोर | मक्षिका | मक्खी |
| मस्तक | माथा | मित्र | मीत |
| मुख | मुँह | रात्रि | रात |
| वधु | बहू | वानर | बन्दर |
| वार्ता | बात | विवाह | ब्याह |
| शर्करा | शक्कर | शैया | सेज |
| श्रावण | सावन | श्वसुर | ससुर |
| सर्प | साँप | सत्य | सच |
| सूत्र | सूत | सूर्य | सूरज |
| स्कन्ध | कंधा | स्तन | थन |
| स्वर्ण | सोना | हस्त | हाथ |
| हास्य | हँसी | क्षीर | खीर |
3. देशज शब्द (Deshaj)
परिभाषा: वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का पता नहीं चलता। ये स्थानीय बोलियों से आवश्यकतानुसार हिंदी में आ गए हैं।
उदाहरण:
लोटा, पगड़ी, थैला, गड़बड़, पेट
खटखटाना, झाड़ू, ठोकर, खिड़की, डिबिया
खिचड़ी, तेंदुआ, चिड़िया, जूता, कलाई
4. विदेशज शब्द (Videshaj)
परिभाषा: वे शब्द जो विदेशी भाषाओं (अरबी, फारसी, अंग्रेजी, तुर्की, पुर्तगाली) से हिंदी में आए हैं।
प्रमुख विदेशी शब्द:
अरबी: अमीर, औरत, कानून, किताब, कुर्सी, गरीब, तारीख, फकीर, रिश्वत, हिसाब, हलवाई, वकील।
फारसी: आदमी, आसमान, कमरा, चश्मा, चरखा, जलेबी, जहर, जिंदगी, दीवार, नमक, बीमार, मलाई, शेर, सरकार।
अंग्रेजी: अपील, कोर्ट, मजिस्ट्रेट, जज, पुलिस, टैक्स, कलेक्टर, पेंसिल, पेन, स्टेशन, स्कूल, डॉक्टर।
तुर्की: उर्दू, कैंची, चाकू, तोप, बारूद, बेगम, बहादुर, लाश, चम्मच।
पुर्तगाली: आलपिन, अलमारी, बाल्टी, चाबी, तौलिया, फीता, साबुन, तंबाकू, गमला।
फ्रांसीसी: कूपन, कारतूस, अंग्रेज, रेस्तरां।
भाग 2: शब्द-अर्थ संबंध (Vocabulary Relations)
गद्यांश में रेखांकित शब्द का पर्यायवाची या विलोम पूछना CTET का सबसे सामान्य प्रश्न है।
1. पर्यायवाची शब्द (Synonyms)
परीक्षा में रटे हुए अर्थ के बजाय संदर्भ (Context) के अनुसार अर्थ चुनना महत्वपूर्ण होता है।
अत्यंत महत्वपूर्ण पर्यायवाची सूची:
अग्नि: आग, अनल, पावक, दहन, हुताशन, कृशानु।
अमृत: सुधा, सोम, पीयूष, अमी, सुरभोग।
असुर: दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, तमचर।
आँख: नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृग, अक्षि।
आकाश: नभ, गगन, अम्बर, व्योम, अनन्त, शून्य।
इन्द्र: सुरपति, देवेन्द्र, शक्र, पुरन्दर, सुरेन्द्र।
ईश्वर: भगवान, परमेश्वर, जगदीश, विधाता, प्रभु।
कमल: जलज, पंकज, सरोज, राजीव, अरविन्द, इन्दीवर, उत्पल।
कपड़ा: वस्त्र, पट, चीर, वसन, अम्बर।
किरण: रश्मि, मयूख, मरीचि, अंशु, कर।
गणेश: गणपति, गजानन, लम्बोदर, एकदंत, विनायक।
गंगा: भागीरथी, मन्दाकिनी, सुरसरि, जान्हवी, त्रिपथगा।
घर: गृह, सदन, आवास, आलय, निकेतन, निलय।
घोड़ा: अश्व, हय, घोटक, बाजि, तुरंग।
चन्द्रमा: शशि, इन्दु, राकेश, मयंक, सुधाकर, निशाकर, विधु।
जल: पानी, नीर, तोय, वारि, अम्बु, सलिल।
जंगल: वन, कानन, विपिन, अरण्य।
तलवार: असि, खड्ग, कृपाण, चन्द्रहास।
तालाब: सर, सरोवर, तड़ाग, जलाशय, पुष्कर।
दिन: दिवस, वासर, वार, दिवा।
देवता: सुर, अमर, देव, निर्जर, विभुध।
नदी: सरिता, तटिनी, आपगा, निम्नगा, तरंगिणी।
पक्षी: खग, विहग, नभचर, पखेरू, द्विज, शकुन्त।
पर्वत: पहाड़, गिरि, शैल, अचल, नग, भूधर।
पत्नी: भार्या, दारा, अर्द्धांगिनी, वाम, वामा।
पुत्र: बेटा, सुत, तनय, आत्मज, नन्दन।
पृथ्वी: भू, भूमि, धरा, धरती, वसुन्धरा, वसुधा, अचला।
फूल: पुष्प, कुसुम, सुमन, प्रसून।
बादल: मेघ, घन, जलद, पयोद, वारिद, नीरद।
बिजली: चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, विद्युत।
भ्रमर: भौंरा, मधुप, मधुकर, अलि, भृंग।
मछली: मत्स्य, मीन, मकर, शफरी।
मनुष्य: नर, मानव, मानुष, इन्सान।
माता: माँ, जननी, अंबा, धात्री।
राजा: नृप, भूप, महीप, नरेश, भूपति।
रात्रि: रात, निशा, रजनी, यामिनी, विभावरी।
वायु: हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत।
वृक्ष: पेड़, तरु, विटप, द्रुम, पादप।
शत्रु: रिपु, अरि, बैरी, विपक्षी।
शरीर: देह, तन, काया, गात, वपु।
समुद्र: सागर, सिंधु, जलधि, पयोधि, रत्नाकर, वारिधि।
सरस्वती: वीणापाणि, शारदा, भारती, वागीश।
साँप: सर्प, अहि, भुजंग, विषधर, व्याल, नाग।
सूर्य: रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, भास्कर, आदित्य, मार्तण्ड।
सोना: स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, हिरण्य।
सिंह: शेर, वनराज, केसरी, मृगेन्द्र, शार्दूल।
हाथी: गज, हस्ती, कुंजर, मतंग, द्विरद।
2. विलोम शब्द (Antonyms)
विलोम शब्द हमेशा सजातीय होते हैं (तत्सम का विलोम तत्सम, तद्भव का तद्भव)।
महत्वपूर्ण विलोम सूची:
अथ $\times$ इति
अज्ञ $\times$ विज्ञ
अल्पायु $\times$ दीर्घायु
अनुराग $\times$ विराग
अनुकूल $\times$ प्रतिकूल
अमर $\times$ मर्त्य
अवर $\times$ प्रवर
अवनि $\times$ अम्बर
अग्रज $\times$ अनुज
अर्वाचीन $\times$ प्राचीन
आदान $\times$ प्रदान
आदि $\times$ अन्त
आय $\times$ व्यय
आविर्भाव $\times$ तिरोभाव
आद्र $\times$ शुष्क
आकर्षण $\times$ विकर्षण
इहलोक $\times$ परलोक
उपकार $\times$ अपकार
उत्कर्ष $\times$ अपकर्ष
उत्थान $\times$ पतन
उर्वर $\times$ ऊसर
ऋजु (सीधा) $\times$ वक्र (टेढ़ा)
एड़ी $\times$ चोटी
ऐच्छिक $\times$ अनिवार्य
कटु $\times$ मधुर
कनिष्ठ $\times$ ज्येष्ठ
कीर्ति $\times$ अपकीर्ति
गुप्त $\times$ प्रकट
गृहस्थ $\times$ संन्यासी
गौरव $\times$ लाघव
घृणा $\times$ प्रेम
चिरंतन $\times$ नश्वर
जंगम $\times$ स्थावर
जाग्रत $\times$ सुषुप्त
ज्योति $\times$ तम
तिमिर $\times$ प्रकाश
तीक्ष्ण $\times$ कुंद
तामसिक $\times$ सात्विक
दयालु $\times$ निर्दय
दुर्लभ $\times$ सुलभ
ध्वंस $\times$ निर्माण
नूतन $\times$ पुरातन
निंदा $\times$ स्तुति
निरक्षर $\times$ साक्षर
नैसर्गिक $\times$ कृत्रिम
परकीय $\times$ स्वकीय
प्रत्यक्ष $\times$ परोक्ष
बंधन $\times$ मुक्ति
मूक $\times$ वाचाल
यथार्थ $\times$ कल्पित
राग $\times$ द्वेष
लघु $\times$ गुरु
विस्तृत $\times$ संक्षिप्त
विपत्ति $\times$ सम्पत्ति
विशिष्ट $\times$ सामान्य
व्यष्टि $\times$ समष्टि
विधि $\times$ निषेध
शोषक $\times$ शोषित
संकीर्ण $\times$ विस्तीर्ण
सत्कार $\times$ तिरस्कार
सापेक्ष $\times$ निरपेक्ष
सुगम $\times$ दुर्गम
सृष्टि $\times$ प्रलय
स्तुति $\times$ निंदा
स्थावर $\times$ जंगम (अति महत्वपूर्ण)
ह्रस्व $\times$ दीर्घ
भाग 3: वाक्यांश के लिए एक शब्द (One Word Substitution)
जिसका कोई शत्रु न जन्मा हो - अजातशत्रु
जो कम बोलता हो - मितभाषी
जो अधिक बोलता हो - वाचाल
जो बहुत कुछ जानता हो - बहुज्ञ
जो सब कुछ जानता हो - सर्वज्ञ
जो कम जानता हो - अल्पज्ञ
जिसकी कोई उपमा न हो - अनुपम
जो पहले कभी न हुआ हो - अभूतपूर्व
जिसे जीता न जा सके - अजेय
जो दिखाई न दे - अदृश्य
जिसके समान कोई दूसरा न हो - अद्वितीय
जिसका कोई अंत न हो - अनन्त
जिसकी आशा न की गई हो - अप्रत्याशित
जो ईश्वर में विश्वास रखता हो - आस्तिक
जो ईश्वर में विश्वास न रखता हो - नास्तिक
जो उपकार को मानता हो - कृतज्ञ
जो उपकार को न मानता हो - कृतघ्न
जिसका पति मर गया हो - विधवा
जिसकी पत्नी मर गई हो - विधुर
जो मोक्ष चाहता हो - मुमुक्षु
जंगल में लगने वाली आग - दावानल
समुद्र में लगने वाली आग - बड़वानल
पेट में लगने वाली आग - जठराग्नि
जो कठिनाई से प्राप्त हो - दुर्लभ
जिसके आर-पार देखा जा सके - पारदर्शी
भाग 4: अलंकार (Figures of Speech)
CTET के पद्यांश (Poetry Passage) में अलंकार की पहचान करना एक निश्चित प्रश्न होता है। अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व हैं।
A. शब्दालंकार (शब्दों के कारण चमत्कार)
1. अनुप्रास अलंकार (Anupras)
पहचान: जहाँ एक ही वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति बार-बार हो।
उदाहरण:
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए। ('त' वर्ण की आवृत्ति)
रघुपति राघव राजा राम। ('र' वर्ण की आवृत्ति)
चारु चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल-थल में। ('च' वर्ण की आवृत्ति)
मुदित महीपति मंदिर आए, सेवक सचिव सुमंत बुलाए। ('म' और 'स' की आवृत्ति)
2. यमक अलंकार (Yamak)
पहचान: जहाँ एक ही शब्द एक से अधिक बार आए, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग हो।
उदाहरण:
कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। वा खाए बौराय जग, या पाए बौराय।
पहले 'कनक' का अर्थ = धतूरा (नशीला पदार्थ)
दूसरे 'कनक' का अर्थ = सोना (स्वर्ण)
काली घटा का घमंड घटा।
पहली 'घटा' = बादल
दूसरी 'घटा' = कम होना
तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं।
पहली 'बेर' = बार (समय/Time)
दूसरी 'बेर' = फल (Fruit)
3. श्लेष अलंकार (Shlesh)
पहचान: शब्द एक ही बार प्रयुक्त होता है, लेकिन उसके अर्थ एक से अधिक होते हैं। (शब्द 'चिपका' हुआ होता है)।
उदाहरण:
रहमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।
यहाँ 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं:
मोती के पक्ष में = चमक
मनुष्य के पक्ष में = इज्जत/प्रतिष्ठा
चून (आटे) के पक्ष में = जल
सुबरन को ढूँढ़त फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।
'सुबरन' के तीन अर्थ:
कवि के लिए = अच्छे शब्द
व्यभिचारी के लिए = गोरा रंग (सुंदर स्त्री)
चोर के लिए = सोना (स्वर्ण)
B. अर्थालंकार (अर्थ के कारण चमत्कार)
1. उपमा अलंकार (Upma)
पहचान: जहाँ दो वस्तुओं में तुलना की जाए। इसमें 'सा, सी, से, सम, सरिस, समान' जैसे योजक शब्द आते हैं।
उदाहरण:
पीपर पात सरिस मन डोला। (मन पीपल के पत्ते के समान डोलने लगा)
हाय फूल-सी कोमल बच्ची।
मुख मयंक सम मंजु मनोहर।
2. रूपक अलंकार (Rupak)
पहचान: जहाँ उपमेय और उपमान में कोई भेद न हो, उन्हें एक ही मान लिया जाए। इसमें प्रायः योजक चिह्न (-) का प्रयोग होता है और 'सा/सी' शब्द नहीं आते।
उदाहरण:
चरण-कमल बंदौ हरिराई। (चरण ही कमल हैं)
मैया मैं तो चन्द्र-खिलौना लैहों। (चाँद रूपी खिलौना)
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो।
3. उत्प्रेक्षा अलंकार (Utpreksha)
पहचान: जहाँ उपमेय में उपमान की कल्पना या संभावना की जाए। इसमें 'मानो, जानो, मनु, जनु, मनहुँ, जनहुँ, ज्यों' शब्दों का प्रयोग होता है।
उदाहरण:
सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमणि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात। (मानो नीलमणि पर्वत पर धूप पड़ रही हो)
सिर फट गया उसका वहीं, मानो अरुण रंग का घड़ा।
उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।
4. अतिशयोक्ति अलंकार (Atishyokti)
पहचान: जहाँ किसी बात का वर्णन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए (लोक सीमा से बाहर)।
उदाहरण:
हनुमान की पूँछ में, लगन न पायी आग। लंका सिगरी जल गयी, गए निसाचर भाग। (आग लगने से पहले ही लंका जलने की बात)
देख लो साकेत नगरी है यही, स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।
आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।
5. मानवीकरण अलंकार (Personification)
पहचान: जब जड़ वस्तुओं या प्रकृति पर मानवीय भावनाओं या क्रियाओं का आरोप किया जाए।
उदाहरण:
मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के। (बादलों का दामाद की तरह सजना)
फूल हँसे, कलियाँ मुस्काईं।
भाग 5: अनेकार्थी शब्द (Polysemy Words)
एक शब्द जिसके भिन्न-भिन्न संदर्भों में भिन्न अर्थ होते हैं। यह श्लेष अलंकार का आधार है और गद्यांश में अक्सर पूछा जाता है।
अंक: गोद, संख्या, नाटक का अध्याय, चिह्न।
अंबर: वस्त्र, आकाश, बादल।
अर्थ: धन, मतलब, कारण, लिए।
अली: भौंरा, सखी, कोयल।
कर: हाथ, किरण, टैक्स (Tax), सूँड।
काल: समय, मृत्यु, यमराज, अकाल।
कनक: सोना, धतूरा, गेहूँ।
कुल: वंश, सब, घर, गोत्र।
गुरु: शिक्षक, भारी, बड़ा, श्रेष्ठ, बृहस्पति।
घट: घड़ा, शरीर, हृदय, कम होना।
जीवन: जल, प्राण, वायु, पुत्र।
तीर: बाण, किनारा (नदी का)।
दंड: सजा, डंडा, एक प्रकार का व्यायाम।
दल: समूह, पत्ता, सेना, पक्ष।
नाग: साँप, हाथी, पर्वत, बादल।
पतंग: सूर्य, कीड़ा, पक्षी, उड़ने वाली पतंग।
पय: दूध, पानी, अन्न।
फल: परिणाम, लाभ, खाने वाला फल, संतान।
बलि: उपहार, बलिदान, राजा बलि।
मधु: शहद, शराब, वसंत ऋतु, मीठा।
मत: राय, नहीं, सम्प्रदाय, वोट।
मित्र: दोस्त, सूर्य, प्रिय।
विधि: कानून, तरीका, भाग्य, ब्रह्मा।
हरि: विष्णु, बंदर, इन्द्र, सर्प, मेंढक, सिंह (हरि शब्द के अनेक अर्थ हैं)।
सारंग: मोर, सर्प, बादल, हिरण, पपीहा, राजहंस, हाथी।
हल: समाधान, खेत जोतने का यंत्र।
निष्कर्ष और अभ्यास रणनीति
CTET में व्याकरण खंड से अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए:
शब्द-भंडार: ऊपर दी गई तालिकाओं को बार-बार पढ़ें।
अलंकार: कविता की पंक्तियों में 'कीवर्ड' ढूँढें (जैसे- 'सा/सी' उपमा के लिए, 'मानो/जनु' उत्प्रेक्षा के लिए)।
संदर्भ: गद्यांश में शब्द का अर्थ रटने के बजाय वाक्य के भाव के अनुसार चुनें।
शब्द भंडार और अलंकार
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