1. इतिहास: एक परिचय
इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव संस्कृति और सभ्यता के क्रमिक विकास की कहानी है।
इतिहास की परिभाषा: किसी समाज या राष्ट्र के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को इतिहास कहते हैं।
अध्ययन का उद्देश्य: इसके द्वारा हम जानते हैं कि अतीत में लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे, किस तरह के घरों में रहते थे और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कैसी थी।
संस्कृति बनाम सभ्यता:
संस्कृति: इसमें मानव के समस्त क्रियाकलाप (खान-पान, रहन-सहन, विचार, कला) शामिल हैं।
सभ्यता: यह मानव विकास के भौतिक पहलुओं (नगर निर्माण, तकनीक, भवन) पर केंद्रित है।
2. तिथियों का निर्धारण (काल-गणना)
इतिहास में घटनाओं के समय को समझने के लिए तिथियों का सही ज्ञान आवश्यक है। वर्तमान में ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रयोग वैश्विक स्तर पर होता है।
प्रमुख शब्दावली:
ईसा पूर्व (B.C. - Before Christ):
इसका अर्थ है ईसा मसीह के जन्म से पहले का समय।
इसमें वर्षों की गिनती उल्टी (पीछे की ओर) होती है।
उदाहरण: यदि महात्मा बुद्ध का जन्म 563 BC में हुआ, तो यह ईसा के जन्म से 563 वर्ष पहले की घटना है।
आधुनिक शब्दावली में इसे BCE (Before Common Era) भी कहा जाता है।
ईस्वी (A.D. - Anno Domini):
यह लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है "ईसा के जन्म के वर्ष से"।
इसमें वर्षों की गिनती सीधी (आगे की ओर) होती है।
उदाहरण: 2024 AD का अर्थ है ईसा के जन्म के 2024 वर्ष बाद।
आधुनिक शब्दावली में इसे CE (Common Era) कहा जाता है।
BP (Before Present): इसका अर्थ है "वर्तमान से पहले"।
3. भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of History)
इतिहासकारों को अतीत की जानकारी विभिन्न स्रोतों से मिलती है। इन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है: पुरातात्विक स्रोत, साहित्यिक स्रोत और विदेशी विवरण।
A. पुरातात्विक स्रोत (Archaeological Sources)
यह इतिहास जानने का सबसे विश्वसनीय माध्यम है क्योंकि इसमें बदलाव की संभावना कम होती है।
1. अभिलेख (Inscriptions):
पत्थर, चट्टानों, धातु की प्लेटों या कठोर सतहों पर उकेरे गए लेखों को अभिलेख कहते हैं।
महत्व: इनमें राजाओं के आदेश, उपलब्धियां और वंशावली मिलती है।
एपीग्राफी (Epigraphy): अभिलेखों के अध्ययन को 'पुरालेखशास्त्र' या एपीग्राफी कहते हैं।
प्रमुख तथ्य:
अशोक के अभिलेख भारत के सबसे प्राचीन पढ़े जाने वाले अभिलेख हैं।
जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) ने 1837 में सबसे पहले अशोक के अभिलेखों (ब्राह्मी लिपि) को पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
भारत के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी (बाएं से दाएं) और खरोष्ठी (दाएं से बाएं) लिपि में हैं।
2. सिक्के (Coins):
न्यूमिसमेटिक्स (Numismatics): सिक्कों के अध्ययन को 'मुद्राशास्त्र' कहते हैं।
प्राचीन सिक्के तांबा, चांदी, सोना और सीसे के बने होते थे।
आहत सिक्के (Punch Marked Coins): ये भारत के प्राचीनतम सिक्के हैं, जो मुख्यतः चांदी के होते थे और इन पर चित्र ठप्पा मारकर बनाए जाते थे।
स्वर्ण सिक्के: भारत में सर्वप्रथम लिखित स्वर्ण सिक्के चलाने का श्रेय हिन्द-यवन (Indo-Greek) शासकों को जाता है। सबसे शुद्ध सोने के सिक्के कुषाण शासकों ने चलाए।
समुद्रगुप्त को एक सिक्के पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है, जो उसके संगीत प्रेम को दर्शाता है।
3. स्मारक और भवन:
प्राचीन इमारतें, मंदिर, स्तूप और मठ तत्कालीन वास्तुकला और धार्मिक विश्वासों की जानकारी देते हैं।
उदाहरण: सांची का स्तूप, अजंता की गुफाएं।
4. अन्य अवशेष:
खुदाई में मिले बर्तन (मृदभांड), औजार, हथियार और आभूषण।
जानवरों, चिड़ियों और मछलियों की हड्डियाँ (यह जानने के लिए कि लोग क्या खाते थे)।
जले हुए अनाज के दाने या लकड़ी के टुकड़े।
B. साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)
हाथ से लिखी गई पुस्तकों को पांडुलिपि (Manuscript) कहा जाता है।
यह लैटिन शब्द 'Manu' (हाथ) से बना है।
ये प्रायः ताड़पत्रों (Palm leaf) या हिमालय में उगने वाले भूर्ज (Birch) नामक पेड़ की छाल पर लिखी जाती थीं।
कीड़ों द्वारा खा लिए जाने के कारण बहुत सी पांडुलिपियाँ नष्ट हो गईं, फिर भी कई मंदिरों और विहारों में सुरक्षित हैं।
साहित्य को दो भागों में बांटा जाता है:
1. धार्मिक साहित्य:
वेद: ऋग्वेद (सबसे प्राचीन), सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
महाकाव्य: रामायण (वाल्मीकि) और महाभारत (वेद व्यास)।
पुराण: इनकी संख्या 18 है, जो गुप्त काल के आसपास संकलित माने जाते हैं।
बौद्ध ग्रंथ: त्रिपिटक (सुत्त, विनय, अभिधम्म), जातक कथाएं, दीपवंश, महावंश।
जैन ग्रंथ: आगम साहित्य।
2. धर्मेतर (Laukik) साहित्य:
अर्थशास्त्र: कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित (मौर्यकालीन प्रशासन की जानकारी)।
अष्टाध्यायी: पाणिनि (संस्कृत व्याकरण का प्रथम ग्रंथ)।
मुद्राराक्षस: विशाखदत्त (मौर्य काल की जासूसी कथा)।
हर्षचरित: बाणभट्ट (राजा हर्षवर्धन की जीवनी)।
राजतरंगिणी: कल्हण (कश्मीर का इतिहास)।
अभिज्ञान शाकुन्तलम: कालिदास।
संगम साहित्य: दक्षिण भारत (तमिल) का प्राचीनतम साहित्य।
C. विदेशी यात्रियों के विवरण
प्राचीन काल में कई विदेशी यात्री भारत आए, जिनके यात्रा वृत्तांत इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
मेगस्थनीज: यूनानी राजदूत, चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया। पुस्तक: इंडिका।
फाह्यान (Fa-Hien): चीनी यात्री, चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के समय आया।
ह्वेनसांग (Xuan Zang): चीनी यात्री, हर्षवर्धन के समय आया। इसे 'यात्रियों का राजकुमार' कहा जाता है। पुस्तक: सी-यू-की।
अलबरूनी: महमूद गजनवी के साथ भारत आया। पुस्तक: तहकीक-ए-हिंद (किताब-उल-हिंद)।
4. भौगोलिक ढांचा: लोग कहाँ रहते थे? (Where did people live?)
NCERT के अनुसार, भारत में मानव बसाव के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित थे:
1. नर्मदा घाटी (Narmada Valley):
यहाँ कई लाख वर्ष पहले लोग रहते थे।
ये लोग कुशल संग्राहक (Gatherers) थे, जो भोजन के लिए जड़ों, फलों और जंगल के उत्पादों पर निर्भर थे।
ये जानवरों का आखेट (शिकार) भी करते थे।
2. सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (उत्तर-पश्चिम):
यह आधुनिक पाकिस्तान क्षेत्र में है।
लगभग 8000 वर्ष पूर्व यहाँ स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलों को उपजाना शुरू किया।
इन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया और गांवों में रहते थे।
3. गारो (उत्तर-पूर्व) तथा मध्य भारत की विंध्य पहाड़ियाँ:
यह वे क्षेत्र थे जहाँ कृषि का विकास हुआ।
विंध्य के उत्तर में सबसे पहले चावल (Rice) उपजाया गया।
4. सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ:
लगभग 4700 वर्ष पूर्व इन्हीं नदियों के किनारे कुछ आरंभिक नगर (हड़प्पा सभ्यता) फले-फूले।
5. गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (जैसे सोन):
गंगा के दक्षिण में नदियों के आसपास का क्षेत्र प्राचीन काल में मगध के नाम से जाना जाता था।
लगभग 2500 वर्ष पूर्व यहाँ नगरों का विकास हुआ।
मगध के शासक बहुत शक्तिशाली थे और उन्होंने एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
5. देश का नाम (India and Bharat)
इंडिया (India): यह शब्द 'इंडस' (Indus) से निकला है, जिसे संस्कृत में 'सिंधु' कहा जाता है। लगभग 2500 वर्ष पूर्व उत्तर-पश्चिम से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को 'हिंडोस' या 'इंडोस' कहा और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि को 'इंडिया' कहा।
भारत (Bharat): इस नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था। इस समूह का उल्लेख ऋग्वेद (लगभग 3500 वर्ष पुरानी कृति) में मिलता है। बाद में इसका प्रयोग देश के लिए होने लगा।
6. औपनिवेशिक भारत और इतिहास के स्रोत
आधुनिक काल (अंग्रेजों के समय) के इतिहास को जानने के स्रोत प्राचीन काल से भिन्न हैं।
1. आधिकारिक रिकॉर्ड (Official Records):
अंग्रेजों का मानना था कि चीजों को लिखना बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने हर निर्देश, योजना, नीतिगत फैसले, सहमति और जांच को साफ-साफ लिखा।
अंग्रेजों ने सभी अहम दस्तावेजों और पत्रों को संभालकर रखने के लिए अभिलेखागार (Archives) और संग्रहालय (Museums) जैसे संस्थान बनाए।
सीमा: ये रिकॉर्ड हमें वही बताते हैं जो सरकारी अफसर सोचते थे या जो वे जनता को दिखाना चाहते थे। इससे हमें आम लोगों के जीवन की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
2. सर्वेक्षण (Surveys) का महत्त्व:
अंग्रेजों का मानना था कि किसी देश पर अच्छी तरह शासन चलाने के लिए उसको सही ढंग से जानना जरूरी है।
19वीं सदी की शुरुआत तक पूरे देश का नक्शा तैयार करने के लिए बड़े-बड़े सर्वेक्षण किए गए।
राजस्व सर्वेक्षण, वनस्पति सर्वेक्षण, प्राणी वैज्ञानिक सर्वेक्षण, पुरातात्विक सर्वेक्षण आदि किए गए।
3. अन्य स्रोत:
लोगों की डायरियां, तीर्थयात्रियों और यात्रियों के संस्मरण।
महत्वपूर्ण लोगों की आत्मकथाएं।
स्थानीय बाजारों में बिकने वाली लोकप्रिय पुस्तक-पुस्तिकाएं।
समाचार पत्र (ये जनमत को समझने में मदद करते थे)।
7. इतिहास का काल-विभाजन (Periodisation)
इतिहास को विभिन्न कालखंडों में बांटने के अलग-अलग प्रयास हुए हैं।
जेम्स मिल का विभाजन (1817):
स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री और राजनीतिक दार्शनिक जेम्स मिल ने अपनी किताब 'A History of British India' में भारतीय इतिहास को तीन कालखंडों में बांटा:
हिन्दू
मुस्लिम
ब्रिटिश
आलोचना: यह विभाजन धर्म के आधार पर था, जो गलत था। प्राचीन काल में सभी शासक एक ही धर्म के नहीं थे और न ही मध्यकाल में केवल मुस्लिम शासक थे। साथ ही, समाज में अन्य धर्मों और परंपराओं का भी महत्व था।
आधुनिक विभाजन:
इतिहासकार अब भारतीय इतिहास को तीन भागों में बांटते हैं:
प्राचीन (Ancient)
मध्यकालीन (Medieval)
आधुनिक (Modern)
समस्या: यह विभाजन पश्चिम (West) से लिया गया है। पश्चिम में 'आधुनिक काल' को विज्ञान, तर्क, लोकतंत्र, मुक्ति और समानता जैसी ताकतों के विकास का युग माना जाता है। लेकिन भारत में ब्रिटिश शासन के तहत लोगों के पास समानता, स्वतंत्रता या मुक्ति नहीं थी। इसलिए कई इतिहासकार इसे 'औपनिवेशिक' (Colonial) युग कहते हैं।
महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Exam Special):
एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल: इसकी स्थापना 1784 में सर विलियम जोन्स ने की थी। इन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुलेखनवीस (Calligraphists): 19वीं सदी की शुरुआत में जब प्रिंटिंग प्रेस का प्रचलन कम था, तब महत्वपूर्ण दस्तावेजों की नकल 'खुशनवीसी' (सुलेखनवीस) द्वारा बहुत सुंदरता से लिखी जाती थी।
इतिहासकार vs पुरातत्वविद:
इतिहासकार: जो अतीत का अध्ययन करते हैं और स्रोतों (लिखित) का उपयोग जासूस की तरह करते हैं।
पुरातत्वविद: जो ईंट, पत्थर, औजार, हड्डियों आदि भौतिक अवशेषों के माध्यम से अतीत की छानबीन करते हैं।
इतिहास के स्रोत और काल-निर्धारण
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