बच्चा - एक समस्या समाधक और वैज्ञानिक अन्वेषक

Sunil Sagare
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1. प्रस्तावना

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) में यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक मनोविज्ञान बच्चों को 'कोरी स्लेट' नहीं मानता, बल्कि उन्हें सक्रिय निर्माता मानता है।

  • जीन पियाजे (Jean Piaget) का प्रसिद्ध कथन है: "बच्चे नन्हे वैज्ञानिक (Little Scientists) हैं जो दुनिया के बारे में अपनी समझ का सृजन सक्रिय रूप से करते हैं।"

  • बच्चे अपने पर्यावरण के साथ अन्तःक्रिया करके सीखते हैं।

  • सीखना एक यांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक समस्या-समाधान (Problem Solving) प्रक्रिया है।


2. समस्या समाधान: अर्थ और परिभाषा

समस्या समाधान एक मानसिक प्रक्रिया है जो किसी बाधा को दूर करने और लक्ष्य तक पहुँचने के लिए की जाती है। यह एक लक्ष्य-निर्देशित (Goal-Directed) व्यवहार है।

मुख्य विशेषताएं:

  • संज्ञानात्मक प्रक्रिया: यह मन में घटित होती है, केवल बाहरी व्यवहार नहीं है।

  • निर्देशित चिंतन: यह एक विशेष दिशा में सोचा गया विचार है।

  • चयनात्मकता: इसमें व्यक्ति कई विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करता है।

  • स्टैनले ग्रे (Stanley Gray) के अनुसार: "समस्या समाधान वह प्रतिमान है, जिसमें तार्किक चिंतन निहित होता है।"

समस्या समाधान के तीन प्रमुख तत्व:

  1. समस्या (Problem): वर्तमान स्थिति और वांछित स्थिति के बीच का अंतर।

  2. लक्ष्य (Goal): वह अवस्था जिसे प्राप्त करना है।

  3. बाधाएं (Obstacles): लक्ष्य तक पहुँचने के मार्ग में आने वाली कठिनाइयां।


3. समस्या समाधान की वैज्ञानिक विधि (Scientific Method)

स्किनर (Skinner) और अन्य मनोवैज्ञानिकों ने समस्या समाधान के लिए एक व्यवस्थित वैज्ञानिक विधि सुझाई है। एक 'वैज्ञानिक अन्वेषक' के रूप में बच्चा अनजाने में इन्हीं चरणों का पालन करता है।

चरण 1: समस्या की पहचान/जागरूकता (Problem Identification)

  • सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि समस्या क्या है।

  • बालक को समस्या का आभास होना चाहिए।

  • उदाहरण: खिलौना क्यों नहीं चल रहा है?

चरण 2: समस्या को समझना और परिभाषित करना (Defining the Problem)

  • समस्या के विशिष्ट स्वरूप को समझना।

  • यह तय करना कि किन क्षेत्रों में काम करने की आवश्यकता है।

चरण 3: जानकारी संग्रह (Data/Information Collection)

  • समस्या से संबंधित प्रासंगिक जानकारी एकत्र करना।

  • बच्चा अपने पुराने अनुभवों को याद करता है या बड़ों से पूछता है।

चरण 4: संभावित समाधानों/परिकल्पना का निर्माण (Formulation of Hypothesis)

  • यह सबसे रचनात्मक चरण है।

  • बच्चा अनुमान लगाता है - "शायद बैटरी खत्म हो गई है" या "शायद तार टूट गया है"।

  • इसे 'सम्भावित समाधान' कहा जाता है।

चरण 5: संभावित समाधानों का मूल्यांकन (Evaluation of Solutions)

  • तर्क का उपयोग करके यह देखना कि कौन सा समाधान सबसे उपयुक्त होगा।

  • असफल उपायों को छांटना।

चरण 6: समाधान का प्रयोग/परीक्षण (Implementation & Testing)

  • चुने गए उपाय को लागू करना।

  • उदाहरण: नई बैटरी डालकर देखना।

चरण 7: निष्कर्ष और सत्यापन (Conclusion & Verification)

  • यदि समस्या हल हो गई, तो निष्कर्ष सही था।

  • यदि नहीं, तो पुनः चरण 4 पर जाकर नई परिकल्पना बनाना।


4. समस्या समाधान की प्रमुख विधियां (Methods of Problem Solving)

CTET परीक्षा में इन विधियों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

A. कलन विधि (Algorithm)

  • यह एक चरण-दर-चरण (Step-by-Step) प्रक्रिया है।

  • यदि आप हर चरण का सही पालन करते हैं, तो समाधान की 100% गारंटी होती है।

  • इसमें नियमों का एक निश्चित सेट होता है।

  • उदाहरण: गणित के सवाल हल करना, मोबाइल नंबर डायल करना, कुकिंग रेसिपी।

  • हानि: यह विधि समय लेने वाली हो सकती है और हर समस्या (जैसे सामाजिक समस्या) के लिए उपयुक्त नहीं है।

B. स्वानुभविक / अन्वेषण विधि (Heuristics)

  • इसे 'अंगूठे का नियम' (Rule of Thumb) भी कहते हैं।

  • यह मानसिक शॉर्टकट (Shortcuts) पर आधारित है।

  • इसमें समाधान की गारंटी नहीं होती, लेकिन यह त्वरित निर्णय लेने में मदद करता है।

  • उदाहरण: "जिस दुकान पर भीड़ ज्यादा है, वहां मिठाई अच्छी मिलती होगी" - यह एक Heuristic है।

  • परीक्षा में प्रश्न आता है: "सीमित समय में समस्या समाधान के लिए कौन सी विधि उपयुक्त है?" उत्तर: Heuristics.

C. साधन-साध्य विश्लेषण (Means-End Analysis)

  • इसमें बड़ी समस्या को छोटे-छोटे उप-लक्ष्यों (Sub-goals) में तोड़ा जाता है।

  • व्यक्ति वर्तमान स्थिति और लक्ष्य के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करता है।

  • उदाहरण: यदि आपको डॉक्टर बनना है (लक्ष्य), तो आप इसे छोटे लक्ष्यों में तोड़ेंगे - प्रवेश परीक्षा पास करना -> कॉलेज -> इंटर्नशिप।

D. प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error)

  • थार्नडाइक (Thorndike) द्वारा प्रतिपादित।

  • बच्चा बार-बार प्रयास करता है, गलतियां करता है और अंततः सही तरीका सीख जाता है।

  • यह छोटे बच्चों और नई समस्याओं के लिए उपयोगी है।

E. अंतर्दृष्टि विधि (Insight Method)

  • कोहलर (Kohler) और गेस्टाल्टवादियों द्वारा प्रतिपादित।

  • इसमें समाधान अचानक दिमाग में आता है (Aha! moment)।

  • यह समस्या को समग्र रूप (as a whole) में देखने पर आधारित है।

F. पश्चगामी कार्यकारी युक्ति (Working Backward)

  • लक्ष्य से शुरू करके वापस प्रारंभिक बिंदु तक आना।

  • उदाहरण: भूलभुलैया (Maze) को हल करते समय अक्सर हम अंतिम बिंदु से शुरुआत (Start) की ओर चलते हैं।


5. समस्या समाधान में बाधाएं (Obstacles in Problem Solving)

अक्सर हमारे सोचने का तरीका समस्या समाधान में रुकावट बनता है।

1. मानसिक विन्यास (Mental Set)

  • किसी समस्या को उसी तरीके से हल करने की प्रवृत्ति जिसका उपयोग पहले सफल रहा है।

  • यह लचीलेपन (Flexibility) को कम करता है।

  • उदाहरण: यदि आपने पिछले 5 सवाल 'जोड़' (+) करके हल किए हैं, तो छठे सवाल में भी आप बिना सोचे 'जोड़' करने की कोशिश करेंगे, भले ही वहां 'घटाना' हो।

2. कार्यात्मक स्थिरता (Functional Fixedness)

  • किसी वस्तु के केवल उसके पारंपरिक उपयोग के बारे में ही सोचना।

  • वस्तु के नए या सृजनात्मक उपयोग को न देख पाना।

  • उदाहरण: यदि आपके पास हथौड़ा नहीं है, तो आप ईंट या भारी पत्थर का उपयोग कील ठोकने के लिए कर सकते हैं। लेकिन यदि आप 'कार्यात्मक स्थिरता' से ग्रस्त हैं, तो आप सोचेंगे कि "हथौड़ा नहीं है तो काम नहीं होगा।"

3. अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking)

  • केवल एक ही सही उत्तर पर ध्यान केंद्रित करना। यह सृजनात्मक समस्या समाधान में बाधा है।

  • समस्या समाधान के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) बेहतर होता है क्योंकि इसमें बहु-दिशात्मक सोच शामिल होती है।


6. बच्चा: एक वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में

जब बच्चा अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से समस्या के हर पहलू को जानने लगता है और स्वयं समाधान खोजता है, तो वह एक वैज्ञानिक अन्वेषक कहलाता है।

वैज्ञानिक अन्वेषक के गुण:

  • जिज्ञासा (Curiosity): "यह क्यों हुआ?", "यह कैसे काम करता है?" जैसे प्रश्न पूछना।

  • अवलोकन शक्ति: चीजों को बारीकी से देखना। इरफान खिलौनों को तोड़कर देखता है कि वे कैसे बने हैं - यह वैज्ञानिक स्वभाव है।

  • पूर्वाग्रह से मुक्ति: अंधविश्वास के बजाय तर्क पर भरोसा करना।

  • धैर्य और दृढ़ता: एक बार में उत्तर न मिलने पर बार-बार प्रयास करना।

  • सृजनात्मकता: पुराने डिब्बों या बेकार सामग्री से नई चीजें बनाना।

बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लाभ:

  1. वे रटने (Rote Learning) के बजाय अवधारणाओं को समझते हैं।

  2. उनमें आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) का विकास होता है।

  3. वे आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बनते हैं।

  4. वे समाज और पर्यावरण के मुद्दों को तार्किक रूप से समझ पाते हैं।


7. शिक्षक और अभिभावकों की भूमिका

NCF 2005 के अनुसार, शिक्षक की भूमिका एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) की होनी चाहिए।

1. समस्या प्रस्तुत करना (Problem Posing)

  • बच्चों के सामने ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं रखें जो उनकी उम्र के अनुकूल हों।

  • उन्हें सीधे उत्तर न दें, बल्कि उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करें।

2. 'स्कैफोल्डिंग' प्रदान करना (Scaffolding)

  • लेव वाइगोत्स्की के अनुसार, जब बच्चा किसी समस्या में अटक जाए, तो उसे अस्थायी सहयोग (Temporary Support) देना चाहिए।

  • इशारे देना, प्रश्न पूछना या आधा काम करके दिखाना।

3. गलतियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण

  • गलतियां सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

  • बच्चे की गलतियों पर डांटने के बजाय चर्चा करें कि "यह तरीका क्यों काम नहीं किया?"।

  • बच्चे को अपनी गलतियों को खुद सुधारने (Self-Correction) का मौका दें।

4. विचार मंथन (Brainstorming)

  • समूह में बच्चों को बिठाकर किसी विषय पर अधिक से अधिक विचार उत्पन्न करने को कहें।

  • ओसबोर्न (Osborn) द्वारा दी गई यह तकनीक सृजनात्मकता और समस्या समाधान दोनों बढ़ाती है।

5. रटने को हतोत्साहित करना

  • कलन विधि (Algorithm) और सूत्रों को रटने के बजाय 'क्यों और कैसे' पर जोर दें।

  • पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के अलावा व्यावहारिक जीवन की समस्याएं दें।


8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Key Points for Revision)

  • लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार: समस्या समाधान की पहचान है।

  • स्मृति सहायक विधियां (Mnemonics): याद रखने की तकनीकें हैं, समस्या समाधान की नहीं।

  • सृजनात्मकता और समस्या समाधान: दोनों में गहरा संबंध है। अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) समस्या समाधान का प्रमुख गुण है।

  • भाषा का महत्व: वाइगोत्स्की के अनुसार, बच्चे समस्या समाधान के दौरान खुद से बात करते हैं (निजी वाक - Private Speech), जो उनके विचारों को निर्देशित करता है।

  • एनसीएफ 2005 (NCF 2005): विज्ञान शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में 'वैज्ञानिक साक्षरता' और 'नैतिक मूल्यों' का विकास करना है।


निष्कर्ष

एक बच्चे को केवल निष्क्रिय श्रोता (Passive Listener) बनाना शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। हमें उन्हें सक्रिय अन्वेषक (Active Explorer) बनाना है जो अपनी दुनिया का निर्माण स्वयं कर सकें। जब हम बच्चे के "क्यों?" का जवाब देने के बजाय उसे "आओ पता करें" कहते हैं, तभी हम उसमें एक वैज्ञानिक को जन्म देते हैं।



बच्चा - एक समस्या समाधक और वैज्ञानिक अन्वेषक

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