पौधे और जन्तु (Plants and Animals)

Sunil Sagare
0

 


1. पादप जगत (Flora)

सजीवों को मुख्य रूप से पादप जगत और जन्तु जगत में विभाजित किया गया है। पौधे हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र का आधार हैं।

1.1 पौधे के भाग एवं उनके कार्य

एक पौधे के मुख्य भाग और उनके विशिष्ट कार्य निम्नलिखित हैं:

  • जड़ (Root):

    • पौधे का वह भाग जो प्रायः भूमि के अन्दर रहता है।

    • कार्य: पौधे को मिट्टी में स्थिर रखना, जल तथा खनिज लवणों का अवशोषण करना और भोजन संचित करना।

    • प्रकार:

      1. मूसला जड़ (Tap Root): इसमें एक मुख्य जड़ होती है। उदाहरण: मटर, चना, मूली, गाजर, सरसों, आम।

      2. झकड़ा जड़ (Fibrous Root): इसमें मुख्य जड़ नहीं होती, सभी जड़ें एक गुच्छे के रूप में होती हैं। उदाहरण: गेहूँ, घास, गन्ना, मक्का, प्याज।

    • खाद्य जड़ें: मूली, गाजर, शकरकन्द, शलजम और टैपिओका (कसावा) जड़ के उदाहरण हैं जिन्हें हम खाते हैं।

  • तना (Stem):

    • यह भाग पौधे को सहारा देता है और जल व खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाता है।

    • रूपांतरित तने (जिन्हें हम खाते हैं): आलू, अदरक, हल्दी, प्याज, लहसुन, जिमीकंद।

  • पत्ती (Leaf):

    • इन्हें 'पौधे की रसोई' कहा जाता है। पत्तियों में हरे रंग का वर्णक 'क्लोरोफिल' पाया जाता है।

    • वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों द्वारा अनावश्यक जल को वाष्प के रूप में बाहर निकालने की प्रक्रिया।

    • प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis): पौधे सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) की उपस्थिति में अपना भोजन बनाते हैं।

      • रासायनिक समीकरण:

        $$6\text{CO}_2 + 12\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{Sunlight/Chlorophyll}} \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{H}_2\text{O} + 6\text{O}_2$$
    • इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) गैस मुक्त होती है। यह क्रिया लाल रंग के प्रकाश में सर्वाधिक और हरे रंग के प्रकाश में सबसे कम होती है। कैक्टस (नागफनी) में प्रकाश संश्लेषण उसके हरे तने में होता है।

      • वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों से अनावश्यक जल का वाष्प के रूप में बाहर निकलना। यह प्रक्रिया पौधे के तापमान को नियंत्रित करती है।

      • नागफनी (Cactus) में प्रकाश-संश्लेषण उसके हरे तने में होता है क्योंकि पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं।

  • फूल (Flower):

    • यह पौधे का प्रजनन अंग है।

    • परागकण: फूल के परागकोष में पाउडर जैसी संरचना होती है।

    • परागण: परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया। यह हवा, पानी, पक्षियों और कीड़ों द्वारा होती है।

    • खाए जाने वाले फूल: केला, सहजन, कद्दू, तोरई, कचनार।

    • उपयोग: इत्र बनाने में (गुलाब, चमेली), दवा में (लौंग, गुड़हल)। लौंग एक सूखी हुई पुष्प कली है।

1.2 पौधों का वर्गीकरण (आकार के आधार पर)

  • शाक (Herbs): बहुत छोटे पौधे, तना कोमल और हरा। उदाहरण: धनिया, मेथी, पालक, टमाटर।

  • झाड़ी (Shrubs): मध्यम आकार, तना कठोर लेकिन ज्यादा मोटा नहीं, शाखाएं आधार से निकलती हैं। उदाहरण: गुलाब, गुड़हल, नींबू, मेहंदी।

  • वृक्ष (Tree): विशाल आकार, तना मोटा, कठोर और भूरा। उदाहरण: आम, नीम, पीपल, बरगद।

  • लताएँ (Creepers & Climbers):

    • विसर्पी लता: जमीन पर फैलने वाले। उदाहरण: खीरा, तरबूज, खरबूजा, पुदीना।

    • आरोही लता: किसी सहारे से ऊपर चढ़ने वाले। उदाहरण: मनीप्लांट, मटर, अंगूर।

1.3 क्षेत्र के आधार पर पौधे

  • जलोद्भिद् (Hydrophytes): पानी में उगने वाले (कमल, हाइड्रिला)।

  • मरुद्भिद् (Xerophytes): मरुस्थल/कम पानी में उगने वाले। जड़ें गहरी, पत्तियाँ काँटों में रूपांतरित, तना गूदेदार। (नागफनी, एलोवेरा, बबूल)।

  • लवणोद्भिद् (Halophytes): दलदली और खारे पानी में। (सुंदरी वन, मैंग्रोव)। इनकी जड़ें सांस लेने के लिए जमीन से बाहर आती हैं (न्यूमेटोफोर)।


2. कुछ विशेष पौधे/वृक्ष (CTET Most Important)

NCERT पुस्तकों में वर्णित निम्नलिखित पौधों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं:

क. रेगिस्तानी ओक (Desert Oak)

  • स्थान: यह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाया जाता है।

  • जड़ें: इसकी जड़ें वृक्ष की ऊँचाई की लगभग $30$ गुनी गहराई तक जमीन के नीचे जाती हैं, जब तक कि वे जल स्तर तक न पहुँच जाएँ।

  • तने में पानी: इस वृक्ष के तने में पानी जमा रहता है। जब स्थानीय लोगों को पानी की कमी होती है, तो वे तने में पतला पाइप डालकर पानी पीते हैं।

  • पत्तियाँ: इसमें पत्तियाँ बहुत कम होती हैं।

ख. घटपर्णी / निपेंथिस (Pitcher Plant)

  • प्रकृति: यह एक कीटभक्षी (Insectivorous) पौधा है।

  • स्थान: यह भारत में मेघालय, तथा विदेशों में ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पाया जाता है।

  • संरचना: इसका आकार घड़े जैसा होता है जिसके ऊपर पत्ती का ढक्कन लगा होता है।

  • शिकार: यह पौधा एक विशेष खुशबू छोड़ता है जिससे आकर्षित होकर कीड़े, मकोड़े, मेंढक और चूहे इसमें फंस जाते हैं।

  • कारण: यह उन स्थानों पर उगता है जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन ($\text{N}$) की कमी होती है। नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए यह कीटों का भक्षण करता है।

ग. खेजड़ी (Khejri Tree)

  • स्थान: यह भारत के रेगिस्तानी क्षेत्रों (मुख्यतः राजस्थान) में पाया जाता है।

  • विशेषता: इसे ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसकी लकड़ी को कीड़ा नहीं लगता।

  • उपयोग: इसकी फलियों की सब्जी बनती है और छाल से दवा बनाई जाती है।

  • ऐतिहासिक महत्व: राजस्थान का 'अमृता देवी बिश्नोई' आंदोलन इसी वृक्ष को बचाने के लिए हुआ था। जोधपुर के खेजड़ली गाँव का नाम इसी पेड़ पर पड़ा है।

घ. बरगद (Banyan Tree)

  • स्तम्भ जड़ें: बरगद की शाखाओं से जो जड़ें नीचे लटकती हैं, उन्हें स्तम्भ जड़ (Prop Roots) कहते हैं। ये पेड़ को खंभों की तरह सहारा देती हैं।

  • इसकी मुख्य जड़ें जमीन के अंदर भी होती हैं।

ङ. क्रोटन (Croton)

  • यह पौधा फसल के साथ बोया जाता है।

  • इसकी जड़ें जमीन में ज्यादा गहरी नहीं जातीं। जब यह पौधा मुरझाने लगता है, तो किसान को पता चल जाता है कि फसल को सिंचाई (पानी) की आवश्यकता है। इसे 'सिग्नल प्लांट' भी कह सकते हैं।


3. जन्तु जगत (Fauna)

जंतुओं का वर्गीकरण उनकी शारीरिक रचना, भोजन और प्रजनन के आधार पर किया जाता है।

3.1 प्रजनन के आधार पर वर्गीकरण

यह पहचानना बहुत आसान है कि कौन सा जानवर अंडे देता है और कौन सा बच्चे:

  1. जरायुज (Viviparous): वे जीव जो विकसित बच्चे को जन्म देते हैं।

    • पहचान: जिनके शरीर पर बाल होते हैं और कान बाहर दिखाई देते हैं।

    • उदाहरण: मनुष्य, गाय, कुत्ता, हाथी, व्हेल, डॉल्फिन, चमगादड़। (व्हेल और चमगादड़ स्तनधारी हैं)।

  2. अण्डज (Oviparous): वे जीव जो अंडे देते हैं।

    • पहचान: जिनके शरीर पर बाल नहीं होते और कान बाहर दिखाई नहीं देते (कान के स्थान पर छिद्र होते हैं)।

    • उदाहरण: पक्षी, मेंढक, मछली, साँप, छिपकली, मगरमच्छ।

3.2 जानवरों की विशेषताएँ और 'सुपर सेंस' (Super Senses)

NCERT में जानवरों की इंद्रियों और विशेषताओं पर विशेष जोर दिया गया है:

  • हाथी (Elephant):

    • भारत का विरासत पशु।

    • एक बड़ा हाथी एक दिन में $100 \text{ kg}$ से अधिक पत्ते और झाड़ियाँ खा लेता है।

    • हाथी दिन में केवल 2 से 4 घंटे ही सोते हैं।

    • इन्हें पानी और कीचड़ में खेलना पसंद है जिससे इनके शरीर को ठंडक मिलती है।

    • झुंड: हाथियों के झुंड में केवल हथिनियां और बच्चे होते हैं। सबसे बुजुर्ग हथिनी झुंड की नेता होती है। नर हाथी 14-15 साल की उम्र में झुंड छोड़ देते हैं।

    • 3 महीने के हाथी के बच्चे का वजन लगभग $200 \text{ kg}$ होता है।

  • बाघ (Tiger):

    • बाघ की मूंछें हवा में हुए कंपन को भांप लेती हैं और उसे शिकार की सही स्थिति का पता चल जाता है।

    • बाघ अँधेरे में हमसे 6 गुना बेहतर देख सकता है।

    • बाघ का गुर्राना (दहाड़) $3 \text{ km}$ दूर तक सुना जा सकता है।

    • यह अपने इलाके की पहचान मूत्र की गंध से करता है।

  • स्लॉथ (Sloth):

    • यह भालू जैसा दिखता है पर भालू नहीं है।

    • यह दिन के करीब 17 घंटे पेड़ों से उल्टे लटक कर सोता है।

    • यह जिस पेड़ पर रहता है, उसी के पत्ते खाता है।

    • इसका जीवनकाल लगभग 40 वर्ष का होता है और यह अपने पूरे जीवन में मुश्किल से 8 पेड़ों पर ही घूम पाता है। यह सप्ताह में एक बार शौच के लिए नीचे उतरता है।

  • रेशम का कीड़ा (Silkworm):

    • यह अपनी मादा को उसकी गंध से कई किलोमीटर दूर से ही पहचान लेता है।

  • साँप (Snake):

    • भारत में केवल 4 प्रकार के जहरीले साँप पाए जाते हैं: नाग (Cobra), करैत, दुबोइया (Russell's Viper) और अफाई (Saw-scaled Viper)

    • साँप के दो खोखले जहर वाले दाँत होते हैं (विषदंत)।

    • साँप के बाहरी कान नहीं होते, वह जमीन पर हुए कंपन (Vibration) को महसूस करता है।

    • साँप के काटने की दवा (सीरम) साँप के जहर से ही बनाई जाती है।

  • डॉल्फिन:

    • यह अलग-अलग तरह की आवाजें निकालती है और एक-दूसरे से बात करती है।

    • भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव: सूसू (गंगा डॉल्फिन)

  • गिलहरी:

    • इसके दाँत हमेशा बढ़ते रहते हैं। दाँतों को घिसने के लिए यह हमेशा कुछ न कुछ कुतरती रहती है। (चूहों में भी यह विशेषता होती है)।

3.3 पक्षी और उनके घोंसले

  • कोयल: यह अपना घोंसला नहीं बनाती। यह कौए के घोंसले में अंडे देती है।

  • कौआ: यह पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर घोंसला बनाता है। इसके घोंसले में लोहे के तार और लकड़ी की शाखाएँ होती हैं।

  • कलचिड़ी (Indian Robin): पत्थरों के बीच में मुलायम घोंसला (रुई, ऊन, बाल) बनाती है।

  • फाख्ता (Dove): कैक्टस के काँटों के बीच या मेहंदी की मेढ़ में घोंसला बनाता है।

  • गौरैया और कबूतर: घरों में या आसपास (अलमारी के ऊपर, आईने के पीछे) घोंसला बनाते हैं।

  • दर्जिन चिड़िया (Tailor Bird): अपनी नुकीली चोंच से पत्तों को सीकर घोंसला बनाती है।

  • बसंती गौरी (Barbet): पेड़ के तने में गहरा छेद बनाकर उसमें अंडे देती है।

  • वीवर पक्षी (जुलाहा): सभी नर वीवर अपने-अपने घोंसले बनाते हैं। मादा वीवर उन सभी घोंसलों को देखती है और जो सबसे अच्छा लगता है, उसमें अंडे देती है।

  • उल्लू: अपनी गर्दन पीछे तक (काफी हद तक $360^\circ$ के करीब) घुमा सकता है। इसकी आँखें मनुष्य की तरह सामने होती हैं।

  • मैना: यह झटके से अपनी गर्दन आगे-पीछे करती है।

  • चील, बाज और गिद्ध: ये मनुष्य से 4 गुना अधिक दूर तक देख सकते हैं। गिद्ध मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखता है।


4. सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship)

जब दो जीव एक-दूसरे के साथ रहते हैं और एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हैं, तो इसे सहजीविता कहते हैं।

  • उदाहरण: भैंस की पीठ पर बगुला (Egret) पक्षी बैठता है। बगुला भैंस के शरीर पर मौजूद परजीवी कीटों को खाता है। इससे बगुले को भोजन मिलता है और भैंस को कीटों से छुटकारा।

  • लाइकेन (Lichen): यह कवक (Fungi) और शैवाल (Algae) का सहजीवी रूप है। यह वायु प्रदूषण (विशेषकर $\text{SO}_2$) का प्राकृतिक सूचक है।


5. मधुमक्खी पालन (Apiculture)

  • उपयुक्त समय: मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से दिसंबर होता है, क्योंकि इस समय रानी मक्खी अंडे देती है।

  • स्थान: बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में यह कार्य अधिक होता है।

  • लीची के फूल: मधुमक्खियों को लीची के फूल बहुत लुभाते हैं (ये फरवरी में खिलते हैं)।

  • छत्ते की संरचना: हर छत्ते में एक रानी मक्खी होती है जो अंडे देती है। कुछ नर मक्खियां होती हैं। बाकी श्रमिक मक्खियां होती हैं जो दिन भर काम करती हैं और शहद के लिए फूलों का रस ढूंढती हैं।

  • नृत्य: जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक तरह का नाच (Dance) करती है जिससे दूसरी मक्खियों को पता चल जाता है।


6. जन्तुओं में श्वसन और पोषण

  • श्वसन अंग:

    • फेफड़े: मनुष्य, शेर, पक्षी, साँप, व्हेल, डॉल्फिन।

    • गिल (Gills): मछलियाँ, टैडपोल।

    • त्वचा: केंचुआ (आर्द्र त्वचा), मेंढक (पानी में)।

    • ट्रेकिया (Trachea/वातक): कॉकरोच, मक्खी।

  • पोषण स्तर:

    • शाकाहारी: केवल पौधे खाने वाले (गाय, हिरण)।

    • मांसाहारी: केवल मांस खाने वाले (शेर, बाघ)।

    • सर्वाहारी: पौधे और मांस दोनों खाने वाले (मनुष्य, कौआ, कुत्ता, बिल्ली)।


7. महत्वपूर्ण तथ्य (Miscellaneous)

  • केंचुआ: इसे 'किसान का मित्र' कहा जाता है। यह मिट्टी को खोदकर पोली (soft) बनाता है और मृत पत्तियों को खाकर भूमि को उपजाऊ बनाता है।

  • पश्मीना शॉल: यह लद्दाख की 'चांगपा' जनजाति द्वारा पाली गई बकरियों के बालों से बनती है। एक पश्मीना शॉल में 6 स्वेटर के बराबर गर्मी होती है। इसे बनाने में लगभग 250 घंटे लगते हैं।

  • रात में जगने वाले जानवर: उल्लू, रैकून, चमगादड़ आदि। इन्हें हर चीज केवल काली और सफेद (Black and White) रंग में ही दिखाई देती है।

  • बांस (Bamboo): यह एक प्रकार की घास है।


सारांश तालिका (Quick Revision Table)

विषयमहत्वपूर्ण बिंदु
प्रकाश संश्लेषण उत्पादकार्बोहाइड्रेट ($\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$) और ऑक्सीजन ($\text{O}_2$)
मलेरिया की दवासिनकोना पेड़ की छाल (कुनैन)
फूलों की घाटीचमोली, उत्तराखंड
साइलेंट वैलीकेरल
ब्रेल लिपिलुईस ब्रेल (फ्रांस), 6 बिंदुओं पर आधारित
जिराफ की नींदकेवल 2 घंटे (सबसे कम)
अजगर की नींदलगभग 18 घंटे

यह नोट्स CTET के 'पर्यावरण अध्ययन' (EVS) खंड के लिए अत्यधिक प्रभावी हैं। परीक्षा से पूर्व इनका दोहरान अवश्य करें।



पौधे और जन्तु

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top