भोजन: स्रोत और घटक
यह अध्याय CTET विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भोजन के स्रोतों, पोषक तत्वों के प्रकार, उनके परीक्षण और अभावजन्य रोगों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
1. भोजन के स्रोत
सभी सजीवों को कार्य करने, वृद्धि करने और स्वस्थ रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
पादप उत्पाद (Plant Products)
पौधे हमारे भोजन का मुख्य स्रोत हैं। हम पौधों के विभिन्न भागों का सेवन करते हैं:
जड़: गाजर, मूली, शकरकंद, शलजम।
तना: आलू, प्याज, अदरक, गन्ना।
पत्ती: पालक, सरसों, बथुआ, मेथी।
पुष्प: केला (फूल), कद्दू का फूल, ब्रोकली।
फल: आम, सेब, टमाटर, बैंगन।
बीज: गेहूँ, चावल, दालें, सरसों (तेल के लिए)।
नोट: कुछ पौधों के दो या दो से अधिक भाग खाने योग्य होते हैं। उदाहरण के लिए, सरसों के बीज से तेल प्राप्त होता है और इसकी पत्तियों का उपयोग साग बनाने में किया जाता है।
जंतु उत्पाद (Animal Products)
दूध: गाय, भैंस, बकरी और ऊंट से प्राप्त होता है।
अंडे और मांस: मुर्गी, बकरी, मछली।
शहद: मधुमक्खियाँ फूलों से 'मकरंद' (मीठा रस) एकत्रित करती हैं और इसे अपने छत्ते में भंडारित करती हैं। यह मकरंद बाद में शहद बन जाता है।
जंतुओं का वर्गीकरण (आहार के आधार पर)
शाकाहारी: केवल पादप उत्पाद खाते हैं। (उदाहरण: गाय, हिरण, भैंस)।
मांसाहारी: केवल दूसरे प्राणियों को खाते हैं। (उदाहरण: शेर, बाघ, छिपकली)।
सर्वाहारी: पादप और जंतु दोनों को खाते हैं। (उदाहरण: मनुष्य, कौआ, कुत्ता, भालू)।
2. भोजन के घटक (Components of Food)
भोजन में वे आवश्यक अवयव जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देते हैं, पोषक तत्व कहलाते हैं।
A. कार्बोहाइड्रेट
कार्य: शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करना।
स्रोत: चावल, गेहूँ, आलू, शकरकंद, गन्ना, पपीता, तरबूज।
प्रकार: भोजन में यह मुख्य रूप से 'मंड' (Starch) और 'शर्करा' (Sugar) के रूप में पाया जाता है।
ग्लूकोज का रासायनिक सूत्र: $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$
B. वसा
कार्य: शरीर को ऊर्जा प्रदान करना (कार्बोहाइड्रेट की तुलना में समान मात्रा में वसा से अधिक ऊर्जा मिलती है)। यह शरीर को गर्म भी रखता है।
स्रोत:
पादप स्रोत: मूंगफली, तिल, सोयाबीन तेल, नारियल तेल।
जंतु स्रोत: घी, मक्खन, दूध, क्रीम, मांस।
C. प्रोटीन
कार्य: शरीर की वृद्धि और क्षतिग्रस्त भागों के रखरखाव के लिए आवश्यक। इसे 'शरीर वर्धक भोजन' कहा जाता है।
स्रोत:
पादप: चना, मटर, राजमा, मूंग, तुअर दाल, सोयाबीन (सर्वाधिक प्रोटीन)।
जंतु: मांस, मछली, पनीर, अंडे।
D. विटामिन
कार्य: रोगों से शरीर की रक्षा करना। यह आँखों, अस्थियों, दाँतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।
प्रकार: विटामिन A, B-complex, C, D, E, K।
विटामिन B-complex: कई विटामिनों का समूह है।
हमारा शरीर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में विटामिन D बनाता है।
E. खनिज लवण
शरीर के उचित विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए थोड़ी मात्रा में आवश्यक हैं।
उदाहरण: आयोडीन, फॉस्फोरस, लौह (Iron), कैल्शियम।
F. आहारी रेशे (रुक्षांश)
इन्हें रफेज भी कहते हैं।
स्रोत: साबुत खाद्यान्न, दाल, आलू, ताजे फल और सब्जियाँ।
कार्य: यह हमारे शरीर को कोई पोषक तत्व प्रदान नहीं करते, लेकिन यह अपचित भोजन को बाहर निकालने में सहायता करते हैं।
G. जल
यह पोषकों को अवशोषित करने में शरीर की मदद करता है।
यह मूत्र और पसीने के रूप में अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
3. पोषक तत्वों का परीक्षण (Nutrient Tests)
CTET में परीक्षणों के रंग परिवर्तन (Color Change) पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. मंड (Starch) का परीक्षण
खाद्य पदार्थ पर तनु आयोडीन विलयन ($\text{I}_2$) की 2-3 बूंदें डालें।
परिणाम: यदि खाद्य पदार्थ का रंग नीला-काला हो जाता है, तो यह मंड की उपस्थिति दर्शाता है।
2. प्रोटीन का परीक्षण
खाद्य पदार्थ का पेस्ट बनाएं।
उसमें 10 बूंद जल, 2 बूंद कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) और 10 बूंद कॉस्टिक सोडा ($\text{NaOH}$) डालें।
परिणाम: विलयन का रंग बैंगनी (Violet) हो जाना प्रोटीन की उपस्थिति दर्शाता है।
रासायनिक समीकरण का संकेत:
$$\text{CuSO}_4 + 2\text{NaOH} \rightarrow \text{Cu(OH)}_2 + \text{Na}_2\text{SO}_4$$
3. वसा का परीक्षण
खाद्य पदार्थ को कागज में लपेटकर कूटें।
परिणाम: कागज पर तैलीय धब्बा (Oily Patch) आना वसा की उपस्थिति दर्शाता है। यह धब्बा प्रकाश को धुंधला सा पार होने देता है।
4. संतुलित आहार (Balanced Diet)
वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व, रुक्षांश और जल उचित मात्रा में उपस्थित हों।
केवल चावल खाने से शरीर की पोषक आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं।
पकाने के दौरान पोषक तत्वों की हानि:
सब्जियों और फलों को छीलकर धोने से विटामिन और खनिज नष्ट हो सकते हैं।
चावल और दालों को बार-बार धोने से विटामिन B नष्ट हो सकता है।
विटामिन C पकाने पर गर्मी से आसानी से नष्ट हो जाता है।
5. अभावजन्य रोग (Deficiency Diseases)
एक या अधिक पोषक तत्वों का लंबे समय तक अभाव होने से रोग उत्पन्न होते हैं।
| विटामिन/खनिज | अभावजन्य रोग/विकार | लक्षण |
| विटामिन A | क्षीणता दृष्टिहीनता (रतौंधी) | कमजोर दृष्टि, अंधेरे में कम दिखाई देना। |
| विटामिन B1 | बेरी-बेरी | दुर्बल पेशियाँ और काम करने में ऊर्जा की कमी। |
| विटामिन C | स्कर्वी | मसूड़ों से खून आना, घाव भरने में अधिक समय लगना। |
| विटामिन D | रिकेट्स | अस्थियों का मुलायम होकर मुड़ जाना। |
| कैल्शियम | अस्थि और दंतक्षय | कमजोर अस्थियाँ, दाँतों का गिरना। |
| आयोडीन | घेंघा (Goiter) | गर्दन की ग्रंथि का फूल जाना, बच्चों में मानसिक विकलांगता। |
| लौह (Iron) | अरक्तता (Anemia) | कमजोरी, शरीर में पीलापन। |
महत्वपूर्ण बिंदु: लौह तत्व (Iron) के मुख्य स्रोत पालक, गुड़ और आँवला हैं। यह प्रश्न CTET में बार-बार पूछा जाता है।
भोजन: स्रोत और घटक
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
