समावेशी शिक्षा: विकलांगता तथा अधिगम अक्षमता

Sunil Sagare
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 परिचय

समावेशी शिक्षा का मूल मंत्र है "सभी के लिए एक स्कूल"। इसका अर्थ है कि सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग) को एक ही छत के नीचे, एक ही कक्षा में और एक ही शिक्षक द्वारा शिक्षा प्रदान की जाए। यह व्यवस्था बच्चों में भेदभाव को खत्म करती है और समाज की मुख्यधारा से जोड़ती है।

CTET परीक्षा में इस अध्याय से 2-3 प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं, विशेषकर अधिगम अक्षमता (Learning Disabilities) और नए अधिनियमों से।


1. विकलांगता (Disability) की अवधारणा

विकलांग या दिव्यांग बालकों से तात्पर्य उन बालकों से है जो मानसिक, शारीरिक या संवेगात्मक दृष्टि से दोषयुक्त होते हैं। क्रो एवं क्रो के अनुसार, ऐसे बालक जिनमें ऐसा शारीरिक दोष होता है जो उन्हें साधारण क्रियाओं में भाग लेने से रोकता है, वे विकलांग बालक कहलाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दावली:

  • क्षति (Impairment): यह शारीरिक स्तर पर होती है (जैसे- आँख या कान की बनावट में दोष)।

  • अक्षमता (Disability): यह कार्य करने की क्षमता में कमी है (जैसे- देख न पाना)।

  • विकलांगता (Handicap): यह समाज के साथ तालमेल न बिठा पाने की स्थिति है।


2. कानूनी प्रावधान एवं अधिनियम (Legal Framework)

CTET के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण खंड है। भारत सरकार ने समय-समय पर दिव्यांगों के अधिकारों के लिए अधिनियम बनाए हैं।

PWD अधिनियम 1995 (Persons with Disabilities Act)

  • इसमें कुल 7 प्रकार की विकलांगताओं को शामिल किया गया था।

  • इसमें समान अवसर और पूर्ण भागीदारी पर जोर दिया गया था।

RPWD अधिनियम 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act)

  • यह अधिनियम 2016 में पारित हुआ और इसने 1995 के एक्ट का स्थान लिया।

  • इसमें विकलांगताओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई।

  • नई शामिल विकलांगताएँ: इसमें तेजाब हमला पीड़ित (Acid Attack Victims), बौनापन (Dwarfism), पार्किंसंस रोग, थैलेसीमिया और विशिष्ट अधिगम अक्षमता को शामिल किया गया।

  • सरकारी नौकरियों में आरक्षण 3% से बढ़ाकर 4% किया गया।

  • 6 से 18 वर्ष तक के बेंचमार्क विकलांगता वाले बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है।


3. अधिगम अक्षमता (Learning Disabilities)

अधिगम अक्षमता वे विकार हैं जो सीखने, पढ़ने, लिखने या गणितीय गणना करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। यह बुद्धि की कमी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में अंतर है।

प्रमुख अधिगम अक्षमताएँ:

1. डिस्लेक्सिया (Dyslexia) - पठन विकार

  • यह पढ़ने से संबंधित विकार है।

  • बच्चा अक्षरों को पहचानने में गलती करता है।

  • लक्षण: 'b' और 'd' में अंतर न कर पाना, 'saw' को 'was' पढ़ना, 'nuclear' को 'unclear' पढ़ना।

  • यह शब्द-अंधता (Word Blindness) भी कहलाता है।

2. डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) - लेखन विकार

  • यह लिखने की क्षमता को प्रभावित करता है।

  • बच्चे की लिखावट बहुत खराब या अस्पष्ट होती है।

  • अक्षरों का आकार छोटा-बड़ा होता है।

  • कारण: हाथ और उंगलियों की मांसपेशियों में समन्वय की कमी।

3. डिस्कैलकुलिया (Dyscalculia) - गणितीय विकार

  • गणित और अंकों को समझने में कठिनाई।

  • बच्चा जोड़-घटाव, गुणा-भाग और समय देखने में समस्या महसूस करता है।

  • इसे 'न्यूमलेक्सिया' भी कहा जाता है।

4. डिस्फेजिया (Dysphasia) / अफेज्या (Aphasia) - भाषा विकार

  • भाषा को समझने और बोलने (संप्रेषण) में कठिनाई।

  • बच्चा अपने विचारों को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता।

  • मस्तिष्क में क्षति के कारण यह समस्या हो सकती है।

5. डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia) - गामक कौशल विकार

  • शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) में समस्या।

  • सूक्ष्म गामक कौशल जैसे- पेन पकड़ना, बटन लगाना, जूते के फीते बांधना या गेंद पकड़ने में कठिनाई होती है।

  • यह हाथ और आँखों के बीच तालमेल न होने के कारण होता है।

6. डिस्थीमिया (Dysthymia)

  • यह गंभीर तनाव की अवस्था है। इसमें व्यक्ति हमेशा उदास रहता है और इसका असर अधिगम पर पड़ता है।

7. डिस्मोरफिया (Dysmorphia)

  • यह एक भ्रम की स्थिति है जिसमें व्यक्ति को लगता है कि उसके शरीर के कुछ अंग दूसरों की तुलना में छोटे या अपूर्ण हैं।


4. विकासात्मक विकार (Neurodevelopmental Disorders)

ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder)

  • ध्यान अभाव अतिसक्रियता विकार।

  • लक्षण: बच्चा एक जगह टिक कर नहीं बैठ सकता, बहुत ज्यादा बोलता है, अपनी बारी का इंतजार नहीं कर पाता और ध्यान जल्दी भटक जाता है।

  • ऐसे बच्चों के लिए कक्षा के कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटना चाहिए।

ऑटिज्म / स्वालीनता (Autism Spectrum Disorder)

  • लक्षण: सामाजिक संवाद में कमी, नजरें न मिलाना (Poor Eye Contact), एक ही व्यवहार को बार-बार दोहराना।

  • ये बच्चे अपने आप में खोए रहते हैं और दूसरों के साथ घुलने-मिलने में कतराते हैं।


5. विशेष आवश्यकता वाले बालकों की पहचान एवं शिक्षण रणनीतियाँ

एक शिक्षक के रूप में आपको कक्षा में विविध आवश्यकताओं वाले बच्चों को संभालना होता है।

A. दृष्टि बाधित छात्र (Visually Impaired)

  • पहचान: पुस्तक को बहुत पास से पढ़ना, बार-बार आँखें मलना, सिर दर्द की शिकायत।

  • शिक्षण रणनीति:

    • ब्रेल लिपि: लुईस ब्रेल द्वारा विकसित (6 बिंदुओं पर आधारित)।

    • स्पर्श सामग्री: ग्लोब या मानचित्र जो छूकर समझे जा सकें।

    • ऑडियो: रिकॉर्डिंग और बोलती पुस्तकें।

    • शिक्षक को स्पष्ट और तेज आवाज में बोलना चाहिए।

    • ऐसे बच्चों को कक्षा में आगे बिठाना चाहिए।

B. श्रवण बाधित छात्र (Hearing Impaired)

  • पहचान: निर्देश बार-बार पूछना, टीवी की आवाज तेज करना, शिक्षक के चेहरे/होंठों को ध्यान से देखना।

  • शिक्षण रणनीति:

    • सांकेतिक भाषा (Sign Language) का प्रयोग।

    • शिक्षक को बोलते समय अपना चेहरा छात्र की ओर रखना चाहिए ताकि वह ओष्ठ पठन (Lip Reading) कर सके।

    • दृश्य सामग्री (चार्ट, मॉडल) का अधिक प्रयोग करें।

C. वाणी दोष (Speech Impairment)

  • हकलाना, तुतलाना या अस्पष्ट बोलना।

  • उपाय: धैर्यपूर्वक सुनना, वाक्य पूरा करने का दबाव न डालना और विशेष अभ्यास कराना।


6. शिक्षक की भूमिका एवं समावेशी कक्षा का प्रबंधन

  1. IEP (Individualized Education Plan): प्रत्येक विशेष बच्चे के लिए उसकी आवश्यकता अनुसार व्यक्तिगत शिक्षा योजना बनाना।

  2. सहानुभूति नहीं, समानुभूति: बच्चों पर दया दिखाने के बजाय उन्हें सशक्त बनाना।

  3. लचीला पाठ्यक्रम: पाठ्यक्रम और मूल्यांकन के तरीके बच्चे की क्षमता के अनुसार होने चाहिए (जैसे- डिस्लेक्सिया वाले बच्चे को लिखित के बजाय मौखिक परीक्षा का विकल्प देना)।

  4. संसाधन: बहु-संवेदी (Multi-sensory) तकनीकों का प्रयोग करना जहाँ देखने, सुनने और छूने सभी का उपयोग हो।


निष्कर्ष: समावेशी शिक्षा केवल एक कानूनी बाध्यता नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय दृष्टिकोण है। जब एक शिक्षक 'डिस्ग्राफिया' वाले बच्चे की खराब लिखावट पर डांटने के बजाय उसे मौखिक उत्तर देने का अवसर देता है, तो वही असली समावेशन है।



समावेशी शिक्षा: विकलांगता तथा अधिगम अक्षमता

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

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