जल

Sunil Sagare
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1. प्रस्तावना: जल एक परिचय

जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह एक अक्षय प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन इसका वितरण असमान है। "जल ही जीवन है" यह कथन न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि समस्त पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए सत्य है।

  • पृथ्वी पर जल की मात्रा: पृथ्वी का लगभग $71\%$ भाग जल से आच्छादित है। इसी कारण अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीली दिखाई देती है और इसे 'नीला ग्रह' (Blue Planet) कहा जाता है।

  • शेष भू-भाग: केवल $29\%$ भाग पर स्थल (Land) है।

  • मानव शरीर में जल: एक वयस्क मनुष्य के शरीर का लगभग $65\%-70\%$ (दो-तिहाई) हिस्सा जल से बना होता है।

  • रक्त में जल: मानव रक्त (Blood) का लगभग $80\%$ भाग जल होता है।


2. जल का वितरण (Distribution of Water)

पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का बहुत छोटा हिस्सा ही मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है। जल का वितरण निम्नलिखित प्रकार से है:

  • महासागर (Oceans): कुल जल का लगभग $97.3\%$। यह जल लवणीय (Saline) होता है और सीधे पीने या कृषि के योग्य नहीं होता।

  • बर्फ की टोपियाँ और हिमनद (Ice Caps & Glaciers): लगभग $2.0\%$। यह जल शुद्ध है लेकिन बर्फ के रूप में जमा हुआ है।

  • भूमिगत जल (Groundwater): लगभग $0.68\%$। यह हमारे लिए पेयजल का एक प्रमुख स्रोत है।

  • झीलों का अलवण जल: $0.009\%$

  • स्थलीय समुद्र और नमकीन झीलें: $0.009\%$

  • वायुमंडल (Atmosphere): $0.0019\%$

  • नदियाँ: $0.0001\%$

महत्वपूर्ण तथ्य: हमारे उपयोग के लिए उपलब्ध अलवण जल (Fresh Water) कुल जल का मात्र $1\%$ या उससे भी कम है।


3. जल के भौतिक और रासायनिक गुण

CTET परीक्षा में जल के वैज्ञानिक गुणों पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।

3.1 रासायनिक संरचना

  • सूत्र: जल का रासायनिक सूत्र $\text{H}_2\text{O}$ है।

  • संघटन: यह दो हाइड्रोजन ($\text{H}$) परमाणुओं और एक ऑक्सीजन ($\text{O}$) परमाणु के संयोग से बना एक यौगिक (Compound) है।

3.2 अवस्थाएँ (States of Matter)

जल पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में पाया जाने वाला एकमात्र पदार्थ है:

  1. ठोस (Solid): बर्फ, ओले, हिमपात।

  2. द्रव (Liquid): नदी, समुद्र, वर्षा का जल।

  3. गैस (Gas): जलवाष्प (Water Vapor), आर्द्रता।

3.3 घनत्व का असंगत व्यवहार (Anomalous Expansion of Water)

यह सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है।

  • सामान्यतः पदार्थ ठंडा करने पर सिकुड़ते हैं, लेकिन जल $4^{\circ}\text{C}$ तक ठंडा करने पर सिकुड़ता है और $4^{\circ}\text{C}$ से नीचे ($0^{\circ}\text{C}$ की ओर) जाने पर फैलता (Expands) है।

  • सर्वाधिक घनत्व: जल का घनत्व $4^{\circ}\text{C}$ पर सर्वाधिक (Maximum) होता है।

  • बर्फ का तैरना: बर्फ का घनत्व द्रव जल से कम होता है, इसलिए बर्फ पानी पर तैरती है।

  • जलीय जीवों की सुरक्षा: ठंडे प्रदेशों में जब झील की ऊपरी सतह जम जाती है (बर्फ बन जाती है), तो भी नीचे का पानी $4^{\circ}\text{C}$ पर द्रव अवस्था में रहता है, जिससे मछलियाँ और अन्य जलीय जीव जीवित रहते हैं।

3.4 क्वथनांक और हिमांक

  • क्वथनांक (Boiling Point): वह तापमान जिस पर जल उबलने लगता है। सामान्य वायुमंडलीय दाब पर शुद्ध जल का क्वथनांक $100^{\circ}\text{C}$ होता है।

  • हिमांक (Freezing Point): वह तापमान जिस पर जल जमकर बर्फ बन जाता है। यह $0^{\circ}\text{C}$ होता है।

  • अशुद्धियों का प्रभाव: जल में नमक या अन्य अशुद्धियाँ मिलाने पर उसका क्वथनांक बढ़ जाता है और हिमांक घट जाता है। (उदाहरण: कुल्फी जमाने वाले बर्फ में नमक मिलाते हैं ताकि वह जल्दी न पिघले)।

3.5 विलायक गुण (Solvent Properties)

  • जल को सार्वभौमिक विलायक (Universal Solvent) कहा जाता है क्योंकि यह अन्य किसी भी द्रव की तुलना में अधिक पदार्थों को अपने भीतर घोल सकता है।

  • गर्म करने पर जल की घुलनशीलता (Solubility) बढ़ जाती है।

3.6 उत्प्लावकता (Buoyancy)

  • जब कोई वस्तु जल में डाली जाती है, तो जल उस पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, जिसे उत्प्लावक बल कहते हैं।

  • घनत्व का नियम:

    • यदि वस्तु का घनत्व जल से अधिक है $\rightarrow$ वस्तु डूब जाएगी (जैसे: लोहे की कील, पत्थर)।

    • यदि वस्तु का घनत्व जल से कम है $\rightarrow$ वस्तु तैरेगी (जैसे: लकड़ी, बर्फ, तेल, नींबू)।

  • नींबू का उदाहरण: सामान्य पानी में नींबू डूब जाता है, लेकिन नमकीन पानी (Saline Water) में तैरता है।

    • कारण: नमक मिलाने से पानी का घनत्व बढ़ जाता है, जो नींबू के घनत्व से अधिक हो जाता है।


4. मृत सागर (The Dead Sea)

NCERT की पुस्तकों में मृत सागर का विशेष उल्लेख है।

  • यह दुनिया का सबसे नमकीन सागर है।

  • लवणता (Salinity): इसमें लगभग $300 \text{ grams}$ नमक प्रति $1000 \text{ ml}$ (1 लीटर) पानी में पाया जाता है।

  • तैरना: इतनी अधिक लवणता के कारण इसका घनत्व बहुत अधिक होता है। इसलिए इंसान इसमें डूबता नहीं है, बल्कि सतह पर आराम से लेट सकता है।


5. जल चक्र (Water Cycle)

जल चक्र एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें जल अपना रूप बदलता है और महासागरों, वायुमंडल और भूमि के बीच घूमता रहता है। इसके प्रमुख चरण हैं:

  1. वाष्पीकरण (Evaporation): सूर्य की गर्मी के कारण महासागरों, नदियों और झीलों का पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है।

  2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पेड़-पौधों की पत्तियों से पानी का वाष्प के रूप में निकलना।

  3. संघनन (Condensation): ऊपर उठकर जलवाष्प ठंडी होती है और बादल का रूप ले लेती है। (गैस से द्रव में परिवर्तन)।

  4. वर्षण (Precipitation): जब बादलों में पानी की बूँदें भारी हो जाती हैं, तो वे बारिश, बर्फ या ओलों के रूप में धरती पर गिरती हैं।

  5. संग्रहण (Collection): वर्षा का जल नदियों, झीलों और भूजल के रूप में पुनः एकत्रित होता है।


6. जल प्रदूषण (Water Pollution)

जल की भौतिक, रासायनिक या जैविक विशेषताओं में हानिकारक परिवर्तन, जो इसे जीवों के लिए अनुपयोगी बना दे, जल प्रदूषण कहलाता है।

6.1 प्रमुख कारण

  • घरेलू अपशिष्ट: मल-मूत्र, साबुन, डिटर्जेंट।

  • औद्योगिक अपशिष्ट: रसायनों, भारी धातुओं (जैसे पारा, सीसा) का नदियों में सीधा विसर्जन।

  • कृषि अपशिष्ट: रासायनिक उर्वरक (Fertilizers) और कीटनाशक (Pesticides)।

  • थर्मल प्रदूषण: कारखानों से निकला गर्म पानी जलीय जीवों के लिए घातक होता है क्योंकि गर्म पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।

6.2 मापन इकाई: BOD

  • BOD (Biochemical Oxygen Demand): यह जल प्रदूषण मापने का एक मानक है।

  • जल में कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए बैक्टीरिया को जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, उसे BOD कहते हैं।

  • उच्च BOD का अर्थ है उच्च प्रदूषण (ऑक्सीजन की कमी)।

  • निम्न BOD का अर्थ है स्वच्छ जल

6.3 यूट्रोफिकेशन (Eutrophication)

जब जल निकायों में उर्वरकों (नाइट्रेट और फॉस्फेट) की अधिकता हो जाती है, तो शैवाल (Algae) बहुत तेजी से बढ़ते हैं (Algal Bloom)। यह पानी की सतह को ढक लेता है, जिससे सूर्य का प्रकाश नीचे नहीं जा पाता और पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे जलीय जीव मर जाते हैं।


7. जल जनित रोग (Waterborne Diseases)

CTET में रोगों से संबंधित प्रश्न मिलान (Matching) या लक्षण के आधार पर पूछे जाते हैं।

7.1 जीवाणु जनित (Bacterial)

  • हैजा (Cholera): दूषित पानी/भोजन से। उल्टी-दस्त।

  • टाइफाइड (Typhoid): इसे 'मियादी बुखार' भी कहते हैं। आंतों को प्रभावित करता है।

  • पेचिश (Dysentery): आंतों में संक्रमण।

7.2 विषाणु जनित (Viral)

  • पोलियो (Polio): दूषित जल से फैलता है।

  • पीलिया (Jaundice/Hepatitis A): यकृत (Liver) को प्रभावित करता है। गंदे पानी से फैलता है।

7.3 प्रोटोजोआ जनित

  • डायरिया (Diarrhea): निर्जलीकरण का कारण बनता है।

  • अमीबिक पेचिश: पेट दर्द और दस्त।

7.4 मच्छरों से फैलने वाले रोग (Vector-borne)

रुके हुए पानी में मच्छर प्रजनन करते हैं।

  • मलेरिया (Malaria):

    • वाहक: मादा एनाफिलीज (Female Anopheles) मच्छर।

    • कारक: प्लाज्मोडियम (प्रोटोजोआ)।

    • खोज: रोनाल्ड रॉस (Ronald Ross) ने सिकंदराबाद (भारत) में इसकी खोज की थी। उन्हें 1902 में नोबेल पुरस्कार मिला।

    • दवा: सिनकोना (Cinchona) पेड़ की छाल से कुनैन (Quinine) बनाई जाती है।

    • लक्षण: ठंड लगकर कपकपी के साथ तेज बुखार।

  • डेंगू और चिकनगुनिया:

    • वाहक: एडीज (Aedes) मच्छर। यह साफ पानी में भी पनप सकता है।

7.5 रासायनिक प्रदूषण से रोग

  • मिनीमाता रोग (Minamata Disease): जल में पारा (Mercury - $\text{Hg}$) की अधिकता से। (मछली खाने से मनुष्यों में फैलता है)।

  • इटाई-इटाई रोग (Itai-Itai): जल में कैडमियम (Cadmium - $\text{Cd}$) की अधिकता से। हड्डियों में दर्द।

  • ब्लू बेबी सिंड्रोम (Blue Baby Syndrome): जल में नाइट्रेट ($\text{NO}_3$) की अधिकता से। बच्चों का शरीर नीला पड़ जाता है।

  • आर्सेनिक समस्या: पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में भूमिगत जल में आर्सेनिक प्रदूषण से त्वचा रोग (Black Foot Disease) होता है।

रोकथाम के उपाय (मच्छरों के लिए):

  • रुके हुए पानी में मिट्टी का तेल (Kerosene) डालना। इससे पानी का पृष्ठ तनाव (Surface Tension) कम हो जाता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है, जिससे मच्छर के लार्वा मर जाते हैं।


8. जल का शुद्धिकरण (Purification of Water)

  1. उबालना (Boiling): सबसे सरल और प्रभावी घरेलू तरीका।

  2. छानना (Filtration): अशुद्धियों को अलग करना।

  3. क्लोरिनेशन (Chlorination): पानी में क्लोरीन की गोलियाँ या विरंजक चूर्ण मिलाना। यह रोगाणुओं को मारता है।

  4. फिटकरी (Alum) का प्रयोग:

    • इसे भरण/अवसादन (Sedimentation/Loading) में सहायता के लिए गंदे पानी में डाला जाता है।

    • फिटकरी गंदे कणों (कीचड़) को भारी कर देती है, जिससे वे जल्दी नीचे बैठ जाते हैं।


9. जल संरक्षण (Water Conservation)

"जल की एक-एक बूँद कीमती है।"

9.1 वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)

वर्षा के जल को छतों से पाइपों द्वारा नीचे टंकियों में जमा करना या भूमिगत गड्ढों में भेजना ताकि भूजल स्तर (Water Table) बढ़ सके।

  • इसे 'टांका' विधि (राजस्थान) के नाम से भी जाना जाता है।

9.2 3R का सिद्धांत

  1. कम उपयोग (Reduce): आवश्यकतानुसार ही नल खोलें।

  2. पुनः उपयोग (Reuse): सब्जी धोने वाले पानी को पौधों में डालना।

  3. पुनः चक्रण (Recycle): गंदे पानी को शोधित करके उद्योगों में उपयोग करना।


10. पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियाँ (Traditional Water Conservation)

CTET (EVS) में भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक प्रणालियों पर प्रश्न आते हैं।

  • बावड़ी/बावली (Stepwells):

    • यह सीढ़ीदार कुआँ होता है।

    • पुराने समय में यह वर्षा जल संचयन और सामुदायिक मिलन का केंद्र था।

    • यात्रियों को पानी पिलाने के लिए इनका निर्माण पुण्य का कार्य माना जाता था।

    • राजस्थान और गुजरात में प्रमुखता से मिलती हैं।

  • जोहड़ (Johad): राजस्थान में वर्षा जल रोकने के लिए बनाए गए छोटे मिट्टी के बांध।

  • टांका (Tanka): राजस्थान (थार रेगिस्तान) में आंगन में बनाया गया पक्का गड्ढा, जिसे ढक्कन से बंद रखा जाता है। इसमें वर्षा का शुद्ध जल (पलर पानी) जमा होता है।

  • कुहल (Kuhls): हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों से पानी को निचली जगहों तक लाने वाली नहरें।

  • झीलें (Lakes): जैसलमेर में राजा घड़सी द्वारा बनवाई गई 'घड़सीसर झील' प्रसिद्ध है, जो मीलों तक फैली थी और नौ तालाबों का समूह थी।


11. महत्वपूर्ण व्यक्ति और संस्थाएँ

11.1 तरुण भारत संघ (TBS)

  • यह एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य करता है।

  • राजेन्द्र सिंह: इन्हें 'भारत का जल पुरुष' (Waterman of India) कहा जाता है। इन्होंने राजस्थान के अलवर जिले में हजारों जोहड़ बनवाकर सूखी नदियों (जैसे अरवरी नदी) को पुनर्जीवित किया।

  • दड़की माई: इनकी कहानी प्रसिद्ध है, जिन्होंने तरुण भारत संघ की मदद से अपने गांव में तालाब बनवाया और पानी की समस्या दूर की।

11.2 भीम संघ (Bhim Sangh)

  • यह कर्नाटक के होलगुण्डी (Holgundi) गाँव में बच्चों की एक पंचायत/संस्था थी।

  • इन्होंने पानी की टंकी को साफ करने और जल संरक्षण का बीड़ा उठाया था।


12. महत्वपूर्ण दिवस और अधिनियम

  • विश्व जल दिवस (World Water Day): प्रतिवर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है।

    • उद्देश्य: मीठे पानी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

  • जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम: भारत सरकार द्वारा वर्ष 1974 में पारित किया गया।


13. महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी तथ्य (One Liners)

  • कठोर जल (Hard Water): इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं। इसमें साबुन झाग नहीं देता।

  • मृदु जल (Soft Water): इसमें साबुन आसानी से झाग देता है। वर्षा का जल सबसे शुद्ध मृदु जल होता है।

  • आर्द्रता (Humidity): वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा। इसे हाइग्रोमीटर (Hygrometer) से मापा जाता है।

  • हाइड्रोमीटर (Hydrometer): यह द्रवों का आपेक्षिक घनत्व मापता है (आर्द्रता नहीं)।

  • भीमगोडा बैराज: यह उत्तराखंड में स्थित है।

  • मेघालय की सिंचाई: यहाँ बांस की पाइपों (Bamboo Drip Irrigation) द्वारा सिंचाई की पुरानी परंपरा है।


सारांश

जल पर्यावरण अध्ययन का एक मुख्य विषय (Theme) है। शिक्षक के रूप में, बच्चों को जल चक्र, प्रदूषण के कारण और विशेष रूप से संरक्षण के पारंपरिक व आधुनिक तरीकों के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है। "जल बचाओ, जीवन बचाओ" केवल एक नारा नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त है।



जल

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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