गणितीय भाषा और शिक्षण शास्त्र

Sunil Sagare
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1. प्रस्तावना: गणित एक भाषा के रूप में

गणित केवल संख्याओं और गणनाओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक सार्वभौमिक भाषा है। गणित को विचारों की अभिव्यक्ति, तुष्टिकरण और तार्किक क्षमता के विकास का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। जिस प्रकार हम अपने विचारों को हिंदी या अंग्रेजी भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं, उसी प्रकार परिमाण (Quantity), आकार (Shape) और स्थान (Space) से संबंधित विचारों को व्यक्त करने के लिए 'गणितीय भाषा' का प्रयोग किया जाता है।

  • परिभाषा: गणितीय भाषा वह प्रणाली है जिसके द्वारा गणितीय विचारों, जैसे—संख्याएं, समीकरण और ज्यामितीय आकृतियों को संप्रेषित किया जाता है।

  • रोजर बेकन (Roger Bacon) का कथन: "गणित सभी विज्ञानों का प्रवेश द्वार और कुंजी है।" (Mathematics is the gate and key of the sciences.)

  • गैलीलियो का कथन: "गणित वह भाषा है जिसमें परमेश्वर ने सम्पूर्ण ब्रह्मांड को लिख दिया है।"


2. गणितीय भाषा की प्रकृति (Nature of Mathematical Language)

गणित की अपनी एक विशिष्ट संरचना होती है जो इसे सामान्य भाषाओं से अलग और अधिक शक्तिशाली बनाती है।

  • सार्वभौमिकता: गणित के नियम और संकेत पूरी दुनिया में एक समान हैं। उदाहरण के लिए, समीकरण $2 + 2 = 4$ भारत में भी वही है और अमेरिका में भी।

  • संक्षिप्तता: गणितीय भाषा बहुत संक्षिप्त होती है। एक लंबे कथन को छोटे से समीकरण में लिखा जा सकता है।

    • सामान्य भाषा: "दो संख्याओं का योग और उनका अंतर गुणा करने पर उनके वर्गों के अंतर के बराबर होता है।"

    • गणितीय भाषा: $(a + b)(a - b) = a^2 - b^2$

  • तार्किंकता: यह 'अगर-तो' (If-then) के तर्क पर चलती है। यह अनुमान पर नहीं, बल्कि ठोस प्रमाणों पर आधारित है।

  • अमूर्तता से मूर्तता की ओर: गणितीय भाषा अमूर्त विचारों (जैसे 'संख्या' जो दिखाई नहीं देती) को संकेतों (जैसे $1, 2, 3$) के माध्यम से मूर्त रूप देती है।


3. गणितीय भाषा के मुख्य अंग (Components of Mathematical Language)

गणित की भाषा मुख्य रूप से पांच तत्वों से मिलकर बनी होती है। इन्हें समझना शिक्षण के लिए अनिवार्य है।

3.1 पद (Terms)

गणित में 'पद' वे शब्द हैं जिनका एक विशिष्ट अर्थ होता है।

  • अपरिभाषित पद: वे शब्द जिन्हें परिभाषित नहीं किया जा सकता, केवल समझा जा सकता है।

    • उदाहरण: बिंदु (Point), रेखा (Line), समतल (Plane)।

  • परिभाषित पद: वे शब्द जिनकी स्पष्ट परिभाषा होती है।

    • उदाहरण: त्रिभुज, आयत, सम संख्या, अभाज्य संख्या।

3.2 प्रत्यय या संकल्पना (Concepts)

यह वह विचार है जो किसी वस्तु या घटना के सामान्य गुणों को दर्शाता है।

  • उदाहरण: 'प्राकृत संख्या' एक संकल्पना है। जब हम $1, 2, 3, 4...$ कहते हैं, तो यह उस संकल्पना का उदाहरण है।

  • 'शून्य' ($\text{Zero}$) एक महत्वपूर्ण संकल्पना है जो 'कुछ नहीं' को दर्शाती है।

3.3 संकेत (Symbols)

गणित संकेतों की भाषा है। संकेतों का प्रयोग भाषा को छोटा और स्पष्ट बनाता है।

  • अंक: $0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9$

  • संक्रिया चिह्न: $+$, $-$, $\times$, $\div$

  • संबंध सूचक: $=$, $<$, $>$, $\leq$, $\geq$, $\cong$ (सर्वांगसम), $\sim$ (समरूप)

  • विशिष्ट संकेत:

    • $\pi$ (पाई)

    • $\sum$ (सिग्मा - योग के लिए)

    • $\infty$ (अनंत)

    • $\theta$ (कोण के लिए)

    • $\therefore$ (इसलिए)

    • $\because$ (चूंकि)

3.4 सूत्र (Formulae)

सूत्र गणितीय नियमों और सिद्धांतों का सांकेतिक रूप है। यह चरों (Variables) के बीच संबंध दर्शाता है।

  • उदाहरण: आयत का क्षेत्रफल $= l \times b$

  • उदाहरण: द्विघात समीकरण का हल:

    $$x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a}$$

3.5 कलन विधि (Algorithm)

किसी समस्या को हल करने के लिए अपनाई गई चरण-दर-चरण प्रक्रिया को कलन विधि कहते हैं।

  • उदाहरण: भाग विधि द्वारा महत्तम समापवर्तक (HCF) निकालना एक कलन विधि है।


4. गणितीय भाषा का व्याकरण (Grammar of Mathematics)

जैसे हिंदी में संज्ञा, क्रिया और विशेषण होते हैं, वैसे ही गणित की संरचना में भी ये तत्व पाए जाते हैं।

  • गणितीय संज्ञा (Nouns):

    • संख्याएं ($5, 10, \frac{1}{2}$), चर ($x, y, z$), आकृतियां (वृत्त, त्रिभुज) गणित की संज्ञाएं हैं।

  • गणितीय क्रिया (Verbs):

    • संक्रियाएं और संबंध चिह्न क्रिया का काम करते हैं।

    • जैसे: बराबर है ($=$), छोटा है ($<$), जोड़ना ($+$)।

  • गणितीय वाक्य (Sentences):

    • जब संज्ञा और क्रिया मिलती हैं, तो गणितीय वाक्य बनता है।

    • उदाहरण: $3 + 5 = 8$ (यह एक पूर्ण वाक्य है जिसका अर्थ है "तीन और पांच का योग आठ के बराबर है")।


5. सामान्य भाषा और गणितीय भाषा में अंतर

शिक्षण के दौरान बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई इसी अंतर को समझने में होती है। सामान्य भाषा के शब्द गणित में अलग अर्थ रखते हैं।

क्र.सं.शब्दसामान्य अर्थगणितीय अर्थ
1.मूल (Root)जड़ (पेड़ की), आधारसमीकरण का हल या वर्गमूल/घनमूल ($\sqrt{x}$)।
2.चर (Variable)जो बदलता रहेवह प्रतीक जिसका मान समीकरण के अनुसार बदलता है (जैसे $x, y$)।
3.विषम (Odd)अजीब या अलगवह संख्या जो $2$ से विभाजित नहीं होती ($1, 3, 5...$)।
4.घटाना (Reduce)कम करना (सामान्यतः)व्यवकलन (Subtraction) की एक विशिष्ट संक्रिया।
5.फल (Product)खाने वाला फल या परिणामगुणा करने पर प्राप्त परिणाम ($2 \times 3 = 6$, यहाँ 6 गुणनफल है)।
6.अंश (Numerator)हिस्सा या भागभिन्न में ऊपर वाली संख्या ($\frac{p}{q}$ में $p$)।

6. गणित शिक्षण में भाषा का महत्व

NCF 2005 (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा) के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की "सोच का गणितीयकरण" (Mathematization of thought) करना है। इसमें भाषा की भूमिका अहम है।

6.1 तार्किक चिंतन का विकास

भाषा विचारों को स्पष्ट करती है। जब छात्र गणितीय भाषा का प्रयोग करता है, तो वह तर्क करना सीखता है।

  • उदाहरण: "चूंकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^\circ$ होता है, इसलिए..." - यह कथन तार्किक प्रवाह को दर्शाता है।

6.2 शुद्धता और सटीकता (Precision)

गणित अस्पष्टता को समाप्त करता है।

  • अस्पष्ट: "मोहन लंबा है।" (कितना लंबा? स्पष्ट नहीं है)

  • गणितीय: "मोहन की लंबाई $165 \text{ cm}$ है।" (पूर्णतः स्पष्ट)

6.3 समस्या समाधान कौशल

इबारती प्रश्नों (Word Problems) को हल करने के लिए सामान्य भाषा को गणितीय भाषा में बदलना पड़ता है।

  • प्रश्न: "राम के पास 5 सेब थे, उसने 2 खा लिए।"

  • गणितीय रूप: $5 - 2 = x$


7. गणितीय संचार (Mathematical Communication)

कक्षा में गणितीय संचार का अर्थ है कि बच्चे गणितीय विचारों को सुन सकें, बोल सकें, पढ़ सकें और लिख सकें।

  • सुनना: शिक्षक द्वारा दी गई समस्या या निर्देश को ध्यानपूर्वक समझना।

  • बोलना: अपने तर्क को शब्दों और गणितीय पदों में व्यक्त करना। जैसे—"मैंने यहाँ $LCM$ लिया क्योंकि हर समान नहीं थे।"

  • पढ़ना: प्रतीकों और आरेखों को समझना। जैसे $\Delta ABC \cong \Delta PQR$ को पढ़कर समझना कि दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।

  • लिखना: समस्या के हल को सही चरणों और संकेतों के साथ प्रस्तुत करना।

संचार को बेहतर बनाने के तरीके:

  1. छात्रों को अपने शब्दों में परिभाषा बताने के लिए प्रोत्साहित करें।

  2. समूह चर्चा (Group Discussion) आयोजित करें।

  3. 'खुले अंत वाले प्रश्न' (Open-ended questions) पूछें।

    • बंद अंत: "$4 \times 5$ क्या है?"

    • खुला अंत: "ऐसी दो संख्याएं बताओ जिनका गुणनफल $20$ हो?" (उत्तर: $4 \times 5$, $2 \times 10$, $1 \times 20$ आदि हो सकते हैं)।


8. गणितीय परिभाषाओं के गुण

एक अच्छी गणितीय परिभाषा में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

  • सुस्पष्टता: परिभाषा में कोई भी शब्द ऐसा नहीं होना चाहिए जिसका अर्थ संदिग्ध हो।

  • सत्यता: यह सभी स्थितियों में लागू होनी चाहिए।

  • उत्क्रमणीयता (Reversibility): यदि $A$ है तो $B$ होगा, और यदि $B$ है तो $A$ होगा।

    • उदाहरण: "समबाहु त्रिभुज वह है जिसकी तीनों भुजाएं समान हैं।" (सीधा)

    • "जिसकी तीनों भुजाएं समान हैं, वह समबाहु त्रिभुज है।" (उल्टा)


9. संख्या और संख्यांक में अंतर (Number vs Numeral)

यह CTET का एक बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है।

  • संख्या (Number): यह एक विचार या अवधारणा है जो मात्रा को दर्शाती है। यह अमूर्त है। (उदाहरण: 'तीन' का विचार)।

  • संख्यांक (Numeral): यह संख्या को लिखने का प्रतीक है। (उदाहरण: $3$, $III$, तीन, Three)।

महत्वपूर्ण तथ्य: एक ही संख्या को अलग-अलग संख्यांकों द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है, जैसे $5$, $V$, पाँच, $101$ (द्विआधारी में)।


10. गणित शिक्षण में आने वाली भाषाई चुनौतियां

बच्चे अक्सर गणित में इसलिए फेल नहीं होते कि उन्हें गणना नहीं आती, बल्कि इसलिए कि वे भाषा नहीं समझ पाते।

  • शब्द समस्याओं (Word Problems) में कठिनाई: न्यूमैन (Newman) के त्रुटि विश्लेषण के अनुसार, बच्चे अक्सर प्रश्न को पढ़ लेते हैं लेकिन यह नहीं समझ पाते कि वहां 'गुणा' करना है या 'भाग'।

  • संकेतों का डर: $\theta, \beta, \Sigma, \int$ जैसे संकेत देखकर बच्चे घबरा जाते हैं।

  • बहुअर्थी शब्द: जैसा कि ऊपर बताया गया है, सामान्य जीवन के शब्द (जैसे 'Volume' का अर्थ आवाज या आयतन) भ्रम पैदा करते हैं।


11. महत्वपूर्ण शिक्षण विधियां (भाषा विकास हेतु)

गणित की भाषा सिखाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए:

  1. ठोस वस्तुओं का प्रयोग: पहले कंकड़, तीलियों या ब्लॉक का प्रयोग करें।

  2. चित्रों का प्रयोग: फिर चित्र बनाकर समझाएं।

  3. सामान्य भाषा: फिर बच्चों की मातृभाषा में समझाएं।

  4. गणितीय भाषा: अंत में $+, -, =$ जैसे चिह्नों का प्रयोग करें।

ELPS अनुक्रम (पामेला लिबेक द्वारा):

  • E - Experience (अनुभव - ठोस वस्तुओं से)

  • L - Language (भाषा - कहानी या बातों से)

  • P - Picture (चित्र - आरेखों से)

  • S - Symbol (संकेत - गणितीय चिह्नों से)


12. गणितीय संक्रियाओं का प्रदर्शन

बच्चों को लिखित कार्य में स्पष्टता सिखाने के लिए शिक्षक को श्यामपट्ट पर सही प्रारूप का उपयोग करना चाहिए।

उदाहरण: भाग विधि (Long Division Method)

सही संरेखण (Alignment) अत्यंत आवश्यक है:

$$\begin{array}{r l} 12 ) & 158 \quad ( 13 \\ - & 12 \downarrow \\ \hline & 38 \\ - & 36 \\ \hline & 02 \end{array}$$

उदाहरण: महत्तम समापवर्तक (HCF/LCM Table)

लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) सिखाते समय ग्रिड का प्रयोग करें:

$$\begin{array}{c|c} 2 & 12, 18, 24 \\ \hline 2 & 6, 9, 12 \\ \hline 2 & 3, 9, 6 \\ \hline 3 & 3, 9, 3 \\ \hline & 1, 3, 1 \end{array}$$

13. निष्कर्ष

गणित की भाषा सटीक, संक्षिप्त और शक्तिशाली है। एक शिक्षक के रूप में, हमारा लक्ष्य बच्चों को केवल सवाल हल करना सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें "गणित की भाषा में साक्षर" बनाना है। जब बच्चा अपने दैनिक जीवन की समस्याओं को गणितीय रूप में देखना और व्यक्त करना शुरू कर देता है, तभी वास्तविक गणित शिक्षण सफल माना जाता है। गणितीय संप्रेषण कौशल का विकास, रटने की प्रवृत्ति को कम करता है और वैचारिक समझ को गहरा करता है।



गणितीय भाषा

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