विद्यालयी पाठ्यक्रम में गणित का स्थान

Sunil Sagare
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गणित केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह तार्किक विचारों का विज्ञान है। शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी विषय का महत्व इस बात से निर्धारित होता है कि वह शिक्षा के उद्देश्यों को पूरा करने में कितना सहायक है। कोठारी आयोग, NCF-2005 और NEP-2020 जैसे प्रमुख दस्तावेजों ने गणित को विद्यालयी पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग माना है।

1. गणित का अर्थ और प्रकृति (Meaning and Nature of Mathematics)

गणित की प्रकृति को समझना एक शिक्षक के लिए अत्यंत आवश्यक है ताकि वह कक्षा में उचित शिक्षण विधियों का चयन कर सके।

  • परिभाषा: गणित गणनाओं, संख्याओं, मात्राओं और आकृतियों का विज्ञान है। यह तार्किक सोच (Logical Thinking) पर आधारित है।

  • सार्वभौमिक भाषा: गणित की अपनी भाषा होती है। इसमें गणितीय पद (Terms), प्रत्यय (Concepts), सूत्र (Formulae) और संकेत (Symbols) शामिल हैं जो पूरी दुनिया में समान हैं। उदाहरण के लिए, $+$ का अर्थ हर जगह 'जोड़' ही होता है।

  • अमूर्त विज्ञान (Abstract Science): गणित की अवधारणाएं अमूर्त होती हैं, जिन्हें मूर्त उदाहरणों द्वारा समझा जाता है। जैसे 'संख्या 5' एक अमूर्त विचार है, जिसे '5 पेन्सिल' (मूर्त) के माध्यम से दर्शाया जाता है।

  • निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning): गणित में हम सामान्य नियमों से विशिष्ट निष्कर्षों की ओर बढ़ते हैं।

  • यथार्थता (Precision): गणित के परिणाम सटीक और स्पष्ट होते हैं। इसमें "शायद" के लिए कोई जगह नहीं होती। जैसे:

    $$2 + 2 = 4$$

    यह एक पूर्ण सत्य है।

प्रसिद्ध कथन (PDF और अन्य स्रोतों से):

  • महावीराचार्य (गणित-सार संग्रह): "लौकिक, वैदिक तथा सामाजिक जो भी व्यापार हैं, उन सभी में गणित का प्रयोग है। ... सूर्य तथा अन्य ग्रहों की गति, दिशा और समय ज्ञात करने में भी गणित की आवश्यकता है।"

  • रोजर बेकन: "गणित सभी विज्ञानों का सिंहद्वार और कुंजी है।"

  • गैलिलियो: "गणित वह भाषा है जिसमें परमेश्वर ने सम्पूर्ण जगत या ब्रह्माण्ड को लिख दिया है।"


2. कोठारी आयोग (1964-66) और गणित की अनिवार्यता

स्वतंत्र भारत में शिक्षा सुधारों के लिए कोठारी आयोग (Kothari Commission) की सिफारिशें मील का पत्थर साबित हुईं।

  • अनिवार्य विषय: आयोग ने स्पष्ट रूप से सिफारिश की कि कक्षा 1 से कक्षा 10 तक गणित को सामान्य शिक्षा के हिस्से के रूप में सभी छात्रों के लिए एक अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए।

  • वैज्ञानिक आधार: वर्तमान युग विज्ञान और तकनीक का है। भौतिकी, रसायन और अन्य विज्ञानों को समझने के लिए गणित एक आधारशिला (Foundation) का कार्य करता है।

  • मानसिक प्रशिक्षण: आयोग का मानना था कि गणित केवल गणना करने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक विकास और अनुशासनात्मक गुणों के लिए आवश्यक है।

गणित को अनिवार्य बनाने के पक्ष में तर्क:

  1. मानसिक व्यायाम: जिस प्रकार शरीर के लिए व्यायाम आवश्यक है, उसी प्रकार मस्तिष्क को तीक्ष्ण बनाने के लिए गणितीय समस्याओं का अभ्यास आवश्यक है।

  2. दैनिक जीवन में उपयोग: घर के बजट से लेकर बैंकिंग, खरीदारी और यात्रा तक, हर जगह गणित का उपयोग होता है।

  3. अन्य विषयों का आधार: भूगोल (अक्षांश-देशांतर), विज्ञान (समीकरण), और अर्थशास्त्र (सांख्यिकी) जैसे विषय गणित के बिना अधूरे हैं।


3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 (NCF-2005) के अनुसार गणित

CTET परीक्षा के लिए NCF-2005 सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इससे संबंधित प्रश्न लगभग हर बार पूछे जाते हैं।

मुख्य उद्देश्य (Main Goal):

  • NCF-2005 के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की सोच का गणितीयकरण (Mathematization of Thought) करना है।

  • इसका अर्थ है कि बच्चा तार्किक रूप से सोचना, निष्कर्ष निकालना और अमूर्त चीजों को समझना सीखे।

गणित शिक्षण के दो प्रकार के उद्देश्य:

  1. संकीर्ण उद्देश्य (Narrow Goals):

    • ये उद्देश्य मुख्य रूप से प्राथमिक स्तर से जुड़े हैं।

    • इनमें 'संख्यात्मक कौशल' (Numeracy Skills) विकसित करना शामिल है।

    • जैसे: जोड़, घटाव, गुणा, भाग, मापन, भिन्न, दशमलव और प्रतिशत का ज्ञान।

    • यह 'रोजगार योग्य' व्यस्क तैयार करने में मदद करता है।

  2. उच्च उद्देश्य (Higher Goals):

    • बच्चे के आंतरिक संसाधनों का विकास करना।

    • अमूर्तता (Abstractness) को समझना और संभालना।

    • समस्या समाधान की क्षमता का विकास करना।

    • तार्किक रूप से मान्यताओं के परिणाम निकालना।

महत्वपूर्ण अवधारणाएं (NCF-2005 विशेष):

  • गणित का लंबा आकार (Tall Shape of Mathematics):

    • NCF-2005 में "गणित के लंबे आकार" का उल्लेख किया गया है।

    • इसका अर्थ है कि गणित में एक अवधारणा दूसरी अवधारणा पर टिकी होती है। यदि छात्र को पिछला ज्ञान (जैसे बीजगणित) नहीं है, तो वह अगला ज्ञान (जैसे कैलकुलस) नहीं सीख सकता। इसलिए यह विषय क्षैतिज (Horizontal) के बजाय लंबवत (Vertical) रूप से बढ़ता है।

  • महत्वाकांक्षी, सुसंगत और महत्वपूर्ण:

    • महत्वाकांक्षी: केवल संकीर्ण लक्ष्यों तक सीमित न रहे, बल्कि उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करे।

    • सुसंगत: टुकड़े-टुकड़े में ज्ञान देने के बजाय, विभिन्न विधियां और कौशल एक-दूसरे से जुड़े हों।

    • महत्वपूर्ण: छात्र उन समस्याओं को हल करें जो उन्हें महत्वपूर्ण लगें और जिनका वास्तविक जीवन से जुड़ाव हो।


4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और गणित

नई शिक्षा नीति ने गणितीय सोच और कोडिंग को शुरुआती कक्षाओं से ही महत्व दिया है।

  • ढांचा: नई $5+3+3+4$ प्रणाली में मूलभूत स्तर (Foundational Stage) से ही संख्या ज्ञान पर जोर दिया गया है।

  • FLN (Foundational Literacy and Numeracy): NEP 2020 का प्रमुख लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 3 तक का प्रत्येक बच्चा 'मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता' प्राप्त कर ले। इसके लिए 'निपुण भारत' (NIPUN Bharat) मिशन चलाया गया है।

  • गणितीय सोच (Mathematical Thinking): रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर, तार्किक निर्णय लेने और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।

  • कोडिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग: कक्षा 6 से ही छात्रों को कोडिंग और डेटा विश्लेषण से परिचित कराया जाएगा, जो गणित का ही आधुनिक अनुप्रयोग है।


5. गणित शिक्षण के मूल्य (Values of Teaching Mathematics)

गणित को पाठ्यक्रम में विशेष स्थान देने के पीछे इसके द्वारा विकसित होने वाले मूल्य हैं:

A. बौद्धिक मूल्य (Intellectual Value):

  • गणित समस्याओं को सुलझाने, अवलोकन करने, एकाग्रता और अन्वेषण की शक्ति विकसित करता है।

  • यह 'आगमनात्मक' (उदाहरण से नियम) और 'निगमनात्मक' (नियम से उदाहरण) तर्क शक्तियों को बढ़ाता है।

B. प्रयोगात्मक/व्यावहारिक मूल्य (Utilitarian Value):

  • हमारे दैनिक जीवन का हर पहलू गणित से जुड़ा है।

  • समय देखना, बाजार से सामान खरीदना, ब्याज की गणना करना आदि।

  • जैसा कि यंग ने कहा था: "यदि विज्ञान का आधार स्तंभ गणित हटा दिया जाए, तो संपूर्ण भौतिक सभ्यता निस्संदेह नष्ट हो जाएगी।"

C. अनुशासन संबंधी मूल्य (Disciplinary Value):

  • गणित छात्रों में नियमितता, समय की पाबंदी और सफाई से काम करने की आदत डालता है।

  • यह मन को एकाग्र करने का प्रशिक्षण देता है।

  • लॉक (Locke) के अनुसार: "गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।"

D. सांस्कृतिक मूल्य (Cultural Value):

  • गणित हमारी संस्कृति और सभ्यता के विकास में सहायक है।

  • होगबेन (Hogben) का प्रसिद्ध कथन है: "गणित सभ्यता और संस्कृति का दर्पण है।" (Mathematics is the mirror of civilization).

  • वास्तुकला, चित्रकला, संगीत और इंजीनियरिंग सभी में गणित निहित है।

E. नैतिक मूल्य (Moral Value):

  • गणित सत्यता पर आधारित है।

  • यह छात्रों में ईमानदारी, सत्य बोलने और निष्पक्षता जैसे गुण विकसित करता है क्योंकि गणित में $(2+2)$ हमेशा $4$ होता है, इसमें झूठ या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती।


6. पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत (Principles of Curriculum Construction)

गणित का पाठ्यक्रम तैयार करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए:

  1. बाल-केंद्रितता (Child-Centredness): पाठ्यक्रम बच्चों की रुचि, आयु और मानसिक स्तर के अनुसार होना चाहिए।

  2. क्रिया-प्रधानता: "करके सीखने" (Learning by Doing) को बढ़ावा मिले।

  3. तार्किक क्रम: विषय वस्तु को सरल से कठिन की ओर व्यवस्थित किया जाना चाहिए।

  4. लचीलापन: इसमें व्यक्तिगत विभिन्नताओं (Individual Differences) के लिए स्थान होना चाहिए।

  5. उपयोगिता: जो पढ़ाया जा रहा है, वह छात्र के जीवन में उपयोगी होना चाहिए।


7. गणित की आधारभूत संरचनाएं (Basic Structures)

एन.सी.ई.आर.टी. और गणितज्ञों के अनुसार, गणित की तीन प्रमुख संरचनाएं हैं जिनका उल्लेख आपके पाठ्यक्रम में है:

  1. बीजगणितीय संरचना (Algebraic Structure):

    • इसमें योग ($+$), गुणा ($\times$) और अन्य संक्रियाओं का सामान्यीकरण किया जाता है।

    • समीकरणों का हल इसी के अंतर्गत आता है।

  2. तलरूप संरचना (Topological/Plane Form Structure):

    • यह स्थान, समीपता, निकटता और सीमा (Limit) जैसी अवधारणाओं से संबंधित है।

    • ज्यामिति इसका एक मुख्य भाग है।

  3. क्रमिक संरचना (Order Structure):

    • इसमें 'से बड़ा' ($>$), 'से छोटा' ($<$) जैसी तुलनात्मक अवधारणाएं शामिल हैं।


8. अन्य विषयों के साथ सह-संबंध (Correlation)

गणित को एक अलग-थलग विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जा सकता। हर विषय में इसकी घुसपैठ है:

  • भौतिक विज्ञान (Physics): गति के नियम, गुरुत्वाकर्षण बल की गणना:

    $$F = G \frac{m_1 m_2}{r_2}$$

    यह बिना गणित के संभव नहीं है।

  • रसायन विज्ञान (Chemistry): परमाणुओं का भार, रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना। जैसे:

    $$\text{2H}_2 + \text{O}_2 \rightarrow \text{2H}_2\text{O}$$
  • जीव विज्ञान (Biology): रक्तचाप मापना, कोशिकाओं की गिनती, पौधों की वृद्धि दर।

  • भूगोल: अक्षांश, देशांतर, दूरियां मापना और ग्राफ बनाना।

  • कला: सममिति (Symmetry), अनुपात और पैटर्न।


9. गणित शिक्षण की समस्याएं और उनका समाधान

विद्यालयों में गणित को लेकर छात्रों में अक्सर डर देखा जाता है।

समस्याएं:

  • भय और असफलता: बहुत से छात्र गणित को "कठिन" मानते हैं।

  • निराशाजनक पाठ्यचर्या: यह केवल प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बनाई गई लगती है।

  • यांत्रिक प्रक्रिया: रटने और केवल सही उत्तर निकालने पर जोर दिया जाता है, प्रक्रिया (Process) पर नहीं।

  • शिक्षकों की तैयारी में कमी: कई बार शिक्षक स्वयं गणितीय अवधारणाओं को लेकर स्पष्ट नहीं होते।

समाधान (NCF-2005 के सुझाव):

  • आनंददायी शिक्षा: गणित को गतिविधियों और खेलों के माध्यम से सिखाया जाए।

  • मूर्त से अमूर्त: पहले ठोस वस्तुओं (जैसे कंचे, तीलियां) का उपयोग करें, फिर संख्याओं पर जाएं।

  • त्रुटियों का स्वागत: गलतियों को सीखने का हिस्सा माना जाना चाहिए, न कि दंड का कारण।

  • संदर्भित ज्ञान: गणितीय समस्याओं को बच्चों के दैनिक जीवन और पर्यावरण से जोड़ा जाना चाहिए।


10. महत्वपूर्ण परिभाषाएं और तथ्य (Important Facts for Exam)

  • वैदिक गणित: इसका प्रयोग मुख्य रूप से 'गणना की गति और कौशल' (Calculation Speed) बढ़ाने के लिए किया जाता है।

  • गणित का सामुदायिक महत्व: समाज के लेन-देन, व्यापार और नैतिक विकास में।

  • ब्लूम की टैक्सोनॉमी: ज्ञानात्मक (Cognitive), भावात्मक (Affective) और क्रियात्मक (Psychomotor) पक्षों के विकास में गणित सहायक है।

  • आगमनात्मक विधि (Inductive Method): उदाहरण $\rightarrow$ नियम (छोटी कक्षाओं के लिए सर्वोत्तम)।

  • निगमनात्मक विधि (Deductive Method): नियम $\rightarrow$ उदाहरण (उच्च कक्षाओं के लिए, समय की बचत करती है)।


निष्कर्ष

गणित विद्यालयी पाठ्यक्रम का केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों को जीवन जीने की कला सिखाता है। यह उन्हें स्पष्ट, सटीक और तार्किक रूप से सोचने में सक्षम बनाता है। चाहे NCF-2005 हो या NEP-2020, सभी ने इस बात पर जोर दिया है कि गणित को 'डरावना' बनाने के बजाय 'आनंददायी' और 'अर्थपूर्ण' बनाया जाए। एक शिक्षक के रूप में, हमारा लक्ष्य बच्चों में 'गणितीयकरण' की क्षमता विकसित करना होना चाहिए, न कि केवल रटे-रटाए सूत्रों का ज्ञान देना।



पाठ्यक्रम में गणित का स्थान

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