स्वतंत्रता के बाद

Sunil Sagare
0

 

1. एक नए और खंडित राष्ट्र का उदय (A New and Divided Nation)

स्वतंत्रता के समय भारत की स्थिति अत्यंत नाजुक थी। देश के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां थीं:

  • शरणार्थी संकट: विभाजन के कारण लगभग 80 लाख (8 Million) शरणार्थी पाकिस्तान से भारत आए थे। इनके रहने और रोजगार का प्रबंध करना एक तत्काल चुनौती थी।

  • रियासतों का विलय: उस समय भारत में लगभग 500 से अधिक देशी रियासतें थीं। इन सभी को नए राष्ट्र में शामिल होने के लिए तैयार करना एक कठिन कार्य था। राजाओं और नवाबों के शासन को लोकतंत्र में बदलना सबसे बड़ी बाधा थी।

  • विविधता में एकता: भारत एक विशाल देश था जहाँ अलग-अलग भाषाएं, धर्म, खान-पान और पहनावा था। इन सभी विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर एक संगठित राष्ट्र बनाना आवश्यक था।

  • आर्थिक पिछड़ापन: स्वतंत्रता के समय भारत की अधिकांश जनसंख्या गांवों में रहती थी और कृषि पर निर्भर थी। मानसून पर निर्भरता के कारण, यदि फसल खराब होती थी, तो नाई, बढ़ई, बुनकर और अन्य कारीगरों पर भी संकट आ जाता था।


2. नए संविधान की रचना (Framing of the Constitution)

भारत के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक लिखित संविधान की आवश्यकता थी।

  • संविधान सभा: संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा का गठन किया गया। इसकी बैठकें नई दिल्ली में हुईं।

  • समय अवधि: संविधान बनने में लगभग 3 साल (सटीक: 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन) का समय लगा।

  • चर्चा और बहस: देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। संविधान सभा की बहसों में विभिन्न विचारधाराओं का समावेश था।

  • स्वीकृति: 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया।

  • लागू होना: 26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ।

3. संविधान की प्रमुख विशेषताएं (Key Features of the Constitution)

CTET परीक्षा के लिए संविधान की विशेषताओं को समझना अनिवार्य है:

A. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)

  • इसका अर्थ है कि सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार होगा, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।

  • क्रांतिकारी कदम: यह एक बहुत बड़ा कदम था क्योंकि इससे पहले भारतीयों को अपना नेता चुनने का अधिकार नहीं था। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी यह अधिकार टुकड़ों में मिला था (पहले संपत्ति वाले पुरुषों को, फिर शिक्षितों को, और अंत में महिलाओं को)।

  • भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद इसे सभी नागरिकों को दे दिया।

  • आयु सीमा: प्रारंभ में मतदान की आयु 21 वर्ष थी, जिसे बाद में घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया (61वें संविधान संशोधन द्वारा)।

B. कानून के समक्ष समानता (Right to Equality)

  • संविधान ने सभी नागरिकों को कानून की नजर में समान माना।

  • धर्म, जाति या लिंग के आधार पर किसी भी भेदभाव को अवैध घोषित किया गया।

  • हिंदू मंदिरों को सभी जातियों (पूर्व में अछूत मानी जाने वाली जातियों सहित) के लिए खोल दिया गया।

C. वंचितों के लिए विशेष अधिकार (Reservation)

  • संविधान निर्माताओं ने महसूस किया कि समाज के कुछ वर्गों (जैसे दलित और आदिवासी) को सदियों से दबाया गया है।

  • केवल 'समानता का अधिकार' देने से उनकी स्थिति नहीं सुधरेगी। इसलिए, विधायिका, सरकारी नौकरियों और शिक्षा में उनके लिए सीटें आरक्षित की गईं।

  • एच.जे. खांडेकर का तर्क: संविधान सभा में एच.जे. खांडेकर ने कहा था कि हरिजनों की अक्षमता के लिए "ऊंची जातियां" जिम्मेदार हैं, जिन्होंने उन्हें हजारों साल तक दबाकर रखा।

  • आदिवासी (ST): आदिवासियों के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की गई ताकि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और वन अधिकारों से वंचित न रखा जाए।


4. शक्तियों का बंटवारा (Division of Powers)

संविधान सभा में इस बात पर लंबी बहस हुई कि केंद्र सरकार के पास ज्यादा ताकत होनी चाहिए या राज्य सरकारों के पास।

  • केंद्र का पक्ष: पंडित नेहरू और अन्य नेताओं का मानना था कि एक मजबूत केंद्र ही देश की सुरक्षा और एकता बनाए रख सकता है।

  • राज्यों का पक्ष: कुछ सदस्यों का मानना था कि अगर प्रांतों (राज्यों) को स्वायत्तता नहीं दी गई, तो उनका विकास रुक जाएगा। मैसूर के एक सदस्य ने चेतावनी दी थी कि अत्यधिक केंद्रीकरण लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है।

समाधान के रूप में, संविधान में विषयों को तीन सूचियों में बांटा गया:

  1. केंद्रीय सूची (Union List):

    • विषय: कराधान (Taxation), रक्षा (Defence), विदेशी मामले (Foreign Affairs), संचार, रेलवे।

    • अधिकार: केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।

  2. राज्य सूची (State List):

    • विषय: कृषि, स्वास्थ्य, पुलिस, जेल।

    • अधिकार: मुख्य रूप से राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं।

  3. समवर्ती सूची (Concurrent List):

    • विषय: वन, शिक्षा, विवाह, उत्तराधिकार।

    • अधिकार: केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं (विवाद की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य होगा)।


5. राजभाषा का मुद्दा (Language Controversy)

संविधान सभा में भाषा का मुद्दा बहुत गरमाया हुआ था।

  • हिंदी बनाम अंग्रेजी: उत्तर भारत के सदस्य हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना चाहते थे। दक्षिण भारत के सदस्यों (जैसे टी.टी. कृष्णमाचारी) ने चेतावनी दी कि अगर उन पर हिंदी थोपी गई, तो वे भारत से अलग हो सकते हैं।

  • समझौता (Compromise):

    • हिंदी को 'राजभाषा' (Official Language) का दर्जा दिया गया, न कि राष्ट्रभाषा का।

    • अदालतों, सेवाओं और विभिन्न राज्यों के बीच संचार के लिए अंग्रेजी का उपयोग जारी रखने का निर्णय लिया गया।

    • संविधान का अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित करता है।


6. डॉ. बी.आर. अंबेडकर की भूमिका

  • डॉ. अंबेडकर को 'संविधान का पिता' कहा जाता है।

  • वे मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे।

  • अंतिम भाषण: संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में उन्होंने कहा था कि राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र भी जरूरी है।

  • प्रसिद्ध कथन: "राजनीति में हमारे पास समानता होगी और सामाजिक व आर्थिक जीवन में असमानता। राजनीति में हम 'एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य' के सिद्धांत को मान्यता देंगे, लेकिन सामाजिक जीवन में हम 'एक व्यक्ति, एक मूल्य' के सिद्धांत को नकारते रहेंगे।"


7. राज्यों का गठन और पुनर्गठन (States Reorganization)

स्वतंत्रता के बाद राज्यों की सीमाएं कैसे तय की जाएं, यह एक बड़ा प्रश्न था।

भाषाई राज्यों की मांग

  • 1920 के दशक में कांग्रेस ने वादा किया था कि आजादी के बाद हर बड़े भाषाई समूह का अपना अलग प्रांत होगा।

  • आजादी के बाद, धर्म के आधार पर विभाजन की त्रासदी को देखते हुए, नेहरू और वल्लभभाई पटेल ने भाषाई राज्यों के गठन को टाल दिया। उन्होंने देश की एकता को प्राथमिकता दी।

  • इस निर्णय से कन्नड़, मलयालम और मराठी भाषी लोगों में असंतोष फैल गया। सबसे तीव्र विरोध तेलुगु भाषी क्षेत्रों (तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी) में हुआ।

पोट्टि श्रीरामुलु और आंध्र प्रदेश

  • तेलुगु भाषियों ने अपने लिए अलग राज्य 'आंध्र' की मांग की।

  • गांधीवादी नेता पोट्टि श्रीरामुलु ने भूख हड़ताल शुरू की।

  • 58 दिनों के अनशन के बाद 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया।

  • उनकी मृत्यु के बाद आंदोलन इतना उग्र हो गया कि सरकार को झुकना पड़ा।

  • 1 अक्टूबर 1953 को 'आंध्र प्रदेश' के रूप में पहला भाषाई राज्य बना।

राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC - 1953)

  • आंध्र के गठन के बाद अन्य भाषाई समूहों ने भी मांगें शुरू कर दीं।

  • सरकार ने 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग (State Reorganization Commission) का गठन किया।

  • अध्यक्ष: फजल अली।

  • रिपोर्ट (1956): आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि असमिया, बांग्ला, उड़िया, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु भाषियों के लिए अलग-अलग राज्यों का गठन किया जाए।

  • उत्तर भारत के विशाल हिंदी भाषी क्षेत्र को भी कई राज्यों में बांटने का सुझाव दिया गया।

  • परिणाम: 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ, जिसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

राज्यों के गठन का कालक्रम (Timeline)

  • 1960: बम्बई प्रांत को विभाजित करके मराठी भाषियों के लिए 'महाराष्ट्र' और गुजराती भाषियों के लिए 'गुजरात' बनाया गया।

  • 1966: पंजाब का विभाजन हुआ। पंजाबी भाषियों के लिए 'पंजाब' और हिंदी/हरियाणवी भाषियों के लिए 'हरियाणा' बना।


8. विकास की योजना (Planning for Development)

गरीबी से मुक्ति और आधुनिक तकनीकी व औद्योगिक आधार तैयार करना नए भारत का प्रमुख लक्ष्य था।

  • योजना आयोग (Planning Commission): 1950 में सरकार ने योजना आयोग की स्थापना की। (अब इसे नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है)।

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy): भारत ने विकास के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था मॉडल चुना।

    • इसमें सरकारी (सार्वजनिक) क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका तय की गई।

    • भारी उद्योगों और बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सरकार की थी।

    • निजी क्षेत्र को छोटे उद्योगों और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया गया।

पंचवर्षीय योजनाएं (Five Year Plans)

  1. प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956):

    • फोकस: कृषि और सिंचाई।

    • उद्देश्य: देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाना।

    • कार्य: भाखड़ा नांगल जैसे विशाल बांध बनाए गए। भूमि सुधार कानूनों पर जोर दिया गया।

  2. द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961):

    • फोकस: भारी उद्योग (Heavy Industries) और विशाल बांध।

    • मॉडल: पी.सी. महालनोबिस मॉडल।

    • कार्य: इस्पात संयंत्रों (Steel Plants) की स्थापना की गई (जैसे भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर)।

    • भिलाई इस्पात संयंत्र सोवियत संघ (USSR) की सहायता से 1959 में स्थापित किया गया।

    • आधुनिक भारत के मंदिर: जवाहरलाल नेहरू ने बांधों और कारखानों को "आधुनिक भारत के मंदिर" कहा था।


9. एक स्वतंत्र विदेश नीति (Independent Foreign Policy)

जब भारत आजाद हुआ, तब द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) समाप्त हो चुका था और शीत युद्ध (Cold War) शुरू हो चुका था। दुनिया दो गुटों में बंट गई थी:

  1. अमेरिका (USA) गुट

  2. सोवियत संघ (USSR) गुट

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM)

  • प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (जो विदेश मंत्री भी थे) ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी।

  • सिद्धांत: भारत किसी भी सैन्य गुट (NATO या Warsaw Pact) में शामिल नहीं होगा। वह दोनों गुटों से समान दूरी बनाए रखेगा और अपनी स्वतंत्र नीति का पालन करेगा।

  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई और शांति स्थापना का प्रयास किया।

  • बांडुंग सम्मेलन (1955): इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एशियाई और अफ्रीकी देशों का सम्मेलन हुआ, जिसने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी।

  • प्रमुख नेता: भारत (नेहरू), यूगोस्लाविया (टीटो), मिस्र (नासिर), इंडोनेशिया (सुकर्णो) और घाना (एनक्रमा)।

  • बेलग्रेड (1961) में गुटनिरपेक्ष देशों का पहला शिखर सम्मेलन हुआ।


10. 60 वर्षों बाद भारत (India After 60+ Years)

स्वतंत्रता के 75+ वर्षों बाद, भारत की उपलब्धियों और विफलताओं का आकलन:

सफलताएं:

  • लोकतंत्र जीवित है: कई भविष्यवाणियों के विपरीत कि भारत टुकड़ों में बिखर जाएगा या सैनिक शासन आ जाएगा, भारत एक सफल लोकतंत्र बना हुआ है।

  • स्वतंत्र प्रेस और न्यायपालिका: देश में एक स्वतंत्र प्रेस और निष्पक्ष न्यायपालिका मौजूद है।

  • विविधता: विभिन्न भाषाओं और धर्मों के लोग एक साथ रह रहे हैं।

चुनौतियां:

  • अस्पृश्यता: संवैधानिक रोक के बावजूद, दलितों और वंचितों के खिलाफ भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • सांप्रदायिकता: धार्मिक समूहों के बीच तनाव की घटनाएं अभी भी होती रहती हैं।

  • आर्थिक असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है। कुछ समूहों ने आर्थिक विकास का लाभ उठाया है, जबकि अन्य अभी भी गरीबी रेखा से नीचे हैं।

  • शहरीकरण: शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ रही है जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।


महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts for Revision)

  • 30 जनवरी 1948: महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे द्वारा की गई।

  • धारा 370: जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद (जिसे अब संशोधित कर दिया गया है)।

  • मैत्री और सहयोग: 1971 में भारत और सोवियत संघ के बीच शांति, मैत्री और सहयोग की संधि हुई।

  • हरित क्रांति (1960 के दशक में): एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में, जिससे भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना।

  • श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में दूध उत्पादन में वृद्धि।

  • सार्क (SAARC): दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, जिसकी स्थापना 1985 में हुई।

निष्कर्ष

स्वतंत्रता के बाद का भारत का इतिहास संघर्षों और उपलब्धियों का मिश्रण है। संविधान ने हमें एक मजबूत ढांचा दिया, लेकिन सामाजिक और आर्थिक समानता के लक्ष्यों को पूरी तरह प्राप्त करना अभी भी एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। CTET अभ्यर्थियों को विशेष रूप से संविधान सभा, भाषाई राज्यों के गठन और पंचवर्षीय योजनाओं के तथ्यों को याद रखना चाहिए।



स्वतंत्रता के बाद

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top