सौरमंडल में पृथ्वी (The Earth in the Solar System)
1. खगोलीय पिंड
सूर्यास्त के बाद आकाश को देखना बहुत रोचक होता है। शुरू में एक या दो चमकते बिंदु दिखते हैं, लेकिन बाद में इनकी संख्या बढ़ जाती है।
सूर्य, चंद्रमा तथा वे सभी वस्तुएं जो रात के समय आसमान में चमकती हैं, खगोलीय पिंड कहलाती हैं।
हमारी पृथ्वी भी इसी विशाल ब्रह्मांड का एक हिस्सा है।
तारे (Stars):
कुछ खगोलीय पिंड बड़े आकार वाले और गर्म होते हैं।
ये गैसों से बने होते हैं।
इनके पास अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता है, जिसे वे बहुत बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं।
इन खगोलीय पिंडों को तारा कहते हैं।
सूर्य भी एक तारा है। यह हमारे सौरमंडल का केंद्र है और पृथ्वी के सबसे निकट का तारा है।
2. नक्षत्रमंडल
रात्रि में आसमान की ओर देखते समय आप तारों के विभिन्न समूहों द्वारा बनाई गई विविध आकृतियों को देख सकते हैं। ये नक्षत्रमंडल कहलाते हैं।
अरसा मेजर (Ursa Major) या बिग बियर (Big Bear) इसी प्रकार का एक नक्षत्रमंडल है।
सप्तर्षि (Saptarishi):
यह सात तारों का समूह है जो कि नक्षत्रमंडल अरसा मेजर का ही भाग है।
यह बहुत आसानी से पहचान में आने वाला नक्षत्रमंडल है।
प्राचीन समय में लोग रात्रि में दिशा का निर्धारण तारों की सहायता से करते थे।
ध्रुव तारा (Pole Star):
उत्तरी तारा उत्तर दिशा को बताता है। इसे ध्रुव तारा भी कहा जाता है।
यह आसमान में हमेशा एक ही स्थान पर रहता है।
हम सप्तर्षि की सहायता से ध्रुव तारे की स्थिति को जान सकते हैं। यदि सप्तर्षि मंडल के संकेतक तारों को आपस में मिलाते हुए एक काल्पनिक रेखा खींची जाए और उसे आगे की ओर बढ़ाया जाए, तो यह ध्रुव तारे की ओर इंगित करेगी।
3. सौरमंडल
सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड (जैसे क्षुद्रग्रह एवं उल्कापिंड) मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते हैं।
हम इसे सौर परिवार का नाम देते हैं, जिसका मुखिया सूर्य है।
सूर्य (The Sun)
सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है।
यह बहुत बड़ा है और अत्यधिक गर्म गैसों (मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम) से बना है।
इसका खिंचाव बल (गुरुत्वाकर्षण) सौरमंडल को बांधे रखता है।
सूर्य, सौरमंडल के लिए प्रकाश एवं ऊष्मा का एकमात्र स्रोत है।
सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है।
प्रकाश की गति:
प्रकाश की गति लगभग
$$3,00,000 \text{ km/s}$$(3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) है।
वैज्ञानिक अंकन में इसे इस प्रकार लिखा जाता है:
$$c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$$इस गति के बावजूद, सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट का समय लगता है।
4. ग्रह
हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं।
सूर्य से दूरी के अनुसार उनका क्रम इस प्रकार है:
बुध (Mercury)
शुक्र (Venus)
पृथ्वी (Earth)
मंगल (Mars)
बृहस्पति (Jupiter)
शनि (Saturn)
यूरेनस (Uranus)
नेपच्यून (Neptune)
याद रखने का तरीका (अंग्रेजी में): My Very Efficient Mother Just Served Us Nuts.
ग्रहों की गति:
सौरमंडल के सभी आठ ग्रह एक निश्चित पथ पर सूर्य का चक्कर लगाते हैं। ये रास्ते दीर्घवृत्ताकार में फैले हुए हैं। इसे कक्षा कहते हैं। अंग्रेजी में इसे Orbit कहा जाता है।
आंतरिक और बाह्य ग्रह (महत्वपूर्ण वर्गीकरण):
| विशेषता | आंतरिक ग्रह (Inner Planets) | बाह्य ग्रह (Outer Planets) |
| निर्माण | ये चट्टानों से बने होते हैं। | ये गैस और तरल पदार्थों से बने होते हैं। |
| स्थिति | ये सूर्य के बहुत नजदीक हैं। | ये सूर्य से बहुत दूर हैं। |
| आकर | आकार में छोटे होते हैं। | आकार में बहुत बड़े होते हैं। |
| ग्रह | बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल | बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून |
5. प्रमुख ग्रहों का विवरण
बुध:
यह सूर्य के सबसे नजदीक है।
अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में इसे केवल 88 दिन लगते हैं।
शुक्र:
इसे पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह माना जाता है, क्योंकि इसका आकार एवं आकृति लगभग पृथ्वी के ही समान है।
यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
पृथ्वी (The Earth):
सूर्य से दूरी के हिसाब से यह तीसरा ग्रह है।
आकार में यह पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है।
यह ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है। यही कारण है कि इसके आकार को भू-आभ कहा जाता है। अंग्रेजी में इस आकार को Geoid कहते हैं।
Geoid का शाब्दिक अर्थ है: पृथ्वी के समान आकार।
अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले रंग की दिखाई पड़ती है क्योंकि इसकी दो-तिहाई सतह पानी से ढकी हुई है। इसलिए इसे नीला ग्रह कहा जाता है।
बृहस्पति:
यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।
शनि:
इसके चारों ओर सुंदर वलय (Rings) पाए जाते हैं।
6. चंद्रमा (The Moon)
हमारी पृथ्वी के पास केवल एक उपग्रह है, जिसका नाम चंद्रमा है।
इसका व्यास पृथ्वी के व्यास का केवल एक-चौथाई है।
$$\text{D}_{\text{moon}} = \frac{1}{4} \times \text{D}_{\text{earth}}$$यह इतना बड़ा इसलिए प्रतीत होता है क्योंकि यह हमारे ग्रह से अन्य खगोलीय पिंडों की अपेक्षा नजदीक है।
यह हम से लगभग 3,84,400 किलोमीटर दूर है।
चंद्रमा की गति:
चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27 दिन में पूरा करता है।
लगभग इतने ही समय में यह अपने अक्ष पर एक चक्कर भी पूरा करता है।
यही कारण है कि पृथ्वी से हमें चंद्रमा का केवल एक ही भाग दिखाई पड़ता है।
चंद्रमा की सतह:
चंद्रमा की परिस्थितियाँ जीवन के लिए अनुकूल नहीं हैं।
इसकी सतह पर पर्वत, मैदान एवं गड्ढे हैं जो चंद्रमा की सतह पर छाया बनाते हैं।
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पर इनकी छाया को देखा जा सकता है।
रोचक तथ्य:
नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 20 जुलाई 1969 को सबसे पहले चंद्रमा की सतह पर कदम रखा।
7. क्षुद्रग्रह (Asteroids)
तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त, असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। इन पिंडों को क्षुद्रग्रह कहते हैं।
ये मंगल एवं बृहस्पति की कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं। (यह प्रश्न CTET में बार-बार पूछा गया है)।
वैज्ञानिकों के अनुसार क्षुद्रग्रह, ग्रह के ही भाग होते हैं, जो कि बहुत वर्ष पहले विस्फोट के बाद ग्रह से टूटकर अलग हो गए थे।
8. उल्कापिंड (Meteoroids)
सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों को उल्कापिंड कहते हैं।
कभी-कभी ये उल्कापिंड पृथ्वी के इतने नजदीक आ जाते हैं कि इनकी प्रवृत्ति पृथ्वी पर गिरने की होती है।
इस प्रक्रिया के दौरान वायु के साथ घर्षण होने के कारण ये गर्म होकर जल जाते हैं। फलस्वरुप, चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है।
कभी-कभी कोई उल्का पूरी तरह जले बिना पृथ्वी पर गिरती है जिससे धरातल पर गड्ढे बन जाते हैं।
9. आकाशगंगा और ब्रह्मांड
क्या आपने तारों वाले खुले आकाश में एक ओर से दूसरी ओर तक फैली चौड़ी सफेद पट्टी की तरह एक चमकदार रास्ते को देखा है? यह लाखों तारों का समूह है। यह पट्टी आकाशगंगा है।
अंग्रेजी में इसे Milky Way Galaxy कहते हैं।
हमारा सौरमंडल इस आकाशगंगा का एक भाग है।
प्राचीन भारत में इसकी कल्पना आकाश में प्रकाश की एक बहती नदी से की गई थी, इस प्रकार इसका नाम आकाशगंगा पड़ा।
लाखों आकाशगंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड (Universe) का निर्माण करती हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य (Quick Revision Points)
पूर्णिमा: पूर्ण चंद्रमा वाली रात। यह महीने में एक बार होती है।
अमावस्या: पंद्रह दिन के बाद आप इसे नहीं देख सकते। यह नए चंद्रमा की रात्रि होती है। ऐसी रात में अगर आसमान साफ है, तो आप आसमान का अवलोकन सबसे अच्छी तरह कर सकते हैं।
शब्द उत्पत्ति:
Geography: एक अंग्रेजी शब्द है। यह ग्रीक भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है पृथ्वी का विवरण। (Ge = पृथ्वी, Graphia = लिखना)।
Geo + Logy = पृथ्वी का अध्ययन।
Geo + Metry = पृथ्वी का मापन।
Geo + Oid = पृथ्वी के आकार के अनुरूप।
ग्रह (Planet): यह अंग्रेजी शब्द है जो ग्रीक भाषा के 'प्लेनेटाइ' (Planetai) शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है 'परिभ्रामक' अर्थात चारों ओर घूमने वाला।
प्लूटो: अगस्त 2006 तक प्लूटो भी एक ग्रह माना जाता था। परंतु अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन ने अपनी बैठक में यह निर्णय लिया कि इसे और खोजे गए अन्य खगोलीय पिंडों (जैसे 2003 UB313) को 'बौने ग्रह' कहा जा सकता है।
CTET गणितीय और वैज्ञानिक विश्लेषण (Science Context)
यदि CTET में विज्ञान के संदर्भ में प्रश्न पूछा जाए, तो निम्नलिखित मान याद रखें:
दूरी का मापन:
खगोलीय दूरियों को मापने के लिए प्रकाश वर्ष (Light Year) का उपयोग होता है।
$$1 \text{ Light Year} = 9.46 \times 10^{12} \text{ km}$$सूर्य का द्रव्यमान:
सूर्य सौरमंडल के कुल द्रव्यमान का लगभग 99.8% हिस्सा है।
घनत्व (Density):
शनि ग्रह का घनत्व पानी से भी कम है। यदि इसे पानी के विशाल महासागर में रखा जाए, तो यह तैरेगा।
$$\text{Density of Saturn} < 1 \text{ g/cm}^3$$परिक्रमण काल तुलना:
$$\begin{array}{l|l} \text{ग्रह का नाम} & \text{सूर्य का एक चक्कर} \\ \hline \text{बुध} & 88 \text{ दिन} \\ \text{पृथ्वी} & 365 \frac{1}{4} \text{ दिन} \\ \end{array}$$
सौरमंडल में पृथ्वी
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