सरकार क्या है?

Sunil Sagare
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1. सरकार का अर्थ और आवश्यकता

हर देश को विभिन्न निर्णय लेने और काम करने के लिए सरकार की ज़रूरत होती है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो देश को चलाती है।

  • परिभाषा: सरकार वह संस्था या एजेंसी है जिसके माध्यम से किसी राजनीतिक इकाई (जैसे देश या राज्य) का शासन चलाया जाता है।

  • निर्णय लेने की शक्ति: सरकार के पास निर्णय लेने और उन निर्णयों को लागू करने का अधिकार होता है।

  • संसाधन प्रबंधन: यह देश के संसाधनों को नियंत्रित करती है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

सरकार के प्रमुख कार्य

सरकार कई तरह के काम करती है, जिन्हें हम निम्नलिखित बिंदुओं में समझ सकते हैं:

  • सामाजिक मुद्दों पर कार्रवाई: जैसे गरीबों के लिए सहायता कार्यक्रम चलाना, शिक्षा की व्यवस्था करना।

  • आवश्यक सेवाएं: डाक और रेल सेवाएं चलाना, बिजली आपूर्ति, पानी की व्यवस्था।

  • कीमत नियंत्रण: जब प्याज या अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बहुत बढ़ जाते हैं, तो उन्हें नियंत्रित करना।

  • सीमा सुरक्षा: देश की सीमाओं की सुरक्षा करना और दूसरे देशों से शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना।

  • आंतरिक सुरक्षा: देश के अंदर शांति और व्यवस्था बनाए रखना।

  • न्याय व्यवस्था: यदि कोई विवाद होता है या कोई अपराध करता है, तो लोग न्यायालय जाते हैं। न्यायालय भी सरकार का ही अंग है।

  • आपदा प्रबंधन: सुनामी या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय पीड़ितों की सहायता करना।


2. सरकार के स्तर (Levels of Government)

भारत एक विशाल देश है, इसलिए सारी व्यवस्था एक ही जगह से नहीं चलाई जा सकती। सरकार मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम करती है:

A. स्थानीय स्तर (Local Level)

  • इसका संबंध आपके गाँव, शहर या मोहल्ले से है।

  • ग्रामीण क्षेत्र: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद।

  • शहरी क्षेत्र: नगर पालिका, नगर निगम।

  • कार्य: स्थानीय साफ-सफाई, सड़कों की रोशनी, स्थानीय डिस्पेंसरी आदि।

B. राज्य स्तर (State Level)

  • इसका संबंध पूरे राज्य को ध्यान में रखने से है।

  • उदाहरण: हरियाणा सरकार, असम सरकार, बिहार सरकार।

  • कार्य: राज्य में शिक्षा (बोर्ड), पुलिस व्यवस्था, राज्य परिवहन, कृषि और सिंचाई आदि।

C. राष्ट्रीय स्तर (National Level)

  • इसका संबंध पूरे देश से होता है।

  • इसे 'केंद्र सरकार' भी कहा जाता है।

  • कार्य: राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, मुद्रा (Currency), रेलवे, और संचार।

नोट: भारत में संघवाद (Federalism) है, जिसका अर्थ है कि देश में एक से अधिक स्तर की सरकारें हैं।


3. सरकार और कानून (Laws and the Government)

सरकार का एक मुख्य काम कानून बनाना है।

  • विधायिका (Legislature): यह कानून बनाती है।

  • कार्यपालिका (Executive): यह कानूनों को लागू करती है।

  • न्यायपालिका (Judiciary): यह कानूनों की व्याख्या करती है और न्याय देती है।

कानून का प्रवर्तन (Enforcement)

सरकार जो कानून बनाती है, वह देश के सभी लोगों पर लागू होता है। बिना कानून के सरकार की निर्णय लेने की शक्ति का कोई मतलब नहीं है।

  • उदाहरण: गाड़ी चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। यदि कोई बिना लाइसेंस गाड़ी चलाता है, तो उसे जेल या जुर्माना हो सकता है।

नागरिकों के अधिकार

अगर लोगों को लगे कि किसी कानून का ढंग से पालन नहीं हो रहा है, तो वे भी न्यायालय जा सकते हैं।

  • उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति को धर्म या जाति के आधार पर नौकरी नहीं दी जाती, तो वह न्यायालय जा सकता है। न्यायालय आदेश दे सकता है कि क्या कदम उठाने चाहिए।


4. सरकार के प्रकार (Types of Government)

दुनिया भर में मुख्य रूप से दो प्रकार की सरकारें पाई जाती हैं:

A. लोकतंत्र (Democracy)

लोकतंत्र में सरकार को शक्ति लोग देते हैं।

  • चुनाव: लोग चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं।

  • जवाबदेही: चुनी हुई सरकार को अपने निर्णयों और कदमों के लिए जनता को सफाई देनी पड़ती है और जवाब देना होता है।

  • भागीदारी: इसमें जनता की भागीदारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से होती है।

  • मुख्य विचार: लोकतंत्र का मूल विचार यह है कि लोग नियमों को बनाने में भागीदार बनकर खुद ही शासन करें।

B. राजतंत्र (Monarchy)

इसमें सरकार चलाने की शक्ति एक अकेले व्यक्ति (राजा या रानी) के हाथ में होती है।

  • उत्तराधिकार: यह पद वंशानुगत होता है। राजा के बाद उसका बेटा या बेटी शासक बनते हैं।

  • सलाहकार: राजा के पास सलाहकारों का एक छोटा समूह हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने की शक्ति उसी के पास रहती है।

  • जवाबदेही का अभाव: राजा या रानी को अपने निर्णयों के लिए लोगों को सफाई देने की ज़रूरत नहीं होती।


5. लोकतांत्रिक सरकार (Democratic Government)

भारत एक लोकतंत्र है। यह उपलब्धि एक लंबी और कठिन लड़ाई का परिणाम है।

प्रतिनिधिक लोकतंत्र (Representative Democracy)

आजकल लोकतंत्र को प्रायः 'प्रतिनिधिक लोकतंत्र' कहा जाता है।

  • प्रक्रिया: इसमें लोग सीधे शासन नहीं करते। वे चुनाव के जरिए अपने प्रतिनिधियों (Representatives) को चुनते हैं।

  • निर्णय: ये प्रतिनिधि मिलकर सारी जनता के लिए निर्णय लेते हैं।

  • आवश्यक शर्त: आज के समय में किसी भी सरकार को तब तक लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता जब तक वह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) की अनुमति न दे।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

  • इसका अर्थ है कि देश के सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार है।

  • भारत में १८ वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी नागरिक (बिना किसी धर्म, जाति, लिंग या शिक्षा के भेदभाव के) वोट दे सकता है।


6. वोट देने का अधिकार: एक ऐतिहासिक संघर्ष

इतिहास में हमेशा से सभी को वोट देने का अधिकार नहीं था। पहले सरकारें केवल उन्हीं पुरुषों को वोट देने देती थीं जो:

  1. पढ़े-लिखे थे।

  2. जिनके पास अपनी संपत्ति थी।

इसका मतलब था कि औरतों, गरीबों और अशिक्षितों को वोट देने का अधिकार नहीं था। ऐसी स्थिति में देश उन नियमों से चलता था जो ये गिने-चुने पुरुष बनाते थे।

सफ्रेज मूवमेंट (Suffrage Movement)

महिलाओं द्वारा मताधिकार के लिए किए गए संघर्ष को 'सफ्रेज मूवमेंट' कहते हैं। 'Suffrage' का मतलब है 'वोट देने का अधिकार'।

  • प्रथम विश्व युद्ध: इस दौरान यह आंदोलन और मजबूत हुआ। जब पुरुष युद्ध पर गए, तो महिलाओं ने उन कामों को संभाला जिन्हें पहले पुरुषों का काम माना जाता था। इससे यह रूढ़िवादी धारणा टूटी कि महिलाएं निर्णय नहीं ले सकतीं।

  • मांग: महिलाओं ने समान रूप से वोट देने के अधिकार की मांग की। उन्होंने खुद को लोहे की जंजीरों से बांधकर प्रदर्शन किया। कई क्रांतिकारी महिलाएं जेल गईं और भूख हड़ताल पर बैठीं।

मताधिकार प्राप्ति की समयरेखा

  • अमेरिका: १९२० में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।

  • इंग्लैंड (UK): १९२८ में महिलाओं को बराबरी के आधार पर वोट देने का अधिकार मिला।


7. यंग इंडिया और गांधीजी के विचार

स्वतंत्रता से पहले भारत में भी केवल कुछ ही लोगों को वोट देने का अधिकार था। गांधीजी और अन्य नेताओं ने इस अन्याय का विरोध किया।

१९३१ में 'यंग इंडिया' पत्रिका में गांधीजी ने लिखा:

"मैं यह विचार सहन नहीं कर सकता कि जिस आदमी के पास संपत्ति है वह वोट दे सकता है, लेकिन वह आदमी जिसके पास चरित्र है पर संपत्ति या शिक्षा नहीं, वह वोट नहीं दे सकता, या जो दिन भर अपना पसीना बहाकर ईमानदारी से काम करता है, वह वोट नहीं दे सकता क्योंकि उसने गरीब आदमी होने का गुनाह किया है।"


8. दक्षिण अफ्रीका और रंगभेद (Apartheid)

लोकतंत्र की समझ के लिए दक्षिण अफ्रीका का संघर्ष जानना आवश्यक है (NCERT कक्षा ६ का महत्वपूर्ण हिस्सा)।

  • रंगभेद कानून: दक्षिण अफ्रीका पहले रंगभेद कानूनों से शासित था। लोगों को उनकी त्वचा के रंग के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया था (श्वेत, अश्वेत, भारतीय और अन्य)।

  • भेदभाव: अश्वेत लोगों को श्वेत लोगों के इलाकों में रहने की इजाजत नहीं थी। उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था। अस्पताल, गाड़ियां, और बसें भी अलग-अलग थीं।

  • अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (ANC): नेलसन मंडेला और उनके साथियों ने इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ लंबा संघर्ष किया।

  • लोकतंत्र: अंततः १९९४ में दक्षिण अफ्रीका एक लोकतांत्रिक देश बना और सभी प्रजातियों के लोगों को बराबर माना गया।


9. लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्त्व (Key Elements)

लोकतांत्रिक सरकार के सफल संचालन के लिए कुछ मुख्य तत्त्व आवश्यक हैं:

  1. भागीदारी (Participation): चुनाव के माध्यम से, और चुनाव के बाद सरकार के कार्यों में रुचि लेकर (धरना, जुलूस, हस्ताक्षर अभियान आदि)।

  2. विवादों का समाधान: सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विभिन्न समुदायों के बीच विवादों (जैसे नदी जल विवाद, धार्मिक जुलूस का रास्ता) का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से करे।

    • उदाहरण: कावेरी नदी जल विवाद (कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच)।

  3. समानता और न्याय (Equality and Justice): लोकतंत्र में समानता और न्याय को अलग नहीं किया जा सकता। छुआछूत की प्रथा अब कानूनन बंद कर दी गई है। सरकार विशेष समूहों (लड़कियों, दलितों) के लिए विशेष प्रावधान करती है ताकि समानता स्थापित हो सके।


10. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (CTET Quick Facts)

  1. सरकार के अंग: विधायिका (कानून बनाना), कार्यपालिका (लागू करना), न्यायपालिका (न्याय करना)।

  2. कावेरी नदी विवाद: कृष्णा सागर बांध (कर्नाटक) और मेट्टूर बांध (तमिलनाडु) के पानी के बंटवारे से जुड़ा है।

  3. जनतंत्र: लोकतंत्र का ही दूसरा नाम है।

  4. तानाशाही (Dictatorship): इसमें एक व्यक्ति के पास निरंकुश शक्तियां होती हैं, यह लोकतंत्र का उल्टा है।

  5. वयस्क मताधिकार की आयु: भारत में पहले २१ वर्ष थी, जिसे ६१वें संविधान संशोधन (१९८९) द्वारा घटाकर १८ वर्ष कर दिया गया।



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