पर्यावरण अध्ययन: शिक्षण शास्त्र और अध्यापन विधियाँ

Sunil Sagare
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 पर्यावरण अध्ययन (EVS) केवल तथ्यों को रटने का विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों को उनके प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश से जोड़ने का एक माध्यम है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर EVS का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा, अवलोकन और अन्वेषण की क्षमता विकसित करना है। एक शिक्षक के रूप में, सही शिक्षण विधि का चुनाव करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विषय वस्तु का ज्ञान होना।


1. विश्लेषण और संश्लेषण विधि (Analysis and Synthesis Method)

यह दोनों विधियाँ एक-दूसरे की पूरक मानी जाती हैं। गणित और विज्ञान के साथ-साथ पर्यावरण अध्ययन में भी इनका विशेष महत्व है।

1.1 विश्लेषण विधि (Analysis Method)

इस विधि का मूल मंत्र है किसी भी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर समझना।

  • मूल सिद्धांत:

    • Unknown to Known: इसमें हम 'अज्ञात से ज्ञात' की ओर बढ़ते हैं।

    • छात्र समस्या की तह तक जाने के लिए उसे विभक्त करते हैं।

  • प्रक्रिया:

    • समस्या प्रस्तुतीकरण।

    • समस्या को छोटे अवयवों (Parts) में विभाजित करना।

    • प्रत्येक भाग का तर्कपूर्ण अध्ययन करना।

  • उदाहरण:

    • यदि हमें 'प्रदूषित जल' के बारे में पढ़ाना है, तो हम सीधे प्रदूषण नहीं रटाएंगे। हम पहले पानी के घटकों का विश्लेषण करेंगे, फिर उसमें मिले अशुद्ध तत्वों (रेत, रसायन) को अलग-अलग समझेंगे।

  • गुण (Merits):

    • यह अन्वेषण (Discovery) की एक प्रबल विधि है।

    • इससे छात्रों में तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

    • अर्जित ज्ञान स्थायी होता है क्योंकि बच्चे स्वयं निष्कर्ष निकालते हैं।

  • दोष (Demerits):

    • यह अधिक समय लेने वाली विधि है।

    • छोटी कक्षाओं के लिए कभी-कभी यह नीरस हो सकती है।

1.2 संश्लेषण विधि (Synthesis Method)

यह विश्लेषण के ठीक विपरीत है। इसमें अलग-अलग जानकारियों को जोड़कर एक समग्र रूप दिया जाता है।

  • मूल सिद्धांत:

    • Known to Unknown: इसमें हम 'ज्ञात से अज्ञात' की ओर बढ़ते हैं।

    • खंडों में प्राप्त ज्ञान को जोड़कर एक निष्कर्ष (Conclusion) बनाया जाता है।

  • उदाहरण:

    • विश्लेषण विधि में हमने जाना कि पानी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन है। संश्लेषण विधि में हम $H_2 + O \rightarrow H_2O$ के रूप में इसे एक साथ लाकर जल का निर्माण समझते हैं।

    • EVS में: मिट्टी, पानी और बीज के अलग-अलग महत्व को जानने के बाद, उन्हें मिलाकर 'पौधा रोपण' की पूरी प्रक्रिया को समझना।

  • गुण:

    • यह विधि सरल और संक्षिप्त है।

    • सिलेबस जल्दी पूरा करने में सहायक है।

    • मंदबुद्धि छात्रों के लिए भी उपयोगी है क्योंकि उन्हें सीधे निष्कर्ष या नियम मिलते हैं।

  • दोष:

    • इससे रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) को बढ़ावा मिल सकता है।

    • छात्रों की तर्क शक्ति का पूर्ण विकास नहीं होता।


2. आगमन और निगमन विधि (Inductive and Deductive Method)

अरस्तू (Aristotle) द्वारा प्रतिपादित ये विधियाँ शिक्षण शास्त्र का आधार स्तंभ हैं।

2.1 आगमन विधि (Inductive Method)

यह प्राथमिक स्तर और EVS शिक्षण के लिए सर्वोत्तम विधि मानी जाती है। यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है।

  • शिक्षण सूत्र (Teaching Maxims):

    • Specific to General: विशिष्ट उदाहरणों से सामान्य नियम की ओर।

    • Concrete to Abstract: स्थूल (मूर्त) से सूक्ष्म (अमूर्त) की ओर।

    • Known to Unknown: ज्ञात से अज्ञात की ओर।

  • चरण (Steps):

    1. उदाहरण: बच्चों के सामने विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत करना (जैसे- अलग-अलग पक्षियों के घोंसले दिखाना)।

    2. निरीक्षण (Observation): बच्चे उन उदाहरणों में समानता खोजते हैं।

    3. सामान्यीकरण (Generalization): बच्चे स्वयं एक नियम बनाते हैं (जैसे- सभी पक्षी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं)।

    4. सत्यापन: अन्य उदाहरणों से नियम की जाँच करना।

  • लाभ:

    • बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और 'करके सीखने' (Learning by doing) की भावना विकसित होती है।

    • ज्ञान रटा नहीं जाता, बल्कि समझा जाता है।

    • आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

  • सीमाएँ:

    • धीमी प्रक्रिया है, पाठ्यक्रम पूरा करने में समय लगता है।

    • अनुभवी शिक्षक की आवश्यकता होती है।

2.2 निगमन विधि (Deductive Method)

यह आगमन की विपरीत प्रक्रिया है। इसमें पहले नियम बताया जाता है और फिर उदाहरण दिए जाते हैं।

  • शिक्षण सूत्र:

    • General to Specific: सामान्य नियम से विशिष्ट उदाहरण की ओर।

    • Abstract to Concrete: सूक्ष्म से स्थूल की ओर।

  • प्रक्रिया:

    • शिक्षक कक्षा में आते ही परिभाषा या सूत्र (Formula) बता देते हैं।

    • उसके बाद उस सूत्र को सिद्ध करने के लिए उदाहरण दिए जाते हैं।

    • जैसे: पहले बताना कि "पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं", फिर प्रयोग करके दिखाना।

  • लाभ:

    • उच्च कक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी।

    • समय और शक्ति की बचत होती है।

    • स्मरण शक्ति का विकास होता है।

  • दोष:

    • यह रटने पर बल देती है।

    • इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) का विकास नहीं होता।

    • छोटी कक्षाओं में बच्चे अवधारणा को समझे बिना ही रट लेते हैं।


3. अन्वेषण या ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic Method)

  • जनक: एच. ई. आर्मस्ट्रांग (H.E. Armstrong)।

  • शाब्दिक अर्थ: यह ग्रीक शब्द 'Heurisco' से बना है जिसका अर्थ है "मैं खोजता हूँ" (I find out)।

मुख्य विशेषताएँ:

  • इस विधि में छात्र एक खोजकर्ता (Discoverer) के रूप में कार्य करता है।

  • शिक्षक का कार्य केवल मार्गदर्शक (Guide) का होता है, वह उत्तर नहीं बताता बल्कि उत्तर तक पहुँचने का रास्ता दिखाता है।

  • यह हर्बर्ट स्पेंसर के इस कथन पर आधारित है: "बच्चों को कम से कम बताया जाए और उन्हें अधिक से अधिक खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।"

प्रक्रिया के चरण:

  1. समस्या प्रस्तुति: शिक्षक एक व्यावहारिक समस्या देता है (जैसे- पौधे धूप में ही क्यों बढ़ते हैं?)।

  2. तथ्य संकलन: छात्र पुस्तकालय, इंटरनेट या अवलोकन से जानकारी जुटाते हैं।

  3. परिकल्पना (Hypothesis): छात्र संभावित उत्तर का अनुमान लगाते हैं।

  4. परीक्षण: प्रयोग द्वारा जाँच करना।

  5. निष्कर्ष: अंतिम नियम बनाना।

EVS में उपयोगिता:

  • यह बच्चों में Problem Solving Skill विकसित करती है।

  • बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं।

  • हालाँकि, यह विधि खर्चीली हो सकती है और इसके लिए प्रयोगशाला या विशेष उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है।


4. प्रोजेक्ट या परियोजना विधि (Project Method)

  • प्रवर्तक: किलपैट्रिक (W.H. Kilpatrick) - ये जॉन डीवी के शिष्य थे।

  • सिद्धांत: यह 'प्रयोजनवाद' (Pragmatism) और 'Learning by Doing' पर आधारित है।

परिभाषा:

"प्रोजेक्ट वह उद्देश्यपूर्ण कार्य है जिसे सामाजिक वातावरण में पूर्ण संलग्नता के साथ किया जाए।"

चरण (Steps):

  1. परिस्थिति निर्माण (Creating Situation): बच्चों को ऐसी स्थिति देना जहाँ उन्हें समस्या महसूस हो।

  2. चयन (Selection): प्रोजेक्ट के विषय का चुनाव करना (जैसे- 'जल संरक्षण' या 'कचरा प्रबंधन')।

  3. योजना (Planning): कैसे करना है, किसकी क्या जिम्मेदारी होगी।

  4. क्रियान्वयन (Execution): योजना के अनुसार कार्य करना (सर्वे करना, डेटा जुटाना)।

  5. मूल्यांकन (Evaluation): कार्य कितना सफल रहा, इसकी समीक्षा करना।

  6. रिकॉर्डिंग (Recording): पूरी प्रक्रिया का दस्तावेज तैयार करना।

EVS में महत्व:

  • यह सामूहिक कार्य (Group Work) को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक गुणों का विकास होता है।

  • यह वास्तविक जीवन (Real Life) से जुड़ी होती है।

  • विषयगत सीमाओं को तोड़ती है (एकीकृत अधिगम)।


5. क्षेत्र भ्रमण विधि (Field Trip / Excursion Method)

पर्यावरण अध्ययन के लिए यह सबसे जीवंत और प्रभावी विधि है। कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना ही इसका उद्देश्य है।

क्यों आवश्यक है? (Importance)

  • प्रत्यक्ष अनुभव (Direct Experience): बच्चे चीजों को अपनी आँखों से देखते हैं, स्पर्श करते हैं और महसूस करते हैं।

  • रटने से मुक्ति: जब बच्चा चिड़ियाघर में शेर देखता है या खेत में फसल देखता है, तो उसे रटने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • निरीक्षण शक्ति: अवलोकन कौशल (Observation Skill) का विकास होता है।

  • सहयोग: यात्रा के दौरान बच्चे मिल-जुल कर रहना और एक-दूसरे की मदद करना सीखते हैं।

भ्रमण के प्रकार:

  • लघु भ्रमण: स्कूल के बगीचे या पास के पार्क तक जाना।

  • सामुदायिक भ्रमण: डाकघर, बैंक, अस्पताल या पुलिस स्टेशन जाकर उनकी कार्यप्रणाली समझना।

  • शैक्षिक यात्रा: किसी ऐतिहासिक स्थल, म्यूजियम या अभ्यारण्य की यात्रा।

शिक्षक की भूमिका:

  • भ्रमण केवल मनोरंजन नहीं होना चाहिए।

  • भ्रमण से पहले स्पष्ट उद्देश्य तय होने चाहिए।

  • भ्रमण के बाद कक्षा में उस पर चर्चा (Discussion) अनिवार्य होनी चाहिए।


6. कहानी कथन विधि (Storytelling Method)

प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर EVS पढ़ाने के लिए यह सबसे लोकप्रिय विधि है।

उपयोगिता:

  • संदर्भ (Context): कहानियाँ बच्चों को एक संदर्भ प्रदान करती हैं जिससे वे कठिन अवधारणाओं को भी आसानी से समझ सकते हैं।

  • कल्पनाशीलता (Imagination): यह बच्चों की कल्पनाशक्ति को उड़ान देती है।

  • रुचि: कक्षा में नीरसता खत्म होती है और बच्चे आनंद लेते हैं।

  • मूल्य शिक्षा: कहानियों के माध्यम से पर्यावरण संवेदनशीलता, सहानुभूति और नैतिकता सिखाई जा सकती है।

ध्यान देने योग्य बातें:

  • कहानी बच्चों के परिवेश से जुड़ी होनी चाहिए।

  • कहानी में लिंग-भेद या रूढ़िवादिता (Stereotypes) नहीं होनी चाहिए।

  • कहानी के अंत में प्रश्न पूछकर बच्चों की समझ की जाँच करनी चाहिए।


7. समस्या समाधान विधि (Problem Solving Method)

यह विधि बच्चों को मानसिक रूप से चुनौती देती है। इसमें जीवन की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक ढंग से हल ढूँढा जाता है।

  • प्रक्रिया:

    1. समस्या की पहचान।

    2. आंकड़ों का संग्रह।

    3. विश्लेषण।

    4. समाधान तक पहुँचना।

  • EVS में उदाहरण: "हमारे स्कूल के नल से पानी क्यों टपक रहा है?" या "बारिश के बाद सड़कों पर पानी क्यों भर जाता है?"

  • यह विधि बच्चों को Critical Thinking (आलोचनात्मक चिंतन) की ओर ले जाती है।


8. चर्चा और संवाद विधि (Discussion Method)

NCF 2005 इस बात पर बहुत जोर देता है कि बच्चे अपने विचार व्यक्त करें।

  • महत्व:

    • बच्चे एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं (Peer Learning)।

    • अभिव्यक्ति की क्षमता (Communication Skill) बेहतर होती है।

    • विविध दृष्टिकोणों का सम्मान करना सीखते हैं।

  • शिक्षक का कार्य: चर्चा को सही दिशा देना और यह सुनिश्चित करना कि हर बच्चे को बोलने का मौका मिले।

  • विषय: सामाजिक मुद्दे जैसे- 'लड़कों और लड़कियों के काम', 'जंगल की कटाई', 'प्लास्टिक का उपयोग'।


9. विज्ञान क्लब और प्रदर्शनी (Science Club & Exhibitions)

कक्षा शिक्षण के अलावा, पाठ्य-सहगामी क्रियाएँ (Co-curricular activities) भी EVS शिक्षण का अभिन्न अंग हैं।

विज्ञान क्लब (Science Club):

  • यह छात्रों का एक अनौपचारिक समूह होता है।

  • क्रियाकलाप: विज्ञान प्रश्नोत्तरी (Quiz), पोस्टर मेकिंग, मॉडल बनाना, वाद-विवाद प्रतियोगिता।

  • उद्देश्य: छात्रों में वैज्ञानिक अभिरुचि और रचनात्मकता (Creativity) को बढ़ावा देना।

विज्ञान प्रदर्शनी (Science Exhibition):

  • बच्चे अपने बनाए मॉडल और प्रोजेक्ट प्रदर्शित करते हैं।

  • इससे उन्हें अपनी मेहनत को प्रस्तुत करने का मंच मिलता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।


10. सर्वेक्षण विधि (Survey Method)

यह विधि बच्चों को समुदाय (Community) के साथ जोड़ती है।

  • कार्यप्रणाली: बच्चों को समूहों में बांटकर किसी विशेष विषय पर डेटा इकट्ठा करने के लिए भेजा जाता है।

  • उदाहरण: "आपके पड़ोस में कितने घरों में बारिश का पानी इकट्ठा किया जाता है?" या "लोग कौन-कौन से ईंधन का उपयोग करते हैं?"

  • सीख: डेटा हैंडलिंग, लोगों से बातचीत करने का कौशल (Interpersonal Skills) और वास्तविकता की समझ।


महत्वपूर्ण बिंदु: एक नज़र में (Quick Revision Notes)

  • बाल-केंद्रित शिक्षा (Child-Centered): सभी विधियाँ ऐसी होनी चाहिए जिनमें बच्चा सक्रिय (Active) हो, न कि मूक श्रोता।

  • करके सीखना (Learning by Doing): EVS का मूल मंत्र है।

  • एकीकृत उपागम (Integrated Approach): EVS को विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा के मिश्रण के रूप में पढ़ाया जाता है। कक्षा 1 और 2 में इसे भाषा और गणित के माध्यम से पढ़ाया जाता है।

  • मूल्यांकन (Assessment): EVS में केवल लिखित परीक्षा नहीं होनी चाहिए। अवलोकन, पोर्टफोलियो, चेकलिस्ट और रेटिंग स्केल का उपयोग करना चाहिए।

  • TLM (Teaching Learning Material): वास्तविक वस्तुएं (Realia), चार्ट, मानचित्र और स्थानीय संसाधनों का प्रयोग सबसे प्रभावी होता है।


निष्कर्ष

एक कुशल शिक्षक वह है जो स्थिति, विषय-वस्तु और छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार इन विधियों का मिश्रण (Mix) प्रयोग करे। उदाहरण के लिए, 'पौधों' के बारे में पढ़ाते समय भ्रमण विधि का उपयोग करें, 'प्रदूषण' पढ़ाते समय प्रोजेक्ट विधि का और 'जल चक्र' समझाते समय आगमन विधि या कहानी का सहारा लें। लक्ष्य हमेशा बच्चे का सर्वांगीण विकास और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाना होना चाहिए।



र्यावरण अध्ययन: शिक्षण शास्त्र और अध्यापन विधियाँ

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