समानता

Sunil Sagare
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1. लोकतंत्र और समानता: एक परिचय

लोकतंत्र में समानता केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि शासन की रीढ़ है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान मानता है।

  • लोकतंत्र की मुख्य विशेषता: समानता लोकतंत्र का केंद्रीय पहलू है। यह इसकी कार्यप्रणाली के सभी पहलुओं को प्रभावित करती है।

  • संवैधानिक स्थिति: इसका अर्थ है कि देश के प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, किसी भी जाति, धर्म, शैक्षिक या आर्थिक पृष्ठभूमि का हो, सब समान माने जाएंगे।

  • वास्तविकता: संविधान में समानता स्वीकार किए जाने के बावजूद, भारतीय समाज में असमानता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन कानूनन भेदभाव करना अपराध है।

2. मताधिकार की समानता (Universal Adult Franchise)

लोकतांत्रिक सरकार के गठन में सबसे पहला कदम समान मताधिकार है।

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: भारत में $18$ वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार है।

  • आधार: यह अधिकार धर्म, जाति, शिक्षा, या अमीरी-गरीबी के आधार पर भेदभाव नहीं करता।

  • समानता का विचार: यह इस विचार पर आधारित है कि एक गरीब मजदूर का वोट और एक अमीर उद्योगपति का वोट समान मूल्य रखता है।

NCERT केस स्टडी: कांता की कहानी

  • परिदृश्य: कांता एक घरेलू कामगार है जो चुनाव के दिन वोट देने के लिए लाइन में खड़ी है।

  • समानता का अनुभव: लाइन में उसके साथ उसके मालिक (जैन साहब) भी खड़े हैं। यहाँ उसे लगता है कि वह और उसके मालिक समान हैं क्योंकि दोनों के पास $1$ वोट है।

  • असमानता का अनुभव: शाम को जब उसकी बेटी बीमार होती है, तो उसे सरकारी अस्पताल की लंबी लाइन में लगना पड़ता है, जबकि अमीर लोग निजी अस्पतालों में जल्दी इलाज करा लेते हैं।

  • निष्कर्ष: कांता के पास 'राजनीतिक समानता' है, लेकिन 'आर्थिक समानता' नहीं है।

3. असमानता के अन्य रूप (जाति और धर्म)

भारत में असमानता का सबसे सामान्य रूप जाति व्यवस्था है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह अलग-अलग रूपों में विद्यमान है।

A. जातिगत असमानता: ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी

  • पुस्तक: 'जूठन' (आत्मकथा)।

  • लेखक: ओमप्रकाश वाल्मीकि (प्रसिद्ध दलित लेखक)।

  • घटना: स्कूल में हेडमास्टर ने उनसे पढ़ने के बजाय पूरे स्कूल और खेल के मैदान में झाड़ू लगवाई। अन्य बच्चे पढ़ रहे थे, जबकि वे सफाई कर रहे थे।

  • प्रभाव: यह घटना दर्शाती है कि जाति के आधार पर बच्चे की गरिमा को कैसे चोट पहुंचाई गई। उन्हें पानी पीने तक की अनुमति नहीं थी।

  • CTET महत्वपूर्ण बिंदु: यह उदाहरण 'हाशिए के समूहों' (Marginalized groups) के प्रति भेदभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

B. धार्मिक असमानता: अंसारी दंपत्ति की कहानी

  • घटना: श्री और श्रीमती अंसारी शहर में किराए पर मकान ढूंढ रहे थे। उनके पास पैसे थे, इसलिए किराया समस्या नहीं थी।

  • भेदभाव: मकान मालकिन ने उनका नाम (मुस्लिम धर्म) सुनकर बहाना बनाया कि वह मांसाहारी लोगों को घर नहीं देती, जबकि पड़ोस से मछली पकने की गंध आ रही थी।

  • गरिमा को चोट: प्रॉपर्टी डीलर ने उन्हें अपना नाम बदलकर 'श्री और श्रीमती कुमार' करने का सुझाव दिया।

  • निष्कर्ष: अंसारी दंपत्ति ने आत्म-सम्मान (गरिमा) के कारण नाम बदलने से मना कर दिया। यहाँ भेदभाव का आधार 'धर्म' था।

4. मानवीय गरिमा (Dignity) का मूल्य

जब लोगों के साथ असमानता का व्यवहार होता है, तो उनकी गरिमा को ठेस पहुँचती है।

  • परिभाषा: गरिमा का अर्थ है अपने आप को और दूसरों को सम्मान योग्य समझना।

  • संवैधानिक मूल्य: प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान और गरिमा का अधिकारी है।

  • ओमप्रकाश और अंसारी का विश्लेषण:

    • ओमप्रकाश वाल्मीकि को उनकी जाति के कारण नीचा दिखाया गया।

    • अंसारी दंपत्ति को उनके धर्म के कारण आवास से वंचित रखा गया।

    • कानून के अनुसार, दोनों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए था।

5. भारतीय संविधान में समानता के प्रावधान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद $15$ (Article 15) समानता सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अनुच्छेद $14$ से $18$ तक मौलिक अधिकारों के अंतर्गत 'समानता का अधिकार' (Right to Equality) दिया गया है।

मुख्य संवैधानिक प्रावधान:

  1. कानून के समक्ष समानता (Article 14): हर व्यक्ति, चाहे वह राष्ट्रपति हो या कांता जैसी कामगार, सभी को एक ही कानून का पालन करना होगा। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

  2. भेदभाव का निषेध (Article 15): राज्य किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।

    • दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश।

    • कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों का उपयोग।

  3. अवसर की समानता (Article 16): सरकारी नौकरियों में सभी नागरिकों को समान अवसर मिलेंगे। (आरक्षण इसका अपवाद नहीं, बल्कि समानता लाने का एक उपाय है)।

  4. अस्पृश्यता का अंत (Article 17): छुआछूत को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया है। इसका किसी भी रूप में आचरण दंडनीय अपराध है।

  5. उपाधियों का अंत (Article 18): सेना और विद्या संबंधी सम्मान के अलावा अन्य उपाधियाँ समाप्त कर दी गई हैं।

6. समानता लागू करने के सरकारी प्रयास

सरकार समानता को दो मुख्य तरीकों से लागू करती है:

  1. कानून बनाकर।

  2. योजनाओं और कार्यक्रमों द्वारा।

मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme)

यह समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

  • परिचय: सभी सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना।

  • इतिहास: भारत में सबसे पहले तमिलनाडु राज्य ने इस योजना को $2001$ में शुरू किया।

  • सर्वोच्च न्यायालय का आदेश: $2001$ में ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को इसे $6$ महीने के भीतर शुरू करने का आदेश दिया।

समानता पर इसका सकारात्मक प्रभाव:

  1. जातिगत पूर्वाग्रह में कमी: स्कूल में सभी जातियों (उच्च और निम्न) के बच्चे साथ बैठकर खाना खाते हैं। कई स्थानों पर दलित महिलाओं को खाना पकाने (रसोइया) के लिए रखा गया है।

  2. उपस्थिति में सुधार: गरीब बच्चे जो पहले भोजन के लिए घर जाते थे और वापस नहीं आते थे, अब स्कूल में रुकते हैं। इससे उनका 'नामांकन' और 'उपस्थिति' बढ़ी है।

  3. माता-पिता को राहत: कामकाजी माताओं को अपना काम छोड़कर बच्चों को खाना खिलाने घर नहीं आना पड़ता।

  4. भुखमरी में कमी: यह गरीब बच्चों की भूख मिटाने में मदद करता है जो अक्सर खाली पेट स्कूल आते थे और पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे।

7. अन्य लोकतंत्रों में समानता के मुद्दे (वैश्विक संदर्भ)

समानता के लिए संघर्ष केवल भारत तक सीमित नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का उदाहरण CTET के लिए महत्वपूर्ण है।

नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) - USA

  • पृष्ठभूमि: अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकन (जिनके पूर्वज गुलाम थे) के साथ बहुत भेदभाव होता था। उन्हें 'गोरे' लोगों से अलग रहना पड़ता था।

  • रोजा पार्क्स (Rosa Parks): $1$ दिसंबर $1955$ को एक अफ्रीकी-अमेरिकन महिला, रोजा पार्क्स ने बस में अपनी सीट एक गोरे व्यक्ति को देने से मना कर दिया।

  • परिणाम: उनके इस इनकार से एक विशाल आंदोलन शुरू हुआ जिसे 'नागरिक अधिकार आंदोलन' कहा जाता है।

  • नागरिक अधिकार अधिनियम (Civil Rights Act), $1964$: इस कानून ने नस्ल, धर्म और राष्ट्रीय मूल के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित कर दिया। इसने स्कूलों में भी अलगाव (Segregation) को समाप्त किया।

8. विकलांगता और समानता (Disability Rights)

समानता का दायरा शारीरिक रूप से अक्षम लोगों तक भी विस्तृत है।

  • RPWD Act $2016$: 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम' $2016$ (Rights of Persons with Disabilities Act).

  • प्रावधान:

    • दिव्यांग व्यक्तियों को समान अधिकार प्राप्त हैं।

    • सरकार को उनकी पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

    • सुगम्य वातावरण (जैसे स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में रैंप/ढलान) अनिवार्य है।

  • उदाहरण: यदि कोई बच्चा व्हीलचेयर के कारण सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सकता और स्कूल में रैंप नहीं है, तो यह उसके गरिमा और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

9. शिक्षण शास्त्र (Pedagogy): समानता को कक्षा में कैसे पढ़ाएं?

CTET में यह खंड सबसे महत्वपूर्ण है। एक शिक्षक के रूप में आपको समानता के विषय को संवेदनशीलता से पढ़ाना चाहिए।

  • मूर्त उदाहरण: छात्रों के दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों का प्रयोग करें (जैसे खेल का मैदान, पानी पीने की जगह)।

  • केस स्टडी का प्रयोग: ओमप्रकाश वाल्मीकि या कांता की कहानियों का उपयोग करके छात्रों में सहानुभूति (Empathy) विकसित करें।

  • चर्चा विधि: "अगर आप अंसारी की जगह होते तो कैसा महसूस करते?" जैसे प्रश्न पूछें।

  • गरिमा का सम्मान: कक्षा में किसी भी समुदाय या समूह के प्रति नकारात्मक टिप्पणी को तुरंत रोकें और संविधान के मूल्यों को स्थापित करें।

  • संवैधानिक साक्षरता: बच्चों को बताएं कि समानता 'उपहार' नहीं बल्कि उनका 'अधिकार' है।

10. मुख्य तथ्य और शब्दावली (सारांश)

  • दलित: इसका अर्थ है 'कुचला हुआ' या 'टूटा हुआ'। इस शब्द का प्रयोग नीची कही जाने वाली जातियों ने अपनी पहचान और संघर्ष को दर्शाने के लिए किया है।

  • संवैधानिक उपचार: यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसके मौलिक अधिकारों (जैसे समानता) का हनन हुआ है, तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है।

  • संसद: भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है, जहाँ जनता के प्रतिनिधि कानून बनाते हैं। संसद में सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व होता है।

  • लैंगिक समानता: सतत विकास लक्ष्य (SDG) $5$ में लैंगिक समानता की बात की गई है।


निष्कर्ष:

समानता लोकतंत्र की आत्मा है। हालाँकि कानून बन गए हैं, लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण बदलने में समय लगता है। एक शिक्षक के रूप में, यह हमारा कर्तव्य है कि हम भावी पीढ़ी को समानता और न्याय के मूल्यों के साथ बड़ा करें।



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