1. मूल्यांकन क्या है? (What is Evaluation?)
मूल्यांकन केवल परीक्षा लेना या अंक देना नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) में मूल्यांकन का अर्थ यह जाँचने से है कि बच्चे ने क्या सीखा, कितना सीखा और उसे सीखने में कहाँ कठिनाई आ रही है।
परिभाषा: मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम यह जानते हैं कि शिक्षण उद्देश्य किस सीमा तक प्राप्त हुए हैं।
टॉरगर्सन एवं एडम्स के अनुसार: किसी प्रक्रिया या वस्तु के महत्व को निर्धारित करना ही मूल्यांकन है।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की उपलब्धियों में सुधार लाना और उन्हें अगली कक्षा के लिए तैयार करना है।
शिक्षण का अभिन्न अंग: मूल्यांकन शिक्षा से अलग नहीं है, बल्कि यह शिक्षण प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है।
मापन और मूल्यांकन में अंतर
अक्सर छात्र मापन (Measurement) और मूल्यांकन (Evaluation) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें अंतर है:
मापन: यह मात्रात्मक (Quantitative) होता है। जैसे - किसी बच्चे के गणित में $100$ में से $80$ अंक आए। यह केवल एक संख्या है।
मूल्यांकन: यह मात्रात्मक और गुणात्मक (Qualitative) दोनों होता है। जैसे - बच्चे के $80$ अंक आए हैं, इसका अर्थ है कि उसकी गणितीय समझ अच्छी है, लेकिन उसे ज्यामिति में और अभ्यास की आवश्यकता है।
2. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) का अर्थ
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के तहत सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को अनिवार्य किया गया है। इसे संक्षेप में CCE कहा जाता है। इसके नाम में ही इसका पूरा अर्थ छिपा है:
A. सतत (Continuous)
इसका अर्थ है कि मूल्यांकन साल के अंत में एक बार होने वाली परीक्षा नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह लगातार होनी चाहिए।
शिक्षण के दौरान (During Teaching) ही बच्चे का आकलन करना।
बच्चों की कमियों को तुरंत पहचानना (Diagnosis)।
कमियों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) देना।
इसमें आवधिक परीक्षाएं और निरंतर अवलोकन दोनों शामिल हैं।
B. व्यापक (Comprehensive)
व्यापकता का अर्थ है बच्चे के विकास के सभी पक्षों का मूल्यांकन करना। इसे दो भागों में बांटा जा सकता है:
शैक्षिक पक्ष (Scholastic Aspects): इसमें विषयों का ज्ञान शामिल है (जैसे- गणित, विज्ञान, भाषा, सामाजिक विज्ञान आदि)।
सह-शैक्षिक पक्ष (Co-Scholastic Aspects): इसमें बच्चे का सर्वांगीण विकास शामिल है। जैसे:
जीवन कौशल (Life Skills)
अभिवृत्ति और मूल्य (Attitudes and Values)
खेल-कूद और शारीरिक स्वास्थ्य
कला और सांस्कृतिक गतिविधियां
3. मूल्यांकन के प्रकार (Types of Evaluation)
CTET में मूल्यांकन के प्रकारों पर सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से इसे तीन भागों में समझा जा सकता है:
1. रचनात्मक/रूपात्मक मूल्यांकन (Formative Assessment)
इसे 'सीखने के लिए आकलन' (Assessment for Learning) भी कहा जाता है।
समय: यह शिक्षण प्रक्रिया के दौरान होता है। जब शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहा होता है, तब वह प्रश्न पूछकर या गतिविधि कराकर जो आकलन करता है, वह रचनात्मक मूल्यांकन है।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य फीडबैक (Feedback) प्रदान करना है।
सुधार की गुंजाइश: इसमें बच्चे को पता चलता है कि उसे कहाँ सुधार करना है और शिक्षक को पता चलता है कि उसे अपनी शिक्षण विधि में क्या बदलाव करने हैं।
प्रकृति: यह निदानात्मक (Diagnostic) होता है।
उदाहरण: कक्षा में प्रश्न पूछना, क्विज़, चर्चा, गृहकार्य पर टिप्पणी।
वेटेज: सामान्यतः इसका भार कुल मूल्यांकन का $40\%$ होता है।
2. योगात्मक/संकलनात्मक मूल्यांकन (Summative Assessment)
इसे 'सीखने का आकलन' (Assessment of Learning) कहा जाता है।
समय: यह सत्र या पाठ के अंत में किया जाता है।
उद्देश्य: इसका उद्देश्य यह निर्णय लेना है कि बच्चे ने कुल कितना सीखा है और उसे अगली कक्षा में भेजा जाए या नहीं।
निर्णयात्मक: यह ग्रेडिंग और रैंकिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
उदाहरण: वार्षिक परीक्षाएं, अर्द्ध-वार्षिक परीक्षाएं, फाइनल प्रोजेक्ट।
वेटेज: इसका भार कुल मूल्यांकन का $60\%$ होता है।
3. निदानात्मक मूल्यांकन (Diagnostic Evaluation)
जब रचनात्मक मूल्यांकन के दौरान यह पता चलता है कि बच्चा बार-बार किसी विशेष क्षेत्र में गलती कर रहा है, तो उसके कारणों का गहरा पता लगाने के लिए निदानात्मक मूल्यांकन किया जाता है।
उदाहरण: यदि कोई बच्चा $2+2=5$ लिख रहा है, तो शिक्षक यह जानने की कोशिश करेगा कि क्या उसे गिनती नहीं आती या वह लापरवाही कर रहा है। कारण जानना ही निदान है।
नोट: निदान के बाद हमेशा उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) दिया जाता है।
4. आकलन के तीन महत्वपूर्ण दृष्टिकोण (Assessment Perspectives)
सीटीईटी परीक्षा में इन तीन शब्दों का बहुत महत्व है:
A. सीखने के लिए आकलन (Assessment for Learning)
यह रचनात्मक मूल्यांकन (Formative) का हिस्सा है।
यह शिक्षण प्रक्रिया के दौरान होता है।
इसमें शिक्षक और छात्र दोनों सक्रिय होते हैं।
उदाहरण: बावर्ची खाना बनाते समय खाने को चखता है ताकि नमक-मिर्च सही कर सके।
B. सीखने का आकलन (Assessment of Learning)
यह योगात्मक मूल्यांकन (Summative) का हिस्सा है।
यह कार्य समाप्त होने के बाद होता है।
उदाहरण: मेहमानों के खाना खाने के बाद यह निर्णय लेना कि खाना कैसा बना था (अब इसमें सुधार नहीं हो सकता)।
C. सीखने के रूप में आकलन (Assessment as Learning)
इसमें छात्र स्वयं अपना आकलन (Self-Assessment) करते हैं।
बच्चे अपनी सीखने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी खुद लेते हैं।
उदाहरण: एक छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी के दौरान खुद से प्रश्न पूछता है और चेक करता है कि उसे कितना याद है।
5. मूल्यांकन के उपकरण और तकनीकें (Tools and Techniques)
एक शिक्षक के पास बच्चे को परखने के लिए कई औजार (Tools) होते हैं। CTET में इन पर आधारित व्यावहारिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. पोर्टफोलियो (Portfolio) - सबसे महत्वपूर्ण
परिभाषा: यह एक निश्चित समय अवधि में विद्यार्थी द्वारा किए गए कार्यों का व्यवस्थित संग्रह है।
क्या शामिल होता है: इसमें बच्चे की ड्राइंग, कविताएं, वर्कशीट्स, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, और उसकी सबसे अच्छी उपलब्धियां शामिल होती हैं।
महत्व: यह बच्चे की प्रगति (Progress) को क्रमिक रूप से दर्शाता है। यह केवल एक दिन का परिणाम नहीं है, बल्कि पूरे साल का लेखा-जोखा है।
उपयोग: शिक्षक और अभिभावक इसे देखकर बच्चे की क्षमताओं का सही अंदाजा लगा सकते हैं।
2. घटनावृत्त अभिलेख (Anecdotal Records)
इसमें शिक्षक बच्चे के जीवन की विशिष्ट घटनाओं या व्यवहारों का लिखित विवरण रखता है।
उदाहरण: "आज राहुल ने टिफिन शेयर किया" या "आज कक्षा में लड़ाई के दौरान रोहन ने धैर्य दिखाया"।
यह बच्चे के सामाजिक और भावनात्मक विकास को समझने में मदद करता है।
यह तथ्यात्मक (Factual) होना चाहिए, इसमें शिक्षक की निजी राय (Subjective opinion) नहीं होनी चाहिए।
3. रेटिंग स्केल (Rating Scale)
इसमें किसी गुण या कौशल को स्तरों में मापा जाता है।
उदाहरण: क्या बच्चा समूह में कार्य करता है?
(1) कभी नहीं
(2) कभी-कभी
(3) हमेशा
इसका उपयोग व्यवहार, रुचि और व्यक्तित्व को मापने के लिए किया जाता है।
4. अवलोकन (Observation)
यह प्राथमिक स्तर पर मूल्यांकन की सबसे अच्छी तकनीक है।
शिक्षक बच्चों को खेलते समय, पढ़ते समय और समूह में बात करते समय ध्यान से देखता है।
यह स्वाभाविक वातावरण में किया जाता है, जिससे बच्चे को पता भी नहीं चलता कि उसका मूल्यांकन हो रहा है।
5. चेक-लिस्ट (Checklist)
यह 'हाँ' या 'ना' में होती है।
उदाहरण: क्या छात्र ने होमवर्क पूरा किया? (हाँ/ना)
6. साक्षात्कार (Interview)
मौखिक रूप से बच्चे के विचारों और भावनाओं को जानने की विधि।
6. प्रश्नों के प्रकार (Types of Questions)
मूल्यांकन करते समय प्रश्न पत्र का निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छे प्रश्न बच्चे की चिंतन क्षमता को बढ़ाते हैं।
A. मुक्त अंत वाले प्रश्न (Open-Ended Questions / Divergent Thinking)
इन प्रश्नों का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता।
बच्चे को अपने विचार व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता होती है।
यह अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और सृजनात्मकता (Creativity) को बढ़ावा देते हैं।
उदाहरण: "यदि पृथ्वी से सारे पेड़ गायब हो जाएं तो क्या होगा?" या "पत्तियों के कितने उपयोग हो सकते हैं?"
B. बंद अंत वाले प्रश्न (Close-Ended Questions / Convergent Thinking)
इनका उत्तर निश्चित होता है।
इनमें बच्चे के विचारों के लिए कोई जगह नहीं होती।
यह अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं।
उदाहरण: "भारत की राजधानी क्या है?" या बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)।
7. प्राथमिक स्तर और EVS में मूल्यांकन (Assessment in Primary Level & EVS)
प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) और विशेषकर पर्यावरण अध्ययन (EVS) में मूल्यांकन का तरीका अलग होना चाहिए:
औपचारिक परीक्षाओं का निषेध: प्राथमिक स्तर पर पेन-पेपर टेस्ट पर जोर नहीं देना चाहिए।
नो-फेल पॉलिसी: बच्चों को अगली कक्षा में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए (हालांकि नई शिक्षा नीति में इसमें कुछ संशोधन हैं, लेकिन बाल-केंद्रित शिक्षा का मूल मंत्र यही है)।
रैंकिंग से बचें: बच्चों को 'होशियार', 'कमजोर' या 'मंदबुद्धि' जैसे लेबल नहीं लगाने चाहिए। उनकी तुलना (Comparison) एक-दूसरे से नहीं करनी चाहिए।
हस्तपरक गतिविधियां: मूल्यांकन 'करके सीखने' (Learning by doing) पर आधारित होना चाहिए।
संकेतक (Indicators): EVS में मूल्यांकन के लिए कुछ संकेतक तय किए गए हैं:
अवलोकन और रिकॉर्डिंग।
चर्चा करना / प्रश्न पूछना।
वर्गीकरण (Categorization)।
न्याय और समानता के प्रति सरोकार (Concern for justice and equality)।
सहयोग (Cooperation)।
8. एक अच्छे परीक्षण की विशेषताएं
एक अच्छा मूल्यांकन या टेस्ट कैसा होना चाहिए?
वैधता (Validity): जिस उद्देश्य के लिए टेस्ट बनाया गया है, वह उसी को मापे। (जैसे - गणित के पेपर में भाषा की क्लिष्टता नहीं होनी चाहिए, वरना वह गणित का नहीं, हिंदी का टेस्ट बन जाएगा)।
विश्वसनीयता (Reliability): बार-बार टेस्ट लेने पर भी परिणाम एक समान आए। (अंकों में निरंतरता)।
वस्तुनिष्ठता (Objectivity): चेक करने वाले शिक्षक की व्यक्तिगत राय का अंकों पर प्रभाव न पड़े। (जैसे MCQ में उत्तर फिक्स होता है, चाहे कोई भी चेक करे)।
व्यावहारिकता: टेस्ट ऐसा हो जिसे आसानी से प्रशासित किया जा सके (समय और लागत कम हो)।
9. CCE के महत्वपूर्ण उद्देश्य (Summary Points)
रटने की प्रवृत्ति का अंत: मूल्यांकन याददाश्त (Memory) पर नहीं, बल्कि समझ (Understanding) और अनुप्रयोग (Application) पर केंद्रित हो।
तनाव कम करना: परीक्षा के डर को खत्म करना।
सर्वांगीण विकास: केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि खेल, संगीत, व्यवहार और जीवन कौशल का विकास।
शिक्षक-छात्र अनुपात: यह मूल्यांकन तभी सफल है जब शिक्षक और छात्रों का अनुपात सही हो (RTE के अनुसार प्राथमिक स्तर पर $30:1$)।
फीडबैक: मूल्यांकन का उद्देश्य बच्चे को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।
गणितीय सूत्र और सांख्यिकी (Math & Science Context)
यदि आप विज्ञान या गणित पढ़ा रहे हैं, तो मूल्यांकन में डेटा विश्लेषण भी शामिल हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि हमें छात्रों के औसत प्राप्तांक निकालने हैं:
जहाँ $\sum x$ सभी अंकों का योग है और $N$ छात्रों की कुल संख्या है। सतत मूल्यांकन में हम केवल अंतिम परिणाम नहीं देखते, बल्कि प्रक्रिया (Steps) को भी महत्व देते हैं।
विज्ञान में, प्रयोगात्मक कौशल (Practical Skills) का मूल्यांकन करते समय हम देखते हैं कि छात्र ने उपकरण कैसे सेट किया:
इस तरह के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की समझ का आकलन लिखित परीक्षा के बजाय प्रयोगशाला (Lab) में अवलोकन द्वारा बेहतर किया जा सकता है।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) एक बाल-केंद्रित दृष्टिकोण है। एक शिक्षक के रूप में, आपको 'जज' नहीं बल्कि एक 'सुविधादाता' (Facilitator) बनना है। जब आप बच्चे का मूल्यांकन करें, तो आपका लक्ष्य उसकी कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि उसकी छिपी हुई प्रतिभा को निखारना होना चाहिए। याद रखें, "हर बच्चा खास होता है और अपनी गति से सीखता है।"
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
