प्रस्तावना: सक्रिय अधिगम (Active Learning)
पर्यावरण अध्ययन (EVS) केवल तथ्यों को रटने का विषय नहीं है, बल्कि यह अपने आसपास की दुनिया को समझने, महसूस करने और उससे जुड़ने की एक प्रक्रिया है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) इस बात पर विशेष बल देती है कि बच्चों का ज्ञान उनके बाहरी जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। सक्रिय अधिगम वह दृष्टिकोण है जहाँ छात्र निष्क्रिय श्रोता नहीं होते, बल्कि वे चर्चा, निर्माण, लेखन और अन्वेषण के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया में सीधे शामिल होते हैं।
1. कक्षा-कक्ष में संचालित गतिविधियाँ
कक्षा एक ऐसा स्थान है जहाँ संवाद और अंतःक्रिया के माध्यम से ज्ञान का निर्माण होता है। यहाँ शिक्षक की भूमिका एक सुगमकर्ता (Facilitator) की होती है।
वाद-विवाद (Debate)
उद्देश्य: छात्रों में तर्कशक्ति और आलोचनात्मक चिंतन का विकास करना।
प्रक्रिया: किसी समसामयिक मुद्दे (जैसे- "क्या प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए?") पर पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करना।
लाभ:
छात्रों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
दूसरों के दृष्टिकोण को सुनने और उनका विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ती है।
तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने का कौशल विकसित होता है।
प्रश्न पूछना (Questioning)
प्रश्न पूछना एक सक्रिय कक्षा की पहचान है। यह केवल छात्रों के ज्ञान की परीक्षा नहीं है, बल्कि उनकी जिज्ञासा को जगाने का माध्यम है।
महत्व:
यह शिक्षक को यह समझने में मदद करता है कि बच्चों ने अवधारणा को कितना समझा है।
यह बच्चों को चिंतन के लिए प्रेरित करता है।
उदाहरण: "अगर धरती से सारा पानी सूख जाए तो क्या होगा?" (यह एक मुक्त अंत वाला प्रश्न है जो कल्पना को बढ़ावा देता है)।
निर्देशन (Direction/Instruction)
इसमें शिक्षक छात्रों के सामने विषय वस्तु का प्रस्तुतिकरण, विश्लेषण और संश्लेषण करता है।
छात्र यहाँ प्रेक्षक (Observer) की भूमिका में होते हैं।
शिक्षक को निर्देश देते समय स्पष्ट और सटीक होना चाहिए ताकि बच्चे गतिविधि के उद्देश्य को समझ सकें।
चार्ट और मानचित्र निर्माण
क्रियाकलाप: तत्कालीन घटनाओं या पाठ्य-वस्तु से संबंधित विषयों पर चार्ट बनाना।
लाभ:
दृश्य सामग्री (Visual Aids) के निर्माण से स्मृति स्थायी होती है।
सृजनात्मकता का विकास होता है।
उदाहरण: 'जल चक्र' या 'खाद्य श्रृंखला' का चार्ट बनाना।
2. समावेशी कक्षा में गतिविधियों की भूमिका
समावेशी शिक्षा में हर बच्चे की आवश्यकता अलग होती है। गतिविधियाँ शिक्षक को यह अवसर देती हैं कि वे विविधता को संसाधन के रूप में प्रयोग करें।
विविधता का सम्मान: गतिविधियों के माध्यम से मेधावी और सीखने में धीमे, दोनों प्रकार के बच्चों को एक साथ लाया जा सकता है।
व्यक्तिगत ध्यान: जब बच्चे समूह में कार्य कर रहे होते हैं, तो शिक्षक उन बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान दे सकते हैं जिन्हें अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
निदान और उपचार: गतिविधियाँ शिक्षकों को यह समझने में मदद करती हैं कि बच्चे कहाँ गलती कर रहे हैं, जिससे उपचारात्मक शिक्षण आसान हो जाता है।
3. कक्षा के बाहर की गतिविधियाँ (Out of Class Activities)
कक्षा की चारदीवारी के बाहर का अनुभव बच्चों के लिए वास्तविक दुनिया का द्वार खोलता है।
शैक्षिक भ्रमण (Field Trips)
महत्व: यह EVS शिक्षण की सबसे सशक्त विधि है। यह छात्रों को प्रत्यक्ष अनुभव (Direct Experience) प्रदान करती है।
उदाहरण:
चिड़ियाघर: जानवरों के व्यवहार, आवास और भोजन की आदतों का अवलोकन।
पोस्ट ऑफिस: संचार के माध्यमों को समझना।
ऐतिहासिक इमारतें: इतिहास और वास्तुकला की समझ।
शिक्षक की तैयारी:
भ्रमण से पूर्व छात्रों को उद्देश्य स्पष्ट करें।
अवलोकन शीट (Observation Sheet) तैयार करें ताकि बच्चे जानकारी नोट कर सकें।
अनुशासन और सुरक्षा के निर्देश दें।
सामुदायिक संसाधन (Community Resources)
समुदाय के लोग भी सीखने का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
उदाहरण:
एक डॉक्टर को कक्षा में बुलाकर स्वास्थ्य और स्वच्छता पर चर्चा करना।
एक किसान से खेती और फसलों के बारे में जानना।
दादा-दादी से पुराने समय के रीति-रिवाजों और पर्यावरण संरक्षण के तरीकों के बारे में पूछना।
सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियाँ
त्योहार मनाना, मेलों का आयोजन, बाल सभा।
ये गतिविधियाँ बच्चों में समाजीकरण, सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करती हैं।
4. पाठ्यक्रम सहगामी गतिविधियाँ (Co-curricular Activities)
ये गतिविधियाँ मुख्य पाठ्यक्रम की पूरक होती हैं और बालक के सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं।
साहित्यिक: विद्यालय पत्रिका संपादन, कविता पाठ, कहानी लेखन।
शारीरिक: खेल-कूद, स्काउटिंग, परेड, योग।
नागरिक विकास: छात्र संसद, सहकारी बैंक, स्वच्छता अभियान।
रचनात्मक: चित्रकला, मिट्टी के खिलौने बनाना, बेकार चीजों से उपयोगी वस्तुएं बनाना (Best out of waste)।
मुख्य उद्देश्य:
विद्यालय और समाज के बीच संबंध स्थापित करना।
छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों और अनुशासन का विकास करना।
अवकाश के समय का सदुपयोग करना।
राष्ट्रीय एकता और सहयोग की भावना बढ़ाना।
5. विज्ञान और पर्यावरण में प्रयोगात्मक कार्य (Practical Work)
"करके सीखना" (Learning by Doing) विज्ञान शिक्षण का मूल मंत्र है। जब हम सुनते हैं तो भूल सकते हैं, देखते हैं तो याद रखते हैं, लेकिन जब हम करते हैं तो समझ जाते हैं।
A. प्रयोग प्रदर्शन विधि (Demonstration Method)
इस विधि में शिक्षक कक्षा में प्रयोग करके दिखाते हैं और छात्र अवलोकन करते हैं।
प्रक्रिया: शिक्षक उपकरणों का प्रयोग करता है और साथ-साथ व्याख्या भी करता है।
कब उपयोगी है:
जब उपकरण महंगे या नाजुक हों।
जब प्रयोग खतरनाक हो (जैसे एसिड का प्रयोग)।
जब समय कम हो।
गुण:
समय और धन की बचत।
कठिन संप्रत्ययों को आसानी से समझाया जा सकता है।
दोष:
यह पूरी तरह बाल-केंद्रित नहीं है क्योंकि छात्र केवल दर्शक होते हैं।
हस्तपरक कौशल (Hands-on skills) का विकास नहीं होता।
B. प्रयोगशाला/प्रायोगिक विधि (Laboratory/Experimental Method)
इस विधि में छात्र स्वयं प्रयोग करते हैं। वे "नन्हे वैज्ञानिक" की तरह कार्य करते हैं।
प्रक्रिया: समस्या की पहचान $\rightarrow$ परिकल्पना $\rightarrow$ प्रयोग $\rightarrow$ अवलोकन $\rightarrow$ निष्कर्ष।
लाभ:
वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।
आत्मविश्वास में वृद्धि।
ज्ञान स्थायी होता है।
दोष:
अधिक समय लगता है।
महंगी प्रयोगशाला की आवश्यकता।
छोटी कक्षाओं के लिए कभी-कभी कठिन हो सकता है।
6. पर्यावरण अध्ययन के कुछ प्रमुख प्रयोग
यहाँ हम विज्ञान और EVS के कुछ महत्वपूर्ण प्रयोगों को गणितीय और वैज्ञानिक संकेतावली का उपयोग करके समझते हैं।
1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
पौधे अपना भोजन कैसे बनाते हैं, इसे समझाने के लिए रसायनिक समीकरण का प्रयोग किया जा सकता है:
यहाँ $\mathrm{CO_2}$ कार्बन डाइऑक्साइड और $\mathrm{H_2O}$ जल है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन ($\mathrm{O_2}$) मुक्त होती है।
2. अंकुरण और वृद्धि का मापन
छात्रों को एक बीज बोने और उसकी वृद्धि को मापने का प्रोजेक्ट दिया जा सकता है। मान लीजिए एक पौधे की ऊंचाई पहले सप्ताह में 2 सेमी और दूसरे सप्ताह में 5 सेमी है। वृद्धि दर की गणना इस प्रकार समझाई जा सकती है:
3. जल का घनत्व (Density of Water)
नींबू का पानी में तैरना या डूबना।
साधारण पानी में नींबू डूब जाता है क्योंकि:
$$\text{नींबू का घनत्व} > \text{पानी का घनत्व}$$नमक वाले पानी में नींबू तैरता है क्योंकि नमक मिलाने से पानी का घनत्व बढ़ जाता है:
$$\text{नींबू का घनत्व} < \text{नमकीन पानी का घनत्व}$$
7. मूल्यांकन और आकलन (Assessment)
गतिविधियों का एक मुख्य उद्देश्य यह जाँचना भी है कि बच्चे कैसे सीख रहे हैं। इसे रचनात्मक आकलन (Formative Assessment) कहते हैं।
अवलोकन (Observation): शिक्षक गतिविधि के दौरान बच्चों के व्यवहार, सहयोग और रुचि को नोट करते हैं।
चेकलिस्ट और रेटिंग स्केल: विशिष्ट कौशलों को जाँचने के लिए।
पोर्टफोलियो: बच्चों द्वारा किए गए कार्यों (चित्र, वर्कशीट, रिपोर्ट) का संग्रह।
स्व-मूल्यांकन: बच्चों को स्वयं अपने कार्य का विश्लेषण करने का मौका देना।
निष्कर्ष
गतिविधियाँ और प्रयोगात्मक कार्य शिक्षा को बोझिल होने से बचाते हैं। जब एक बच्चा खुद मिट्टी में हाथ डालकर पौधा लगाता है, या खुद बाजार जाकर सब्जियों के दाम पूछता है, तो वह जो सीखता है, वह किसी भी किताब से बेहतर होता है। एक शिक्षक के रूप में हमारा दायित्व है कि हम कक्षा को चारदीवारी से बाहर निकालकर जीवन के विशाल प्रांगण से जोड़ें।
गतिविधियाँ और प्रयोगात्मक विधियाँ
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
