उद्योग का संबंध आर्थिक गतिविधियों से है जो वस्तुओं के उत्पादन, खनिजों के निष्कर्षण या सेवाओं की व्यवस्था से संबंधित हैं। यह द्वितीयक क्रियाकलाप (Secondary Activity) के अंतर्गत आता है। द्वितीयक क्रियाकलापों में कच्चे माल को लोगों के लिए अधिक मूल्यवान उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है।
1. उद्योगों का वर्गीकरण
उद्योगों का वर्गीकरण मुख्य रूप से तीन आधारों पर किया जाता है: कच्चा माल, आकार और स्वामित्व।
क) कच्चा माल के आधार पर
कच्चे माल के उपयोग के आधार पर उद्योगों को चार भागों में बांटा गया है:
कृषि आधारित उद्योग:
ये उद्योग कच्चे माल के रूप में वनस्पति और जंतु आधारित उत्पादों का उपयोग करते हैं।
उदाहरण: खाद्य संसाधन, वनस्पति तेल, सूती वस्त्र, डेयरी उत्पाद और चर्म उद्योग।
खनिज आधारित उद्योग:
ये प्राथमिक उद्योग हैं जो खनिज अयस्कों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं। इन उद्योगों के उत्पाद अन्य उद्योगों का पोषण करते हैं।
उदाहरण: लौह अयस्क से निर्मित लोहा (जो मशीनरी बनाने में काम आता है), सीमेंट उद्योग।
समुद्र आधारित उद्योग:
ये सागरों और महासागरों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं।
उदाहरण: मत्स्य तेल निर्माण, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण।
वन आधारित उद्योग:
ये वनों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करते हैं।
उदाहरण: लुगदी एवं कागज, औषध रसायन, फर्नीचर और भवन निर्माण।
ख) आकार के आधार पर
आकार का तात्पर्य निवेश की गई पूंजी की राशि, नियोजित लोगों की संख्या और उत्पादन की मात्रा से है।
लघु आकार के उद्योग:
इसमें कम पूंजी और छोटी तकनीक का उपयोग होता है। अक्सर यह पारिवारिक श्रम पर निर्भर होते हैं।
उदाहरण: टोकरी बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाना, हस्तशिल्प। (इन्हें कुटीर उद्योग भी कहा जाता है)।
वृहद आकार के उद्योग:
इसमें पूंजी का निवेश अधिक और प्रयुक्त प्रौद्योगिकी उच्च स्तरीय होती है।
उदाहरण: ऑटोमोबाइल (गाड़ी) निर्माण, भारी मशीनरी उद्योग।
ग) स्वामित्व के आधार पर
निजी क्षेत्र:
इनका स्वामित्व और संचालन एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है।
उदाहरण: रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज।
सार्वजनिक क्षेत्र:
इनका स्वामित्व और संचालन सरकार द्वारा किया जाता है।
उदाहरण: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।
संयुक्त क्षेत्र:
इनका स्वामित्व और संचालन राज्य (सरकार) और व्यक्तियों अथवा व्यक्तियों के समूह द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
उदाहरण: मारुति उद्योग लिमिटेड।
सहकारी क्षेत्र:
इनका स्वामित्व और संचालन कच्चे माल के उत्पादकों या आपूर्तिकर्ताओं, कामगारों अथवा दोनों द्वारा होता है।
उदाहरण: आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल), सुधा डेयरी।
2. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक
उद्योग उन्हीं स्थानों पर केंद्रित होते हैं जहां निम्नलिखित कारक आसानी से उपलब्ध हों:
कच्चा माल: भारी और वजन कम होने वाले कच्चे माल के स्रोत के निकट उद्योग लगाए जाते हैं।
भूमि: समतल भूमि की उपलब्धता।
जल: धुलाई और शीतलन प्रक्रियाओं के लिए।
श्रम: कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिक।
शक्ति (बिजली): निर्बाध विद्युत आपूर्ति।
पूंजी: निवेश के लिए बैंक और वित्तीय सुविधाएं।
परिवहन: कच्चे माल को लाने और तैयार माल को बाजार तक पहुंचाने के लिए।
बाजार: तैयार माल की खपत के लिए निकटतम बाजार।
3. औद्योगिक तंत्र (Industrial System)
औद्योगिक तंत्र में तीन मुख्य चरण होते हैं:
निवेश: कच्चा माल, श्रम, भूमि की लागत, जल की उपलब्धता, परिवहन, विद्युत और अन्य अवसंरचना।
प्रक्रम: वे सभी क्रियाकलाप जो कच्चे माल को परिष्कृत माल में परिवर्तित करते हैं। (जैसे: कपास को ओटना, कातना, बुनना)।
निर्गत: अंतिम उत्पाद और उससे अर्जित आय।
4. औद्योगिक प्रदेश (Industrial Regions)
औद्योगिक प्रदेश का विकास तब होता है जब कई तरह के उद्योग एक-दूसरे के निकट स्थित होते हैं और वे अपनी निकटता का लाभ साझा करते हैं।
विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश:
पूर्वोत्तर अमेरिका
पश्चिमी और मध्य यूरोप
पूर्वी यूरोप
पूर्वी एशिया
भारत के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश:
मुंबई-पुणे समूह
बंगलौर-तमिलनाडु प्रदेश
हुगली प्रदेश (पश्चिम बंगाल)
अहमदाबाद-वडोदरा प्रदेश
छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश
विशाखापट्टनम-गुंटूर औद्योगिक प्रदेश
गुड़गांव-दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश
कोल्लम-तिरुवनंतपुरम औद्योगिक प्रदेश
नोट: अधिकांश मुख्य औद्योगिक प्रदेश शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों, समुद्री पत्तनों (बंदरगाहों) के समीप और विशेष तौर पर कोयला क्षेत्रों के निकट स्थित होते हैं।
5. प्रमुख उद्योगों का वितरण
विश्व के तीन सबसे महत्वपूर्ण उद्योग हैं:
लौह-इस्पात उद्योग: इसे आधुनिक उद्योगों का 'मेरুদंड' कहा जाता है।
सूती वस्त्र उद्योग: यह सबसे पुराने उद्योगों में से एक है।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग: यह एक उभरता हुआ उद्योग है जिसे सनराइज उद्योग भी कहा जाता है।
सनराइज उद्योग: इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य लाभ, सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) और ज्ञान से संबंधित उद्योग शामिल हैं।
6. लौह-इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)
यह एक पोषक उद्योग है क्योंकि इसके उत्पाद अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
निवेश: श्रम, पूंजी, स्थान, लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर।
कच्चे माल का अनुपात: लौह अयस्क, कोयला और चूना पत्थर का अनुपात लगभग $4 : 2 : 1$ होता है।
प्रक्रम:
कच्चे माल को झोंका भट्टी (Blast Furnace) में रखा जाता है।
वहां यह प्रगलित (Smelted) होता है।
इसके बाद परिशोधन होता है और इस्पात प्राप्त होता है।
प्रगलन (Smelting): यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातुओं को उनके अयस्कों द्वारा गलनांक बिंदु से अधिक ताप पर निष्कर्षित किया जाता है।
रसायन विज्ञान संदर्भ (महत्वपूर्ण तथ्य):
इस्पात को कठोर बनाने के लिए इसमें थोड़ी मात्रा में मैंगनीज, निकल या क्रोमियम मिलाया जाता है। जंग से बचाने के लिए जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है जिसे गैल्वेनाइजेशन कहते हैं।
तुलनात्मक अध्ययन: जमशेदपुर बनाम पिट्सबर्ग
| विशेषता | जमशेदपुर (भारत) | पिट्सबर्ग (संयुक्त राज्य अमेरिका) |
| पहचान | भारत का प्रमुख इस्पात केंद्र। | विश्व का 'इस्पात नगर' (Steel City)। |
| मुख्य संयंत्र | टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO)। | अनेक बड़े इस्पात कारखाने। |
| स्थापना | 1907 में साक्षी (अब जमशेदपुर) में। | 19वीं सदी के मध्य में विकसित। |
| नदी | सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम पर। | मोनोंगाहेला और एलेघनी नदियां (ओहियो की सहायक)। |
| कच्चा माल | लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज उड़ीसा और छत्तीसगढ़ से। कोयला झरिया से। | कोयला स्थानीय उपलब्ध। लौह अयस्क मिनेसोटा की खानों से आता है। |
| परिवहन | यह स्थान बंगाल-नागपुर रेलवे लाइन पर कालीमाटी स्टेशन के निकट है। | 'ग्रेट लेक्स' जलमार्ग परिवहन का मुख्य साधन है। |
| बाजार | कोलकाता के निकट विशाल बाजार उपलब्ध। | स्थानीय और राष्ट्रीय अमेरिकी बाजार। |
नोट: पिट्सबर्ग में अब मिलें घट रही हैं और उनका स्थान विविध उद्योगों ने ले लिया है। ग्रेट लेक्स के नाम हैं: सुपीरियर, ह्यूरन, ओंटारियो, मिशिगन और ईरी। सुपीरियर झील इनमें सबसे बड़ी है।
7. सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry)
वस्त्र निर्माण के लिए रेशे (Fibers) कच्चा माल हैं। रेशे दो प्रकार के होते हैं:
प्राकृतिक: ऊन, सिल्क, कपास, लिनन और जूट।
मानव निर्मित: नायलॉन, पॉलिएस्टर, एक्रिलिक और रेयॉन।
इतिहास: 18वीं सदी की औद्योगिक क्रांति तक वस्त्र हस्त-तकली और हथकरघों से बनते थे। 18वीं सदी में पॉवरलूम (Powerloom) ने ब्रिटेन में और बाद में विश्व में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दिया।
भारत में:
ढाका की मलमल, मसूलीपट्टनम की छींट, कालीकट के केलिको और बुरहानपुर की सुनहरी जरी वाली सूती वस्त्र विश्व विख्यात थे।
प्रथम सफल यंत्रीकृत वस्त्र मिल: मुंबई में 1854 में स्थापित की गई। (इससे पहले 1818 में कोलकाता के पास फोर्ट ग्लोस्टर में मिल बनी थी, लेकिन वह असफल रही)।
तुलनात्मक अध्ययन: अहमदाबाद बनाम ओसाका
| विशेषता | अहमदाबाद (भारत) | ओसाका (जापान) |
| उपनाम | भारत का मैनचेस्टर | जापान का मैनचेस्टर |
| अवस्थिति | गुजरात में साबरमती नदी के तट पर। | जापान के कान्साई क्षेत्र में। |
| प्रथम मिल | 1859 में स्थापित। | 19वीं सदी के अंत में विकसित। |
| जलवायु | आर्द्र जलवायु, जो कताई और बुनाई के लिए आदर्श है। | उष्ण आर्द्र जलवायु। |
| कच्चा माल | कपास उत्पादक क्षेत्र (काली मिट्टी) के निकट होने से कच्चा माल आसानी से उपलब्ध। | यह पूरी तरह से आयातित कच्चे माल (मिस्र, भारत, चीन, यूएसए) पर निर्भर है। |
| जल आपूर्ति | साबरमती नदी से। | योडो नदी से पर्याप्त जल उपलब्ध। |
| श्रम | घनी आबादी वाले राज्य (गुजरात, महाराष्ट्र) से सस्ता श्रम। | कुशल श्रम उपलब्ध। |
| वर्तमान स्थिति | मशीनों के पुराने होने और नई तकनीक न अपनाने के कारण समस्याग्रस्त। | अब अन्य उद्योगों (लोहा-इस्पात, मशीनरी, ऑटोमोबाइल) ने इसका स्थान ले लिया है। |
8. सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग (IT Industry)
सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग सूचना के संग्रहण, प्रक्रमण (Processing) और वितरण को व्यवहार में लाते हैं। यह उद्योग मुख्य रूप से संसाधन उपलब्धता, लागत और अवसंरचना पर निर्भर करता है।
तुलनात्मक अध्ययन: बंगलौर बनाम सिलिकॉन घाटी
| विशेषता | बंगलौर (भारत) | सिलिकॉन घाटी (कैलिफोर्निया, USA) |
| अवस्थिति | दक्कन का पठार (Deccan Plateau)। | सैंटा क्लारा घाटी, रॉकी पर्वतमाला के निकट। |
| उपनाम | सिलिकॉन पठार (Silicon Plateau) | सिलिकॉन वैली |
| जलवायु | वर्ष भर मृदु और समकारी जलवायु। (धूल मुक्त)। | शीतोष्ण जलवायु, कभी कभार तापमान $0^\circ\mathrm{C}$ से नीचे जाता है। |
| शैक्षिक केंद्र | भारत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान यहां हैं। | स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रसिद्ध केंद्र निकट हैं। |
| श्रम | कुशल और कम वेतन वाले प्रबंधक और इंजीनियर उपलब्ध। | विश्व के सबसे उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल। |
| परिवहन | अच्छी परिवहन सुविधा और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (BEL, BHEL, ISRO) की उपस्थिति। | प्रमुख हवाई अड्डों और बाजारों के निकट। |
भारत के अन्य IT हब: नई दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, गुड़गांव, पुणे, कोच्चि और चंडीगढ़।
9. औद्योगिक विपदा (Industrial Disaster)
उद्योगों में दुर्घटनाएं मुख्य रूप से तकनीकी विफलता या खतरनाक पदार्थों के लापरवाही से उपयोग के कारण होती हैं। CTET के लिए सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण:
भोपाल गैस त्रासदी (3 दिसंबर 1984):
समय: रात के लगभग 12:30 बजे।
स्थान: यूनियन कार्बाइड (कीटनाशक कारखाना)।
गैस: मिथाइल आइसोसाइनेट (Methyl Isocyanate - MIC)।
रासायनिक सूत्र: $\text{CH}_3\text{NCO}$
प्रभाव: हजारों लोगों की मृत्यु और जीवित बचे लोग आज भी अंधापन, प्रतिरक्षा तंत्र की विकृति जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं।
10. कुछ महत्वपूर्ण तथ्य (One Liners)
टेक्सटाइल (Textile): यह शब्द लैटिन भाषा के टेक्सेरे (Texere) से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है 'बुनना'।
ग्रेट लेक्स (Great Lakes): उत्तरी अमेरिका की पांच झीलों का समूह - सुपीरियर, ह्यूरन, ओंटारियो, मिशिगन और ईरी। यह अंतर्देशीय जलमार्ग का सबसे बड़ा समूह है।
C-DAC: पुणे स्थित संस्था जिसने भारत का सुपर कंप्यूटर 'परम' बनाया।
BHEL: भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड - सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम।
CTET अभ्यर्थियों के लिए सारांश तालिका
उद्योग
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