शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी, रोचक और स्थाई बनाने के लिए जिन साधनों का उपयोग किया जाता है, उन्हें शिक्षण सहायक सामग्री (Teaching Learning Material - TLM) कहा जाता है। CTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में इस अध्याय से 3-4 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। एक आदर्श शिक्षक वही है जो अपनी शिक्षण विधि में नवाचार और सहायक सामग्रियों का उचित प्रयोग कर सके।
शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) का अर्थ और परिभाषा
अध्यापन के दौरान पाठ्य सामग्री को समझाते समय शिक्षक जिन सामग्रियों का प्रयोग करता है, वे शिक्षण सहायक सामग्री कहलाती हैं। यह रटने की प्रवृत्ति को कम करती है और समझने की क्षमता को बढ़ाती है।
मूल उद्देश्य: अमूर्त (Abstract) संकल्पनाओं को मूर्त (Concrete) रूप देना।
डेण्ड के अनुसार: सहायक सामग्री वह सामग्री है जो कक्षा में या अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित या बोली गई पाठ्य सामग्री को समझने में सहायता प्रदान करती है।
एलविन स्ट्राँग के अनुसार: सहायक सामग्री के अंतर्गत उन सभी साधनों को सम्मिलित किया जाता है, जिसकी सहायता से छात्रों की पाठ में रुचि बनी रहती है।
शिक्षण सहायक सामग्री का महत्त्व और आवश्यकता
शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अधिगम को सुगम बनाने के लिए किया जाता है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
ज्ञान का स्थायीकरण: सुनी हुई बातों की अपेक्षा देखी और सुनी गई बातें अधिक समय तक याद रहती हैं।
प्रेरणा और रुचि: यह नीरस पाठ को भी रोचक बना देती है, जिससे छात्र सक्रिय रहते हैं।
इंद्रियों का उपयोग: इससे छात्रों की दृश्य और श्रव्य इंद्रियां सक्रिय होती हैं, जिससे अधिगम तीव्र होता है।
समय और ऊर्जा की बचत: कठिन संप्रत्यय को समझाने में शिक्षक को कम समय लगता है।
शब्दावली में वृद्धि: रेडियो और टेलीविजन जैसे साधनों से बच्चे नए शब्दों और उनके उच्चारण से परिचित होते हैं।
अनुभव आधारित शिक्षण: रटे हुए ज्ञान की तुलना में करके या देखकर सीखा हुआ ज्ञान अधिक प्रभावशाली होता है।
शिक्षण सहायक सामग्रियों का वर्गीकरण (Types of TLM)
इंद्रियों के प्रयोग के आधार पर शिक्षण सहायक सामग्री को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
1. दृश्य साधन (Visual Aids)
ये वे उपकरण हैं जिन्हें छात्र केवल आँखों से देख सकते हैं। इनमें सुनने की क्रिया शामिल नहीं होती।
श्यामपट्ट (Blackboard):
इसे शिक्षक का सबसे विश्वस्त मित्र माना जाता है।
यह सबसे सस्ता और सुलभ साधन है।
इसका उपयोग शब्दों के उच्चारण, कठिन अंशों को सरल करने, चित्र बनाने और व्याकरण समझाने के लिए किया जाता है।
नोट: श्यामपट्ट कार्य साफ़, स्पष्ट और व्यवस्थित होना चाहिए।
चित्र (Pictures):
जब वास्तविक वस्तु उपलब्ध न हो, तो चित्रों का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- महापुरुषों के चित्र, ऐतिहासिक इमारतों के चित्र।
मानचित्र (Maps):
ऐतिहासिक घटनाओं और भौगोलिक स्थानों के अध्ययन के लिए यह अनिवार्य है।
यह दूरी, दिशा और स्थान की अवधारणा को स्पष्ट करता है।
चार्ट (Charts):
भाषा शिक्षण में वर्णमाला, विलोम शब्द या व्याकरणिक नियमों को चार्ट के माध्यम से कक्षा में टांगा जा सकता है।
इससे 'प्रिन्ट समृद्ध परिवेश' (Print Rich Environment) का निर्माण होता है।
वास्तविक पदार्थ (Realia):
यह सबसे उत्तम दृश्य सामग्री है।
इसमें छात्रों को वास्तविक वस्तुओं (जैसे- फूल, पत्तियां, टिकट, सिक्के) को प्रत्यक्ष दिखाया और छूने दिया जाता है।
यह निरीक्षण शक्ति का विकास करता है।
नमूने (Models):
जो वस्तुएं आकार में बहुत बड़ी होती हैं (जैसे- हाथी, पहाड़, रेलगाड़ी) या जो उपलब्ध नहीं हो सकतीं, उनके प्रतिरूप (Model) कक्षा में दिखाए जाते हैं।
फ्लेनेल बोर्ड (Flannel Board):
यह एक विशेष प्रकार का बोर्ड होता है जिस पर खादी या फलालेन का कपड़ा चढ़ा होता है।
इस पर चित्र या अक्षर चिपकाकर कहानी सुनाई जाती है या शब्द निर्माण सिखाया जाता है।
बुलेटिन बोर्ड (Bulletin Board):
इस पर प्रतिदिन के समाचार, रोचक तथ्य, या विद्यालय की सूचनाएं प्रदर्शित की जाती हैं।
यह छात्रों के सामान्य ज्ञान में वृद्धि करता है।
ओवर हेड प्रोजेक्टर (OHP):
इसमें पारदर्शी शीट (Transparencies) पर लिखे विषय को बड़े पर्दे पर प्रक्षेपित किया जाता है।
2. श्रव्य साधन (Audio Aids)
इनका संबंध केवल श्रवणेन्द्रिय (कानों) से होता है। छात्र सुनकर ज्ञान प्राप्त करते हैं।
रेडियो (Radio):
यह दूरस्थ शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी है।
समाचार, नाटक और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रवण कौशल और उच्चारण सुधरता है।
टेपरिकॉर्डर (Tape Recorder):
यह भाषा शिक्षण में बहुत उपयोगी है।
छात्र अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करके सुन सकते हैं और उच्चारण संबंधी त्रुटियों (जैसे- गति, आरोह-अवरोह) में सुधार कर सकते हैं।
ग्रामोफोन/लिंग्वाफोन:
यह एक पुराना साधन है लेकिन उच्चारण सुधारने के लिए बहुत प्रभावी है।
इसमें पाठ का आदर्श वाचन रिकॉर्ड होता है जिसे छात्र सुनते हैं और अनुकरण करते हैं।
3. दृश्य-श्रव्य साधन (Audio-Visual Aids)
ये सबसे प्रभावशाली साधन हैं क्योंकि इनमें आँख और कान दोनों इंद्रियां एक साथ सक्रिय रहती हैं।
टेलीविजन (Television):
यह शिक्षा और मनोरंजन का बेहतरीन मिश्रण है।
छात्र घटनाओं को सजीव देखते हैं, जिससे उनकी समझ गहरी होती है।
चलचित्र/सिनेमा (Cinema):
ऐतिहासिक फिल्मों या शैक्षिक वृत्तचित्रों (Documentaries) के माध्यम से छात्रों को तथ्यात्मक जानकारी रोचक ढंग से दी जाती है।
कम्प्यूटर और इंटरनेट:
यह आधुनिक युग का सबसे सशक्त साधन है।
पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, वीडियो और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से जटिल विषयों को भी आसानी से समझाया जा सकता है।
भाषा प्रयोगशाला (Language Lab) में इसका विशेष उपयोग होता है।
नाटक (Drama/Role Play):
नाटक में छात्र स्वयं पात्र बनकर अभिनय करते हैं।
महत्त्व: इससे संवाद बोलने की कला, भाव-भंगिमा और आत्मविश्वास का विकास होता है।
यह भाषा प्रयोग के विविध अवसर प्रदान करता है।
क्रियात्मक सहायक सामग्री और अन्य गतिविधियाँ
NCF 2005 करके सीखने (Learning by Doing) पर बल देता है। इसके अंतर्गत वे सामग्रियां आती हैं जिनमें छात्र सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
शैक्षिक भ्रमण (Field Trips)
इसे 'सरस्वती यात्रा' भी कहा जाता है।
यह कक्षा की चारदीवारी से बाहर की दुनिया का व्यावहारिक ज्ञान देता है।
उदाहरण: डाकघर, बैंक, चिड़ियाघर या ऐतिहासिक स्थलों का दौरा।
इससे छात्रों में अवलोकन कौशल और सामाजिकता का विकास होता है।
भाषा खेल (Language Games)
कक्षा के वातावरण को बोझिल होने से बचाने के लिए भाषा खेल जरूरी हैं।
उदाहरण: अन्त्याक्षरी, शब्द-सीढ़ी, पहेलियाँ, वाद-विवाद प्रतियोगिता।
यह शब्दावली विस्तार और मौखिक अभिव्यक्ति में सहायक है।
संग्रहालय (Museum)
यहाँ ऐतिहासिक और दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह होता है।
पुरानी पांडुलिपियां, सिक्के और अस्त्र-शस्त्र देखकर छात्र इतिहास और संस्कृति से जुड़ते हैं।
पाठ्यपुस्तक: साधन या साध्य? (Textbook in Language Teaching)
भाषा शिक्षण में पाठ्यपुस्तक एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण 'साधन' (Resource) है, लेकिन यह एकमात्र साधन नहीं है।
साधन vs साध्य: पाठ्यपुस्तक केवल एक साधन (Tool) है जो उद्देश्यों तक पहुँचने में मदद करता है। साध्य (Goal) बच्चे का सर्वांगीण विकास और भाषा दक्षता है।
शिक्षक को पाठ्यपुस्तक के बाहर भी जाना चाहिए और बाहरी दुनिया के उदाहरणों को जोड़ना चाहिए।
एक अच्छी पाठ्यपुस्तक के गुण
पाठ्यपुस्तक का चयन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
विषय-वस्तु की विविधता: उसमें कहानी, कविता, नाटक, निबंध, संस्मरण आदि विभिन्न विधाओं का समावेश होना चाहिए।
जीवन से जुड़ाव: पाठ ऐसे हों जो बच्चों के दैनिक जीवन, परिवेश और अनुभवों से जुड़े हों।
भाषा शैली: भाषा बच्चों के मानसिक स्तर के अनुरूप सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण होनी चाहिए। कठिन और तत्सम प्रधान शब्दों का अनावश्यक प्रयोग नहीं होना चाहिए।
चित्र और प्रस्तुतीकरण: प्राथमिक स्तर पर पुस्तक रंगीन और आकर्षक चित्रों से भरपूर होनी चाहिए। चित्र अमूर्त भावों को समझने में मदद करते हैं।
अभ्यास कार्य: पाठ के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न केवल रटने वाले न हों, बल्कि चिंतन और सृजनात्मकता को बढ़ावा देने वाले हों।
व्याकरण का प्रस्तुतीकरण: व्याकरण को अलग से नियमों के रूप में न पढ़ाकर, पाठ के संदर्भ में ही (Contextual Grammar) सिखाया जाना चाहिए।
लैंगिक संवेदनशीलता: पाठ्यपुस्तक में लिंग, धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। महिलाओं और पुरुषों को समान महत्त्व देने वाले पाठ होने चाहिए।
बाल साहित्य (Children's Literature)
प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण में बाल साहित्य का विशेष महत्त्व है।
उद्देश्य: बच्चों में पठन के प्रति रुचि जगाना और उन्हें भाषा की विभिन्न छटाओं से परिचित कराना।
विशेषताएं: यह रोचक, चित्रात्मक और बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप होता है।
लाभ:
कल्पना शक्ति का विकास।
शब्दावली में वृद्धि।
कहानी के पात्रों के माध्यम से नैतिक मूल्यों का विकास।
सृजनात्मकता को प्रोत्साहन।
समावेशी कक्षा में शिक्षण सहायक सामग्री (TLM in Inclusive Classrooms)
समावेशी कक्षा में विभिन्न क्षमताओं वाले बच्चे (सामान्य और विशेष आवश्यकता वाले) एक साथ पढ़ते हैं। शिक्षक को सभी की जरूरतों का ध्यान रखना होता है।
दृष्टिबाधित छात्रों के लिए:
ब्रेल लिपि वाली पुस्तकें।
उभरे हुए नक़्शे और ग्लोब।
टेपरिकॉर्डर और स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर (श्रव्य साधन)।
वास्तविक वस्तुएं जिन्हें छूकर पहचाना जा सके।
श्रवण बाधित छात्रों के लिए:
अधिक से अधिक दृश्य सामग्री (चार्ट, मॉडल, फ्लैश कार्ड) का प्रयोग।
सांकेतिक भाषा (Sign Language) का प्रयोग।
हाव-भाव और शारीरिक भाषा (Body Language) का प्रभावी उपयोग।
शिक्षण सहायक सामग्री के चयन और प्रयोग के सिद्धांत
किसी भी सामग्री का उपयोग तभी सफल होता है जब उसका चयन और प्रस्तुतीकरण सही हो।
उद्देश्यपूर्णता: सामग्री का चयन पाठ के उद्देश्य के अनुसार होना चाहिए। बिना वजह सामग्री का प्रयोग छात्रों का ध्यान भटका सकता है।
सटीकता: जो जानकारी दी जा रही है वह सही और अद्यतन होनी चाहिए।
सरलता: सामग्री बहुत जटिल नहीं होनी चाहिए जिसे समझने में ही बच्चों की ऊर्जा खत्म हो जाए।
मितव्ययिता (Low Cost): सामग्री सस्ती या बिना लागत (Low cost/No cost) की होनी चाहिए। शिक्षक बेकार वस्तुओं (कबाड़ से जुगाड़) से भी प्रभावी TLM बना सकते हैं।
उपयुक्त समय: सामग्री को सही समय पर प्रस्तुत करना चाहिए और काम खत्म होने पर हटा लेना चाहिए, अन्यथा छात्र उसी में खोए रहेंगे।
स्थानिया: सामग्री बच्चों के स्थानीय परिवेश से संबंधित होनी चाहिए ताकि वे उससे आसानी से जुड़ सकें।
CTET परीक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण बिंदु (Key Points for Revision)
प्रिन्ट समृद्ध परिवेश (Print Rich Environment): कक्षा की दीवारों पर चार्ट, पोस्टर, बच्चों की रचनाएं और कविताएं लगी होनी चाहिए। यह भाषा सीखने में बहुत मदद करता है।
बहुभाषिकता (Multilingualism): कक्षा में बच्चों की मातृभाषा को 'बाधा' नहीं बल्कि एक 'संसाधन' (Resource) माना जाना चाहिए। पाठ्यपुस्तक और TLM ऐसे हों जो विविधता का सम्मान करें।
रोल प्ले (भूमिका निर्वाह): इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को विविध संदर्भों में भाषा प्रयोग के अवसर प्रदान करना है, न कि केवल अभिनय सिखाना।
समाचार पत्र और पत्रिकाएं: ये उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा सीखने के लिए एक उत्तम और प्रामाणिक सामग्री (Authentic Material) हैं।
तकनीक का प्रयोग: स्मार्ट क्लास और डिजिटल बोर्ड का प्रयोग आधुनिक शिक्षा में अनिवार्यता बन रहा है, लेकिन यह शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता।
निष्कर्ष
शिक्षण सहायक सामग्री और पाठ्यपुस्तकें भाषा शिक्षण की रीढ़ हैं। एक कुशल शिक्षक वह है जो पाठ्यपुस्तक के सीमित दायरे से बाहर निकलकर, परिवेश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए शिक्षण को जीवंत बना दे। याद रखें, बच्चे तब सबसे बेहतर सीखते हैं जब वे सक्रिय होते हैं और शिक्षण सामग्री उनके अनुभवों से जुड़ती है।
शिक्षण सहायक सामग्री(TLM)
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
