विशिष्ट बालक: पहचान, प्रकार और शिक्षा

Sunil Sagare
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 यह अध्याय CTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसमें हम 'वैयक्तिक विभिन्नता' के आधार पर विशिष्ट बालकों के वर्गीकरण, उनकी पहचान और उनकी शिक्षा विधियों का अध्ययन करेंगे।


1. विशिष्ट बालक का अर्थ (Meaning of Special Child)

वह बालक जो अपनी मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और संवेगात्मक विशेषताओं में औसत (सामान्य) बालकों से अलग होता है, विशिष्ट बालक कहलाता है। यह विशिष्टता सकारात्मक (प्रतिभाशाली) या नकारात्मक (पिछड़ा/मंदबुद्धि) दोनों प्रकार की हो सकती है।

  • क्रो एवं क्रो के अनुसार: विशिष्ट बालक वह है जो शारीरिक, मानसिक या सामाजिक गुणों में सामान्य बालक से भिन्न होता है।

  • मुख्य आवश्यकता: इन बालकों को अपनी क्षमता के पूर्ण विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण और कक्षा-व्यवस्था की आवश्यकता होती है।


2. विशिष्ट बालकों का वर्गीकरण (Classification)

विशिष्ट बालकों को मुख्य रूप से 6 वर्गों में विभाजित किया गया है:

  1. प्रतिभाशाली बालक

  2. सृजनशील बालक

  3. पिछड़े बालक

  4. मंद-बुद्धि बालक

  5. समस्यात्मक बालक

  6. बाल अपराधी


3. प्रतिभाशाली बालक (Gifted Children)

ऐसे बालक जिनकी बौद्धिक क्षमता और क्रियात्मक योग्यता सामान्य बालकों की तुलना में बहुत अधिक होती है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • बुद्धि लब्धि (IQ): सामान्यतः 130 से 170 (टर्मन के अनुसार 140 से अधिक)।

  • विशाल शब्दकोश: इनका भाषा पर पूर्ण अधिकार होता है।

  • अमूर्त चिंतन: ये कठिन मानसिक कार्यों और अमूर्त संकल्पनाओं को आसानी से समझ लेते हैं।

  • जिज्ञासु प्रवृत्ति: इनमें प्रश्न पूछने और नई चीजों को जानने की तीव्र इच्छा होती है।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अध्ययन और समस्याओं को सुलझाने में तार्किक विधि का प्रयोग करते हैं।

  • नेतृत्व कौशल: इनमें दूसरों का नेतृत्व करने की नैसर्गिक क्षमता होती है।

प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा:

  • संवर्धन कार्यक्रम (Enrichment Programmes): पाठ्यक्रम को विस्तृत और चुनौतीपूर्ण बनाना।

  • त्वरण (Acceleration): बच्चे को उसकी योग्यता के आधार पर अगली कक्षा में प्रोन्नत करना (Grade Skipping)।

  • विशेष अवसर: पुस्तकालय, विशेष प्रोजेक्ट और स्वतंत्र अध्ययन की सुविधा देना।

  • हैविर्स्ट का कथन: "प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का सफल कार्यक्रम वही है, जिसका उद्देश्य उनकी विभिन्न योग्यताओं का विकास करना हो।"

रेनज़ुली का 'थ्री रिंग मॉडल' (महत्वपूर्ण):

जोसेफ रेनज़ुली ने प्रतिभाशाली व्यवहार के तीन घटक बताए हैं:

  1. औसत से उच्च क्षमता

  2. कार्य के प्रति प्रतिबद्धता

  3. सृजनात्मकता


4. सृजनशील बालक (Creative Children)

सृजनात्मकता का अर्थ है कुछ 'नया' या 'मौलिक' (Original) रचने की क्षमता।

जेम्स ड्रेवर के अनुसार: "अनिवार्य रूप से किसी नई वस्तु का सृजन करना ही सृजनात्मकता है।"

पहचान और विशेषताएँ:

  • अपसारी चिंतन (Divergent Thinking): ये बालक एक ही समस्या के कई अलग-अलग समाधान सोच सकते हैं। (Out of the box thinking)।

  • मौलिकता: इनके विचारों में नयापन होता है, ये दूसरों की नकल नहीं करते।

  • लचीलापन: परिस्थितियों के अनुसार अपने विचारों को बदलने की क्षमता।

  • जिज्ञासा और विनोद: ये अत्यंत जिज्ञासु होते हैं और इनमें विनोद (हँसी-मजाक) की भावना पाई जाती है।

  • जोखिम उठाना: ये असफल होने के डर के बिना नए प्रयोग करते हैं।

टॉरेंस (Torrance) के अनुसार सृजनात्मकता के तत्व:

  1. प्रवाह (Fluency): विचारों की अधिक मात्रा।

  2. लचीलापन (Flexibility): विविधतापूर्ण विचार।

  3. मौलिकता (Originality): अनोखे विचार।

  4. विस्तारण (Elaboration): विचारों को विस्तृत करना।

सृजनशील बालकों की शिक्षा:

  • ब्रेनस्टॉर्मिंग (Brainstorming): मस्तिष्क उद्वेलन विधि द्वारा नए विचारों को प्रोत्साहन देना।

  • स्वतंत्रता: निर्णय लेने और अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता देना।

  • समस्या समाधान: खुली अंत वाली (Open-ended) समस्याएं देना।


5. पिछड़े बालक (Backward Children)

वे छात्र जो अपनी आयु वर्ग के अन्य छात्रों की तुलना में शैक्षिक उपलब्धि में बहुत पीछे रह जाते हैं।

परिभाषा (सिरिल बर्ट): "पिछड़ा बालक वह है जो अपने विद्यालय जीवन के मध्य में (लगभग 10.5 वर्ष की आयु में) अपनी कक्षा से नीचे की कक्षा का कार्य करने में असमर्थ हो।"

विशेषताएँ:

  • सीखने की गति बहुत धीमी होती है।

  • जीवन में निराशा और हीन भावना का अनुभव करते हैं।

  • समाज विरोधी कार्यों की ओर झुक सकते हैं।

  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।

पिछड़ेपन के कारण:

  • शारीरिक दोष या बीमारी।

  • निम्न बुद्धि लब्धि (IQ 80-90 के बीच)।

  • परिवार का खराब वातावरण या गरीबी।

  • विद्यालय में अनुपस्थिति।

शिक्षा व्यवस्था:

  • विशेष विद्यालय और उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching)।

  • हस्तशिल्प (Handicraft) की शिक्षा देना ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

  • मूर्त वस्तुओं के माध्यम से पढ़ाना।

  • पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर पढ़ाना।


6. मंद-बुद्धि बालक (Mentally Retarded Children)

ये वे बालक होते हैं जिनका मानसिक विकास रुक जाता है और जिनकी मानसिक क्षमताएँ औसत से बहुत कम होती हैं।

विशेषताएँ:

  • बुद्धि लब्धि (IQ) सामान्यतः 70 से कम होती है।

  • स्मृति शक्ति बहुत कमजोर होती है।

  • अमूर्त चिंतन का पूर्ण अभाव होता है।

  • दूसरों पर निर्भरता अधिक होती है।

शिक्षा और देखभाल:

  • इन्हें 'जीवन कौशल' (Life Skills) और दैनिक कार्यों (नहाना, खाना, कपड़े पहनना) का प्रशिक्षण देना प्राथमिकता है।

  • व्यावसायिक प्रशिक्षण देना ताकि वे सरल कार्य कर सकें।

  • शिक्षण में दृश्य-श्रव्य सामग्री का अधिकतम प्रयोग।

  • माता-पिता को धैर्य और प्रेमपूर्वक व्यवहार करने का परामर्श।


7. समस्यात्मक बालक (Problematic Children)

वे बालक जिनका व्यवहार या व्यक्तित्व किसी बात में गंभीर रूप से असामान्य होता है और जो कक्षा या परिवार के लिए समस्या बन जाते हैं।

प्रमुख प्रकार:

  • चोरी करने वाले

  • झूठ बोलने वाले

  • क्रोध करने वाले

  • विद्यालय से भागने वाले

  • एकांत प्रिय

उपचार और शिक्षा:

  • कारणों का पता लगाना: शिक्षक को 'केस स्टडी' विधि द्वारा समस्या के मूल कारण (जैसे- घर का माहौल, ईर्ष्या, अवहेलना) को जानना चाहिए।

  • सहानुभूति: बालक को डांटने या मारने के बजाय प्रेम और सहानुभूति से समझाना।

  • नैतिक शिक्षा: कहानियों और नाटकों के माध्यम से अच्छे-बुरे का अंतर सिखाना।

  • आत्म-नियंत्रण: बालक को अपने आवेगों पर नियंत्रण रखना सिखाना।


8. बाल अपराधी (Juvenile Delinquents)

जब कोई बालक (कानून द्वारा निर्धारित आयु से कम) कोई ऐसा कार्य करता है जो कानूनन अपराध है, तो उसे बाल अपराधी कहते हैं।

उदाहरण: चोरी करना, मारपीट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, नशा करना।

कारण:

  • पारिवारिक कलह और विघटन।

  • गरीबी और आवश्यकताओं की पूर्ति न होना।

  • बुरी संगति।

  • मनोरंजन के अनुचित साधन।

सुधार के उपाय:

  • किशोर न्यायालय (Juvenile Courts): बाल अपराधियों को जेल नहीं भेजा जाता, बल्कि सुधार गृह (Reformatory Schools) में रखा जाता है।

  • मनोवैज्ञानिक उपचार: मनोचिकित्सक द्वारा परामर्श (Counselling)।

  • माता-पिता की भूमिका: घर का वातावरण स्नेहपूर्ण बनाना।


महत्त्वपूर्ण सूत्र (Mathematical Formula for Intelligence)

बुद्धि लब्धि (IQ) का मापन करने के लिए टर्मन द्वारा संशोधित सूत्र का प्रयोग किया जाता है:

$$IQ = \frac{\text{MA (मानसिक आयु)}}{\text{CA (वास्तविक आयु)}} \times 100$$

जहाँ:

  • MA = Mental Age

  • CA = Chronological Age


परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण बिंदु (Exam Oriented Facts)

  • डिस्लेक्सिया (Dyslexia): पठन संबंधी विकार (पढ़ने में कठिनाई)।

  • डिस्ग्राफिया (Dysgraphia): लेखन संबंधी विकार (लिखने में कठिनाई)।

  • डिस्कैलकुलिया (Dyscalculia): गणितीय गणना संबंधी विकार।

  • समावेशी शिक्षा (Inclusive Education): विशिष्ट बालकों को सामान्य बालकों के साथ मुख्यधारा के विद्यालयों में पढ़ाना।

  • ब्रेल लिपि: दृष्टिबाधित बालकों के पढ़ने के लिए (लुई ब्रेल द्वारा विकसित)।



विशिष्ट बालक: पहचान, प्रकार और शिक्षा

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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