हिंदी व्याकरण (भाग-2) - शब्द भेद, काल और कारक

Sunil Sagare
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शब्द विचार: एक दृष्टि

वर्णों के सार्थक मेल को 'शब्द' कहते हैं। व्याकरण में शब्दों का वर्गीकरण मुख्य रूप से चार आधारों पर किया जाता है, लेकिन CTET के लिए 'प्रयोग के आधार पर' वर्गीकरण सबसे महत्वपूर्ण है।

प्रयोग के आधार पर शब्द भेद:

  1. विकारी शब्द: वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, काल या कारक के अनुसार परिवर्तन आ जाता है। (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)।

  2. अविकारी शब्द (अव्यय): वे शब्द जो हर स्थिति में एक समान रहते हैं। (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात)।


भाग 1: विकारी शब्द (विस्तृत अध्ययन)

1. संज्ञा (Sangya)

किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं।

संज्ञा के 5 भेद और उनकी पहचान:

A. व्यक्तिवाचक संज्ञा

यह किसी एक विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराती है।

  • पहचान: यह अपने आप में विशिष्ट (Specific) होती है। इसका बहुवचन प्रायः नहीं बनता।

  • उदाहरण:

    • व्यक्तियों के नाम: राम, सीता, मोहन।

    • दिशाओं के नाम: उत्तर, पश्चिम।

    • देशों/नगरों के नाम: भारत, जापान, पटना।

    • नदियों/पर्वतों के नाम: गंगा, हिमालय, अरावली।

    • पुस्तकों के नाम: रामचरितमानस, गोदान।

B. जातिवाचक संज्ञा

यह एक ही प्रकार की वस्तुओं या प्राणियों की पूरी 'जाति' या 'वर्ग' का बोध कराती है।

  • पहचान: यदि किसी शब्द को बोलने से वैसी ही अनेक चीजों का चित्र दिमाग में आए।

  • उदाहरण:

    • प्राकृतिक तत्व: नदी, पहाड़, ज्वालामुखी, वर्षा।

    • पशु-पक्षी: गाय, घोड़ा, तोता।

    • पद/व्यवसाय: शिक्षक, डॉक्टर, मंत्री, चोर।

    • वस्तुएँ: कुर्सी, मेज, किताब, घड़ी।

महत्वपूर्ण नियम: यदि किसी व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग किसी की तुलना करने या उपमा देने के लिए किया जाए, तो वह 'जातिवाचक' बन जाती है।

  • उदाहरण: "कालिदास भारत के शेक्सपियर हैं।" (यहाँ शेक्सपियर व्यक्ति नहीं, बल्कि महान नाटककार की 'जाति' का बोध करा रहा है)।

C. भाववाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी गुण, दशा, भाव या स्वभाव का बोध हो। इन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है।

  • पहचान: इनके अंत में अक्सर ता, त्व, पन, पा, आई, आहट जैसे प्रत्यय लगे होते हैं।

  • उदाहरण: मित्रता, बचपन, अपनापन, बुढ़ापा, लंबाई, कड़वाहट, मिठास।

भाववाचक संज्ञा का निर्माण:

  • जातिवाचक से: मानव $\rightarrow$ मानवता

  • सर्वनाम से: अपना $\rightarrow$ अपनापन

  • विशेषण से: चतुर $\rightarrow$ चतुराई

  • क्रिया से: थकना $\rightarrow$ थकावट

D. समूहवाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी एक वस्तु का नहीं, बल्कि पूरे समूह या समुदाय का बोध हो।

  • उदाहरण: कक्षा, सेना, भीड़, दल, गुच्छा, परिवार, समिति, पुलिस।

E. द्रव्यवाचक संज्ञा

वे शब्द जो किसी पदार्थ, धातु या द्रव्य का बोध कराते हैं जिन्हें मापा या तौला जाता है, गिना नहीं जाता।

  • उदाहरण: सोना, लोहा, दूध, पानी, तेल, घी, चावल, ऊन।

  • नोट: द्रव्यवाचक संज्ञा का प्रयोग सदैव एकवचन में होता है।


2. सर्वनाम (Sarvanam)

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द। हिंदी में मूल सर्वनाम 11 हैं (मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ), लेकिन प्रयोग के आधार पर इनके 6 भेद हैं।

A. पुरुषवाचक सर्वनाम

बातचीत में शामिल व्यक्तियों के लिए।

  1. उत्तम पुरुष (वक्ता): मैं, हम।

  2. मध्यम पुरुष (श्रोता): तू, तुम, आप।

  3. अन्य पुरुष (तीसरा व्यक्ति): वह, वे, यह, ये।

B. निश्चयवाचक सर्वनाम (संकेतवाचक)

किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करने वाले शब्द।

  • उदाहरण: "यह मेरी घड़ी है।" "वे मेरे खिलौने हैं।"

  • अंतर समझें: "वह जा रहा है" (अन्य पुरुष)। "वह मेरी किताब है" (निश्चयवाचक)।

C. अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जब किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का पता न चले।

  • प्राणी के लिए: 'कोई' (दरवाजे पर कोई खड़ा है)।

  • वस्तु के लिए: 'कुछ' (पानी में कुछ गिर गया है)।

D. संबंधवाचक सर्वनाम

जो वाक्य में आए दूसरे संज्ञा/सर्वनाम शब्दों से संबंध बताते हैं।

  • शब्द: जो-सो, जैसा-वैसा, जिसकी-उसकी।

  • उदाहरण: "जो करेगा, सो भरेगा।" "जिसकी लाठी, उसकी भैंस।"

E. प्रश्नवाचक सर्वनाम

प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त शब्द।

  • उदाहरण: "तुम क्या कर रहे हो?" "वहाँ कौन है?"

F. निजवाचक सर्वनाम

कर्ता द्वारा स्वयं के लिए प्रयुक्त शब्द।

  • शब्द: आप, स्वयं, खुद, स्वतः, अपने आप।

  • उदाहरण: "मैं स्वयं चला जाऊँगा।" "गांधीजी अपना काम आप करते थे।"


3. विशेषण (Visheshan)

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द।

  • विशेष्य: जिसकी विशेषता बताई जाए (जैसे- 'लाल गुलाब' में गुलाब विशेष्य है)।

  • प्रविशेषण: जो विशेषण की भी विशेषता बताए (जैसे- "वह बहुत तेज दौड़ता है" - यहाँ 'बहुत' प्रविशेषण है)।

विशेषण के 4 भेद:

  1. गुणवाचक विशेषण:

    • रंग, रूप, आकार, गुण, दोष, दशा, काल, स्थान।

    • उदाहरण: नया कपड़ा, पुराना घर, भारतीय लोग, दयालु राजा, काली कमीज।

  2. संख्यावाचक विशेषण:

    • जिनकी गिनती की जा सके।

    • निश्चित संख्यावाचक: चार आम, दस रुपये, पहला छात्र।

    • अनिश्चित संख्यावाचक: कुछ लोग, सब छात्र, कई मकान।

  3. परिमाणवाचक विशेषण:

    • जिन्हें मापा या तौला जाए (गिनती संभव न हो)।

    • निश्चित परिमाण: दो मीटर कपड़ा, पाँच किलो चावल।

    • अनिश्चित परिमाण: थोड़ा दूध, बहुत पानी, जरा सी चीनी।

  4. सार्वनामिक विशेषण (संकेतवाचक):

    • यह सबसे महत्वपूर्ण और ट्रिकी है। जब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करे।

    • सूत्र: सर्वनाम + संज्ञा = सार्वनामिक विशेषण।

    • उदाहरण: "यह घर मेरा है।" (यहाँ 'यह' घर की विशेषता बता रहा है)।

    • तुलना: "यह मेरा घर है।" (यहाँ 'यह' निश्चयवाचक सर्वनाम है)।

विशेषण की अवस्थाएँ (Degrees of Comparison):

  1. मूलावस्था: उच्च (राम उच्च कुलीन है)।

  2. उत्तरावस्था: उच्चतर (राम श्याम से उच्चतर है)।

  3. उत्तमावस्था: उच्चतम (राम कक्षा में उच्चतम अंक लाया)।


4. क्रिया (Kriya)

जिस शब्द से किसी कार्य का करना या होना पाया जाए।

  • धातु: क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। (जैसे- पढ़, लिख, जा)। इसमें 'ना' जोड़ने से सामान्य क्रिया बनती है (पढ़ना)।

A. कर्म के आधार पर क्रिया के भेद:

  1. अकर्मक क्रिया:

    • जिसमें कर्म (Object) नहीं होता। क्रिया का फल कर्ता पर पड़ता है।

    • पहचान: क्रिया के साथ 'क्या' और 'किसको' लगाने पर उत्तर न मिले।

    • उदाहरण: तैरना, सोना, उड़ना, रोना, हँसना, चलना।

    • वाक्य: "पक्षी आकाश में उड़ते हैं।" (क्या उड़ते हैं? - उत्तर 'पक्षी' है जो कर्ता है, कर्म नहीं। अतः अकर्मक)।

  2. सकर्मक क्रिया:

    • जिसमें कर्म होता है या होने की संभावना होती है।

    • उदाहरण: खाना, पीना, पढ़ना, लिखना, बनाना।

    • वाक्य: "राम आम खाता है।" (क्या खाता है? - आम। उत्तर मिला = सकर्मक)।

B. संरचना के आधार पर महत्वपूर्ण क्रियाएँ:

  1. प्रेरणार्थक क्रिया:

    • कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

    • प्रथम प्रेरणार्थक: माँ बच्चे को जगाती है।

    • द्वितीय प्रेरणार्थक: माँ नौकरानी से बच्चे को जगवाती है।

    • रूप: करना $\rightarrow$ कराना $\rightarrow$ करवाना।

  2. पूर्वकालिक क्रिया:

    • मुख्य क्रिया से पहले होने वाली क्रिया।

    • पहचान: धातु में 'कर' या 'करके' लगा होता है।

    • उदाहरण: "वह खाकर सो गया।" "बच्चा दूध पीकर खेलने लगा।"

  3. नामधातु क्रिया:

    • संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनने वाली क्रियाएँ।

    • उदाहरण: बात $\rightarrow$ बतियाना, हाथ $\rightarrow$ हथियाना, लात $\rightarrow$ लतियाना, गरम $\rightarrow$ गरमाना।

  4. संयुक्त क्रिया:

    • दो या अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रिया।

    • उदाहरण: "वह घर पहुँच गया।" (पहुँच + गया)।


भाग 2: अविकारी शब्द (अव्यय)

ये शब्द लिंग, वचन, कारक से प्रभावित नहीं होते।

1. क्रिया-विशेषण

जो क्रिया की विशेषता बताए।

  • कालवाचक (समय): आज, कल, अभी, तुरंत, लगातार, दिनभर।

    • उदाहरण: वह दिनभर पढ़ता है।

  • स्थानवाचक (जगह): यहाँ, वहाँ, भीतर, बाहर, इधर, उधर।

    • उदाहरण: बच्चे बाहर खेल रहे हैं।

  • परिमाणवाचक (मात्रा): बहुत, कम, अधिक, थोड़ा, इतना, उतना।

    • उदाहरण: कम बोलो।

  • रीतिवाचक (ढंग): धीरे, तेज, अचानक, ध्यानपूर्वक, ऐसे, वैसे।

    • उदाहरण: वह तेज दौड़ता है।

2. संबंधबोधक अव्यय

जो अव्यय किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ते हैं।

  • पहचान: इनसे पहले अक्सर 'के', 'की', 'से' लगा होता है।

  • उदाहरण: के पास, के ऊपर, के नीचे, के साथ, के बिना।

  • वाक्य: "विद्या के बिना जीवन व्यर्थ है।" "घर के पीछे बगीचा है।"

3. समुच्चयबोधक अव्यय (योजक)

दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द।

  • समानाधिकरण (जोड़ने वाले): और, तथा, एवं, या, अथवा, किंतु, परंतु, लेकिन।

    • उदाहरण: राम और श्याम मित्र हैं। वह गरीब है परंतु ईमानदार है।

  • व्यधिकरण (आश्रित वाक्यों को जोड़ने वाले): कि, क्योंकि, ताकि, यदि-तो, यद्यपि-तथापि।

    • उदाहरण: उसने कहा कि वह कल आएगा।

4. विस्मयादिबोधक अव्यय

आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा आदि भावों को व्यक्त करने वाले।

  • उदाहरण: अरे!, वाह!, शाबाश!, हाय!, छी!

5. निपात (अति महत्वपूर्ण)

वे अव्यय जो किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष बल (Force) देते हैं।

  • शब्द: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, केवल।

  • उदाहरण:

    • राम ही जाएगा। (केवल राम, कोई और नहीं)।

    • राम भी जाएगा। (राम के अलावा और लोग भी जा रहे हैं)।

    • तुम्हें आज जाना ही पड़ेगा।


भाग 3: काल (Tense) - सूक्ष्म अवलोकन

CTET में काल के उप-भेदों (Sub-types) से प्रश्न आते हैं।

1. भूतकाल (Past Tense)

  • सामान्य भूत: क्रिया समाप्त हो गई। (राम गया।)

  • आसन्न भूत: क्रिया अभी-अभी समाप्त हुई है। (राम गया है।)

  • पूर्ण भूत: क्रिया बहुत पहले समाप्त हो चुकी थी। (राम गया था।)

  • अपूर्ण भूत: भूतकाल में कार्य चल रहा था। (राम जा रहा था।)

  • संदेहार्थक भूत: कार्य हुआ या नहीं, इसमें संदेह हो। (राम गया होगा।)

  • हेतुहेतुमद् भूत: शर्त वाला वाक्य। (यदि तुम पढ़ते, तो पास हो जाते।)

2. वर्तमान काल (Present Tense)

  • सामान्य वर्तमान: ता है, ती है। (वह पढ़ता है।)

  • अपूर्ण वर्तमान (तात्कालिक): कार्य जारी है। (वह पढ़ रहा है।)

  • पूर्ण वर्तमान: कार्य अभी पूरा हुआ है (आसन्न भूत जैसा)। (वह पढ़ चुका है।)

  • संदेहार्थक वर्तमान: वर्तमान में कार्य होने पर संदेह। (वह पढ़ता होगा - Note: 'होगा' देखकर भविष्य न समझें, यह वर्तमान का संदेह है।)

3. भविष्यत काल (Future Tense)

  • सामान्य भविष्यत: वह कल जाएगा।

  • संभाव्य भविष्यत: संभावना व्यक्त करना। (शायद आज वर्षा हो। संभव है वह आए।)


भाग 4: कारक (Case) - विस्तृत चार्ट

कारक वह व्याकरणिक इकाई है जो संज्ञा/सर्वनाम का संबंध क्रिया से जोड़ती है।

कारकचिह्नविस्तृत पहचान व नियम
1. कर्तानेक्रिया करने वाला। भूतकाल की सकर्मक क्रिया में 'ने' लगता है। (राम ने खाया)। अकर्मक या वर्तमान/भविष्य में अक्सर चिह्न नहीं होता।
2. कर्मकोजिस पर क्रिया का फल पड़े। (राम ने रावण को मारा)। निर्जीव वस्तुओं के साथ अक्सर 'को' नहीं लगता (मैंने पुस्तक पढ़ी)।
3. करणसे, के द्वारासाधन (Tool/Medium)। (मैं पेन से लिखता हूँ)।
4. संप्रदानके लिए, कोकिसी को कुछ देना या किसी के लिए कुछ करना। अपवाद: 'को' का प्रयोग तब होता है जब दान दिया जाए। (राजा ने भिखारी को धन दिया)।
5. अपादानसे (अलग)अलग होना, डरना, तुलना करना, शर्माना। (पेड़ से पत्ता गिरा। राम श्याम से सुंदर है। बहू ससुर से लजाती है)।
6. संबंधका, के, कीदो संज्ञाओं का संबंध। (राम का घर)।
7. अधिकरणमें, परक्रिया का आधार (स्थान/समय)। (चिड़िया पेड़ पर बैठी है। परीक्षा मार्च में होगी)।
8. संबोधनहे, अरेपुकारना।

भाग 5: वाच्य (Voice) - एक नजर

क्रिया का वह रूपांतर जिससे पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है।

  1. कर्तृवाच्य (Active Voice): क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है।

    • उदाहरण: राम पत्र लिखता है। सीता पत्र लिखती है।

  2. कर्मवाच्य (Passive Voice): क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है और कर्ता के साथ 'से' या 'के द्वारा' लगता है।

    • उदाहरण: राम द्वारा पत्र लिखा जाता है। सीता द्वारा पत्र लिखा जाता है। (यहाँ पत्र पुल्लिंग है, इसलिए क्रिया 'लिखा जाता' रही, भले ही कर्ता सीता हो)।

  3. भाववाच्य: क्रिया न कर्ता के अनुसार होती है न कर्म के अनुसार, बल्कि भाव प्रधान होता है। क्रिया सदैव अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन होती है। अक्सर असमर्थता दिखाने के लिए।

    • उदाहरण: मुझसे चला नहीं जाता। राम से दौड़ा नहीं जाता।


अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण ट्रिक्स

  1. सकर्मक/अकर्मक: 'क्या' और 'किसको' का उत्तर ढूँढें।

  2. सर्वनाम vs सार्वनामिक विशेषण: यदि 'यह/वह' के तुरंत बाद संज्ञा है, तो वह विशेषण है। यदि 'यह/वह' के बाद क्रिया है, तो वह सर्वनाम है।

    • यह किताब है। (सर्वनाम)

    • यह किताब मेरी है। (सार्वनामिक विशेषण)

  3. लिंग पहचान: शब्द के साथ 'अच्छा/अच्छी' या 'मेरा/मेरी' लगाकर देखें।

    • दही: अच्छा दही (पुल्लिंग) - अपवाद, अक्सर लोग इसे स्त्रीलिंग समझते हैं।

    • पुस्तक: अच्छी पुस्तक (स्त्रीलिंग)।



शब्द भेद, काल और कारक

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