भारत: जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी

Sunil Sagare
0

 

1. मौसम और जलवायु (Weather and Climate)

मौसम और जलवायु दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं, जिन्हें अक्सर एक समझा जाता है। CTET में इन दोनों के अंतर पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

मौसम (Weather):

  • यह वायुमंडल की दिन-प्रतिदिन की स्थिति है।

  • यह अल्पकालिक होता है (घंटों या दिनों में बदल सकता है)।

  • इसमें तापमान, वर्षा, हवा की गति और धूप शामिल हैं।

  • उदाहरण: "आज मौसम धूप वाला है" या "कल बारिश हो सकती है।"

जलवायु (Climate):

  • यह एक विशाल क्षेत्र में लंबी समयावधि (सामान्यतः $30$ वर्ष से अधिक) में मौसम की अवस्थाओं और विविधताओं का औसत है।

  • यह दीर्घकालिक और अपेक्षाकृत स्थायी होती है।

  • उदाहरण: भारत की जलवायु 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी' है।


2. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

भारत की जलवायु को नियंत्रित करने वाले छह प्रमुख कारक हैं:

  1. अक्षांश (Latitude): कर्क रेखा (Tropic of Cancer) देश के मध्य भाग से पश्चिम में कच्छ के रन से लेकर पूर्व में मिजोरम तक गुजरती है। देश का लगभग आधा भाग कर्क रेखा के दक्षिण में है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्र है, जबकि उत्तरी भाग उपोष्णकटिबंधीय है।

  2. तुंगता/ऊंचाई (Altitude): भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत हैं जिनकी औसत ऊंचाई लगभग $6000 \text{ m}$ है। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है। इसलिए, हिमालय क्षेत्र में जलवायु ठंडी होती है।

  3. वायुदाब एवं पवन तंत्र (Pressure and Wind System): भारत उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनों (Trade Winds) के क्षेत्र में स्थित है।

  4. समुद्र से दूरी (Continentality): जैसे-जैसे समुद्र से दूरी बढ़ती है, उसका समकारी प्रभाव कम होता जाता है और लोग विषम मौसम का अनुभव करते हैं। इसे महाद्वीपीय अवस्था कहते हैं (गर्मी में बहुत गर्म और सर्दी में बहुत ठंडा)।

  5. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances): शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिम भारत में आने वाले चक्रवातीय विक्षोभ भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उत्पन्न होते हैं।

  6. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents): तटीय जलवायु को प्रभावित करती हैं।


3. भारतीय मानसून (The Indian Monsoon)

  • शब्द की उत्पत्ति: 'मानसून' शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द 'मौसम' (Mausim) से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'ऋतु'।

  • अर्थ: मानसून का अर्थ है एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन।

  • भारत की जलवायु को 'मानसूनी जलवायु' कहा जाता है।

मानसून की क्रियाविधि को समझने के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • स्थल और जल के गर्म और ठंडे होने की दर अलग-अलग होती है।

  • ग्रीष्म ऋतु में भारत के आंतरिक भागों में निम्न दाब (Low Pressure) का क्षेत्र बन जाता है, जबकि समुद्र के ऊपर उच्च दाब (High Pressure) होता है।

  • हवा हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है।


4. भारत की ऋतुएँ (The Seasons of India)

भारत में मुख्य रूप से चार ऋतुएँ मानी जाती हैं:

1. शीत ऋतु (Winter Season) - मध्य नवंबर से फरवरी तक

  • समय: दिसंबर और जनवरी भारत के उत्तरी भाग में सबसे ठंडे महीने होते हैं।

  • तापमान: दक्षिण भारत में औसत तापमान $24^\circ\text{C}$ से $25^\circ\text{C}$ के बीच रहता है, जबकि उत्तर भारत में यह $10^\circ\text{C}$ से $15^\circ\text{C}$ के बीच गिर जाता है।

  • पवन दिशा: इस समय उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (North-East Trade Winds) स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं। इसलिए देश के अधिकतर भाग में शुष्क मौसम रहता है।

  • वर्षा: इन पवनों के कारण तमिलनाडु के तट (कोरोमंडल तट) पर वर्षा होती है, क्योंकि यहाँ ये पवनें समुद्र (बंगाल की खाड़ी) से स्थल की ओर बहती हैं और अपने साथ नमी लाती हैं।

  • पश्चिमी विक्षोभ: उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्की वर्षा होती है, जो 'रबी' की फसल (विशेषकर गेहूँ) के लिए बहुत लाभदायक होती है। पहाड़ों पर हिमपात (Snowfall) होता है।

2. ग्रीष्म ऋतु (Summer Season) - मार्च से मई तक

  • तापमान: सूर्य के उत्तरायण होने के कारण तापमान बढ़ता है। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान $48^\circ\text{C}$ तक पहुँच सकता है।

  • लू (Loo): मई के महीने में उत्तर भारत में धूल भरी, गर्म और शुष्क हवाएँ चलती हैं जिन्हें 'लू' कहा जाता है। इनके संपर्क में आना घातक हो सकता है।

  • काल बैसाखी: पश्चिम बंगाल में तीव्र हवाओं के साथ गरज वाली वर्षा होती है, जिसे 'काल बैसाखी' कहा जाता है।

  • आम्र वर्षा (Mango Showers): ग्रीष्म ऋतु के अंत में केरल और कर्नाटक में पूर्व-मानसूनी वर्षा होती है। यह आम को जल्दी पकने में सहायता करती है।

3. वर्षा ऋतु / दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) - जून से सितंबर

  • प्रक्रिया: यह मानसून के 'आगमन' का समय है। इस समय उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र इतना तीव्र हो जाता है कि वह दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित करता है।

  • पवन दिशा: ये पवनें हिंद महासागर को पार करके भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश करती हैं। चूँकि ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से गुजरती हैं, इसलिए ये अपने साथ भारी मात्रा में नमी लाती हैं।

  • मानसून का प्रस्फोट (Burst of Monsoon): सामान्य वर्षा में अचानक वृद्धि हो जाती है और यह लगातार कई दिनों तक जारी रहती है।

  • शाखाएँ: मानसून भारतीय प्रायद्वीप के आकार के कारण दो शाखाओं में बँट जाता है:

    1. अरब सागर शाखा: यह पश्चिमी घाट से टकराती है और पश्चिमी तटीय भागों में भारी वर्षा करती है।

    2. बंगाल की खाड़ी शाखा: यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से होते हुए उत्तर-पूर्व भारत (मेघालय की गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियों) की ओर बढ़ती है।

  • सर्वाधिक वर्षा: मेघालय में स्थित मौसिनराम (Mawsynram) दुनिया का सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।

  • वृष्टि छाया क्षेत्र (Rain Shadow Area): पश्चिमी घाट का पूर्वी भाग (दक्कन का पठार) कम वर्षा प्राप्त करता है क्योंकि यह पवनों के विपरीत दिशा (Leeward side) में स्थित है।

4. शरद ऋतु / लौटता हुआ मानसून (Retreating Monsoon) - अक्टूबर और नवंबर

  • प्रक्रिया: सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण उत्तर भारत में निम्न दाब कमजोर पड़ जाता है। मानसून पीछे हटने लगता है।

  • पवन दिशा: पवनें स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं।

  • संक्रमण काल: यह गर्म वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल है। अक्टूबर में दिन का तापमान उच्च रहता है और रातें ठंडी और सुहावनी होती हैं। इसे 'क्वार की उमस' (October Heat) भी कहते हैं।

  • चक्रवात: इस समय बंगाल की खाड़ी में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते हैं, जो भारत के पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) पर भारी तबाही और वर्षा लाते हैं।


5. प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation)

प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वे पौधे जो मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप उगते हैं। भारत में वर्षा के वितरण के आधार पर वनस्पति को 5 प्रमुख प्रकारों में बांटा गया है:

1. उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Evergreen Forests)

  • अन्य नाम: सदाबहार वन।

  • वर्षा: उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा $> 200 \text{ cm}$ होती है।

  • विशेषता: ये वन इतने घने होते हैं कि सूर्य का प्रकाश जमीन तक नहीं पहुँच पाता। ये वृक्ष वर्ष के अलग-अलग समय में अपनी पत्तियाँ गिराते हैं, इसलिए ये हमेशा हरे-भरे दिखाई देते हैं।

  • क्षेत्र: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम के ऊपरी भाग और तमिलनाडु का तट।

  • मुख्य वृक्ष: आबनूस (Ebony), महोगनी (Mahogany), रोज़वुड (Rosewood), रबर और सिनकोना।

  • जीव-जंतु: हाथी, बंदर, लेमूर, एक सींग वाला गैंडा (असम)।

2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests)

  • अन्य नाम: मानसूनी वन (भारत में सबसे बड़े क्षेत्र में फैले वन)।

  • वर्षा: $70 \text{ cm}$ से $200 \text{ cm}$ के बीच।

  • विशेषता: जल की बचत करने के लिए ये वृक्ष ग्रीष्म ऋतु में (6 से 8 सप्ताह के लिए) अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।

  • उप-विभाजन:

    • आर्द्र पर्णपाती ($100-200 \text{ cm}$): हिमालय के गिरिपद, झारखंड, पश्चिमी ओडिशा, छत्तीसगढ़। (वृक्ष: सागौन/Teak, साल, शीशम)।

    • शुष्क पर्णपाती ($70-100 \text{ cm}$): बिहार और उत्तर प्रदेश के मैदान। (वृक्ष: पीपल, नीम)।

  • मुख्य वृक्ष: सागौन (Teak - सबसे प्रमुख), साल, पीपल, नीम, शीशम, चंदन, शहतूत।

3. कटीली झाड़ियाँ और वन (The Thorn Forests and Scrubs)

  • वर्षा: $70 \text{ cm}$ से कम वर्षा वाले क्षेत्र।

  • विशेषता: वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कम करने के लिए इन पौधों की पत्तियाँ कांटों के रूप में होती हैं और जड़ें पानी की तलाश में गहरी होती हैं।

  • क्षेत्र: गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अर्ध-शुष्क क्षेत्र।

  • मुख्य पौधे: कीकर, बबूल (Acacia), खजूर (Palm), कैक्टस (Nagphani), खेजड़ी।

  • जीव-जंतु: ऊंट, जंगली गधा (Wild Ass - कच्छ के रन में)।

4. पर्वतीय वन (Mountain Forests)

ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में कमी आती है, जिससे वनस्पति में बदलाव आता है।

  • $1000 \text{ m} - 2000 \text{ m}$: आर्द्र शीतोष्ण वन। चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष जैसे ओक (Oak) और चेस्ट नट।

  • $1500 \text{ m} - 3000 \text{ m}$: शंकुधारी वन (Coniferous trees)। इनका आकार शंकु जैसा होता है। वृक्ष: चीड़ (Pine), देवदार (Deodar), सिल्वर फर, स्प्रूस।

  • $3600 \text{ m}$ से ऊपर: अल्पाइन वनस्पति। वृक्षों का आकार छोटा हो जाता है और अंततः वे झाड़ियों और घास के मैदानों में बदल जाते हैं। वृक्ष: जूनीपर, बर्च।

  • और अधिक ऊंचाई पर टुंड्रा वनस्पति (काई/Moss और लाइकेन) पाई जाती है।

  • जीव-जंतु: कश्मीरी महामृग, याक, हिम तेंदुआ (Snow Leopard), लाल पांडा।

5. मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)

  • स्थिति: ये वन खारे पानी (Saline water) में भी जीवित रह सकते हैं। ये मुख्यतः ज्वारीय क्षेत्रों (Tidal areas) में पाए जाते हैं।

  • क्षेत्र: पश्चिम बंगाल का सुंदरबन डेल्टा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टा।

  • सुंदरबन: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में स्थित है। यहाँ 'सुन्दरी' नामक वृक्षों की अधिकता है, जिसके कारण इसका नाम सुंदरबन पड़ा। सुन्दरी वृक्ष से मजबूत लकड़ी प्राप्त होती है।

  • जीव: रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), मगरमच्छ, घड़ियाल।


6. वन्य प्राणी (Wildlife)

भारत में वन्यजीवों की विपुल विविधता पाई जाती है। लगभग 90,000 पशु प्रजातियाँ और 2,000 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ यहाँ मिलती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य और संरक्षण परियोजनाएँ:

  1. राष्ट्रीय पशु: बाघ (Tiger)।

  2. राष्ट्रीय पक्षी: मोर (Peacock)।

  3. राष्ट्रीय विरासत पशु: हाथी (Elephant)।

  4. एक सींग वाला गैंडा: असम (काजीरंगा) और पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है।

  5. एशियाई शेर (Asiatic Lion): केवल गुजरात के गिर वन (Gir Forest) में पाए जाते हैं। यह इनका एकमात्र प्राकृतिक आवास है।

  6. जंगली गधा (Wild Ass): कच्छ के रन (गुजरात) में पाया जाता है।

  7. ऊंट: थार के मरुस्थल में पाए जाते हैं।

संरक्षण अधिनियम और परियोजनाएँ (Important for CTET):

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act): $1972$ में लागू हुआ।

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger): बाघों को बचाने के लिए $1973$ में शुरू किया गया।

  • प्रोजेक्ट हाथी (Project Elephant): $1992$ में शुरू किया गया।

  • मगरमच्छ संरक्षण परियोजना: $1975$ में।

प्रवासी पक्षी (Migratory Birds)

शीत ऋतु में भारत में कई प्रवासी पक्षी आते हैं, जैसे:

  • पेलिकन (Pelican)

  • साइबेरियन क्रेन (Siberian Crane) - ये साइबेरिया से आते हैं।

  • फ्लेमिंगो (Flamingo/राजहंस) - कच्छ के रन में बड़ी संख्या में आते हैं।

  • स्टॉर्क (Stork)

  • कर्ल्यू (Curlew)


7. महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी बिंदु (Key Points for Exam)

  • अश्व अक्षांश (Horse Latitudes): $30^\circ - 35^\circ$ अक्षांशों के बीच उच्च वायुदाब पेटी।

  • जेट धारा (Jet Stream): ऊपरी क्षोभमंडल में चलने वाली तीव्र हवाएँ। पश्चिमी जेट धारा भारत में पश्चिमी विक्षोभ लाती है।

  • अल-नीनो (El Nino): एक गर्म समुद्री जलधारा जो पेरू के तट पर बहती है। यह भारतीय मानसून को कमजोर करती है।

  • जीवमंडल निचय (Biosphere Reserves): भारत में $18$ बायोस्फीयर रिजर्व हैं।

    • नीलगिरी: भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व ($1986$ में स्थापित)।

    • नंदा देवी: उत्तराखंड।

    • कंचनजंगा: सिक्किम।

  • चिपको आंदोलन: वनों की कटाई रोकने के लिए सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में उत्तराखंड में चलाया गया आंदोलन।

  • वन महोत्सव: जुलाई के पहले सप्ताह में मनाया जाता है।

8. वनों का महत्व (सारांश)

  • पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) लेते हैं और ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) छोड़ते हैं।

  • पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, जिससे मृदा अपरदन (Soil Erosion) रुकता है।

  • वन वर्षा लाने में सहायक होते हैं।

  • ये वन्यजीवों को आवास प्रदान करते हैं।



भारत: जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top