विज्ञान में हम अपने चारों ओर की वस्तुओं को पदार्थ कहते हैं। CTET की दृष्टि से पदार्थों के गुण, अवस्थाएँ और उनके परिवर्तन को समझना अत्यंत आवश्यक है।
पदार्थ के अभिलाक्षणिक गुण
स्थान और द्रव्यमान: विश्व की प्रत्येक वस्तु जो स्थान घेरती है और जिसमें द्रव्यमान होता है, पदार्थ कहलाती है।
कणीय प्रकृति: पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है।
रिक्त स्थान: पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है। उदाहरण के लिए, जब हम पानी में चीनी घोलते हैं, तो चीनी के कण पानी के कणों के बीच के रिक्त स्थानों में समावेशित हो जाते हैं।
गतिज ऊर्जा: पदार्थ के कण निरंतर गतिशील रहते हैं। तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा ($K.E.$) बढ़ जाती है।
आकर्षण बल: पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यह बल ठोस में सबसे अधिक और गैस में सबसे कम होता है।
पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter)
पदार्थ मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में पाया जाता है:
1. ठोस (Solid):
इनका आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
ये दृढ़ होते हैं और बाह्य बल लगाने पर अपना आकार नहीं बदलते।
उदाहरण: ईंट, पत्थर, लकड़ी, बर्फ।
2. द्रव (Liquid):
इनका आयतन निश्चित होता है लेकिन आकार निश्चित नहीं होता।
ये उस पात्र का आकार ले लेते हैं जिसमें इन्हें रखा जाता है।
इनमें बहाव का गुण होता है, इसलिए ये तरल कहलाते हैं।
उदाहरण: जल, दूध, तेल।
3. गैस (Gas):
इनका आकार और आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं।
इनके कणों के बीच बहुत अधिक रिक्त स्थान होता है और ये तेजी से विसरण (Diffusion) करते हैं।
उदाहरण: ऑक्सीजन, जलवाष्प।
महत्वपूर्ण तथ्य: जल पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में रह सकता है - ठोस (बर्फ), द्रव (जल) और गैस (जलवाष्प)।
2. तत्वों और यौगिकों का रसायन (Elements and Compounds)
तत्व (Elements)
यह पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।
तत्वों को धातु, अधातु और उपधातु में वर्गीकृत किया जाता है।
धातुओं की विशेषताएँ:
ये ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।
इनमें चमक (Lustre) होती है।
ये आघातवर्ध्य (Malleable) होती हैं अर्थात इन्हें पीटकर चादर बनाया जा सकता है।
ये तन्य (Ductile) होती हैं अर्थात इनके तार खींचे जा सकते हैं।
अपवाद: पारा ($\text{Hg}$) एक धातु है जो कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
यौगिक (Compounds)
जब दो या दो से अधिक तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से मिलते हैं, तो यौगिक बनता है।
उदाहरण: जल ($\text{H}_2\text{O}$) एक यौगिक है।
ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) जलने में सहायक है।
हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) स्वयं ज्वलनशील है।
परंतु इनका यौगिक 'जल' आग बुझाने का कार्य करता है।
3. मिश्रण और पृथक्करण की विधियाँ (Mixtures and Separation Techniques)
दैनिक जीवन में हम वस्तुओं को उनके मिश्रण से अलग करते हैं ताकि उपयोगी घटकों को प्राप्त किया जा सके। CTET में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
प्रमुख पृथक्करण विधियाँ
1. हस्तचयन (Handpicking):
जब अशुद्धियाँ आकार में बड़ी हों और कम मात्रा में हों।
उदाहरण: चावल या दाल से कंकड़-पत्थर को हाथ से चुनकर अलग करना।
2. थ्रेशिंग या गाहना (Threshing):
अनाज की डंडियों से अन्न कणों (दानों) को अलग करने की प्रक्रिया।
यह कार्य बैलों की सहायता से या मशीनों (Threshers) द्वारा किया जाता है।
किसान इसे पत्थर पर पटक कर भी करते हैं।
3. निष्पावन (Winnowing):
पवन या वायु के झोंकों का उपयोग करके मिश्रण के भारी और हल्के अवयवों को अलग करना।
उदाहरण: किसान द्वारा अनाज (भारी कण) को भूसे (हल्के कण) से अलग करना। भूसा हवा से उड़कर दूर गिरता है और अनाज पास में ढेर बनाता है।
4. चालन (Sieving):
जब मिश्रण के घटकों के आकार में अंतर हो।
उदाहरण: आटे से चोकर (Bran) को अलग करना, रेत से कंकड़ अलग करना।
5. अवसादन और निस्तारण (Sedimentation and Decantation):
अवसादन: मिश्रण में भारी ठोस घटकों का नीचे बैठ जाना (जैसे पानी में मिट्टी का बैठना)।
निस्तारण: अवसादन के बाद ऊपर के द्रव को बिना हिलाए दूसरे बर्तन में डालना।
6. निस्पंदन (Filtration):
फिल्टर पेपर या बारीक कपड़े का उपयोग करके द्रव से ठोस अशुद्धियों को अलग करना।
उदाहरण: चाय बनने के बाद छलनी से चायपत्ती अलग करना, या गंदे पानी को साफ करना।
7. वाष्पीकरण (Evaporation):
जल को उसके वाष्प में बदलने की प्रक्रिया।
उदाहरण: समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करना। यह प्रक्रिया सूर्य के प्रकाश में होती है।
4. मिश्रधातु: निर्माण और उपयोग (Alloys)
धातुओं को पिघलाकर मिश्रधातुएँ बनाई जाती हैं जो मूल धातु से अधिक मजबूत और उपयोगी होती हैं।
विशेष नोट: आदिवासी लोग हजारों वर्षों से काँसे (Bronze) का उपयोग करते आ रहे हैं। यह एल्युमीनियम की तुलना में भारी होता है लेकिन बहुत मजबूत होता है।
5. भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
1. भौतिक परिवर्तन (Physical Change):
इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है।
पदार्थ की केवल अवस्था या आकार बदलता है।
यह अक्सर उत्क्रमणीय (Reversible) होता है।
उदाहरण: मोम का पिघलना, पानी का बर्फ बनना, चीनी का पानी में घुलना, नमक का पानी में घुलना, बल्ब का जलना।
2. रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change):
इसमें सदैव एक नया पदार्थ बनता है।
यह अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होता है।
उदाहरण: दूध से दही बनना, लोहे पर जंग लगना, कागज का जलना, भोजन का पचना, अगरबत्ती का जलना।
लोहे पर जंग लगना:
यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
आवश्यक शर्तें: ऑक्सीजन + नमी (जल)।
बचाव: लोहे पर जिंक (Zinc) की परत चढ़ाना, जिसे यशद-लेपन (Galvanization) कहते हैं।
6. अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts)
अम्ल (Acids)
स्वाद में खट्टे होते हैं।
नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
इनका $\text{pH}$ मान 7 से कम होता है ($pH < 7$)।
प्राकृतिक स्रोत:
सिरका: एसीटिक अम्ल ($\text{CH}_3\text{COOH}$)
चींटी का डंक: फॉर्मिक अम्ल (मेथेनोइक अम्ल)
नींबू/संतरा: साइट्रिक अम्ल
दही: लैक्टिक अम्ल
इमली/अंगूर: टार्टरिक अम्ल
पालक/टमाटर: ऑक्सैलिक अम्ल
क्षार (Bases)
स्वाद में कड़वे और कसैले होते हैं।
छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं।
लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
इनका $\text{pH}$ मान 7 से अधिक होता है ($pH > 7$)।
उदाहरण: खाने का सोडा (Sodium Bicarbonate), चूने का पानी।
7. कृषि: तकनीक और प्रकार (Agriculture)
कृषि एक प्राथमिक क्रियाकलाप है। भारत में कृषि की विविध विधियाँ प्रचलित हैं।
स्थानांतरित कृषि (Jhum Cultivation)
यह CTET का सबसे महत्वपूर्ण विषय है।
क्षेत्र: उत्तर-पूर्वी भारत (मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश)।
प्रक्रिया:
एक फसल काटने के बाद खेत को कुछ वर्षों के लिए खाली छोड़ दिया जाता है।
वहाँ उगने वाले बाँस या खरपतवार को उखाड़ा नहीं जाता, बल्कि काटकर जला दिया जाता है।
यह राख खाद का काम करती है और भूमि को उर्वर बनाती है।
खेती करते समय जमीन को गहरा नहीं जोता जाता, बस हल्का सा हिलाकर बीज छिड़क दिए जाते हैं।
इसे 'काटो और जलाओ' (Slash and Burn) कृषि भी कहते हैं।
विभिन्न राज्यों में खेती के नाम:
झूम: उत्तर-पूर्वी भारत
बेवार: बुंदेलखंड
दीपा: छत्तीसगढ़
रोका: ब्राजील
लदांग: मलेशिया
प्रमुख फसलें और मसाले
मसालों का घर: केरल को कहा जाता है। यहाँ तेजपत्ता, काली मिर्च, इलायची उगाई जाती है।
केसर: जम्मू और कश्मीर।
सरसों: उत्तर प्रदेश, राजस्थान।
हल्दी: आंध्र प्रदेश।
चावल का कटोरा: छत्तीसगढ़ (और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों) को कहा जाता है।
8. भारत की पारंपरिक कलाएँ और शिल्प (Traditional Arts)
भारत के विभिन्न राज्यों में कपड़े, चित्रकला और हस्तशिल्प की अनूठी शैलियाँ हैं।
चित्रकला (Paintings)
1. मधुबनी चित्रकला (मिथिला पेंटिंग):
राज्य: बिहार (दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर)।
सामग्री: पिसे हुए चावल के घोल में रंग मिलाकर।
रंग: प्राकृतिक रंगों का प्रयोग (नील, हल्दी, फूलों और पेड़ों के रंग)।
विषय: मनुष्य, जानवर, पेड़, फूल, पक्षी, मछलियाँ।
यह कला बहुत पुरानी है और त्योहारों या खुशी के मौकों पर घर की दीवारों और आँगन में बनाई जाती है।
2. वर्ली चित्रकला:
राज्य: महाराष्ट्र।
सामग्री: गाय के गोबर और मिट्टी का प्रयोग बैकग्राउंड के लिए, और चावल के पेस्ट का प्रयोग चित्र बनाने के लिए।
विषय: फसल पैदावार, शिकार, मछली पकड़ना, खेती, उत्सव और नृत्य।
3. पट्टचित्र:
राज्य: ओडिशा।
यह कपड़े पर की जाने वाली चित्रकारी है।
4. फाड़ चित्रकारी:
राज्य: राजस्थान।
वस्त्र और बुनाई (Textiles and Weaving)
1. पोचमपल्ली और कलमकारी:
राज्य: तेलंगाना (और आंध्र प्रदेश)।
पोचमपल्ली साड़ियाँ अपनी विशेष बुनाई और चमकदार रंगों के लिए प्रसिद्ध हैं। पोचमपल्ली एक कस्बा है जहाँ बुनकर रहते हैं।
2. पश्मीना शॉल:
स्थान: लद्दाख/जम्मू-कश्मीर।
स्रोत: 'चांगपा' जनजाति द्वारा पाली जाने वाली खास बकरियों के बालों से।
विशेषता: यह 6 स्वेटर के बराबर गर्मी देती है लेकिन बहुत पतली होती है। इसे मशीनों से नहीं बुना जा सकता, इसे हाथ से बुनने में लगभग 250 घंटे लगते हैं।
3. अन्य प्रसिद्ध वस्त्र:
कांजीवरम: तमिलनाडु
जामदानी: पश्चिम बंगाल
बनारसी सिल्क: वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
चिकनकारी: लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
पटोला: गुजरात (सूरत/पाटन)
कुल्लू शॉल: हिमाचल प्रदेश
9. नृत्य और सांस्कृतिक उत्सव (Culture and Festivals)
संस्कृति "चीजें जो हम करते हैं" का एक अभिन्न अंग है।
शास्त्रीय और लोक नृत्य
चेराओ नृत्य (मिजोरम): इसमें जमीन पर बाँस की डंडी लेकर दो-दो लोगों की जोड़ी आमने-सामने बैठती है। ढोल की ताल पर बाँस को जमीन पर पीटते हैं और नर्तक बाँस के बीच कूदते हैं। यह फसल कटने पर किया जाता है।
प्रमुख त्योहार
फसल त्योहार: बिहू (असम), ओणम (केरल), पोंगल (तमिलनाडु), बैसाखी (पंजाब), मकर संक्रांति।
होली: पूर्णिमा को मनाई जाती है।
दीपावली: अमावस्या को मनाई जाती है।
रथ यात्रा: ओडिशा (पुरी)।
10. विविध महत्वपूर्ण बिंदु (Miscellaneous)
ब्रेल लिपि (Braille Script):
आविष्कारक: लुई ब्रेल (फ्रांस)।
यह नेत्रहीन लोगों के लिए है।
यह 6 बिंदुओं (Dots) पर आधारित होती है (पुराने समय में 12 थी, अब 6 है)।
इसे मोटे कागज पर नुकीले औजार से बिंदु उभारकर लिखा जाता है और उंगलियों से छूकर पढ़ा जाता है।
बांस और बेंत: असम में बाँस के पुल और घर बनाए जाते हैं। असम में बाँस को "हरा सोना" भी कहा जाता है।
इत्र: उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला इत्र (Perfume) के लिए मशहूर है। यहाँ गुलाब जल और केवड़ा भी तैयार किया जाता है।
मंड (Starch) का परीक्षण:
खाद्य पदार्थ में मंड की उपस्थिति जाँचने के लिए आयोडीन (Iodine) के घोल का प्रयोग होता है।
रंग परिवर्तन: यह पदार्थ को नीला-काला कर देता है।
निर्माण एवं कला: पदार्थ, तकनीक और भारतीय संस्कृति
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
