1. प्रस्तावना: शिक्षण में निदान और उपचार की आवश्यकता
कक्षा में छात्रों के सीखने की गति भिन्न-भिन्न होती है। कुछ छात्र गणितीय संक्रियाओं को शीघ्र समझ लेते हैं, जबकि कुछ छात्र बार-बार समझाने पर भी त्रुटियाँ करते हैं। इन त्रुटियों को अनदेखा करना भविष्य में गणितीय अधिगम के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
मूल उद्देश्य: शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाना और छात्रों की कमजोरियों को दूर करके उन्हें मुख्यधारा में लाना।
सम्बन्ध: यह चिकित्सा क्षेत्र के मॉडल पर आधारित है—पहले बीमारी का पता लगाना (निदान) और फिर दवाई देना (उपचार)।
2. नैदानिक शिक्षण (Diagnostic Teaching)
नैदानिक शिक्षण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिक्षक यह जानने का प्रयास करता है कि छात्र को अधिगम में कहाँ और क्यों कठिनाई हो रही है। यह केवल "क्या नहीं आता" जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि "क्यों नहीं आता" का पता लगाना इसका मुख्य ध्येय है।
नैदानिक परीक्षण की मुख्य विशेषताएँ:
उद्देश्य: इसमें छात्रों को अंक या ग्रेड नहीं दिए जाते। इसका एकमात्र उद्देश्य अधिगम रिक्तियों (Learning Gaps) की पहचान करना है।
प्रकृति: यह विश्लेषणात्मक होता है। यह किसी एक विशेष प्रकरण या उप-विषय पर केंद्रित होता है।
व्यक्तिगत भिन्नता: यह प्रत्येक छात्र की विशिष्ट कठिनाइयों को उजागर करता है।
निदान के प्रमुख चरण:
समस्याग्रस्त छात्र की पहचान: सर्वप्रथम उन छात्रों को चिह्नित करना जो कक्षा में पिछड़ रहे हैं या बार-बार त्रुटियाँ कर रहे हैं।
त्रुटि के क्षेत्र की पहचान: यह जानना कि छात्र जोड़, घटाव, गुणा, भाग या ज्यामिति के किस विशिष्ट भाग में गलती कर रहा है।
उदाहरण: यदि कोई छात्र $\frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{2}{5}$ लिखता है, तो यह भिन्नों के योग की अवधारणा में कमी को दर्शाता है।
त्रुटि के कारणों का विश्लेषण: क्या यह लापरवाही है, अवधारणा की गलत समझ है, या पूर्व ज्ञान का अभाव है?
उपचार की योजना: कारण पता चलने के बाद उपचारात्मक शिक्षण की रणनीति बनाना।
नैदानिक परीक्षण के उपकरण:
निरीक्षण (Observation)
साक्षात्कार (Interview)
संचित अभिलेख (Cumulative Records)
मानकीकृत उपलब्धि परीक्षण
3. उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching)
निदानात्मक परीक्षण द्वारा खोजी गई कमियों को दूर करने के लिए जो शिक्षण विधि अपनाई जाती है, उसे उपचारात्मक शिक्षण कहते हैं। यह नैदानिक प्रक्रिया का तार्किक परिणाम है।
उपचारात्मक शिक्षण की परिभाषा:
ब्लेअर के अनुसार, "उपचारात्मक शिक्षण मूलतः एक उत्तम शिक्षण विधि है जो छात्रों को अपने मानसिक स्तर के अनुरूप प्रगति करने का अवसर देती है।"
मुख्य उद्देश्य:
छात्रों की अधिगम सम्बन्धी त्रुटियों को सुधारना।
छात्रों में गणित के प्रति खोया हुआ आत्मविश्वास पुनः जागृत करना।
असफल होने की हताशा को दूर करना।
छात्रों की अवांछनीय आदतों को समाप्त कर सही आदतों का विकास करना।
4. निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण में अन्तर
परीक्षा में अक्सर इन दोनों के बीच के सूक्ष्म अंतर पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इसे नीचे दी गई सारणी से समझें:
| आधार | नैदानिक शिक्षण | उपचारात्मक शिक्षण |
| प्रकृति | यह कारणों की खोज करता है। | यह समाधान प्रदान करता है। |
| क्रम | यह पहले आता है। | यह निदान के बाद आता है। |
| फोकस | "गलती क्यों हुई?" पर केंद्रित। | "गलती कैसे सुधारें?" पर केंद्रित। |
| उपकरण | परीक्षण, साक्षात्कार, विश्लेषण। | अभ्यास कार्य, शिक्षण विधियाँ, टीएलएम (TLM)। |
5. गणित में सामान्य त्रुटियाँ और उनका विश्लेषण
गणित शिक्षण में छात्र कई प्रकार की त्रुटियाँ करते हैं। एक शिक्षक के रूप में आपको इनके प्रकारों की जानकारी होनी चाहिए:
A. संकल्पनात्मक त्रुटियाँ (Conceptual Errors):
जब छात्र आधारभूत नियम ही नहीं समझ पाता।
उदाहरण: छात्र दशमलव की स्थिति को नहीं समझता।
$$0.5 \times 0.5 = 0.5 \quad (\text{गलत})$$$$0.5 \times 0.5 = 0.25 \quad (\text{सही})$$
B. गणना सम्बन्धी त्रुटियाँ (Computational Errors):
जोड़, घटाव या गुणा में हासिल (carry-over) या उधार (borrow) लेने में गलती करना।
उदाहरण:
$$\begin{array}{r} 42 \\ - 18 \\ \hline 36 \end{array}$$(यहाँ छात्र ने 8 में से 2 घटा दिया, बजाय हासिल लेने के।)
C. लापरवाही पूर्ण त्रुटियाँ:
जल्दबाजी में सही प्रक्रिया जानते हुए भी गलत उत्तर लिखना। जैसे प्रश्न में '+' चिह्न था लेकिन छात्र ने गुणा कर दिया।
D. गलत सूत्र का प्रयोग:
क्षेत्रफल निकालने के लिए परिमाप के सूत्र का प्रयोग करना।
उदाहरण: आयत का क्षेत्रफल $= 2(l + b)$ प्रयोग करना जबकि सही सूत्र $l \times b$ है।
6. उपचारात्मक शिक्षण की प्रमुख रणनीतियाँ
कक्षा में विभिन्न स्तर के बालकों के लिए अलग-अलग रणनीतियों की आवश्यकता होती है।
I. धीमे सीखने वाले (Slow Learners) छात्रों के लिए:
ऐसे छात्रों की बुद्धि लब्धि (IQ) सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है या वे किसी कारणवश पिछड़ गए होते हैं।
मूर्त से अमूर्त की ओर (Concrete to Abstract):
केवल सूत्रों को रटाने के बजाय ठोस वस्तुओं का प्रयोग करें।
गिनती सिखाने के लिए कंकड़ या बीज का प्रयोग।
भिन्नों को समझाने के लिए कागज मोड़ने की गतिविधि या रोटी/पिज्जा का उदाहरण।
बहु-संवेदी उपागम (Multi-sensory Approach):
दृश्य, श्रव्य और स्पर्श-आधारित सामग्री का प्रयोग करें।
जियो-बोर्ड (Geo-board): ज्यामितीय आकृतियों को समझाने के लिए।
गिनतारा (Abacus): स्थानीय मान और जोड़-घटाव के लिए।
डाइन्स ब्लॉक्स (Dienes Blocks): संख्या संकल्पना और स्थानीय मान के लिए।
ड्रिल और अभ्यास कार्य:
नियमित लेकिन छोटे अंतराल पर अभ्यास कराएं। एक ही प्रकार के प्रश्नों को बार-बार हल करवाएं ताकि प्रक्रिया याद हो जाए।
छोटे समूह में शिक्षण:
पूरी कक्षा के बजाय 3-4 छात्रों का समूह बनाकर उन्हें पढ़ाना अधिक प्रभावी होता है। इसे 'अनुवर्ग शिक्षण' (Tutorial Teaching) भी कहते हैं।
II. प्रतिभाशाली (Gifted) छात्रों के लिए उपचारात्मक शिक्षण:
अक्सर यह माना जाता है कि केवल कमजोर छात्रों को ही ध्यान की आवश्यकता है, परन्तु प्रतिभाशाली छात्र भी यदि सही मार्गदर्शन न मिले तो कक्षा में बोर हो सकते हैं या कुंठाग्रस्त हो सकते हैं।
संवर्धन कार्यक्रम (Enrichment Programs):
इन्हें पाठ्यक्रम से थोड़ा ऊपर के स्तर का कार्य दें।
उदाहरण: यदि कक्षा को साधारण ब्याज पढ़ाया जा रहा है, तो इन्हें चक्रवृद्धि ब्याज की अवधारणाओं से परिचित कराया जा सकता है।
विश्लेषणात्मक प्रश्न:
इन्हें रटे-रटाए प्रश्नों के स्थान पर "ह्यूरिस्टिक विधि" (Heuristic Method) या खोज विधि आधारित प्रश्न दें जहाँ समस्या समाधान कौशल की आवश्यकता हो।
प्रोजेक्ट कार्य:
गणित के इतिहास, महान गणितज्ञों की जीवनी, या गणितीय पहेलियों पर प्रोजेक्ट बनाने को कहें।
7. उपचारात्मक शिक्षण के सिद्धांत
सफल उपचार के लिए शिक्षक को निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:
सम्बन्ध स्थापन (Rapport): शिक्षक और छात्र के बीच भयमुक्त वातावरण होना चाहिए ताकि छात्र अपनी समस्याएं खुलकर बता सके।
प्रोत्साहन: छोटी-छोटी सफलताओं पर भी छात्र की प्रशंसा करें। इससे उनका आत्मबल बढ़ता है।
सक्रिय सहयोग: छात्र को केवल मूक श्रोता न बनाएं, बल्कि उसे श्यामपट्ट (Blackboard) पर बुलाकर प्रश्न हल करवाएं।
सरल से जटिल: पहले आसान प्रश्नों से आत्मविश्वास बढ़ाएं, फिर कठिन स्तर की ओर बढ़ें।
8. गणित की विशिष्ट उपचारात्मक गतिविधियाँ
यहाँ कुछ व्यावहारिक गतिविधियाँ दी गई हैं जिन्हें एक शिक्षक कक्षा में अपना सकता है:
A. स्थानीय मान की समझ के लिए:
अक्सर छात्र $205$ को 'दो सौ पचास' पढ़ लेते हैं।
उपचार: स्थानीय मान कार्ड्स या नकली मुद्रा (नोटों) का खेल खिलाएं।
$$2 \times 100 + 0 \times 10 + 5 \times 1 = 205$$
B. भिन्नों की तुलना के लिए:
छात्र समझते हैं कि $\frac{1}{5}$, $\frac{1}{3}$ से बड़ा है क्योंकि 5, 3 से बड़ा है।
उपचार: कागज की पट्टियों (Paper Strips) का प्रयोग करें। समान लंबाई की पट्टियों को अलग-अलग भागों में बांटकर दिखाएं कि हर (Denominator) जितना बड़ा होगा, टुकड़ा उतना ही छोटा होगा।
C. बीजगणित (Algebra) में:
समान और असमान पदों (Like and Unlike terms) में भ्रम।
उपचार: फलों का उदाहरण दें।
$$2x + 3y$$(2 सेब + 3 संतरे = 5 फल नहीं हो सकते, वे अलग-अलग ही रहेंगे)।
9. शिक्षण में मूल्यांकन और फीडबैक
उपचारात्मक शिक्षण के बाद पुनः मूल्यांकन करना अनिवार्य है।
पुनः परीक्षण (Re-test): उपचार के बाद यह जांचना कि क्या छात्र ने अवधारणा सीख ली है।
सतत अवलोकन: छात्र के दैनिक कार्यों पर नजर रखना।
फीडबैक: छात्र को सकारात्मक और सुधारात्मक फीडबैक दें। "गलत है" कहने के बजाय कहें, "आपने प्रयास अच्छा किया, लेकिन इस चरण में थोड़ी चूक हुई है, आइये इसे देखें।"
10. CTET परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण बिंदु (Summary)
निदानात्मक परीक्षण का आधार विश्लेषण है, जबकि उपलब्धि परीक्षण का आधार अंक प्रदान करना है।
गणित में उपचारात्मक शिक्षण का सर्वाधिक प्रयोग अंकगणित और बीजगणित में होता है।
यदि कोई छात्र ज्यामिति में कमजोर है, तो उसे नेत्रहीन छात्रों के लिए बने उपकरणों (जैसे जियो-बोर्ड) से भी सामान्य छात्रों को बहुत अच्छी तरह समझाया जा सकता है।
एनसीएफ 2005 (NCF 2005) के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की सोच का गणितीयकरण करना है, न कि केवल सवाल हल करना।
त्रुटियाँ अधिगम का एक अनिवार्य हिस्सा हैं; वे अंतर्दृष्टि (Insight) प्रदान करती हैं कि बच्चा कैसे सोच रहा है।
निष्कर्ष
निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक कुशल शिक्षक वह है जो डॉक्टर की भांति पहले समस्या की जड़ (निदान) तक पहुँचे और फिर एक मनोवैज्ञानिक की भांति उचित शिक्षण विधियों (उपचार) का प्रयोग कर छात्र को सफलता की ओर ले जाए। नियमित अभ्यास, धैर्य और सही तकनीकों के प्रयोग से गणित के डर को समाप्त किया जा सकता है।
गणित शिक्षण में नैदानिक एवं उपचारात्मक शिक्षण
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
.png)