1. स्थलमंडलीय प्लेटें (Lithospheric Plates)
पृथ्वी का ऊपरी ठोस भाग (भूपर्पटी) कई छोटे-बड़े टुकड़ों में विभाजित है। इन टुकड़ों को स्थलमंडलीय प्लेट कहा जाता है।
प्लेटों की गति: ये प्लेटें हमेशा धीमी गति से चारों तरफ घूमती रहती हैं। इनकी गति अत्यंत धीमी होती है (प्रत्येक वर्ष केवल कुछ मिलीमीटर)।
गति का कारण: पृथ्वी के अंदर पिघला हुआ मैग्मा (Magma) एक वृत्तीय रूप (Circular manner) में घूमता रहता है। इसी मैग्मा की गति के कारण प्लेटें भी गति करती हैं।
जब ये प्लेटें गति करती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन होता है।
2. पृथ्वी की गतियां: बल के प्रकार
पृथ्वी की गतियों को उन बलों के आधार पर विभाजित किया जाता है जो उन्हें उत्पन्न करते हैं। मुख्य रूप से दो प्रकार के बल कार्य करते हैं:
A. अंतर्जनित बल (Endogenic Forces)
ये बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में उत्पन्न होते हैं।
आकस्मिक बल (Sudden Forces): ये बल अचानक भारी तबाही मचाते हैं।
उदाहरण: भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन।
पटल विरूपण बल (Diastrophic Forces): ये बल बहुत धीमी गति से कार्य करते हैं और स्थलाकृतियों का निर्माण करते हैं।
उदाहरण: पर्वत निर्माणकारी बल।
B. बहिर्जनित बल (Exogenic Forces)
ये बल पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न होते हैं। इनका मुख्य कार्य धरातल को घिसना और समतल करना है।
अपरदन और निक्षेपण (Erosion and Deposition):
मुख्य कारक: नदी, बहता जल, पवन, समुद्री तरंग, और हिमनद।
3. ज्वालामुखी (Volcano)
ज्वालामुखी भूपर्पटी पर खुला एक ऐसा छिद्र होता है जिससे पिघले हुए पदार्थ (मैग्मा/लावा) अचानक बाहर निकलते हैं।
क्रेटर (Crater): ज्वालामुखी का ऊपरी मुख जहां से लावा बाहर आता है।
निकास (Vent): वह नली जिसके माध्यम से मैग्मा धरती की सतह तक पहुंचता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: जब मैग्मा पृथ्वी के अंदर होता है तो उसे मैग्मा कहते हैं, और जब वह सतह पर आ जाता है तो उसे लावा कहते हैं।
4. भूकंप (Earthquake)
जब स्थलमंडलीय प्लेटों में गति होती है, तो पृथ्वी की सतह पर कंपन होता है। यह कंपन पृथ्वी के चारों ओर गति कर सकता है। इसे भूकंप कहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दावली:
उद्गम केंद्र (Focus):
यह भूपर्पटी के नीचे का वह स्थान है जहां कंपन या गति आरंभ होती है।
भूकंपीय ऊर्जा यहीं से मुक्त होती है।
अधिकेंद्र (Epicenter):
उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर, पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र कहते हैं।
सबसे अधिक हानि अधिकेंद्र के पास होती है।
जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, भूकंप की तीव्रता कम होती जाती है।
भूकंपीय तरंगे (Seismic Waves):
भूकंपीय तरंगे तीन प्रकार की होती हैं:
P तरंगे (अनुदैर्ध्य): ये सबसे तेज गति वाली तरंगे हैं और सबसे पहले सतह पर पहुंचती हैं। ये ध्वनि तरंगों की तरह व्यवहार करती हैं।
S तरंगे (अनुप्रस्थ): ये तरंगे केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं। इनसे पता चलता है कि पृथ्वी का बाहरी क्रोड तरल है।
L तरंगे (पृष्ठीय): ये केवल सतह पर चलती हैं और सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।
भूकंप का मापन:
यंत्र: भूकंप का मापन भूकंपलेखी (Seismograph) नामक यंत्र से किया जाता है।
पैमाना: भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर मापी जाती है।
$2.0$ या उससे कम: प्रभाव न के बराबर।
$5.0$: वस्तुएं गिरने से क्षति हो सकती है।
$6.0$ या अधिक: बहुत शक्तिशाली और विनाशकारी।
$7.0$ या अधिक: सर्वाधिक विनाशकारी।
केस स्टडी (भुज, गुजरात): 26 जनवरी 2001 को भुज में $6.9$ की तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया था, जिससे भारी जान-माल की हानि हुई थी।
5. मुख्य स्थलाकृतियां (Major Landforms)
पृथ्वी की सतह लगातार दो प्रक्रियाओं द्वारा बदलती रहती है:
अपक्षय (Weathering): पृथ्वी की सतह पर शैलों (चट्टानों) के टूटने की प्रक्रिया। यह एक ही स्थान पर होती है।
अपरदन (Erosion): जल, पवन या हिम जैसे घटकों द्वारा होने वाले क्षय को अपरदन कहते हैं। यह एक गतिशील प्रक्रिया है।
अपरदित पदार्थ एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाए जाते हैं और अंततः एक जगह जमा (निक्षेपित) कर दिए जाते हैं।
6. नदी के कार्य (Work of a River)
नदी का जल दृश्य भूमि को लगातार काटता और छांटता रहता है। नदी अपने उद्गम से लेकर मुहाने तक विभिन्न स्थलाकृतियों का निर्माण करती है।
A. जलप्रपात (Waterfall):
जब नदी किसी खड़े ढाल वाले स्थान से अत्यधिक कठोर शैल या खड़े ढाल वाली घाटी में गिरती है, तो यह जलप्रपात बनाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
विश्व का सबसे ऊंचा जलप्रपात: एंजेल जलप्रपात (वेनेजुएला, दक्षिण अमेरिका)।
अन्य प्रसिद्ध प्रपात: नियाग्रा जलप्रपात (उत्तरी अमेरिका में कनाडा और USA की सीमा पर), विक्टोरिया जलप्रपात (अफ्रीका में जाम्बिया और जिम्बाब्वे की सीमा पर)।
B. विसर्प (Meanders):
जब नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्हीं बड़े मोड़ों को विसर्प कहते हैं।
C. चापझील (Ox-bow Lake):
समय के साथ विसर्प लूप नदी से कट जाते हैं और एक अलग झील बनाते हैं।
इनकी आकृति गाय के खुर (चाप) जैसी होती है, इसलिए इसे चापझील या गोखुर झील कहते हैं।
D. बाढ़कृत मैदान (Floodplain):
नदी अपने तटों से बाहर बहने लगती है जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आती है।
बाढ़ के कारण नदी महीन मिट्टी और अन्य पदार्थों का निक्षेपण करती है, जिससे उपजाऊ समतल बाढ़कृत मैदान का निर्माण होता है।
E. तटबंध (Levees):
नदी के दोनों किनारों पर मिट्टी के जमाव से जो उठी हुई दीवारें बनती हैं, उन्हें तटबंध कहते हैं।
F. वितरिका (Distributary):
समुद्र तक पहुंचते-पहुंचते नदी का प्रवाह धीमा हो जाता है और वह कई धाराओं में विभाजित हो जाती है। इन अलग हुई धाराओं को वितरिका कहा जाता है।
G. डेल्टा (Delta):
नदी की प्रत्येक वितरिका अपने मुहाने पर अवसादों का निर्माण करती है।
सभी मुहानों के अवसादों के संग्रह से डेल्टा का निर्माण होता है। यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ होता है (जैसे: सुंदरवन डेल्टा)।
7. समुद्री तरंग के कार्य (Work of Sea Waves)
समुद्री तरंगों के अपरदन और निक्षेपण से तटीय स्थलाकृतियां बनती हैं।
निर्माण की प्रक्रिया (क्रमबद्ध):
समुद्री गुफा (Sea Caves): समुद्री तरंगें लगातार शैलों से टकराती हैं, जिससे दरारें विकसित होती हैं। समय के साथ ये बड़ी और चौड़ी हो जाती हैं, जिन्हें समुद्री गुफा कहते हैं।
तटीय मेहराब (Sea Arches): जब गुफाओं का आकार बढ़ता जाता है और केवल छत ही बचती है (आर-पार रास्ता बन जाता है), तो तटीय मेहराब बनते हैं।
स्टैक (Stacks): अपरदन मेहराब की छत को भी तोड़ देता है और केवल दीवारें बचती हैं। इन दीवार जैसी आकृतियों को स्टैक कहते हैं।
समुद्र भृगु (Sea Cliff): समुद्र जल के ऊपर लगभग ऊर्ध्वाधर उठे हुए ऊंचे शैलीय तटों को समुद्र भृगु कहते हैं।
निक्षेपण कार्य:
पुलिन (Beach): समुद्री तरंगें किनारों पर अवसाद जमा करती हैं, जिससे समुद्री पुलिन का निर्माण होता है। भारत में मरीना बीच और जुहू बीच इसके उदाहरण हैं।
8. हिमनद के कार्य (Work of Ice)
हिमनद (Glaciers) अथवा 'हिमानी' बर्फ की नदियां होती हैं।
गर्त का निर्माण: हिमनद अपने नीचे की कठोर चट्टानों से मिट्टी और पत्थरों को अपरदित कर देती हैं (बुलडोजर की तरह)। इससे गहरे गर्त (Hollows) बन जाते हैं।
झीलों का निर्माण: पर्वतीय क्षेत्रों में जब बर्फ पिघलती है, तो उन गर्तों में पानी भर जाता है और वे सुंदर झील बन जाती हैं।
हिमोढ़ (Glacial Moraines): हिमनद के द्वारा लाए गए पदार्थ जैसे छोटे-बड़े शैल, रेत और तलछट मिट्टी निक्षेपित (जमा) हो जाते हैं। ये निक्षेप हिमोढ़ का निर्माण करते हैं।
9. पवन के कार्य (Work of Wind)
रेगिस्तान (मरुस्थल) में पवन, अपरदन और निक्षेपण का प्रमुख कारक है।
A. छत्रक शैल (Mushroom Rocks):
रेगिस्तान में पवन चट्टान के ऊपरी भाग की अपेक्षा निचले भाग को आसानी से काटती है।
इसके परिणामस्वरूप चट्टान का आधार संकीर्ण और शीर्ष विस्तृत हो जाता है, जिससे यह छतरी जैसा दिखता है। इसे छत्रक शैल कहते हैं।
B. बालू टिब्बा (Sand Dunes):
जब पवन चलती है तो यह अपने साथ रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है।
जब पवन का बहाव रुकता है, तो रेत गिरकर छोटी पहाड़ी बनाती है। इसे बालू टिब्बा कहते हैं।
C. लोएस (Loess):
जब बालू के कण बहुत महीन और हल्के होते हैं, तो वायु उन्हें बहुत दूर तक उड़ा ले जाती है।
जब ये कण विस्तृत क्षेत्र में निक्षेपित हो जाते हैं, तो इसे लोएस कहते हैं।
तथ्य: चीन में विशाल लोएस निक्षेप पाए जाते हैं।
परीक्षा उपयोगी सारांश (Quick Facts for CTET)
भूकंपीय तरंगें: केवल P, S और L प्रकार की होती हैं।
मापन: तीव्रता रिक्टर स्केल पर, और रिकॉर्डिंग सीस्मोग्राफ पर।
एंजेल जलप्रपात: वेनेजुएला में है।
नियाग्रा जलप्रपात: उत्तरी अमेरिका में है।
डेल्टा: नदी के मुहाने पर बनता है (निक्षेपण कार्य)।
विंसर्प: नदी के मध्य भाग (मैदानी क्षेत्र) में बनते हैं।
प्लेट गति: मैग्मा के वृत्तीय प्रवाह के कारण।
भूकंप पूर्व सूचना: जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन, तालाब में मछलियों की उत्तेजना (स्थानीय पद्धतियां)।
शिक्षक के लिए नोट: छात्रों को मानचित्र पर प्रमुख ज्वालामुखियों और भूकंप संभावित क्षेत्रों ("Ring of Fire") को देखने के लिए प्रेरित करें।
हमारी बदलती पृथ्वी
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