हमारी पृथ्वी के अंदर

Sunil Sagare
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 विषय: हमारी पृथ्वी के अंदर (Inside Our Earth)

पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है। इसके अंदर और बाहर निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। जिस प्रकार एक प्याज में कई परतें होती हैं, उसी प्रकार पृथ्वी भी विभिन्न सकेंद्री परतों (Concentric Layers) से बनी है। CTET परीक्षा के लिए इस अध्याय को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।


1. पृथ्वी का आंतरिक भाग: एक परिचय

पृथ्वी की त्रिज्या (Radius) लगभग $6371 \text{ km}$ है। मानव के लिए पृथ्वी के केंद्र तक पहुँचना असंभव है, क्योंकि वहां तापमान और दबाव अत्यधिक होता है। वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों और ज्वालामुखीय उद्गारों के अध्ययन से पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अनुमान लगाया है।

पृथ्वी की संरचना को मुख्य रूप से तीन परतों में विभाजित किया गया है:

  1. पर्पटी (Crust)

  2. मेंटल (Mantle)

  3. क्रोड (Core)


2. पर्पटी (Crust)

यह पृथ्वी की सतह की सबसे ऊपरी परत है। यह तीनों परतों में सबसे पतली परत है।

  • महाद्वीपीय संहति: महाद्वीपों पर इसकी मोटाई लगभग $35 \text{ km}$ है।

  • महासागरीय सतह: समुद्र की तली में इसकी मोटाई केवल $5 \text{ km}$ है।

पर्पटी के रासायनिक घटक

CTET परीक्षाओं में रासायनिक संरचना से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इन्हें याद रखने के लिए संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

A. महाद्वीपीय पर्पटी (Continental Crust):

यह मुख्य रूप से 'सिलिका' और 'एल्युमिना' जैसे खनिजों से बनी है। इसलिए इसे सियाल कहा जाता है।

$$\text{Si} (\text{Silica}) + \text{al} (\text{Alumina}) = \text{Sial}$$

B. महासागरीय पर्पटी (Oceanic Crust):

यह मुख्य रूप से 'सिलिका' और 'मैग्नीशियम' की बनी होती है। इसलिए इसे सीमे कहा जाता है।

$$\text{Si} (\text{Silica}) + \text{ma} (\text{Magnesium}) = \text{Sima}$$

महत्वपूर्ण तथ्य: पृथ्वी के कुल आयतन का केवल $1\%$ हिस्सा ही पर्पटी है। यह सबसे ठोस और भंगुर (Brittle) भाग है।


3. मेंटल (Mantle)

पर्पटी के ठीक नीचे मेंटल होता है। यह पृथ्वी के आयतन का सबसे बड़ा हिस्सा है।

  • गहराई: यह $2900 \text{ km}$ की गहराई तक फैला हुआ है।

  • आयतन: पृथ्वी के कुल आयतन का लगभग $84\%$ हिस्सा मेंटल है।

  • अवस्था: यह परत अर्द्ध-ठोस या प्लास्टिक अवस्था में होती है, जहाँ से ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान मैग्मा बाहर निकलता है।

मेंटल का विभाजन

मेंटल को दो भागों में बाँटा जा सकता है:

  1. ऊपरी मेंटल: इसे एस्थेनोस्फीयर (Durbaltamandal) भी कहते हैं। यह वह क्षेत्र है जहाँ चट्टानें पिघली हुई अवस्था में होती हैं।

  2. निचला मेंटल: यह ठोस अवस्था में होता है।


4. क्रोड (Core)

पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत को क्रोड कहा जाता है।

  • त्रिज्या: इसकी त्रिज्या लगभग $3500 \text{ km}$ है।

  • आयतन: यह पृथ्वी के आयतन का लगभग $15\%$ है।

  • तापमान और दाब: यहाँ तापमान और दाब अत्यधिक उच्च होता है।

रासायनिक संरचना (Nife)

क्रोड मुख्य रूप से निकल और लोहे (फेरस) से बना होता है। इसे निफे कहा जाता है।

$$\text{Ni} (\text{Nickel}) + \text{fe} (\text{Ferrous/Iron}) = \text{Nife}$$

क्रोड का विभाजन:

  1. बाह्य क्रोड (Outer Core): यह तरल अवस्था में है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इसी के घूर्णन के कारण बनता है।

  2. आंतरिक क्रोड (Inner Core): अत्यधिक दबाव के कारण यह ठोस अवस्था में होता है।


5. शैल एवं खनिज (Rocks and Minerals)

पृथ्वी की पर्पटी अनेक प्रकार के शैलों से बनी है। पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को शैल (Rock) कहते हैं। शैल विभिन्न रंग, आकार और गठन की हो सकती हैं।

मुख्य रूप से शैल तीन प्रकार की होती हैं:

  1. आग्नेय शैल (Igneous Rocks)

  2. अवसादी शैल (Sedimentary Rocks)

  3. कायांतरित शैल (Metamorphic Rocks)


6. आग्नेय शैल (Igneous Rocks)

'इग्नियस' शब्द लैटिन भाषा के 'इग्निस' (Ignis) से बना है, जिसका अर्थ है - अग्नि

  • निर्माण: जब द्रवित मैग्मा ठंडा होकर ठोस हो जाता है, तब आग्नेय शैल का निर्माण होता है।

  • प्राथमिक शैल: इन्हें प्राथमिक शैल भी कहा जाता है क्योंकि सबसे पहले इन्हीं का निर्माण हुआ था।

आग्नेय शैल दो प्रकार की होती हैं:

A. अंतर्भेदी आग्नेय शैल (Intrusive Igneous Rocks)

  • जब द्रवित मैग्मा भू-पर्पटी के अंदर गहराई में ही ठंडा हो जाता है।

  • धीरे-धीरे ठंडा होने के कारण इनके दाने (Grains) बड़े होते हैं।

  • उदाहरण: ग्रेनाइट। (मसाले तथा दाने पीसने वाले पत्थर ग्रेनाइट के बने होते हैं)।

B. बहिर्भेदी आग्नेय शैल (Extrusive Igneous Rocks)

  • जब द्रवित लावा पृथ्वी की सतह पर आता है और तेजी से ठंडा होकर ठोस बन जाता है।

  • इनकी संरचना बहुत महीन दानों वाली होती है।

  • उदाहरण: बेसाल्ट।

  • विशेष: भारत का दक्कन पठार बेसाल्ट शैलों से ही बना है।


7. अवसादी शैल (Sedimentary Rocks)

'सेडिमेंटरी' शब्द लैटिन भाषा के 'सेडिमेंटम' (Sedimentum) से बना है, जिसका अर्थ है - स्थिर होना

  • निर्माण प्रक्रिया: शैल लुढ़ककर, चटककर तथा एक-दूसरे से टकराकर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। इन छोटे कणों को अवसाद कहते हैं।

  • ये अवसाद हवा, जल आदि के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाकर जमा कर दिए जाते हैं।

  • ये अदृढ़ अवसाद दबकर और कठोर होकर शैल की परत बनाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

  1. जीवाश्म (Fossils): इन शैलों में पौधों, जानवरों और अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं के अवशेष भी हो सकते हैं जो कभी इन शैलों पर रहे थे। आग्नेय शैलों में जीवाश्म नहीं पाए जाते।

  2. परतदार: ये परत-दर-परत जमने से बनती हैं।

उदाहरण:

  • बलुआ पत्थर (रेत के दानों से बनता है)।

  • चूना पत्थर।

  • लाल किला (दिल्ली) लाल बलुआ पत्थर से बना है।


8. कायांतरित शैल (Metamorphic Rocks)

'मेटामॉर्फिक' शब्द ग्रीक भाषा के 'मेटामोरफोस' (Metamorphose) से बना है, जिसका अर्थ है - रूप परिवर्तन

  • निर्माण: आग्नेय और अवसादी शैल उच्च ताप और दाब के कारण कायांतरित शैलों में परिवर्तित हो सकती हैं।

  • यह प्रक्रिया ठोस अवस्था में ही होती है।

रूपांतरण के उदाहरण:

$$\text{Chikni Mitti (Clay)} \xrightarrow{\text{High Heat/Pressure}} \text{Slate}$$
$$\text{Chuna Patthar (Limestone)} \xrightarrow{\text{High Heat/Pressure}} \text{Marble}$$

नोट: ताजमहल (आगरा) सफेद संगमरमर (Marble) से बना है, जो एक कायांतरित शैल है।


9. शैल चक्र (Rock Cycle)

शैलों का एक प्रकार से दूसरे प्रकार में परिवर्तन होने की प्रक्रिया को शैल चक्र कहते हैं। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

चक्र का क्रम:

  1. मैग्मा से आग्नेय: द्रवित मैग्मा ठंडा होकर आग्नेय शैल बनता है।

  2. आग्नेय से अवसाद: आग्नेय शैल टूटकर छोटे कणों (अवसाद) में बदलती है।

  3. अवसाद से अवसादी: अवसाद दबकर अवसादी शैल बनाते हैं।

  4. कायांतरण: आग्नेय और अवसादी शैल उच्च ताप/दाब पाकर कायांतरित शैल में बदलती हैं।

  5. पुनः मैग्मा: कायांतरित शैल अत्यधिक ताप के कारण पिघलकर पुनः द्रवित मैग्मा बन जाती है।


10. खनिजों का महत्व और उपयोग

शैल विभिन्न खनिजों से बनी होती हैं। खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ हैं जिनका निश्चित भौतिक गुणधर्म और निश्चित रासायनिक मिश्रण होता है।

उपयोग:

  1. ईंधन के रूप में: कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम।

  2. उद्योगों में: लोहा, एल्युमिनियम, सोना, यूरेनियम।

  3. औषधि में: विभिन्न खनिजों का उपयोग दवाइयाँ बनाने में होता है।

  4. उर्वरक में: नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि।


परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Recap for CTET)

  • विश्व की सबसे गहरी खान दक्षिण अफ्रीका में स्थित है ($4 \text{ km}$ गहरी)।

  • तेल की खोज में इंजीनियर $6 \text{ km}$ गहराई तक खोद चुके हैं।

  • पृथ्वी के केंद्र तक पहुँचने के लिए समुद्र की सतह पर $6000 \text{ km}$ गहराई तक खोदना होगा (जो असंभव है)।

  • शैल के शब्द मूल:

    • Igneous $\rightarrow$ Ignis (लैटिन) $\rightarrow$ अग्नि

    • Sedimentary $\rightarrow$ Sedimentum (लैटिन) $\rightarrow$ स्थिर

    • Metamorphic $\rightarrow$ Metamorphose (ग्रीक) $\rightarrow$ रूप परिवर्तन

  • स्लेट और संगमरमर रूपांतरित चट्टानें हैं।

  • पृथ्वी की त्रिज्या $\approx 6371 \text{ km}$ है।


सारांश तालिका: शैलों के प्रकार

शैल का प्रकारउत्पत्तिविशेषताउदाहरण
आग्नेय (Igneous)मैग्मा के ठंडा होने सेरवेदार, कठोर, जीवाश्म रहितग्रेनाइट, बेसाल्ट
अवसादी (Sedimentary)अवसादों के जमाव सेपरतदार, जीवाश्म युक्त, मुलायमबलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोयला
कायांतरित (Metamorphic)ताप व दाब से रूप परिवर्तनअत्यधिक कठोर, टिकाऊसंगमरमर, स्लेट, नीस


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