1. स्मृति की प्रकृति और परिभाषा
स्मृति केवल सूचनाओं को जमा करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक सक्रिय मानसिक प्रक्रिया है। यह अतीत के अनुभवों को संचित करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें चेतना में लाने की क्षमता है।
स्मृति के प्रमुख चरण (Process of Memory):
स्मृति की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में पूरी होती है। इनका क्रम परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है:
संकेतन (Encoding):
यह स्मृति का पहला चरण है।
इसमें बाहरी दुनिया से प्राप्त सूचनाओं को एक ऐसे रूप में बदला जाता है जिसे मस्तिष्क स्वीकार कर सके।
उदाहरण: जब आप किसी नए शब्द को सुनते हैं, तो आप उसे ध्वनि या अर्थ के रूप में कोड करते हैं।
भंडारण (Storage):
यह दूसरा चरण है।
कोड की गई जानकारी को कुछ समय के लिए धारण करके रखना भंडारण कहलाता है।
यह प्रक्रिया मस्तिष्क में तंत्रिका-जैविक परिवर्तनों (Neurobiological changes) द्वारा होती है, जिसे 'स्मृति चिन्ह' कहते हैं।
पुनर्प्राप्ति (Retrieval):
यह अंतिम चरण है।
जब हमें संग्रहीत जानकारी की आवश्यकता होती है, तो उसे अचेतन मन से चेतन मन में लाना पुनर्प्राप्ति कहलाता है।
यदि हम किसी जानकारी को याद नहीं कर पाते, तो इसका अर्थ है कि पुनर्प्राप्ति में विफलता हुई है।
2. स्मृति के प्रकार (Types of Memory)
एटकिन्सन और शिफ्रिन (Atkinson & Shiffrin, 1968) ने स्मृति का 'अवस्था मॉडल' (Stage Model) प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार स्मृति के तीन प्रमुख तंत्र हैं:
A. संवेदी स्मृति (Sensory Memory)
यह स्मृति का प्रवेश द्वार है।
अवधि: यह अत्यंत क्षणिक होती है। इसकी अवधि $1$ सेकंड से भी कम (लगभग $0.2$ से $0.5$ सेकंड) होती है।
क्षमता: इसकी क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन जानकारी बहुत जल्दी ओझल हो जाती है।
प्रकार:
दृश्य प्रतिमा (Iconic Memory): आँखों द्वारा देखी गई वस्तुओं की छवि जो लगभग $0.25$ सेकंड तक रहती है।
प्रतिध्वनि (Echoic Memory): कानों द्वारा सुनी गई ध्वनि जो $2$ से $4$ सेकंड तक गूंजती रहती है।
महत्व: यह हमें दुनिया को निरंतरता (Continuity) में देखने और सुनने में मदद करती है।
B. अल्पकालिक स्मृति (Short Term Memory - STM)
इसे 'कार्यकारी स्मृति' (Working Memory) भी कहा जाता है, जहाँ हम सचेत रूप से जानकारी पर कार्य करते हैं।
अवधि: बिना अभ्यास के जानकारी यहाँ $20$ से $30$ सेकंड तक ही रहती है।
क्षमता: इसकी क्षमता सीमित होती है। जॉर्ज मिलर (George Miller) के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति एक बार में $7 \pm 2$ (अर्थात $5$ से $9$) आइटम ही याद रख सकता है। इसे 'मैजिक नंबर' कहा जाता है।
प्रक्रिया:
अवधान (Attention): संवेदी स्मृति से केवल वही जानकारी STM में आती है जिस पर हम ध्यान देते हैं।
रखरखाव अभ्यास (Maintenance Rehearsal): बार-बार दोहराने से जानकारी यहाँ बनी रहती है।
C. दीर्घकालिक स्मृति (Long Term Memory - LTM)
यह स्मृति का स्थायी भंडार है।
अवधि: कुछ मिनटों से लेकर जीवन भर।
क्षमता: यह असीमित (Unlimited) मानी जाती है।
भंडारण का तरीका: यहाँ जानकारी अर्थ के आधार पर (Semantically) व्यवस्थित होती है।
3. दीर्घकालिक स्मृति का वर्गीकरण
लॉन्ग टर्म मेमोरी को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
1. घोषणात्मक स्मृति (Declarative/Explicit Memory)
ऐसी यादें जिन्हें हम सचेत रूप से याद कर सकते हैं और शब्दों में बता सकते हैं। इसके दो उप-भाग हैं:
प्रासंगिक स्मृति (Episodic Memory):
यह हमारे व्यक्तिगत जीवन की घटनाओं से संबंधित है।
इसमें 'कब', 'कहाँ' और 'क्या' हुआ की जानकारी होती है।
उदाहरण: आपके पिछले जन्मदिन की पार्टी, कल स्कूल में क्या हुआ था।
आर्थी स्मृति (Semantic Memory):
यह सामान्य ज्ञान, तथ्यों, नियमों और शब्दों के अर्थ से संबंधित है।
इसमें समय और स्थान का संदर्भ जरूरी नहीं होता।
उदाहरण: भारत की राजधानी दिल्ली है, $2 \times 2 = 4$ होता है।
2. अघोषणात्मक स्मृति (Non-Declarative/Implicit Memory)
ऐसी यादें जो हमारे व्यवहार में दिखती हैं, लेकिन जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल होता है।
प्रक्रियात्मक स्मृति (Procedural Memory):
यह कौशल सीखने से संबंधित है। "कार्य कैसे करें"।
यह बहुत मजबूत होती है और आसानी से नहीं भूलती।
उदाहरण: साइकिल चलाना, तैरना, कीबोर्ड पर टाइप करना।
4. स्मृति मापन की विधियां
मनोविज्ञान में यह जांचने के लिए कि किसी ने कितना याद रखा है, निम्न विधियों का प्रयोग होता है:
प्रत्याह्वान (Recall):
बिना किसी संकेत के जानकारी को याद करना।
उदाहरण: निबंधात्मक प्रश्न का उत्तर देना, रिक्त स्थान भरें।
यह कठिन माना जाता है।
पहचान (Recognition):
दिए गए विकल्पों में से सही जानकारी को पहचानना।
उदाहरण: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)।
यह Recall की तुलना में आसान होता है क्योंकि इसमें संकेत मौजूद होते हैं।
पुनः सीखना (Relearning):
इसे 'बचत विधि' भी कहते हैं।
यदि किसी सामग्री को पहले याद किया गया हो और बाद में भूल गए हों, तो उसे दोबारा याद करने में कम समय लगता है।
5. विस्मृति (Forgetting)
सीखी गई जानकारी को पुनः स्मरण करने में असमर्थता ही विस्मृति है। यह हमेशा नकारात्मक नहीं होती; अनावश्यक जानकारी को भूलना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी भी है।
एबिंगहॉस का विस्मृति वक्र (Ebbinghaus Forgetting Curve):
हर्मन एबिंगहॉस ने निरर्थक पदों (Nonsense Syllables) पर प्रयोग किए और पाया कि:
विस्मृति की दर शुरुआत में बहुत तेज होती है।
सीखने के $20$ मिनट बाद हम लगभग $40\%$ से अधिक भूल जाते हैं।
$1$ घंटे बाद लगभग $60\%$ विस्मृति हो जाती है।
कुछ दिनों के बाद भूलने की गति धीमी और स्थिर हो जाती है।
6. विस्मृति के सिद्धांत (कारण)
हम क्यों भूलते हैं? इसके मुख्य मनोवैज्ञानिक सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
A. स्मृति चिन्ह ह्रास (Trace Decay Theory)
जब हम कुछ सीखते हैं, तो मस्तिष्क में एक भौतिक निशान (Trace) बनता है।
यदि लंबे समय तक उस जानकारी का उपयोग या अभ्यास न किया जाए, तो ये निशान समय के साथ धुंधले होकर समाप्त हो जाते हैं।
इसे "Use it or Lose it" भी कहते हैं।
B. हस्तक्षेप का सिद्धांत (Interference Theory)
विस्मृति इसलिए नहीं होती कि यादें गायब हो गई हैं, बल्कि इसलिए होती है क्योंकि अन्य यादें बाधा डालती हैं। यह दो प्रकार का होता है:
पूर्वलक्षी हस्तक्षेप (Proactive Interference):
जब पुरानी जानकारी नई जानकारी को याद रखने में बाधा डालती है।
सूत्र: Old $\rightarrow$ blocks $\rightarrow$ New
उदाहरण: आपने अपना मोबाइल नंबर बदला है, लेकिन जब कोई नंबर मांगता है, तो गलती से पुराना नंबर ही याद आता है।
उत्तरलक्षी हस्तक्षेप (Retroactive Interference):
जब नई जानकारी पुरानी जानकारी को याद करने में बाधा डालती है।
सूत्र: New $\rightarrow$ blocks $\rightarrow$ Old
उदाहरण: आपने इस सप्ताह नए छात्रों के नाम याद किए, जिसके कारण आप पिछले साल के छात्रों के नाम भूल गए।
C. पुनर्प्राप्ति विफलता (Retrieval Failure)
जानकारी LTM में मौजूद है, लेकिन सही संकेत (Cues) न मिलने के कारण वह याद नहीं आ रही।
जीभ की नोक घटना (Tip of the Tongue - TOT): व्यक्ति को लगता है कि उसे उत्तर पता है, बस जुबान पर नहीं आ रहा। यह सही संकेतों की कमी के कारण होता है।
D. अभिप्रेरित विस्मृति (Motivated Forgetting)
सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के अनुसार, हम उन बातों को जानबूझकर अचेतन मन में धकेल देते हैं जो हमें दुख, चिंता या शर्मिंदगी देती हैं।
इसे दमन (Repression) कहा जाता है।
7. स्मृति सुधारने की तकनीकें (Mnemonic Devices)
बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए एक शिक्षक को इन युक्तियों का ज्ञान होना चाहिए:
खंडयन (Chunking):
बड़ी जानकारी को छोटे-छोटे टुकड़ों (Chunks) में तोड़ना।
उदाहरण: मोबाइल नंबर $9876543210$ को $98765-43210$ के रूप में याद रखना।
यह STM की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
विस्तारात्मक अभ्यास (Elaborative Rehearsal):
नई जानकारी को पुरानी जानकारी से जोड़कर अर्थपूर्ण बनाना।
सिर्फ रटने की बजाय उसे समझना और उदाहरणों से जोड़ना।
यह जानकारी को LTM में भेजने का सबसे अच्छा तरीका है।
निमोनिक्स (Mnemonics):
जानकारी को याद रखने के लिए सूत्र या कविता बनाना।
उदाहरण: इंद्रधनुष के रंगों के लिए 'VIBGYOR'।
स्थान विधि (Method of Loci):
चीजों को याद रखने के लिए उन्हें एक परिचित रास्ते या स्थान के साथ मानसिक रूप से जोड़ना।
द्वैध कूटन (Dual Coding):
पैवियो (Paivio) के अनुसार, जानकारी को शब्दों और चित्रों (Images) दोनों रूपों में याद करना।
चित्रों के साथ सीखी गई जानकारी अधिक समय तक याद रहती है।
8. अधिगम और स्मृति का शैक्षिक निहितार्थ
CTET और शिक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु:
अर्थपूर्ण अधिगम (Meaningful Learning): बच्चों को रटने (Rote Learning) के बजाय समझने पर जोर दें। अर्थपूर्ण सामग्री निरर्थक सामग्री की तुलना में जल्दी याद होती है और देर से भूलती है।
बहु-संवेदी उपागम: पढ़ाते समय दृश्य-श्रव्य सामग्री का प्रयोग करें। जितने अधिक संवेदी अंग शामिल होंगे, स्मृति उतनी ही मजबूत होगी।
वितरित अभ्यास (Distributed Practice): एक ही बार में लगातार पढ़ने (Massed Practice) की तुलना में रुक-रुक कर और अंतराल देकर पढ़ना (Distributed Practice) ज्यादा प्रभावी होता है।
सक्रिय भागीदारी: जब बच्चे खुद करके सीखते हैं (Learning by doing), तो वह प्रक्रियात्मक स्मृति का हिस्सा बन जाता है जो स्थायी होता है।
पुनरावृत्ति (Revision): एबिंगहॉस के वक्र के अनुसार, सिखाने के तुरंत बाद और फिर समय-समय पर पुनरावृत्ति कराने से विस्मृति को रोका जा सकता है।
महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य (Quick Facts for CTET)
वर्किंग मेमोरी (Working Memory) का संप्रत्यय बैडले और हिच (Baddeley & Hitch) ने दिया था।
मस्तिष्क का हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) भाग नई यादों को बनाने और उन्हें LTM में बदलने के लिए जिम्मेदार होता है।
फ्लैशबल्ब स्मृति (Flashbulb Memory): किसी राष्ट्रीय त्रासदी या अत्यंत महत्वपूर्ण घटना की एकदम स्पष्ट और विस्तृत याद (जैसे $9/11$ हमला या नोटबंदी का दिन)।
जेगरनिक प्रभाव (Zeigarnik Effect): हम पूरे हो चुके कार्यों की तुलना में अधूरे कार्यों को ज्यादा अच्छे से याद रखते हैं।
निष्कर्ष:
स्मृति एक स्थिर पुस्तकालय नहीं, बल्कि एक सक्रिय कार्यशाला है। एक शिक्षक के रूप में, हमारा उद्देश्य छात्रों की स्मृति में केवल तथ्यों को भरना नहीं, बल्कि उन्हें सूचनाओं को संसाधित (Process) करने और जीवन में उनका उपयोग करने योग्य बनाना होना चाहिए।
स्मृति और विस्मृति
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
