पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

Sunil Sagare
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परिचय: स्थलरूप क्या हैं?

पृथ्वी की सतह हर जगह एक समान नहीं है। पृथ्वी के पास स्थलरूपों की एक अनंत विविधता है। स्थलमंडल के कुछ भाग ऊबड़-खाबड़ हैं तो कुछ समतल। ये स्थलरूप दो मुख्य प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनते हैं।

स्थलरूप निर्माण की प्रक्रियाएं

स्थलरूपों का निर्माण मुख्य रूप से दो प्रक्रियाओं द्वारा निर्धारित होता है:

1. आंतरिक प्रक्रिया (Internal Process)

  • यह प्रक्रिया पृथ्वी की सतह के अंदर होती है।

  • इसके कारण पृथ्वी की सतह कहीं ऊपर उठ जाती है तो कहीं धंस जाती है।

  • प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) और ज्वालामुखी गतिविधियां इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

2. बाह्य प्रक्रिया (External Process)

  • यह प्रक्रिया पृथ्वी की सतह के ऊपर लगातार बनने और टूटने का कार्य करती है।

  • इसमें दो मुख्य क्रियाएं शामिल हैं:

    • अपरदन (Erosion): पृथ्वी की सतह का घिसकर नीचे हो जाना। यह बहते जल, पवन और हिम द्वारा होता है।

    • निक्षेपण (Deposition): अपरदित पदार्थों का एक जगह जमा होना। इससे सतह का निर्माण या उत्थान होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: अपरदन और निक्षेपण की क्रियाएं बहते हुए जल, वायु तथा बर्फ (हिमानी) के द्वारा होती हैं।


स्थलरूपों का वर्गीकरण

ऊंचाई और ढाल (Slope) के आधार पर स्थलरूपों को तीन मुख्य वर्गों में बांटा जाता है:

  1. पर्वत (Mountains)

  2. पठार (Plateaus)

  3. मैदान (Plains)


1. पर्वत (Mountains)

पर्वत पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक ऊंचाई है। पर्वत का शिखर छोटा तथा आधार चौड़ा होता है। यह आसपास के क्षेत्र से बहुत ऊंचा होता है। कुछ पहाड़ बादलों से भी ऊंचे होते हैं।

प्रमुख विशेषताएं:

  • ऊंचाई: साधारणतः $600$ मीटर से अधिक ऊंचाई और खड़ी ढाल वाली पहाड़ी को पर्वत कहा जाता है।

  • जलवायु: जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, जलवायु ठंडी होती जाती है।

  • हिमानी (Glaciers): कुछ पर्वतों पर हमेशा जमी रहने वाली बर्फ की नदियां होती हैं, जिन्हें हिमानी कहा जाता है।

  • कठोर जलवायु: पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु कठोर होती है और ढाल खड़ी होती है, इसलिए यहां कृषि योग्य भूमि की कमी होती है और जनसंख्या कम निवास करती है।

  • पर्वत श्रृंखला (Mountain Range): जब पर्वत एक क्रम में व्यवस्थित होते हैं, तो उसे पर्वत श्रृंखला कहा जाता है। यह सैकड़ों किलोमीटर तक फैली हो सकती है।

    • उदाहरण: हिमालय (एशिया), आल्प्स (यूरोप), एंडीज (दक्षिण अमेरिका)।

पर्वतों के प्रकार (Types of Mountains)

निर्माण प्रक्रिया के आधार पर पर्वत तीन प्रकार के होते हैं:

क. वलित पर्वत (Fold Mountains)

  • इनका निर्माण पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों के टकराने और 'वलन' (Folding) पड़ने से होता है।

  • इनकी सतह ऊबड़-खाबड़ तथा शिखर शंक्वाकार होते हैं।

  • उदाहरण:

    • हिमालय (एशिया): यह नवीन वलित पर्वत है।

    • आल्प्स (यूरोप): यह भी नवीन वलित पर्वत है।

    • अरावली (भारत): यह विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। अपरदन की प्रक्रिया के कारण यह घिस गई है।

    • यूराल (रूस) और अप्लेशियन (उत्तरी अमेरिका): ये गोलाकार दिखाई देते हैं और इनकी ऊंचाई कम है। ये बहुत पुराने वलित पर्वत हैं।

ख. भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountains)

  • जब बहुत बड़ा भाग टूट जाता है और ऊर्ध्वाधर (Vertically) रूप से विस्थापित हो जाता है, तब इनका निर्माण होता है।

  • उत्खंड (Horst): ऊपर उठे हुए खंड को उत्खंड कहते हैं।

  • द्रोणिका भ्रंश (Graben): नीचे धंसे हुए खंड को द्रोणिका भ्रंश कहते हैं।

  • उदाहरण:

    • राइन घाटी (Rhine Valley) - यूरोप।

    • वोसजेस पर्वत (Vosges Mountain) - यूरोप।

ग. ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountains)

  • इनका निर्माण ज्वालामुखी क्रियाओं के कारण होता है।

  • जब पृथ्वी के अंदर से मैग्मा बाहर निकलता है और ठंडा होकर जम जाता है, तो यह शंकु का आकार ले लेता है।

  • उदाहरण:

    • माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका)।

    • माउंट फुजियामा (जापान)।

पर्वतों का महत्व

  1. जल का संग्रह: पर्वत जल के आगार होते हैं। बहुत सी नदियों का स्रोत पर्वतों में स्थित हिमानियां होती हैं। जलाशयों का जल लोगों तक पहुंचाया जाता है।

  2. ऊर्जा उत्पादन: पर्वतों से प्राप्त जल का उपयोग पनबिजली (Hydro-electricity) उत्पादन में किया जाता है।

  3. कृषि: नदी घाटियां और वेदिकाएं (Terraces) फसलों की खेती के लिए उपयुक्त होती हैं।

  4. जैव विविधता: पर्वतों में अलग-अलग प्रकार की वनस्पतियां (Flora) और जीव-जंतु (Fauna) पाए जाते हैं।

  5. संसाधन: वनों से हमें ईंधन, चारा, आश्रय और दूसरे उत्पाद जैसे गोंद, रेजिन आदि प्राप्त होते हैं।

  6. पर्यटन: पर्वत सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं। पैराग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग और स्कीइंग जैसे खेल यहां लोकप्रिय हैं।

क्या आप जानते हैं? प्रशांत महासागर में स्थित मौना की (Mauna Kea) पर्वत (हवाई द्वीप) सागर की सतह के नीचे स्थित है। इसकी ऊंचाई $10,205$ मीटर है, जो माउंट एवरेस्ट से भी अधिक है।


2. पठार (Plateaus)

पठार उठी हुई और सपाट भूमि होती है। यह आसपास के क्षेत्रों से अधिक उठा हुआ होता है और इसका ऊपरी भाग मेज (Table) के समान सपाट होता है।

प्रमुख विशेषताएं:

  • पठार के एक या एक से अधिक किनारे होते हैं, जिनकी ढाल खड़ी होती है।

  • पठारों की ऊंचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है।

  • पर्वतों की तरह पठार भी नए या पुराने हो सकते हैं।

प्रमुख पठार और उदाहरण

  1. दक्कन का पठार (Deccan Plateau): भारत में स्थित, यह सबसे पुराने पठारों में से एक है। यह बेसाल्ट चट्टानों (ज्वालामुखी उद्गार) से बना है।

  2. तिब्बत का पठार (Tibet Plateau): यह विश्व का सबसे ऊंचा पठार है। इसकी ऊंचाई मध्य समुद्र तल से $4,000$ से $6,000$ मीटर तक है। इसे 'विश्व की छत' भी कहा जाता है।

  3. अफ्रीका का पठार: यह सोना (Gold) और हीरों (Diamond) के खनन के लिए प्रसिद्ध है।

  4. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का पठार: यह अपने मरुस्थलीय क्षेत्र और खनिजों के लिए जाना जाता है।

  5. छोटा नागपुर का पठार (भारत): यहां लोहा, कोयला और मैंगनीज के बहुत बड़े भंडार पाए जाते हैं।

पठारों का महत्व

  1. खनिज भंडार: पठारी क्षेत्रों में खनिजों की प्रचुरता होती है। यही कारण है कि विश्व के बहुत से खनन क्षेत्र पठारी भागों में स्थित हैं।

  2. जलप्रपात (Waterfalls): पठारी क्षेत्रों में नदियां ऊंचाई से गिरती हैं, जिससे जलप्रपात बनते हैं।

    • हुंडरू जलप्रपात (Hundru Falls): छोटा नागपुर पठार पर सुवर्णरेखा नदी पर।

    • जोग जलप्रपात (Jog Falls): कर्नाटक में शरावती नदी पर।

  3. काली मिट्टी: लावा पठार (जैसे दक्कन) में काली मिट्टी की प्रचुरता होती है, जो बहुत उपजाऊ होती है और कपास की खेती के लिए उत्तम है।

  4. पर्यटन: कई पठारी क्षेत्र रमणीय होते हैं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।


3. मैदान (Plains)

मैदान समतल भूमि के बहुत बड़े भाग होते हैं। ये सामान्यतः मध्य समुद्री तल से $200$ मीटर से अधिक ऊंचे नहीं होते हैं।

मैदानों का निर्माण

  • अधिकांश मैदान नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा बने हैं।

  • नदियां पर्वतों की ढालों से नीचे बहती हैं और उन्हें अपरदित (Erode) कर देती हैं।

  • वे अपरदित पदार्थों (पत्थर, बालू, सिल्ट) को अपने साथ आगे ले जाती हैं।

  • नदियां इन पदार्थों का निक्षेपण (Deposit) अपनी घाटियों में करती हैं। इन्हीं निक्षेपों से मैदानों का निर्माण होता है।

मैदानों की विशेषताएं और महत्व

  1. उर्वरता: मैदान प्रायः बहुत उपजाऊ होते हैं क्योंकि नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी (जलोढ़ मृदा) यहाँ जमा होती है।

  2. परिवहन: समतल भूमि होने के कारण यहाँ परिवहन के साधनों का निर्माण करना आसान होता है (सड़कें, रेलमार्ग)।

  3. जनसंख्या: ये विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले भाग होते हैं। खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी और मकान बनाने के लिए समतल भूमि की उपलब्धता के कारण यहाँ आबादी घनी होती है।

  4. प्रमुख उदाहरण:

    • एशिया: गंगा और ब्रह्मपुत्र का मैदान (भारत), यांग्त्से नदी का मैदान (चीन)।

    • उत्तरी अमेरिका: मिसिसिपी नदी का मैदान।


स्थलरूप और लोग (Landforms and People)

मनुष्य विभिन्न प्रकार के स्थलरूपों में अलग-अलग ढंग से जीवन यापन करता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन:

  • यहाँ जीवन कठिन होता है।

  • मैदानों की तुलना में यहां कृषि, परिवहन और आवास निर्माण कठिन है।

  • प्राकृतिक आपदाओं (भूस्खलन, हिमस्खलन) का खतरा अधिक रहता है।

मैदानी क्षेत्रों में जीवन:

  • यहाँ जीवन पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में सरल होता है।

  • फसलें उगाना, घर बनाना और सड़कें बनाना आसान होता है।

  • यही कारण है कि प्राचीन सभ्यताएं (जैसे सिंधु घाटी, मेसोपोटामिया) नदी घाटियों और मैदानों में ही विकसित हुईं।

पर्यावरणीय चिंताएं:

  • कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार, तूफान या बाढ़ विनाश कर देते हैं।

  • मानव द्वारा भूमि का गलत उपयोग (जैसे उपजाऊ भूमि पर मकान बनाना) और प्रदूषण (पानी में कूड़ा फेंकना) स्थिति को और भयावह बना देता है।

  • स्वच्छ भारत मिशन: स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और स्वस्थ शरीर के लिए स्वच्छ पर्यावरण (विशेषकर साफ पानी, हवा और परिवेश) आवश्यक है। यह मिशन इसी दिशा में एक प्रयास है।


CTET विशेष: अध्यापन संबंधी मुद्दे (Pedagogical Notes)

सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में, इस अध्याय को पढ़ाते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:

  1. अवलोकन विधि: छात्रों को अपने आसपास के स्थलरूपों को देखने और पहचानने के लिए प्रोत्साहित करें।

  2. मानचित्र कार्य: विश्व के मानचित्र पर हिमालय, आल्प्स, एंडीज, राइन घाटी और तिब्बत के पठार को चिह्नित करवाएं।

  3. तुलनात्मक अध्ययन: पर्वतों और पठारों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए चित्रों और मॉडल का उपयोग करें।

  4. पर्यावरणीय संवेदनशीलता: छात्रों के साथ चर्चा करें कि कैसे मानव गतिविधियां स्थलरूपों को प्रदूषित कर रही हैं और हम इसे कैसे रोक सकते हैं।


परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • हिमानी (Glacier): बर्फ की नदियां।

  • वलन (Fold): प्लेटों के टकराने से सतह का मुड़ना।

  • हॉर्स्ट (Horst) और ग्रेबन (Graben): भ्रंशोत्थ पर्वत के क्रमशः उठे हुए और धंसे हुए भाग।

  • विश्व का सबसे ऊंचा पठार: तिब्बत का पठार ($4000$ - $6000$ मी)।

  • अफ्रीकी पठार प्रसिद्ध है: सोना और हीरा खनन के लिए।

  • छोटा नागपुर पठार: लोहा, कोयला, मैंगनीज।

  • यांग्त्से नदी: चीन (मैदान निर्माण)।

  • प्रशांत महासागर: मौना की पर्वत ($10,205$ मी)।

  • पॉलीनेशिया (Polynesia): जहां 'मौना की' स्थित है।



पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

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