कक्षा-कक्ष प्रक्रियाएँ

Sunil Sagare
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 कक्षा-कक्ष प्रक्रियाएँ शिक्षण-अधिगम का वह हिस्सा हैं जहाँ शिक्षक और विद्यार्थी सक्रिय रूप से अंतःक्रिया करते हैं। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार, कक्षा का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहाँ ज्ञान रटा न जाए, बल्कि उसका निर्माण (Construction of Knowledge) किया जाए। सामाजिक विज्ञान शिक्षण में इसका महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह विषय समाज, इतिहास और भूगोल की समझ विकसित करता है।


1. शिक्षण विधियाँ और प्रविधियाँ (Teaching Methods)

सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन को पढ़ाने के लिए विभिन्न विधियों का प्रयोग किया जाता है। एक शिक्षक को विषयवस्तु की प्रकृति के अनुसार विधि का चयन करना चाहिए।

क. आख्यान या कहानी कथन विधि (Narrative/Storytelling Method)

यह इतिहास और साहित्य पढ़ाने की सबसे पुरानी और प्रभावी विधि है।

  • अवधारणा: इसमें शिक्षक किसी घटना, व्यक्ति या कालखंड को एक कहानी के रूप में प्रस्तुत करता है।

  • उद्देश्य: छात्रों में रुचि उत्पन्न करना और कल्पना शक्ति का विकास करना।

  • महत्वपूर्ण चरण:

    1. कहानी का चयन विषयवस्तु के अनुकूल होना चाहिए।

    2. कहानी की भाषा सरल और प्रभावपूर्ण होनी चाहिए।

    3. कहानी के अंत में नैतिक मूल्य या ऐतिहासिक तथ्य स्पष्ट होने चाहिए।

  • लाभ:

    • अमूर्त घटनाओं को मूर्त रूप में समझने में मदद मिलती है।

    • यह विधि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर बहुत उपयोगी है।

    • छात्रों की श्रवण क्षमता (Listening Skill) का विकास होता है।

  • सीमाएँ: यदि कहानी बहुत लंबी हो तो छात्र उद्देश्य से भटक सकते हैं। यह विधि उच्च कक्षाओं में जटिल अवधारणाओं (जैसे- अर्थशास्त्र) के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।

ख. चर्चा और संवाद विधि (Discussion Method)

यह एक जनतांत्रिक विधि है जहाँ शिक्षक और छात्र दोनों सक्रिय रहते हैं।

  • अवधारणा: किसी विशेष समस्या या विषय पर समूह में विचारों का आदान-प्रदान करना।

  • प्रक्रिया:

    1. विषय का चयन: शिक्षक एक प्रासंगिक मुद्दा (जैसे- 'लोकतंत्र में समानता') प्रस्तुत करता है।

    2. समूह निर्माण: कक्षा को छोटे समूहों में विभाजित किया जाता है।

    3. संचालन: शिक्षक एक सुविधा प्रदाता (Facilitator) की भूमिका निभाता है और सुनिश्चित करता है कि चर्चा मुख्य मुद्दे से न भटके।

    4. निष्कर्ष: चर्चा के अंत में मुख्य बिंदुओं को श्यामपट्ट पर लिखा जाता है।

  • लाभ:

    • छात्रों में तार्किक चिंतन और आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) का विकास होता है।

    • आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ती है।

    • सहिष्णुता और दूसरों के विचारों का सम्मान करने की भावना विकसित होती है।

ग. क्षेत्र भ्रमण विधि (Field Trip/Excursion)

सामाजिक विज्ञान, विशेषकर भूगोल और पर्यावरण अध्ययन के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विधि मानी जाती है।

  • अवधारणा: कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना।

  • उदाहरण: ऐतिहासिक इमारतें, संग्रहालय, पंचायत भवन, नदी तट, या चिड़ियाघर का दौरा।

  • चरण:

    1. नियोजन (Planning): उद्देश्य तय करना, अनुमति लेना और मार्ग निर्धारित करना।

    2. तैयारी: छात्रों को पूर्व-ज्ञान देना कि उन्हें वहाँ क्या देखना है।

    3. क्रियान्वयन: भ्रमण के दौरान अवलोकन करना और नोट्स बनाना।

    4. अनुवर्ती क्रिया (Follow-up): कक्षा में वापस आकर रिपोर्ट तैयार करना और चर्चा करना।

  • शैक्षिक महत्व:

    • यह 'देखकर सीखने' (Learning by Seeing) पर आधारित है।

    • प्राप्त ज्ञान स्थायी होता है।

    • छात्रों में अवलोकन शक्ति (Observation Skill) का विकास होता है।

घ. परियोजना विधि (Project Method)

यह विधि 'करके सीखने' (Learning by Doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसके प्रवर्तक किलपैट्रिक माने जाते हैं, जो जॉन डीवी के शिष्य थे।

  • अवधारणा: यह एक उद्देश्यपूर्ण कार्य है जिसे सामाजिक वातावरण में पूर्ण संलग्नता के साथ किया जाता है।

  • परियोजना के प्रकार:

    • रचनात्मक: जैसे- मिट्टी का घर बनाना, मानचित्र बनाना।

    • समस्या समाधान: जैसे- 'गाँव में जल प्रदूषण के कारणों' का पता लगाना।

  • परियोजना विधि के 6 चरण (क्रमबद्ध):

    1. परिस्थिति का निर्माण: समस्या को पहचानना।

    2. योजना का चयन: विषय चुनना।

    3. नियोजन (Planning): रूपरेखा तैयार करना।

    4. क्रियान्वयन (Execution): कार्य करना।

    5. मूल्यांकन: कार्य की समीक्षा करना।

    6. रिकॉर्डिंग: रिपोर्ट या आलेख तैयार करना।

  • लाभ:

    • यह विधि व्यावहारिक ज्ञान देती है।

    • सहयोग और सामाजिकता की भावना विकसित होती है।

ङ. सर्वेक्षण विधि (Survey Method)

यह विधि स्थानीय परिवेश और समाज से सीधे आँकड़े एकत्र करने के लिए उपयोगी है।

  • प्रक्रिया: छात्र समुदाय में जाकर लोगों से प्रश्न पूछते हैं और जानकारी इकट्ठा करते हैं।

  • उदाहरण: 'आपके क्षेत्र में कितने लोग साक्षर हैं?' या 'विभिन्न परिवारों में पानी की खपत'।

  • महत्व:

    • छात्रों को अनुसंधान (Research) का प्रारंभिक अनुभव मिलता है।

    • समाज और विद्यालय के बीच की दूरी कम होती है।

    • डेटा विश्लेषण (Data Analysis) का कौशल विकसित होता है।


2. सहयोगात्मक अधिगम (Cooperative Learning)

आधुनिक शिक्षा में व्यक्तिगत स्पर्धा के स्थान पर सहयोग पर बल दिया जाता है।

  • परिभाषा: जब छात्र छोटे-छोटे समूहों में एक साथ मिलकर किसी लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।

  • मुख्य तत्व:

    • सकारात्मक परस्पर निर्भरता: समूह की सफलता हर सदस्य के योगदान पर निर्भर करती है।

    • व्यक्तिगत जवाबदेही: हर छात्र को अपने हिस्से का काम करना होता है।

    • समूह प्रसंस्करण: काम पूरा होने पर समूह चर्चा करता है कि उन्होंने कैसा प्रदर्शन किया।

  • शिक्षक की भूमिका: समूहों का निर्माण करना (विषम योग्यता वाले समूह बेहतर होते हैं) और मार्गदर्शन करना।

  • लाभ: कमजोर छात्र होशियार छात्रों से सीखते हैं और सामाजिक कौशल बेहतर होते हैं।


3. रचनावादी दृष्टिकोण (Constructivist Approach)

NCF 2005 रचनावाद पर आधारित है। यह मानता है कि ज्ञान शिक्षक द्वारा दिया जाने वाला 'उपहार' नहीं है, बल्कि छात्र अपने अनुभवों से ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं।

  • प्रमुख सिद्धांत:

    • पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) नए ज्ञान का आधार है।

    • अधिगम एक सक्रिय प्रक्रिया है।

    • सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) सीखने के लिए महत्वपूर्ण है (लेव वाइगोत्स्की के अनुसार)।

  • कक्षा में रचनावाद:

    • शिक्षक व्याख्यान देने के बजाय प्रश्न पूछता है और जिज्ञासा जगाता है।

    • छात्रों को अपने शब्दों में परिभाषा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

    • गलतियों को सीखने का हिस्सा माना जाता है, न कि दंड का कारण।


4. शिक्षण-अधिगम संसाधन (Learning Resources)

सामाजिक विज्ञान को रोचक बनाने के लिए विभिन्न संसाधनों का प्रयोग आवश्यक है।

क. ग्लोब (Globe)

  • उपयोग: पृथ्वी का सटीक 3D मॉडल।

  • महत्व: दिन-रात का होना, पृथ्वी का घूर्णन, अक्षांश-देशांतर और महाद्वीपों की सही स्थिति समझाने के लिए मानचित्र से बेहतर है।

  • सीमा: इसे हर जगह ले जाना मुश्किल है और इसमें छोटे क्षेत्रों का विस्तृत विवरण नहीं होता।

ख. मानचित्र (Maps)

  • प्रकार:

    • भौतिक मानचित्र: पर्वत, पठार, नदियाँ।

    • राजनैतिक मानचित्र: देश, राज्य, सीमाएँ।

    • थीमेटिक मानचित्र: वर्षा, जनसंख्या, सड़क, वन वितरण।

  • मानचित्र कौशल: छात्रों में दिशा, दूरी और प्रतीकों (Symbols) को समझने की क्षमता विकसित करना।

ग. दृश्य-श्रव्य सामग्री (Audio-Visual Aids)

  • उदाहरण: वृत्तचित्र (Documentaries), ऐतिहासिक फिल्में, रेडियो, स्मार्ट क्लास।

  • महत्व: यह बहु-संवेदी (Multi-sensory) अधिगम प्रदान करते हैं, जिससे याद रखना आसान होता है।

घ. समाचार पत्र और कतरनें

  • उपयोग: समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) को कक्षा के विषय से जोड़ना।

  • गतिविधि: छात्र विभिन्न खबरों की कतरनें जमा करके 'कोलाज' बना सकते हैं।


5. कक्षा-कक्ष में मूल्यांकन (Assessment in Classroom)

मूल्यांकन केवल परीक्षा लेना नहीं है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का सुधार है।

  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE):

    • रचनात्मक मूल्यांकन (Formative Assessment): यह शिक्षण के दौरान होता है। जैसे- प्रश्नोत्तरी, चर्चा, प्रोजेक्ट। इसका उद्देश्य सुधार (Diagnosis and Remedial) है।

    • योगात्मक मूल्यांकन (Summative Assessment): यह सत्र के अंत में होता है। इसका उद्देश्य ग्रेडिंग या पास-फेल तय करना है।

  • मूल्यांकन के उपकरण:

    • पोर्टफोलियो: छात्र के कार्यों (चित्रकला, कार्यपत्रक, टेस्ट) का क्रमिक संग्रह। यह छात्र की प्रगति का सबसे अच्छा प्रमाण है।

    • रूब्रिक्स (Rubrics): किसी कार्य को जाँचने के लिए पहले से तय किए गए मानदंड।

    • अवलोकन (Observation): शिक्षक द्वारा छात्र के व्यवहार और गतिविधियों को नोट करना।


6. सामाजिक विज्ञान शिक्षक की भूमिका

रचनावादी कक्षा में शिक्षक 'ज्ञान का दाता' नहीं बल्कि एक सुविधा प्रदाता (Facilitator) होता है।

  • जिम्मेदारियाँ:

    • भयमुक्त वातावरण बनाना।

    • सभी छात्रों (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित) को शामिल करना (समावेशी शिक्षा)।

    • स्थानीय ज्ञान को पाठ्यपुस्तक के ज्ञान से जोड़ना।

    • संवेदनशील मुद्दों (जैसे- जाति, लिंग) पर चर्चा करते समय संतुलन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना।


7. प्रमुख बिंदु एवं तथ्य (Quick Revision Notes)

  • ब्लूम का वर्गीकरण (Bloom's Taxonomy): संज्ञानात्मक डोमेन (दिमाग), भावात्मक डोमेन (हृदय/मूल्य) और मनोगत्यात्मक डोमेन (हाथ/कौशल)। सामाजिक विज्ञान में 'भावात्मक पक्ष' (मूल्यों का विकास) बहुत महत्वपूर्ण है।

  • आगमनात्मक विधि (Inductive Method): उदाहरण से नियम की ओर। (छोटी कक्षाओं के लिए बेहतर)।

  • निगमनात्मक विधि (Deductive Method): नियम से उदाहरण की ओर।

  • स्रोत विधि (Source Method): इतिहास पढ़ाने के लिए पुरातात्विक स्रोतों (सिक्के, अभिलेख) का उपयोग करना। यह छात्रों को इतिहासकारों की तरह सोचने में मदद करता है।

  • मस्तिष्क उद्वेलन (Brainstorming): किसी समस्या पर छात्रों द्वारा मुक्त रूप से अनेकों विचार प्रस्तुत करना। यह रचनात्मकता बढ़ाता है।


8. कक्षा-कक्ष की चुनौतियाँ और समाधान

  • विविधता: कक्षा में अलग-अलग संस्कृति और भाषा के बच्चे होते हैं।

    • समाधान: बहुभाषिकता को एक संसाधन (Resource) के रूप में देखें, बाधा नहीं।

  • लैंगिक रूढ़िवादिता: पाठ्यपुस्तकों या चर्चाओं में लिंग भेद।

    • समाधान: शिक्षक को उदाहरणों के माध्यम से जेंडर तटस्थता (Gender Neutrality) को बढ़ावा देना चाहिए। जैसे- "महिलाएँ भी पायलट हो सकती हैं" और "पुरुष भी खाना पका सकते हैं"।


शिक्षक के लिए निर्देश: इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसे नागरिक का निर्माण करना है जो तार्किक हो, समाज के प्रति जिम्मेदार हो और संवैधानिक मूल्यों (स्वतंत्रता, समानता, न्याय) में विश्वास रखता हो।



कक्षा-कक्ष प्रक्रियाएँ

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

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