भाषा कौशल में प्रवीणता का मूल्यांकन

Sunil Sagare
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भाषा शिक्षण केवल व्याकरण रटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को विभिन्न संदर्भों में भाषा का प्रभावशाली प्रयोग करने योग्य बनाना है। एक शिक्षक के रूप में, यह जानना आवश्यक है कि बच्चा भाषा को कितना समझ रहा है और उसका प्रयोग कैसे कर रहा है। इसी प्रक्रिया को मूल्यांकन कहते हैं।

नीचे दिए गए नोट्स में हम भाषा के चारों कौशल—सुनना (Listening), बोलना (Speaking), पढ़ना (Reading), और लिखना (Writing)—के मूल्यांकन, विधियों और उपकरणों को विस्तार से समझेंगे।


1. भाषा मूल्यांकन की अवधारणा

मूल्यांकन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह केवल परीक्षा लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीखने-सिखाने की पूरी प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।

  • मूल्यांकन का अर्थ: बच्चे की भाषा क्षमता, प्रयोग और समझ का विश्लेषण करना।

  • उद्देश्य: यह जानना कि बच्चे ने क्या सीखा है, उसे कहाँ कठिनाई हो रही है, और शिक्षण विधि में क्या सुधार करने की आवश्यकता है।

  • आकलन (Assessment) बनाम मूल्यांकन (Evaluation):

    • आकलन: यह शिक्षण प्रक्रिया के दौरान होता है। इसका उद्देश्य सुधार करना है (जैसे—कक्षा में प्रश्न पूछना)।

    • मूल्यांकन: यह शिक्षण प्रक्रिया के अंत में या एक निश्चित अवधि के बाद होता है। इसका उद्देश्य निर्णय लेना या ग्रेड देना है।


2. भाषा मूल्यांकन का महत्त्व एवं आवश्यकता

CTET के दृष्टिकोण से मूल्यांकन के महत्त्व को समझना अनिवार्य है:

  • अधिगम की जांच: छात्र ने ज्ञान को किस हद तक ग्रहण किया है, इसका पता चलता है।

  • शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता: शिक्षक यह जान पाता है कि उसका पढ़ाने का तरीका सही है या उसमें बदलाव की जरूरत है।

  • निदान और उपचार: बच्चों की कमजोरियों (Learning Gaps) का पता लगाना (निदानात्मक) और उन्हें दूर करना (उपचारात्मक)।

  • आत्म-मूल्यांकन: बच्चों को अपनी प्रगति स्वयं समझने का अवसर मिलता है।

  • प्रेरणा: सकारात्मक फीडबैक बच्चों को आगे सीखने के लिए प्रेरित करता है।


3. मूल्यांकन के प्रमुख सिद्धांत

एक अच्छा मूल्यांकन पत्र या टेस्ट कैसा होना चाहिए? इसके लिए कुछ तकनीकी मानक तय किए गए हैं:

1. विश्वसनीयता (Reliability)

  • यदि एक ही परीक्षा को बार-बार लिया जाए और परिणाम (अंक) लगभग समान रहें, तो वह परीक्षा विश्वसनीय मानी जाती है।

  • उदाहरण: यदि राम को आज टेस्ट में 10 में से 8 अंक मिले और दो दिन बाद उसी टेस्ट में फिर 8 अंक मिले, तो टेस्ट विश्वसनीय है।

2. वैधता (Validity)

  • मूल्यांकन जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया है, वह उसी की जांच करे।

  • उदाहरण: यदि आप बच्चे की 'मौखिक क्षमता' जांचना चाहते हैं, लेकिन आप उससे 'लिखित परीक्षा' ले रहे हैं, तो यह वैध नहीं है।

3. वस्तुनिष्ठता (Objectivity)

  • परीक्षक के बदलने पर भी अंकों में अंतर नहीं आना चाहिए।

  • उदाहरण: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूरी तरह वस्तुनिष्ठ होते हैं क्योंकि उत्तर निश्चित होता है।

4. व्यावहारिकता (Practicality)

  • मूल्यांकन प्रक्रिया समय, लागत और प्रशासन की दृष्टि से सरल और संभव होनी चाहिए।

5. वाशबैक (Washback)

  • यह एक महत्त्वपूर्ण शब्द है। इसका अर्थ है—परीक्षा का कक्षा शिक्षण पर पड़ने वाला प्रभाव।

  • सकारात्मक वाशबैक: जब मूल्यांकन सीखने को बेहतर बनाता है।

  • नकारात्मक वाशबैक: जब केवल परीक्षा पास करने के लिए रटाया जाता है।


4. भाषायी कौशलों का मूल्यांकन (LSRW)

भाषा के चार आधारभूत कौशल हैं। इनका मूल्यांकन अलग-अलग तरीकों से किया जाता है।

A. श्रवण कौशल (Listening Skill) का मूल्यांकन

सुनना केवल ध्वनियों को सुनना नहीं है, बल्कि सुनकर अर्थ ग्रहण करना है।

मूल्यांकन के तरीके:

  • कहानी सुनकर प्रश्न उत्तर: शिक्षक कहानी सुनाए और बच्चे तथ्यों या भावों के उत्तर दें।

  • निर्देश पालन: शिक्षक निर्देश दे (जैसे- "लाल रंग की पेंसिल उठाओ") और देखे कि बच्चा सही क्रिया कर रहा है या नहीं।

  • श्रुतलेख (Dictation): यह सुनने की सटीकता और वर्तनी दोनों की जांच करता है।

  • सारांश कथन: सुनी हुई सामग्री का सार अपने शब्दों में बताना।

ध्यान देने योग्य बिंदु:

  • क्या बच्चा वक्ता के भाव (Intonation) को समझ पा रहा है?

  • क्या वह मुख्य विचार और सहायक विवरण में अंतर कर पा रहा है?


B. वाचन/मौखिक अभिव्यक्ति कौशल (Speaking Skill) का मूल्यांकन

बोलना अपने विचारों को प्रभावी और स्पष्ट रूप से व्यक्त करना है।

मूल्यांकन के तरीके:

  • सस्वर वाचन: कविता या गद्य को उचित लय और गति के साथ पढ़ना।

  • चित्र वर्णन: किसी चित्र को दिखाकर उस पर विचार व्यक्त करवाना। प्राथमिक स्तर पर यह सबसे अच्छा तरीका है।

  • भूमिका निर्वाह (Role Play): विभिन्न स्थितियों (जैसे—दुकानदार और ग्राहक) में संवाद करना।

  • वाद-विवाद और चर्चा: किसी विषय पर तर्कपूर्ण विचार रखना।

  • आशुभाषण (Extempore): बिना तैयारी के किसी विषय पर बोलना।

आकलन के पैरामीटर:

  • प्रवाह (Fluency): बिना झिझक के बोलना।

  • उच्चारण (Pronunciation): शब्दों का सही उच्चारण।

  • शब्दावली (Vocabulary): संदर्भ के अनुसार सही शब्दों का चयन।

  • हाव-भाव: बोलते समय शारीरिक भाषा का प्रयोग।

Note: बच्चों की उच्चारण त्रुटियों को तुरंत टोकने के बजाय, उन्हें अपनी बात पूरा करने का मौका देना चाहिए। बार-बार टोकना (Over-correction) बच्चे में हीन भावना पैदा कर सकता है।


C. पठन कौशल (Reading Skill) का मूल्यांकन

पठन का मुख्य अर्थ है—पढ़कर अर्थ समझना। केवल अक्षरों को उच्चारित करना पढ़ना नहीं है।

मूल्यांकन के तरीके:

  • मौखिक पठन (Loud Reading): उच्चारण, यति, गति और प्रवाह की जांच के लिए।

  • मौन पठन (Silent Reading): अर्थ ग्रहण और एकाग्रता की जांच के लिए। यह समझ को गहरा करता है।

  • बोध प्रश्न (Comprehension Questions): गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देना।

  • शीर्षक देना: पढ़े गए अनुच्छेद को उचित शीर्षक देना।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • क्या बच्चा संदर्भ के अनुसार शब्दों का अर्थ अनुमान लगा पा रहा है?

  • क्या वह पाठ के निहितार्थ (Inference) को समझ पा रहा है?


D. लेखन कौशल (Writing Skill) का मूल्यांकन

लिखना अपने विचारों को क्रमबद्ध और व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध करना है।

मूल्यांकन के तरीके:

  • मुक्त लेखन (Free Writing): डायरी लेखन, पत्र लेखन, या निबंध। यह सृजनात्मकता की जांच करता है।

  • अनुच्छेद लेखन: किसी एक विषय पर विचार लिखना।

  • रिक्त स्थान पूर्ति: सही शब्दों का चयन करके वाक्य पूरा करना (यह सीमित लेखन है)।

  • सुलेख और श्रुतलेख: लिखावट की सुंदरता और वर्तनी की शुद्धता की जांच।

आकलन के पैरामीटर:

  • विचारों की मौलिकता: क्या बच्चे ने रटे-रटाए वाक्य लिखे हैं या अपने विचार?

  • वाक्य विन्यास: व्याकरणिक रूप से सही वाक्यों का निर्माण।

  • वर्तनी: शब्दों की शुद्धता।

  • विराम चिह्न: सही जगह पर पूर्णविराम, अल्पविराम आदि का प्रयोग।


5. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)

CBSE और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत CCE को अनिवार्य किया गया है।

  • सतत (Continuous): मूल्यांकन साल भर नियमित रूप से होना चाहिए, न कि केवल साल के अंत में।

  • व्यापक (Comprehensive): इसमें बच्चे के विकास के सभी पक्ष शामिल होने चाहिए:

    • शैक्षिक पक्ष (Scholastic): विषय ज्ञान, पाठ्यक्रम।

    • सह-शैक्षिक पक्ष (Co-Scholastic): खेल, जीवन कौशल, अभिवृत्ति, मूल्य, कला।

CCE का उद्देश्य:

  • परीक्षा के भय और तनाव को कम करना।

  • रटने की प्रवृत्ति को खत्म करना।

  • सर्वांगीण विकास पर जोर देना।


6. मूल्यांकन के उपकरण एवं तकनीक (Tools and Techniques)

एक शिक्षक के पास बच्चे को परखने के लिए कई 'औजार' होते हैं। CTET में इनसे सीधे प्रश्न आते हैं।

1. पोर्टफोलियो (Portfolio) — सबसे महत्त्वपूर्ण

  • परिभाषा: यह एक निश्चित अवधि में विद्यार्थी द्वारा किए गए कार्यों का एक व्यवस्थित संग्रह है।

  • सामग्री: इसमें बच्चे की ड्राइंग, वर्कशीट, निबंध, टेस्ट पेपर, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, और शिक्षक की टिप्पणियां शामिल होती हैं।

  • महत्त्व:

    • यह बच्चे की क्रमिक प्रगति (Gradual Progress) का सबूत देता है।

    • यह शिक्षक और अभिभावक दोनों को बच्चे की क्षमताओं और कमजोरियों को समझने में मदद करता है।

    • यह बच्चे में आत्म-गौरव और दायित्व बोध बढ़ाता है।

2. एनकडोटल रिकॉर्ड (Anecdotal Record - घटना वृत्त)

  • इसमें बच्चे के जीवन या विद्यालय में घटित किसी विशिष्ट घटना का वर्णन होता है।

  • यह बच्चे के व्यवहार, सामाजिक कौशल और व्यक्तित्व को समझने में मदद करता है।

  • उदाहरण: "आज राहुल ने लंच में अपना खाना एक गरीब बच्चे के साथ साझा किया"—यह उसके 'सहयोग' गुण को दर्शाता है।

3. चेक लिस्ट (Check List)

  • यह 'हाँ' या 'नहीं' में उत्तर देने वाली सूची होती है।

  • उदाहरण:

    • क्या बच्चा उच्चारण सही करता है? (हाँ/नहीं)

    • क्या बच्चा समूह में कार्य करता है? (हाँ/नहीं)

4. रेटिंग स्केल (Rating Scale)

  • इसमें किसी गुण या कौशल को स्तर दिए जाते हैं (जैसे—1 से 5 या A से E)।

  • यह बताता है कि कोई गुण बच्चे में 'कितनी मात्रा' में मौजूद है।

  • उदाहरण: वाचन कौशल: उत्तम / अच्छा / औसत / सुधार की आवश्यकता।

5. अवलोकन / निरीक्षण (Observation)

  • शिक्षक द्वारा बच्चों को स्वाभाविक गतिविधियों (खेलते समय, बात करते समय) में ध्यानपूर्वक देखना।

  • यह प्राथमिक स्तर पर मूल्यांकन की सबसे श्रेष्ठ विधि मानी जाती है क्योंकि इसमें बच्चे को पता भी नहीं चलता कि उसका मूल्यांकन हो रहा है।

6. साक्षात्कार (Interview)

  • आमने-सामने बैठकर प्रश्न पूछना। यह मौखिक अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास जांचने के लिए उपयोगी है।


7. प्रश्नों के प्रकार

प्रश्न पत्र बनाते समय शिक्षक को विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का मिश्रण रखना चाहिए।

A. मुक्त अंत वाले प्रश्न (Open-ended / Divergent Questions)

  • इन प्रश्नों का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता।

  • बच्चे को अपने विचार और कल्पना प्रयोग करने की पूरी छूट होती है।

  • उदाहरण: "अगर तुम पक्षी होते, तो क्या करते?" या "कहानी का अंत बदलो।"

  • महत्त्व: यह सृजनात्मकता (Creativity) और चिंतन कौशल को बढ़ाता है।

B. बंद अंत वाले प्रश्न (Close-ended / Convergent Questions)

  • इनका उत्तर निश्चित होता है।

  • उदाहरण: "भारत की राजधानी क्या है?" या बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)।

  • महत्त्व: यह तथ्यात्मक ज्ञान की जांच करते हैं।


8. निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण

यह मूल्यांकन का सबसे महत्त्वपूर्ण चक्र है।

  1. निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic Test):

    • इसका उद्देश्य है—समस्या का कारण जानना

    • जैसे डॉक्टर बीमारी का पता लगाने के लिए टेस्ट करता है, वैसे ही शिक्षक यह जानने के लिए टेस्ट लेता है कि बच्चा गणित या भाषा में बार-बार गलती क्यों कर रहा है।

  2. उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching):

    • निदान के बाद, समस्या को दूर करने के लिए जो विशेष शिक्षण दिया जाता है, उसे उपचारात्मक शिक्षण कहते हैं।

    • इसमें दोबारा वही पाठ पढ़ाना, अलग विधि का प्रयोग करना, या व्यक्तिगत ध्यान देना शामिल है।


9. मूल्यांकन में शिक्षक की भूमिका

  • सुगमकर्ता (Facilitator): शिक्षक को केवल जज नहीं बनना चाहिए, बल्कि बच्चे को सीखने में मदद करनी चाहिए।

  • तटस्थता: शिक्षक को किसी भी पूर्वाग्रह (Bias) से मुक्त होना चाहिए।

  • संवेदनशीलता: बच्चे की पृष्ठभूमि, मातृभाषा और संस्कृति का सम्मान करते हुए मूल्यांकन करना चाहिए।


निष्कर्ष (Quick Recap for Exam)

  • पोर्टफोलियो सबसे अच्छा उपकरण है क्योंकि यह क्रमिक विकास दिखाता है।

  • प्राथमिक स्तर पर निरीक्षण (Observation) सबसे प्रभावी है।

  • भाषा में मौखिक और लिखित दोनों रूपों का मूल्यांकन जरूरी है।

  • प्रश्नों का उद्देश्य केवल रटा हुआ ज्ञान जांचना नहीं, बल्कि चिंतन और मौलिकता को परखना होना चाहिए।

  • त्रुटियाँ सीखने का हिस्सा हैं; उन्हें तुरंत सुधारने के बजाय चर्चा का विषय बनाना चाहिए।



भाषा कौशल में प्रवीणता का मूल्यांकन

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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