जल

Sunil Sagare
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1. जल चक्र (Water Cycle)

जल चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है।

  • मूल अवधारणा: सूर्य की ऊष्मा के कारण जल वाष्पित होता है। ठंडा होने पर जलवाष्प संघनित होकर बादलों का रूप ले लेता है। यहाँ से यह वर्षा, हिम या ओलावृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है।

  • टेरारियम (Terrarium) उदाहरण: हमारी पृथ्वी एक थलशाला (Terrarium) के समान है। जो जल शताब्दियों पूर्व उपस्थित था, वही आज भी मौजूद है।

    • उदाहरण: जिस जल का प्रयोग आज हम हरियाणा के खेत में सिंचाई के लिए कर रहे हैं, हो सकता है कि वह सैकड़ों वर्ष पहले अमेज़न नदी में बहता हो।

जल चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ:

  1. वाष्पीकरण:

    • जल का द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था (वाष्प) में बदलना।

    • सूर्य का ताप वाष्पीकरण की दर को बढ़ाता है।

    • महासागरों, नदियों और झीलों से जल वाष्पित होकर वायुमंडल में जाता है।

  2. संघनन:

    • जलवाष्प का ठंडा होकर पुनः द्रव अवस्था (पानी की बूंदों) में बदलना।

    • बादलों का निर्माण इसी प्रक्रिया से होता है।

  3. वर्षण:

    • जब बादल भारी हो जाते हैं और जल को धारण नहीं कर पाते, तो वह पृथ्वी पर गिरता है।

    • रूप: वर्षा, हिमपात, ओले।

  4. अपवाह (Runoff):

    • धरातल पर बहने वाला जल जो पुनः नदियों और महासागरों में मिल जाता है।


2. जल का वितरण (Distribution of Water)

पृथ्वी की सतह का तीन-चौथाई भाग ($3/4$) जल से ढका हुआ है। फिर भी अनेक देशों में जल की कमी है। इसका मुख्य कारण जल का असमान वितरण और पीने योग्य पानी की कमी है।

जल वितरण सारणी (NCERT आधारित):

$$\begin{array}{l|l} \textbf{जल स्रोत} & \textbf{प्रतिशत मात्रा} \\ \hline \text{महासागर (लवणीय जल)} & 97.3\% \\ \text{बर्फ छत्रक (Ice Caps)} & 02.0\% \\ \text{भूमिगत जल} & 00.68\% \\ \text{झीलों का अलवण जल} & 00.009\% \\ \text{स्थलीय समुद्र एवं नमकीन झीलें} & 00.009\% \\ \text{वायुमंडल} & 00.0019\% \\ \text{नदियाँ} & 00.0001\% \\ \hline \textbf{कुल} & \textbf{100\%} \end{array}$$
  • अलवण जल (Fresh Water): केवल $2.7\%$ जल ही अलवण है। इसमें से भी लगभग $70\%$ जल बर्फ की चादरों और हिमानियों (अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड) के रूप में है जो हमारी पहुँच से बाहर है।

  • पीने योग्य जल: मनुष्य के उपयोग के लिए केवल लगभग $1\%$ अलवण जल उपलब्ध है, जो मुख्य रूप से भूमिगत जल और नदियों में पाया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • विश्व जल दिवस: प्रतिवर्ष $22 \text{ March}$ को मनाया जाता है।

  • महत्व: जल संरक्षण की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करना।


3. महासागरीय परिसंचरण (Ocean Circulation)

ताल या झील के शांत जल के विपरीत, महासागरीय जल हमेशा गतिमान रहता है। यह कभी शांत नहीं रहता। महासागरीय गतियों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:

  1. तरंगें

  2. ज्वार-भाटा

  3. धाराएँ


A. तरंगें (Waves)

जब महासागरीय सतह पर पवन बहती है, तब तरंगें उत्पन्न होती हैं। जितनी तेज़ पवन बहती है, तरंगें उतनी ही बड़ी होती जाती हैं।

  • परिभाषा: समुद्र तट पर गेंद से खेलते समय जब गेंद जल में गिर जाती है, तो वह तरंगों के साथ तट पर वापस आ जाती है। जल की सतह का लगातार उठना और गिरना 'तरंग' कहलाता है।

  • तूफान: तूफान में तेज़ वायु चलने पर विशाल तरंगें उत्पन्न होती हैं जो विनाशकारी हो सकती हैं।

सुनामी (Tsunami):

  • अर्थ: 'सुनामी' जापानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है 'पोताश्रय तरंगें' (Harbour Waves), क्योंकि सुनामी आने पर पोताश्रय (बंदरगाह) नष्ट हो जाते हैं।

  • कारण: भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार या जल के नीचे भूस्खलन के कारण महासागरीय जल विस्थापित होता है।

  • गति: सुनामी तरंगे $700 \text{ km/h}$ से भी अधिक गति से चल सकती हैं।

  • 2004 का सुनामी:

    • हिंद महासागर में आया था।

    • भारत के तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक विनाश हुआ।

    • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 'इंदिरा पॉइंट' डूब गया था।


B. ज्वार-भाटा (Tides)

दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना और गिरना 'ज्वार-भाटा' कहलाता है।

  • ज्वार (High Tide): जब जल सर्वाधिक ऊँचाई तक उठकर तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है।

  • भाटा (Low Tide): जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है और तट से पीछे चला जाता है।

उत्पत्ति का कारण:

सूर्य और चंद्रमा की शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण शक्ति ($Gravitational Force$) के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार-भाटा आते हैं।

$$F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}$$

(गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के जल को अपनी ओर खींचता है)

  1. वृहत् ज्वार (Spring Tides):

    • कब: पूर्णिमा (Full Moon) और अमावस्या (New Moon) के दिनों में।

    • स्थिति: सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही सीध में होते हैं।

    • प्रभाव: इस समय सबसे ऊँचे ज्वार उठते हैं।

  2. लघु ज्वार (Neap Tides):

    • कब: जब चाँद अपने प्रथम और अंतिम चतुर्थांश (Quarter) में होता है।

    • स्थिति: पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं से महासागरीय जल पर पड़ता है (समकोण स्थिति - $90^\circ$)।

    • प्रभाव: परिणाम स्वरूप निम्न ज्वार भाटा आता है।

ज्वार-भाटा का महत्त्व:

  • नौसंचालन (Navigation): उच्च ज्वार नौसंचालन में सहायक होता है। यह जल स्तर को तट की ऊँचाई तक पहुँचाता है, जिससे जहाज बंदरगाह तक आसानी से पहुँच जाते हैं।

  • मत्स्य पालन (Fishing): उच्च ज्वार के दौरान अनेक मछलियाँ तट के निकट आ जाती हैं। इससे मछुआरों को बिना कठिनाई के अधिक मछलियाँ मिल जाती हैं।

  • विद्युत उत्पादन: कुछ स्थानों पर ज्वार-भाटा से होने वाले जल के उतार-चढ़ाव का उपयोग विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।


C. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)

महासागरीय धाराएँ निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली जल की धाराएँ होती हैं। ये नदियाँ जैसी होती हैं जो समुद्र के अंदर बहती हैं।

  • तापमान के आधार पर वर्गीकरण:

    1. गर्म धाराएँ (Warm Currents)

    2. ठंडी धाराएँ (Cold Currents)

1. गर्म जलधाराएँ:

  • उत्पत्ति: भूमध्य रेखा (Equator) के निकट उत्पन्न होती हैं और ध्रुवों (Poles) की ओर प्रवाहित होती हैं।

  • उदाहरण: गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream)।

  • प्रभाव: ये जिस क्षेत्र में जाती हैं, वहाँ के तापमान को बढ़ा देती हैं (गर्म कर देती हैं)।

2. ठंडी जलधाराएँ:

  • उत्पत्ति: ध्रुवों या उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशों की ओर प्रवाहित होती हैं।

  • उदाहरण: लैब्रडोर महासागरीय धारा (Labrador Current)।

  • प्रभाव: ये तटीय क्षेत्रों के तापमान को कम कर देती हैं।

धाराओं का प्रभाव:

  • मत्स्य पालन क्षेत्र: जिस स्थान पर गर्म और ठंडी जलधाराएँ मिलती हैं, वह विश्व भर में सर्वोत्तम मत्स्यन क्षेत्र (Fishing Ground) माना जाता है।

    • उदाहरण: जापान के आसपास का क्षेत्र और उत्तर अमेरिका का पूर्वी तट।

  • कोहरा (Fog): गर्म और ठंडी धाराओं के मिलन स्थल पर कुहासे वाला मौसम बनता है, जिससे नौसंचालन में बाधा उत्पन्न होती है।


4. लवणता (Salinity)

महासागरों का जल खारा होता है क्योंकि इसमें अत्यधिक मात्रा में घुले हुए लवण होते हैं।

  • मुख्य लवण: खाने वाला नमक (Sodium Chloride - $\text{NaCl}$).

  • मापन: लवणता $1000$ ग्राम जल में मौजूद नमक की मात्रा होती है।

  • औसत लवणता: महासागरों की औसत लवणता $35 \text{ ppt}$ (parts per thousand) या $35$ ग्राम प्रति हजार ग्राम होती है।

क्या आप जानते हैं? (Facts for CTET):

  • इज़राइल के मृत सागर (Dead Sea) में $340$ ग्राम प्रति लीटर लवणता होती है।

  • इतनी अधिक लवणता के कारण जल का घनत्व ($\text{Density}$) बहुत बढ़ जाता है।

  • तराक इसमें डूबते नहीं हैं, बल्कि 'प्लव' (Float) करते हैं।


5. जल प्रदूषण और संरक्षण (Water Pollution & Conservation)

यद्यपि जल एक नवीकरणीय संसाधन है, फिर भी इसका अति-उपयोग और प्रदूषण इसे अनुपयोगी बना देता है।

प्रमुख प्रदूषक:

  • वाहित मल (Sewage)

  • कृषि रसायन (उर्वरक और कीटनाशक)

  • औद्योगिक अपशिष्ट (भारी धातुएँ जैसे- लेड, आर्सेनिक)

संरक्षण की विधियाँ:

  1. वन और वनस्पति आवरण: पेड़-पौधे धरातलीय प्रवाह को मंद करते हैं और भूमिगत जल को पुनः पूरित करने में मदद करते हैं।

  2. जल संग्रहण (Water Harvesting): पृष्ठीय प्रवाह को बचाने के लिए वर्षा जल संग्रहण एक प्रभावी विधि है।

  3. सिंचाई तकनीक:

    • स्प्रिंकलर (Sprinklers): वाष्पीकरण को कम करने के लिए।

    • ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): शुष्क प्रदेशों में बूँद-बूँद सिंचाई अत्यंत उपयोगी है।


6. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Facts for Revision)

  • तरल सोना: जल को कभी-कभी 'नीला सोना' या 'तरल सोना' भी कहा जाता है।

  • कोरियोलिस बल (Coriolis Force): पृथ्वी के घूर्णन के कारण महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में अपनी दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में अपनी बायीं ओर विक्षेपित हो जाती हैं।

  • अल-नीनो (El-Nino): यह एक गर्म समुद्री जलधारा है जो पेरू के तट पर उत्पन्न होती है और भारतीय मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।

  • जल की अवस्थाएँ: ठोस (बर्फ), द्रव (जल), गैस (जलवाष्प)।

  • $\text{H}_2\text{O}$: जल का रासायनिक सूत्र। यह दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना यौगिक है।


सारांश तालिका: महासागरीय गतियाँ

$$\begin{array}{l|l|l} \textbf{गति} & \textbf{कारण} & \textbf{विशेषता} \\ \hline \text{तरंगें} & \text{पवन} & \text{जल का उठना और गिरना} \\ \hline \text{ज्वार-भाटा} & \text{गुरुत्वाकर्षण (सूर्य/चंद्र)} & \text{दिन में 2 बार नियमित उतार-चढ़ाव} \\ \hline \text{धाराएँ} & \text{तापमान, घनत्व, पृथ्वी का घूर्णन} & \text{निश्चित दिशा में बहने वाली नदियाँ} \end{array}$$


जल

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