1. प्रस्तावना (Introduction)
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) को प्रभावशाली, रोचक और स्थायी बनाने के लिए जिन साधनों का उपयोग किया जाता है, उन्हें शिक्षण-अधिगम सामग्री या टी.एल.एम. (Teaching Learning Material - TLM) कहा जाता है। एक शिक्षक चाहे कितना भी ज्ञानी क्यों न हो, यदि वह अपने ज्ञान को छात्रों तक सही ढंग से संप्रेषित नहीं कर पाता, तो शिक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होता।
पर्यावरण अध्ययन (EVS) में TLM का महत्व और भी अधिक है क्योंकि यह विषय छात्रों को उनके परिवेश से जोड़ता है। रटंत प्रणाली (Rote Learning) को खत्म करने और अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायक सामग्री की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) भी इस बात पर जोर देती है कि ज्ञान को स्कूल के बाहरी जीवन से जोड़ा जाए, और इसमें विभिन्न प्रकार के संसाधनों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
2. शिक्षण सहायक सामग्री के उद्देश्य एवं कार्य
शिक्षण सामग्री का उपयोग केवल कक्षा को सजाने या मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसके पीछे ठोस शैक्षणिक उद्देश्य होते हैं:
जटिल अवधारणाओं का सरलीकरण: अमूर्त (Abstract) विचारों को मूर्त (Concrete) रूप में प्रस्तुत करना। जैसे—पृथ्वी के घूर्णन को ग्लोब के माध्यम से समझाना।
इंद्रियों की सक्रियता: अधिगम तब सबसे अधिक प्रभावी होता है जब एक से अधिक इंद्रियां सक्रिय हों।
केवल सुनने से: लगभग $20\%$ याद रहता है।
देखने से: लगभग $30\%$ याद रहता है।
देखने और सुनने से: लगभग $50\%$ याद रहता है।
स्वयं करने से: $90\%$ तक अधिगम स्थायी होता है।
समय और ऊर्जा की बचत: जो बात समझाने में घंटों लग सकते हैं, उसे एक चित्र या मॉडल मिनटों में स्पष्ट कर सकता है।
उत्सुकता और रुचि: नीरस कक्षा में छात्रों का ध्यान भटकता है, लेकिन TLM का प्रयोग उनमें जिज्ञासा (Curiosity) उत्पन्न करता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पर्यावरण अध्ययन में प्रयोग और प्रदर्शन छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करते हैं।
3. शिक्षण सहायक सामग्री का वर्गीकरण (Classification of TLM)
इंद्रियों के उपयोग के आधार पर शिक्षण सामग्री को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है:
A. दृश्य सामग्री (Visual Aids)
ये वे साधन हैं जिनमें केवल आँखों का प्रयोग होता है। छात्र देखकर सीखते हैं।
श्यामपट्ट (Blackboard/Greenboard):
यह शिक्षक का सबसे विश्वसनीय मित्र माना जाता है।
इसका उपयोग पाठ का सारांश लिखने, चित्र बनाने और कठिन शब्दों को समझाने के लिए होता है।
शिक्षक को श्यामपट्ट पर लिखते समय $45^\circ$ के कोण पर खड़ा होना चाहिए ताकि छात्र भी देख सकें।
मानचित्र (Map):
पर्यावरण अध्ययन में स्थान, दूरी और दिशाओं की सापेक्ष स्थिति को समझाने के लिए मानचित्र अनिवार्य है।
यह छात्रों में 'मानचित्रण कौशल' (Mapping Skills) का विकास करता है।
महत्वपूर्ण: प्राथमिक स्तर पर मानचित्र का उद्देश्य पैमाने (Scale) की सटीकता नहीं, बल्कि सापेक्ष स्थिति और दिशा ज्ञान है।
चित्र एवं चार्ट (Pictures and Charts):
जहाँ वास्तविक वस्तु नहीं लाई जा सकती (जैसे—शेर, ज्वालामुखी, ऐतिहासिक इमारतें), वहाँ उनके चित्र प्रभावी होते हैं।
चार्ट का उपयोग प्रक्रियाओं (जैसे—जल चक्र, भोजन का पाचन) को समझाने के लिए किया जाता है।
ग्लोब (Globe):
पृथ्वी का प्रतिरूप।
दिन-रात का होना, महाद्वीपों का आकार और महासागरों की स्थिति समझाने के लिए सर्वोत्तम।
वास्तविक पदार्थ (Real Objects/Specimens):
जैसे—विभिन्न प्रकार की मिट्टी, चट्टानें, पत्तियां, बीज आदि।
यह छात्रों को प्रत्यक्ष अनुभव देता है।
B. श्रव्य सामग्री (Audio Aids)
इन साधनों में केवल कानों का प्रयोग होता है। यह उन छात्रों के लिए भी उपयोगी है जो देख नहीं सकते (दृष्टिबाधित)।
रेडियो:
शैक्षिक प्रसारण और समाचार सुनने के लिए।
दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाने का सशक्त माध्यम।
टेप रिकॉर्डर/ऑडियो प्लेयर:
महान व्यक्तियों के भाषण, पशु-पक्षियों की आवाजें, या कविताओं के सस्वर पाठ के लिए उपयोग किया जाता है।
C. दृश्य-श्रव्य सामग्री (Audio-Visual Aids)
ये सबसे शक्तिशाली साधन हैं क्योंकि इसमें आँख और कान दोनों सक्रिय रहते हैं।
टेलीविजन/स्मार्ट क्लास:
इसमें गति, चित्र और ध्वनि का संयोजन होता है।
डिस्कवरी या नेशनल जियोग्राफिक जैसे चैनलों के कार्यक्रम पर्यावरण शिक्षण के लिए बेहतरीन संसाधन हैं।
कम्प्यूटर और इंटरनेट:
यह एक आधुनिक उपकरण है।
इंटरनेट के माध्यम से दुनिया भर की जानकारी कक्षा में लाई जा सकती है।
मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन (PPT) से पाठ को रोचक बनाया जा सकता है।
वृत्तचित्र (Documentaries):
पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण, वन जीवन पर बनी लघु फिल्में छात्रों को संवेदनशील बनाती हैं।
4. प्राकृतिक वातावरण और समुदाय: सबसे बड़ा संसाधन
NCF-2005 और आधुनिक शिक्षा शास्त्र इस बात पर जोर देते हैं कि सीखने के लिए चारदीवारी के भीतर के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। पर्यावरण अध्ययन के लिए 'पर्यावरण' स्वयं सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।
1. समुदाय के सदस्य (Community Members)
समुदाय के लोग एक महत्वपूर्ण मानवीय संसाधन हैं।
उदाहरण: यदि आप 'व्यवसाय' या 'खेती' पढ़ा रहे हैं, तो किसी किसान, कुम्हार, या डॉक्टर को कक्षा में आमंत्रित करना पाठ्यपुस्तक से पढ़ने से कहीं अधिक प्रभावी होगा।
बुजुर्गों से पुराने समय के पौधों, पानी के स्रोतों और त्योहारों के बारे में जानकारी लेना इतिहास और पर्यावरण को जोड़ने का बेहतरीन तरीका है।
2. भ्रमण (Field Trips)
कक्षा कक्ष अधिगम को वास्तविक जीवन से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम।
उदाहरण: चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, डाकघर, या नजदीकी तालाब का दौरा।
भ्रमण केवल घूमना नहीं है, बल्कि यह अवलोकन (Observation), नोट करना और प्रश्न पूछने की प्रक्रिया है।
3. प्रकृति की प्रयोगशाला (Nature as Laboratory)
विद्यालय का बगीचा।
छात्रों द्वारा खुद पौधे लगाना और उनकी वृद्धि का निरीक्षण करना।
इसमें छात्र मापन भी सीखते हैं, जैसे पौधे की लंबाई मापना:
$$\text{Growth Rate} = \frac{\text{Height}_2 - \text{Height}_1}{\text{Time Interval}}$$
5. पाठ्यपुस्तक: एक संसाधन, एकमात्र संसाधन नहीं
भारत में पाठ्यपुस्तक को ही सब कुछ मान लेने की परंपरा रही है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। एक अच्छी EVS पाठ्यपुस्तक की विशेषताएँ निम्नलिखित होनी चाहिए:
रटने के खिलाफ: परिभाषाओं और तकनीकी शब्दावली की भरमार नहीं होनी चाहिए।
क्रियाकलाप आधारित: हर पाठ के साथ 'करके देखो', 'पता करो' जैसे खंड होने चाहिए।
वास्तविक जीवन से जुड़ाव: उदाहरण और चित्र बच्चों के परिवेश से हों।
संवेदनशीलता: लिंग भेद, जाति और धर्म के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने वाली हो।
एकीकृत उपागम: विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा को अलग-अलग न मानकर एक साथ (Integrated) प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
6. कक्षा में विज्ञान किट और प्रयोगशाला (Laboratory & Science Kits)
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर जटिल प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन एक 'एक्टिविटी रूम' या 'विज्ञान कोना' (Science Corner) होना आवश्यक है।
उपकरण: हैण्ड लेन्स (Hand Lens), चुंबक, थर्मामीटर, बीकर, टॉर्च, दर्पण आदि।
प्रयोग:
हवा जगह घेरती है।
पानी में कौन सी चीजें तैरती हैं और कौन सी डूबती हैं।
छाया कैसे बनती है।
मोबाइल लैब: कई जगहों पर 'चलती-फिरती प्रयोगशाला' (Mobile Lab) का कांसेप्ट भी अपनाया गया है जो उन स्कूलों तक संसाधन पहुँचाती है जहाँ सुविधाएँ कम हैं।
7. मानचित्रण कौशल (Mapping Skills)
CTET में मानचित्र से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। मानचित्र शिक्षण केवल भूगोल नहीं, बल्कि EVS का अभिन्न अंग है।
कौशल विकास: मानचित्र पढ़ने के लिए छात्रों में तीन मुख्य क्षमताओं का विकास होना चाहिए:
स्थान (Place): कौन सी जगह कहाँ है।
दूरी (Distance): पैमाने की समझ।
दिशा (Direction): उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम की सापेक्ष समझ।
उदाहरण: यदि मानचित्र पर पैमाना $1 \text{ cm} = 110 \text{ km}$ है, और दो शहरों के बीच की दूरी मानचित्र पर $5 \text{ cm}$ है, तो वास्तविक दूरी होगी:
$$\text{वास्तविक दूरी} = 5 \times 110 = 550 \text{ km}$$प्रतीक (Symbols): रेलवे लाइन, नदी, पुल आदि के लिए रूढ़िगत चिह्नों (Conventional Symbols) की समझ।
8. बाला (BALA - Building As Learning Aid)
BALA का अर्थ है— Building As Learning Aid (अधिगम सहायक के रूप में बिल्डिंग)।
यह एक अभिनव अवधारणा है जिसमें विद्यालय की पूरी इमारत को ही शिक्षण सामग्री में बदल दिया जाता है।
दीवारें: दीवारों पर सौर मंडल, मानचित्र, या गिनती लिखी हो सकती है।
फर्श: फर्श पर ज्यामितीय आकृतियाँ या सांप-सीढ़ी का खेल जिससे जोड़-घटाव सीखा जा सके।
सीढ़ियाँ: सीढ़ियों पर पहाड़े (Tables) लिखे जा सकते हैं।
दरवाजे: दरवाजों के खुलने के कोण (Angles) से ज्यामिति सिखाई जा सकती है (जैसे $90^\circ$ का कोण)।
यह पद्धति 'कम लागत' (Low Cost) में हर समय सीखने का वातावरण तैयार करती है।
9. सूचना एवं संचार तकनीक (ICT)
वर्तमान समय में ICT पर्यावरण शिक्षा में क्रांति ला रहा है।
इंटरनेट: छात्र प्रोजेक्ट कार्य के लिए जानकारी एकत्र कर सकते हैं।
सॉफ्टवेयर: ऐसे सिमुलेशन सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जहाँ बच्चे वर्चुअल रूप से पौधे उगा सकते हैं या प्रदूषण के प्रभाव देख सकते हैं।
एडूसैट (EDUSAT): भारत द्वारा शिक्षा के लिए समर्पित उपग्रह, जिसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में भी टीवी पर शैक्षिक कार्यक्रम दिखाए जाते हैं।
10. कम लागत वाली प्रभावी सामग्री (Low Cost / No Cost TLM)
भारत जैसे देश में जहाँ संसाधनों की कमी हो सकती है, वहाँ कबाड़ से जुगाड़ (Best out of waste) सबसे महत्वपूर्ण TLM है।
लाभ:
आर्थिक रूप से वहन करने योग्य।
छात्रों की सृजनात्मकता (Creativity) बढ़ती है।
पर्यावरण संरक्षण (Recycling) का संदेश मिलता है।
उदाहरण:
खाली माचिस की डिब्बियों से रेलगाड़ी बनाना।
पुरानी बोतलों से 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई) का मॉडल बनाना।
गत्ते के टुकड़ों से आकृतियाँ काटना।
पेड़ की पत्तियों से विभिन्न जानवरों के आकार बनाना (पत्ती कला)।
11. शिक्षण सामग्री चयन के सिद्धांत
शिक्षक को कक्षा में कोई भी सामग्री ले जाने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
उद्देश्यपूर्ण: क्या यह सामग्री उस विशेष पाठ के उद्देश्य को पूरा करती है?
स्तर अनुकूल: सामग्री बच्चों की आयु और मानसिक स्तर के अनुसार होनी चाहिए।
सरल और सुरक्षित: विशेषकर छोटे बच्चों के लिए कांच या नुकीली वस्तुओं से बचना चाहिए।
सटीकता: मानचित्र, चार्ट या ग्लोब में दी गई जानकारी अद्यतित (Updated) और सही होनी चाहिए।
निष्कर्ष
शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) पर्यावरण अध्ययन के शिक्षण की आत्मा है। यह न केवल शिक्षण को प्रभावी बनाती है, बल्कि बच्चों को रटने की प्रवृत्ति से दूर ले जाकर 'करके सीखने' (Learning by Doing) की ओर प्रेरित करती है। एक कुशल शिक्षक वह नहीं है जो केवल महंगी सामग्री का प्रयोग करे, बल्कि वह है जो अपने आसपास के परिवेश, प्रकृति, समुदाय और यहाँ तक कि विद्यालय की इमारत (BALA) को भी एक संसाधन के रूप में प्रयोग कर सके।
पर्यावरण अध्ययन: शिक्षण-अधिगम सामग्री
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