अभिप्रेरणा

Sunil Sagare
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. अभिप्रेरणा: अर्थ और परिभाषा

अभिप्रेरणा (Motivation) लैटिन भाषा के शब्द 'Movere' से बना है, जिसका अर्थ होता है- 'गति देना' या 'to move'।

  • मनोविज्ञान में अभिप्रेरणा वह आंतरिक शक्ति है जो किसी व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कार्य करने हेतु उत्तेजित करती है।

  • यह एक अदृश्य शक्ति है जिसे देखा नहीं जा सकता, केवल व्यवहार के माध्यम से महसूस किया जा सकता है।

प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के कथन:

  • बी. एफ. स्किनर: "अभिप्रेरणा अधिगम का सर्वोच्च राजमार्ग (Golden Highway) है।" (यह कथन CTET में कई बार पूछा गया है)।

  • गुड (Good): "कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने और नियमित करने की प्रक्रिया ही अभिप्रेरणा है।"

  • मैकडूगल: "अभिप्रेरणा वे शारीरिक और मानसिक दशाएं हैं जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती हैं।"


2. अभिप्रेरणा की विशेषताएँ

एक अभिप्रेरित व्यवहार में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं:

  • लक्ष्य निर्देशित व्यवहार: व्यक्ति का व्यवहार किसी विशिष्ट लक्ष्य की ओर उन्मुख होता है।

  • ऊर्जा परिवर्तन: अभिप्रेरणा व्यक्ति में ऊर्जा (Energy) का संचार करती है।

  • निरंतरता: यह लक्ष्य प्राप्ति तक व्यक्ति को क्रियाशील रखती है।

  • चयनात्मक क्रिया: अभिप्रेरित व्यक्ति इधर-उधर भटकने के बजाय केवल लक्ष्य से सम्बंधित कार्य करता है।

  • आंतरिक अवस्था: यह व्यक्ति के अंदर उत्पन्न होने वाली स्थिति है, न कि बाहर से थोपी गई।


3. अभिप्रेरणा के प्रकार (Types of Motivation)

CTET परीक्षा में अक्सर परिदृश्यात्मक (Scenario-based) प्रश्न इसी भाग से आते हैं। अभिप्रेरणा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

A. आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation)

जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को अपनी स्वयं की इच्छा, रुचि या खुशी के लिए करता है, तो उसे आंतरिक अभिप्रेरणा कहते हैं। इसमें कार्य करना ही अपने आप में एक पुरस्कार है।

  • उदाहरण: एक छात्र गिटार बजाना सीख रहा है क्योंकि उसे संगीत पसंद है।

  • उदाहरण: राजेश अपने कोर्स की किताबों के अलावा अन्य किताबें भी पढ़ता है क्योंकि उसे पढ़ने में मज़ा आता है।

  • महत्व: यह अधिगम के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसमें 'लोकस ऑफ कंट्रोल' (नियंत्रण का केंद्र) व्यक्ति के अंदर होता है।

B. बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation)

जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को स्वयं की इच्छा से न करके, किसी बाहरी पुरस्कार को पाने या दंड से बचने के लिए करता है।

  • उदाहरण: परीक्षा में पास होने के लिए पढ़ना।

  • उदाहरण: पिता से साइकिल इनाम में पाने के लिए अच्छे नंबर लाना।

  • नकारात्मक पक्ष: यदि पुरस्कार हटा लिया जाए, तो कार्य भी बंद हो सकता है। यह रटंत विद्या (Rote Learning) को बढ़ावा दे सकती है।

नोट: एक शिक्षक के रूप में आपका उद्देश्य छात्र को बाह्य अभिप्रेरणा से शुरुआत करके धीरे-धीरे आंतरिक अभिप्रेरणा की ओर ले जाना होना चाहिए।


4. अभिप्रेरणा चक्र (The Motivation Cycle)

अभिप्रेरणा एक चक्रीय प्रक्रिया है। इसके 6 प्रमुख चरण होते हैं। इस क्रम को याद रखना अत्यंत आवश्यक है:

$$\text{Need} \rightarrow \text{Drive} \rightarrow \text{Arousal} \rightarrow \text{Goal-Directed Behavior} \rightarrow \text{Achievement} \rightarrow \text{Reduction of Arousal}$$
  1. आवश्यकता (Need): हर अभिप्रेरणा की शुरुआत किसी कमी या आवश्यकता से होती है। (जैसे- शरीर में पानी की कमी/प्यास)।

  2. प्रणोद/चालक (Drive): आवश्यकता के कारण जो तनाव उत्पन्न होता है, उसे प्रणोद कहते हैं। (जैसे- प्यास का अहसास होना)।

  3. उत्तेजना (Arousal): यह व्यक्ति को सक्रिय करती है। व्यक्ति बेचैन होकर समाधान ढूँढने लगता है।

  4. लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार (Goal-Directed Behavior): व्यक्ति पानी खोजने के लिए हाथ-पाँव मारता है या किचन की तरफ जाता है।

  5. उपलब्धि (Achievement): पानी मिल जाता है और व्यक्ति उसे पी लेता है।

  6. उत्तेजना में कमी (Reduction of Arousal): प्यास बुझते ही तनाव कम हो जाता है और चक्र पूरा हो जाता है।


5. अभिप्रेरणा के प्रमुख सिद्धांत

(i) मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs)

अब्राहम मैस्लो ने 1954 में अपनी पुस्तक 'Motivation and Personality' में यह सिद्धांत दिया। उन्होंने मानव आवश्यकताओं को एक पिरामिड के रूप में 5 स्तरों में बांटा:

  1. शारीरिक आवश्यकताएं (Physiological): भूख, प्यास, नींद, आदि। (यह सबसे निचला और आधारभूत स्तर है)।

  2. सुरक्षा की आवश्यकता (Safety): शारीरिक खतरे से सुरक्षा, नौकरी की सुरक्षा, घर।

  3. प्रेम और संबद्धता (Love and Belonging): परिवार, मित्र, रिश्तेदार और समाज से जुड़ने की इच्छा।

  4. सम्मान की आवश्यकता (Esteem): समाज में पद, प्रतिष्ठा और आत्म-सम्मान।

  5. आत्म-सिद्धि (Self-Actualization): अपनी पूर्ण क्षमता को पहचानना। "एक व्यक्ति जो बन सकता है, उसे वह बनना ही चाहिए।" (यह सर्वोच्च स्तर है)।

महत्वपूर्ण: मैस्लो के अनुसार, जब तक निचले स्तर की आवश्यकता पूरी नहीं होती, व्यक्ति उच्च स्तर के बारे में नहीं सोचता।

(ii) मैकडूगल का मूल प्रवृत्ति सिद्धांत (Instinct Theory)

विलियम मैकडूगल ने बताया कि मनुष्य का व्यवहार मूल प्रवृत्तियों द्वारा संचालित होता है। उन्होंने 14 मूल प्रवृत्तियां (Instincts) बताईं और प्रत्येक मूल प्रवृत्ति से जुड़ा एक संवेग (Emotion) होता है।

  • उदाहरण: 'पलायन' (मूल प्रवृत्ति) का संवेग 'भय' है। 'युयुत्सा' (लड़ने की इच्छा) का संवेग 'क्रोध' है।

(iii) हल का प्रणोद न्यूनता सिद्धांत (Drive Reduction Theory)

क्लाक एल. हल (Hull) ने यह सिद्धांत दिया। उनके अनुसार, प्राणी वह कार्य करता है जिससे उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो और उसका तनाव (Drive) कम हो सके।

(iv) उपलब्धि अभिप्रेरणा सिद्धांत (Achievement Motivation)

यह सिद्धांत डेविड मैकलीलैंड द्वारा दिया गया। उन्होंने तीन प्रमुख आवश्यकताओं पर जोर दिया:

  1. उपलब्धि की आवश्यकता (nAch): कठिन कार्यों को करने और सफलता प्राप्त करने की तीव्र इच्छा।

  2. शक्ति की आवश्यकता (nPow): दूसरों को नियंत्रित करने और प्रभावित करने की इच्छा।

  3. संबद्धता की आवश्यकता (nAff): दूसरों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की इच्छा।


6. अधिगम (Learning) और अभिप्रेरणा का सम्बन्ध

अधिगम केवल कोरी स्लेट पर लिखना नहीं है, यह एक सक्रिय प्रक्रिया है जिसमें अभिप्रेरणा ईंधन का काम करती है।

  • सीखने की तत्परता: थार्नडाइक के 'तत्परता के नियम' के अनुसार, यदि बच्चा सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार (अभिप्रेरित) नहीं है, तो उसे जबरदस्ती नहीं सिखाया जा सकता।

  • रुचि का विकास: अभिप्रेरणा छात्र में विषय के प्रति रुचि जाग्रत करती है।

  • ध्यान केन्द्रित करना: प्रेरित बालक अधिक समय तक एकाग्रचित होकर पढ़ाई कर सकता है।


7. अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक

सीखने की प्रक्रिया पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है, जिन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:

A. व्यक्तिगत कारक (Personal Factors)

ये कारक शिक्षार्थी से स्वयं जुड़े होते हैं:

  • आयु और परिपक्वता: एक निश्चित आयु से पहले अमूर्त संकल्पनाएं नहीं सिखाई जा सकतीं (पियाजे का सिद्धांत)।

  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: बीमार या तनावग्रस्त बच्चा ठीक से नहीं सीख सकता।

  • बुद्धि और अभिक्षमता: बौद्धिक स्तर सीखने की गति को निर्धारित करता है।

  • आकांक्षा स्तर: बच्चा जीवन में क्या बनना चाहता है।

B. पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors)

ये कारक बाहरी वातावरण से जुड़े होते हैं:

  • विद्यालय का वातावरण: कक्षा में प्रकाश, बैठने की व्यवस्था और शांत माहौल।

  • शिक्षक का व्यवहार: सहयोगात्मक और लोकतांत्रिक व्यवहार सीखने को बढ़ावा देता है।

  • शिक्षण विधियां: "करके सीखना" (Learning by doing) और खेल विधि व्याख्यान विधि से बेहतर है।

  • सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश: वाइगोत्स्की के अनुसार, बच्चे अपने समाज और संस्कृति के साथ अंतःक्रिया करके सीखते हैं।


8. कक्षा में अभिप्रेरणा बढ़ाने की रणनीतियां (Strategies for Teachers)

एक शिक्षक के रूप में आप बच्चों को कैसे प्रेरित रख सकते हैं?

  1. विषय-वस्तु की उपयोगिता: छात्रों को बताएं कि जो वे पढ़ रहे हैं, उसका वास्तविक जीवन में क्या उपयोग है।

  2. सफलता का अनुभव: शुरुआत में आसान कार्य दें ताकि बच्चे सफल हों और उनका आत्मविश्वास बढ़े।

  3. प्रतियोगिता नहीं, सहयोग: छात्रों के बीच अस्वस्थ प्रतियोगिता (Marks के लिए) के बजाय सहयोगात्मक अधिगम (Group learning) को बढ़ावा दें।

  4. निपुणता-उन्मुखी लक्ष्य (Mastery Oriented Goals): बच्चों को सिर्फ 'फर्स्ट' आने के लिए नहीं, बल्कि 'कुशल' बनने के लिए प्रेरित करें।

  5. जिज्ञासा जगाना: प्रश्न पूछने और समस्या समाधान के अवसर दें।

  6. पुरस्कार और दंड का उचित प्रयोग:

    • पुरस्कार (Rewards) का प्रयोग सीमित होना चाहिए, अन्यथा बच्चे लालची हो जाएंगे और आंतरिक प्रेरणा खत्म हो जाएगी।

    • दंड (Punishment) का प्रयोग भय उत्पन्न करता है, इसे टालना चाहिए।


9. कुछ महत्वपूर्ण संप्रत्यय (Important Concepts for CTET)

  • सीखा हुआ असहायपन (Learned Helplessness): जब किसी छात्र को बार-बार असफलता मिलती है और उसे लगता है कि उसके प्रयास का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा, तो वह प्रयास करना छोड़ देता है। यह स्थिति अधिगम के लिए घातक है।

  • नियंत्रण का केंद्र (Locus of Control):

    • आंतरिक: "मैं फेल हुआ क्योंकि मैंने मेहनत नहीं की।" (सुधार की गुंजाइश)।

    • बाह्य: "मैं फेल हुआ क्योंकि पेपर कठिन था या टीचर ने अच्छा नहीं पढ़ाया।" (सुधार की कमी)।

  • येरक्स-डोडसन नियम (Yerkes-Dodson Law): यह नियम कहता है कि कार्य निष्पादन (Performance) तब सबसे अच्छा होता है जब उत्तेजना (Arousal) का स्तर मध्यम हो। बहुत कम उत्तेजना में सुस्ती होती है और बहुत अधिक उत्तेजना (High Anxiety) में घबराहट के कारण प्रदर्शन बिगड़ जाता है।



अभिप्रेरणा (Motivation)

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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