पंचायती राज

Sunil Sagare
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1. स्थानीय स्वशासन का अर्थ और महत्व

  • परिभाषा: स्थानीय स्वशासन का अर्थ है, स्थानीय लोगों द्वारा स्वयं अपने क्षेत्र का शासन चलाना। यह सत्ता के विकेंद्रीकरण (Decentralization) का सबसे अच्छा उदाहरण है।

  • मुख्य उद्देश्य:

    • लोकतंत्र में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना।

    • स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही खोजना।

    • प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना।

    • गांधी जी का सपना "ग्राम स्वराज" साकार करना।

  • जनक: भारत में आधुनिक स्थानीय स्वशासन का जनक लॉर्ड रिपन को माना जाता है (1882 का प्रस्ताव)।


2. पंचायती राज का ऐतिहासिक विकास (समितियां)

स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई समितियां गठित कीं। CTET में अक्सर इन समितियों के सुझावों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

बलवंत राय मेहता समिति (1957)

  • इस समिति का गठन सामुदायिक विकास कार्यक्रम की जांच के लिए किया गया था।

  • सुझाव: इसने 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' की सिफारिश की।

  • त्रि-स्तरीय ढांचा: समिति ने सुझाव दिया कि पंचायती राज तीन स्तरों पर होना चाहिए:

    1. ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत।

    2. खंड (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति।

    3. जिला स्तर पर जिला परिषद।

  • इस समिति की सिफारिश पर 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में सबसे पहले पंचायती राज का उद्घाटन किया गया।

  • दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश (1959) था।

अशोक मेहता समिति (1977)

  • इसने द्वि-स्तरीय (Two-tier) प्रणाली का सुझाव दिया:

    1. मंडल पंचायत (कई गांवों को मिलाकर)।

    2. जिला परिषद।

  • नोट: इस समिति की सिफारिशें लागू नहीं हुईं, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

एल. एम. सिंघवी समिति (1986)

  • सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए।

  • न्याय पंचायतों के गठन की वकालत की।

  • चुनावों को गैर-दलगत तरीके से कराने का सुझाव दिया।

पी. के. थुंगन समिति (1988)

  • इन्होंने भी संवैधानिक मान्यता और नियमित चुनाव पर जोर दिया।

  • इन्हीं समितियों के आधार पर बाद में 73वां संविधान संशोधन लाया गया।


3. 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992

यह अधिनियम भारतीय पंचायती राज इतिहास में मील का पत्थर है। इसे 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में लागू किया गया। इसीलिए 24 अप्रैल को 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' मनाया जाता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • संवैधानिक दर्जा: संविधान में 'भाग-9' जोड़ा गया जिसका शीर्षक 'पंचायत' है।

  • अनुच्छेद: अनुच्छेद 243 से 243-O तक प्रावधान शामिल किए गए।

  • अनुसूची: संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।

  • कार्य विषय: 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 कार्यात्मक विषय (Subjects) रखे गए हैं (जैसे- कृषि, भूमि सुधार, पेयजल, सड़कें आदि)।


4. पंचायती राज की संरचना (त्रि-स्तरीय व्यवस्था)

73वें संशोधन के अनुसार, जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है, वहां त्रि-स्तरीय प्रणाली अनिवार्य है।

स्तर 1: ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर)

यह सबसे निचला और बुनियादी स्तर है।

A. ग्राम सभा

  • परिचय: ग्राम सभा पंचायती राज की व्यवस्थापिका (Legislature) की तरह है। यह पंचायत की निगरानी करती है।

  • सदस्यता: गाँव का प्रत्येक नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है और जिसका नाम गाँव की मतदाता सूची में दर्ज है, वह ग्राम सभा का सदस्य होता है।

  • बैठकें: वर्ष में कम से कम दो या चार बार (राज्यों के अनुसार भिन्न) ग्राम सभा की बैठक होना अनिवार्य है।

  • कार्य:

    • ग्राम पंचायत के बजट को मंजूरी देना।

    • विकास कार्यों की समीक्षा करना।

    • लाभार्थियों की पहचान करना (जैसे BPL सूची का अनुमोदन)।

    • पंचायत को मनमानी करने से रोकना और पैसों का दुरुपयोग रोकना।

    • चुने हुए प्रतिनिधियों पर नजर रखना।

B. ग्राम पंचायत का गठन

  • गाँव को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटा जाता है जिन्हें वार्ड कहते हैं।

  • पंच: प्रत्येक वार्ड से एक प्रतिनिधि चुना जाता है, जिसे 'वार्ड पंच' या सदस्य कहते हैं।

  • सरपंच: पूरे पंचायत क्षेत्र से एक मुखिया चुना जाता है जिसे सरपंच या प्रधान कहते हैं।

  • उप-सरपंच: पंच मिलकर अपने में से एक उप-सरपंच चुनते हैं।

  • कार्यकाल: ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

  • चुनाव लड़ने की आयु: न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।

C. पंचायत सचिव (Secretary)

  • सचिव का चुनाव नहीं होता है, बल्कि यह सरकार द्वारा नियुक्त कर्मचारी होता है।

  • कार्य:

    • ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें बुलाना।

    • बैठकों का रिकॉर्ड (कार्यवृत्त/Minutes) रखना।

    • वित्तीय अभिलेखों का रखरखाव करना।

D. ग्राम पंचायत के कार्य (NCERT आधारित)

  • सड़कें, नालियां, स्कूल, पानी के स्रोत और अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों का निर्माण और रखरखाव।

  • स्थानीय कर (Tax) लगाना और इकट्ठा करना।

  • गाँव के लोगों को रोजगार देने संबंधी सरकारी योजनाएं लागू करना (जैसे मनरेगा)।

  • जन्म और मृत्यु का पंजीकरण।

E. आमदनी के स्रोत

  • घरों, बाजारों आदि पर लगाए जाने वाले कर से मिलने वाली राशि।

  • विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा चलाई गई योजनाओं की राशि (जो जनपद और जिला पंचायत के माध्यम से आती है)।

  • समुदाय के काम के लिए मिलने वाले दान।


स्तर 2: पंचायत समिति / जनपद पंचायत (ब्लॉक स्तर पर)

  • कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक विकास खंड (Block) बनता है।

  • इसे पंचायत समिति, क्षेत्र पंचायत या जनपद पंचायत भी कहते हैं।

  • प्रमुख: इसका राजनीतिक प्रमुख 'ब्लॉक प्रमुख' होता है, जो पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।

  • प्रशासनिक अधिकारी: यहां का मुख्य अधिकारी BDO (खंड विकास अधिकारी) होता है।

  • कार्य: यह ग्राम पंचायतों और जिला परिषद के बीच कड़ी (Link) का काम करती है। यह ग्राम पंचायतों की योजनाओं को जिला परिषद तक पहुंचाती है।


स्तर 3: जिला परिषद (जिला स्तर पर)

  • यह पंचायती राज की शीर्ष संस्था है।

  • पूरे जिले के विकास की योजना बनाना इसका मुख्य कार्य है।

  • सदस्य:

    • इसके सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं।

    • जिले के सभी पंचायत समितियों के प्रमुख।

    • जिले के सांसद (MP) और विधायक (MLA)।

  • अध्यक्ष: जिला परिषद के सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनते हैं।

  • CEO: राज्य सरकार द्वारा एक मुख्य कार्यपालन अधिकारी (IAS स्तर का) नियुक्त किया जाता है।

  • कार्य: यह जिले स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करती है और पंचायत समितियों के बीच धन का वितरण नियंत्रित करती है।


5. आरक्षण व्यवस्था (महत्वपूर्ण प्रावधान)

संविधान के अनुच्छेद 243-D के तहत आरक्षण का प्रावधान है:

  • अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST): उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण।

  • महिलाएं: कुल सीटों का कम से कम $\frac{1}{3}$ (33%) हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है।

  • नोट: कई राज्यों (जैसे बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड) ने महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाकर 50% कर दिया है।

  • अध्यक्ष पदों (सरपंच/प्रमुख) के लिए भी इसी प्रकार आरक्षण लागू होता है।


6. राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission)

  • पहले पंचायतों के चुनाव राज्य सरकार की मर्जी पर निर्भर थे। 73वें संशोधन ने इसे अनिवार्य बना दिया।

  • अनुच्छेद 243-K: पंचायतों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है।

  • यह भारत के निर्वाचन आयोग (जो संसद/विधानसभा चुनाव कराता है) से अलग संस्था है।

  • हर 5 साल में चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। यदि पंचायत समय से पहले भंग होती है, तो 6 महीने के अंदर चुनाव कराना अनिवार्य है।


7. राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission)

  • अनुच्छेद 243-I: राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष पर एक राज्य वित्त आयोग का गठन करेगा।

  • कार्य: यह आयोग सिफारिश करता है कि राज्य सरकार के कुल राजस्व (Tax) में से कितना हिस्सा पंचायतों को दिया जाए।

  • यह पंचायतों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय भी सुझाता है।


8. पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act)

CTET के लिए यह एक 'हॉट टॉपिक' है।

  • पूरा नाम: PESA - Panchayat (Extension to Scheduled Areas) Act.

  • उद्देश्य: 73वें संशोधन के प्रावधानों को देश के आदिवासी क्षेत्रों (5वीं अनुसूची वाले क्षेत्रों) में कुछ बदलावों के साथ लागू करना।

  • विशेषता:

    • इसमें ग्राम सभा को अत्यधिक शक्तिशाली बनाया गया है।

    • जनजातीय रीतियों और रिवाजों की सुरक्षा करना।

    • प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन) पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुनिश्चित करना।

    • भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की सहमति लेना अनिवार्य है।

    • शराब की बिक्री और लघु वन उपज पर ग्राम सभा का नियंत्रण होता है।


9. ग्राम सभा और ग्राम पंचायत में अंतर

अक्सर छात्र इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं। स्पष्टता के लिए नीचे दी गई तुलना देखें:

विशेषताग्राम सभाग्राम पंचायत
प्रकृतियह एक स्थायी निकाय है (कभी भंग नहीं होती)।यह एक निर्वाचित निकाय है (5 साल के लिए)।
सदस्यगाँव के सभी वयस्क मतदाता (18+)।वार्ड सदस्य (पंच) और सरपंच।
भूमिकायह विधायी अंग (संसद) की तरह है जो निर्णय लेती है।यह कार्यपालिका (सरकार) की तरह है जो निर्णयों को लागू करती है।
शक्तियह पंचायत के कार्यों को मंजूरी देती है।यह ग्राम सभा के प्रति जवाबदेह होती है।

10. महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद (एक नज़र में)

CTET और अन्य परीक्षाओं में सीधे अनुच्छेद पूछे जा सकते हैं:

  • 243: परिभाषाएं।

  • 243-A: ग्राम सभा।

  • 243-B: पंचायतों का गठन (त्रि-स्तरीय)।

  • 243-C: पंचायतों की संरचना।

  • 243-D: स्थानों का आरक्षण (SC/ST/Women)।

  • 243-E: पंचायतों की अवधि (5 वर्ष)।

  • 243-F: सदस्यता के लिए अयोग्यताएं।

  • 243-G: पंचायतों की शक्तियां और उत्तरदायित्व (29 विषय)।

  • 243-K: पंचायतों के लिए निर्वाचन (राज्य निर्वाचन आयोग)।


11. चुनौतियां और निष्कर्ष

यद्यपि पंचायती राज ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है, फिर भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं:

  1. सरपंच-पति संस्कृति: महिला सरपंच होने के बावजूद वास्तविक शक्ति उनके पतियों के पास होना।

  2. धन की कमी: पंचायतों के पास अपने स्वयं के आय स्रोत बहुत सीमित हैं, वे राज्य सरकार के अनुदान पर निर्भर हैं।

  3. ग्राम सभा की अनियमित बैठकें: कई जगहों पर ग्राम सभा की बैठकें केवल कागजों पर होती हैं।

निष्कर्ष:

पंचायती राज व्यवस्था ने ग्रामीण भारत में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाई है। एक शिक्षक के रूप में, यह समझाना आवश्यक है कि सक्रिय नागरिकता (ग्राम सभा में भाग लेना) ही लोकतंत्र को सफल बनाती है। हरदा (Hardas) गाँव की कहानी (NCERT कक्षा 6) इसका बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे ग्राम सभा पानी की समस्या सुलझा सकती है।


मुख्य बिंदु याद रखें (Quick Revision for Exam):

  • जनक: लॉर्ड रिपन।

  • शिल्पकार: बलवंत राय मेहता।

  • संवैधानिक संशोधन: 73वां (1992)।

  • लागू हुआ: 24 अप्रैल 1993।

  • चुनाव आयु: 21 वर्ष।

  • वोट देने की आयु: 18 वर्ष।

  • महिला आरक्षण: $\frac{1}{3}$ (न्यूनतम)।

  • विषय: 29 (11वीं अनुसूची)।

  • संरचना: ग्राम (गाँव) -> जनपद (ब्लॉक) -> जिला (जिला)।

  • सचिव की नियुक्ति: सरकार द्वारा।



पंचायती राज

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