मानव संसाधन

Sunil Sagare
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 मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं। प्रकृति की देन केवल तभी महत्वपूर्ण होती है जब वह लोगों के लिए उपयोगी होती है। लोग अपनी आवश्यकताओं और योग्यताओं से उसे संसाधन में परिवर्तित करते हैं। इस प्रकार, मानव संसाधन ही अंतिम संसाधन है।

स्वस्थ, शिक्षित और अभिप्रेरित लोग अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों का विकास करते हैं। 


1. जनसंख्या का वितरण (Distribution of Population)

भूपृष्ठ पर जिस प्रकार लोग फैले हैं, उसे जनसंख्या वितरण का प्रतिरूप कहते हैं। विश्व की जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है।

  • विश्व की $90\%$ से अधिक जनसंख्या भूपृष्ठ के लगभग $30\%$ भाग पर निवास करती है।

  • शेष $70\%$ भू-भाग पर या तो विरल जनसंख्या है या वह निर्जन है।

  • विषुवत वृत्त (Equator) के दक्षिण की अपेक्षा विषुवत वृत्त के उत्तर में बहुत अधिक लोग रहते हैं।

  • विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग तीन-चौथाई ($3/4$) भाग दो महाद्वीपों— एशिया और अफ्रीका में रहता है।

  • विश्व के $60\%$ लोग केवल $10$ देशों में रहते हैं। इन सभी देशों में $10$ करोड़ से अधिक लोग हैं।

अत्यधिक घने बसे क्षेत्र

  • दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया।

  • यूरोप।

  • उत्तर-पूर्वी उत्तर अमेरिका।

विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र

  • उच्च अक्षांशीय क्षेत्र।

  • उष्ण कटिबंधीय मरुस्थल।

  • उच्च पर्वत।

  • विषुवतीय वनों के क्षेत्र।



2. जनसंख्या घनत्व (Density of Population)

पृथ्वी पृष्ठ के एक इकाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। इसे सामान्य रूप से प्रति वर्ग किलोमीटर में व्यक्त किया जाता है।

सूत्र:

$$\text{जनसंख्या घनत्व} = \frac{\text{कुल जनसंख्या}}{\text{कुल क्षेत्रफल}}$$

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • संपूर्ण विश्व का औसत जनसंख्या घनत्व $51$ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

  • भारत का जनसंख्या घनत्व: वर्ष $2011$ की जनगणना के अनुसार, भारत का जनसंख्या घनत्व $382$ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

  • दक्षिण-मध्य एशिया में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व है। इसके पश्चात क्रमशः पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया का स्थान है।


3. जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Population Distribution)

लोग कुछ स्थानों पर रहना पसंद करते हैं जबकि कुछ स्थानों पर कम। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(A) भौगोलिक कारक (Geographical Factors)

1. स्थलाकृति (Topography)

  • लोग सदैव पर्वतों और पठारों की तुलना में मैदानी भागों में रहना पसंद करते हैं।

  • मैदानी क्षेत्र खेती, विनिर्माण और सेवा क्रियाओं के लिए उपयुक्त होते हैं।

  • उदाहरण: भारत में गंगा का मैदान विश्व के सबसे अधिक घने बसे क्षेत्रों में से एक है, जबकि एंडीज, आल्प्स और हिमालय जैसे पर्वत विरल बसे हुए हैं।

2. जलवायु (Climate)

  • लोग सामान्य रूप से चरम जलवायु (अत्यधिक गर्म अथवा अत्यधिक ठंडी) से बचते हैं।

  • सहारा मरुस्थल (अत्यधिक गर्म) या रूस के ध्रुवीय प्रदेश, कनाडा और अंटार्कटिक (अत्यधिक ठंडे) में जनसंख्या कम है।

  • समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्र बसाव के लिए उपयुक्त होते हैं।

3. मृदा (Soil)

  • उपजाऊ मृदा कृषि के लिए उपयुक्त भूमि प्रदान करती है।

  • उदाहरण: भारत में गंगा और ब्रह्मपुत्र, चीन में ह्वांग-हो और चांग जियांग तथा मिस्र में नील नदी के उपजाऊ मैदान घने बसे हुए क्षेत्र हैं।

4. जल (Water)

  • लोग उन क्षेत्रों में रहने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ अलवणीय जल (Fresh water) आसानी से उपलब्ध होता है।

  • विश्व की नदी घाटियाँ घने बसे क्षेत्र हैं, जबकि मरुस्थल विरल जनसंख्या वाले हैं।

5. खनिज (Minerals)

  • खनिज निक्षेपों वाले क्षेत्र अधिक बसे हुए हैं।

  • खनन कार्य रोजगार पैदा करता है।

  • उदाहरण: दक्षिण अफ्रीका की हीरे की खानें और मध्य पूर्व एशिया में तेल की खोज ने इन क्षेत्रों में लोगों को रहने के लिए प्रेरित किया है।

(B) सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारक

1. सामाजिक कारक

  • अच्छे आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र अत्यधिक घने बसे होते हैं।

  • उदाहरण: पुणे, बैंगलोर।

2. सांस्कृतिक कारक

  • धर्म और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान लोगों को आकर्षित करते हैं।

  • उदाहरण: वाराणसी, यरुशलम और वेटिकन सिटी।

3. आर्थिक कारक

  • औद्योगिक क्षेत्र रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। बड़ी संख्या में लोग इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं।

  • उदाहरण: जापान में ओसाका और भारत में मुंबई दो घने बसे क्षेत्र हैं।


4. जनसंख्या परिवर्तन (Population Change)

जनसंख्या परिवर्तन से तात्पर्य एक निश्चित अवधि के दौरान लोगों की संख्या में परिवर्तन से है। विश्व की जनसंख्या स्थिर नहीं रही है। यह कई गुना बढ़ गई है।

जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण

जनसंख्या में परिवर्तन मुख्य रूप से जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास के कारण होता है।

1. जन्म दर (Birth Rate):

प्रति $1000$ व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या को जन्म दर कहते हैं।

2. मृत्यु दर (Death Rate):

प्रति $1000$ व्यक्तियों पर मृतकों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं।

3. प्रवास (Migration):

किसी क्षेत्र विशेष में लोगों के आने-जाने को प्रवास कहते हैं।

प्राकृतिक वृद्धि दर (Natural Growth Rate)

जन्म दर और मृत्यु दर के बीच के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि दर कहते हैं।

$$\text{प्राकृतिक वृद्धि दर} = \text{जन्म दर} - \text{मृत्यु दर}$$
  • यदि जन्म दर, मृत्यु दर से अधिक है = जनसंख्या बढ़ती है।

  • यदि जन्म दर, मृत्यु दर से कम है = जनसंख्या घटती है।

  • यदि जन्म दर और मृत्यु दर समान हैं = जनसंख्या स्थिर रहती है।

विश्व में जनसंख्या के बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि मृत्यु दर की तुलना में जन्म दर का अधिक होना है।


5. प्रवास के प्रकार (Types of Migration)

प्रवास जनसंख्या के आकार को परिवर्तित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। लोग एक देश के भीतर अथवा देशों के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं।

शब्दावली (महत्वपूर्ण):

  • उत्प्रवासी (Emigrants): वे लोग होते हैं जो देश छोड़ते हैं।

  • आप्रवासी (Immigrants): वे लोग होते हैं जो देश में आते हैं।

जनसंख्या पर प्रभाव:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भीतरी प्रवास (in-migration) अथवा आप्रवास द्वारा संख्या बढ़ी है।

  • सूडान जैसा देश एक ऐसा उदाहरण है जिसमें लोगों के बाहर चले जाने अथवा उत्प्रवास के कारण जनसंख्या में कमी का अनुभव किया गया है।

प्रवास की सामान्य प्रवृत्ति:

अंतर्राष्ट्रीय प्रवास की सामान्य प्रवृत्ति यह है कि लोग अच्छे आर्थिक अवसरों की खोज में 'कम विकसित' राष्ट्रों से 'अधिक विकसित' राष्ट्रों की ओर चले जाते हैं। देशों के अंदर, बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की खोज में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं।


6. जनसंख्या परिवर्तन के प्रतिरूप (Patterns of Population Change)

जनसंख्या वृद्धि की दर विश्व के अलग-अलग देशों में भिन्न-भिन्न है।

  • यद्यपि विश्व की कुल जनसंख्या तीव्रता से बढ़ रही है, तथापि सभी देशों में यह वृद्धि अनुभव नहीं की जा रही है।

  • केन्या (Kenya): यहाँ जनसंख्या वृद्धि दर ऊँची है। यहाँ जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही उच्च हैं। हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ मृत्यु दर कम हो गई है, परंतु जन्म दर अभी भी अधिक है जिससे वृद्धि दर बढ़ रही है।

  • यूनाइटेड किंगडम (UK): यहाँ निम्न जन्म दर और मृत्यु दर के कारण जनसंख्या वृद्धि की दर मंद है।


7. जनसंख्या संघटन (Population Composition)

किसी देश की जनसंख्या कितनी भी अधिक हो, उसका उस देश के आर्थिक विकास के स्तर से कुछ लेना-देना नहीं है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश और जापान अति घने बसे देश हैं, लेकिन जापान बांग्लादेश से आर्थिक रूप से अधिक विकसित है।

संसाधन के रूप में लोगों की भूमिका को समझने के लिए हमें उनके गुणों के बारे में जानना आवश्यक है। लोग अपनी आयु, लिंग, साक्षरता स्तर, स्वास्थ्य दशाओं, व्यवसाय और आय के स्तर पर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। इस संरचना को 'जनसंख्या संघटन' कहते हैं।

जनसंख्या पिरामिड (Population Pyramid)

जनसंख्या संघटन का अध्ययन करने की एक रुचिकर विधि 'जनसंख्या पिरामिड' है, जिसे आयु-लिंग पिरामिड भी कहते हैं।


जनसंख्या पिरामिड क्या दर्शाता है?

  1. कुल जनसंख्या विभिन्न आयु वर्गों में विभाजित है (जैसे $5-9$ वर्ष, $10-14$ वर्ष)।

  2. कुल जनसंख्या का प्रतिशत इन वर्गों में से प्रत्येक वर्ग में पुरुष और स्त्रियों में उपविभाजित है।

पिरामिड की संरचना:

  • आधार (Base): नीचे का भाग बच्चों ( $15$ वर्ष से कम) की संख्या को दिखाता है और जन्म दर के स्तर को दर्शाता है।

  • शीर्ष (Top): ऊपर का भाग वृद्ध लोगों ( $65$ वर्ष से अधिक) की संख्या को दिखाता है और मृतकों की संख्या को दर्शाता है।

  • आश्रित आबादी: जनसंख्या पिरामिड एक देश में आश्रित लोगों की संख्या भी बताता है।

    • युवा आश्रित: $15$ वर्ष से कम आयु के लोग।

    • वृद्ध आश्रित: $65$ वर्ष से अधिक आयु के लोग।

    • कार्यशील आयु वर्ग: $15$ से $65$ वर्ष के लोग (आर्थिक रूप से सक्रिय)।

विभिन्न देशों के पिरामिड

1. केन्या का पिरामिड (त्रिभुजाकार):

  • लक्षण: आधार बहुत चौड़ा है और ऊपर की ओर तेजी से संकरा होता जाता है।

  • कारण: यहाँ जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही बहुत ऊँची हैं। बहुत से बच्चे जन्म लेते हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर की मृत्यु शैशव काल में ही हो जाती है और कुछ ही वृद्ध हो पाते हैं।

2. भारत का पिरामिड:

  • लक्षण: जिन देशों में मृत्यु दर (विशेषकर शिशुओं में) कम हो रही है, वहाँ पिरामिड आधार पर चौड़ा है लेकिन ऊपर की ओर धीरे-धीरे संकरा होता है।

  • कारण: इसका अर्थ है कि यहाँ अधिक लोग प्रौढ़ आयु तक जीवित रहते हैं। यह पिरामिड एक विशाल 'कार्यशील जनसंख्या' का संकेत देता है, जो एक मजबूत मानव संसाधन है।

3. जापान का पिरामिड:

  • लक्षण: इसका आधार संकरा है।

  • कारण: निम्न जन्म दर के कारण आधार संकरा है। घटी हुई मृत्यु दर के कारण अधिक लोग वृद्ध आयु तक पहुँचते हैं।


8. महत्वपूर्ण शब्दावली एवं तथ्य (CTET Quick Revision)

1. जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy):

यह उन वर्षों की संख्या है, जिसमें औसत व्यक्ति के जीवित रहने की आशा की जा सकती है।

2. साक्षरता (Literacy):

भारत की जनगणना के अनुसार, $7$ वर्ष या उससे अधिक आयु का व्यक्ति जो किसी भी भाषा को समझकर लिख तथा पढ़ सकता है, उसे साक्षर माना जाता है।

3. लिंगानुपात (Sex Ratio):

प्रति $1000$ पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं।

$$\text{लिंगानुपात} = \frac{\text{महिलाओं की संख्या}}{\text{पुरुषों की संख्या}} \times 1000$$
  • लिंगानुपात का कम होना महिलाओं की निम्न स्थिति को दर्शाता है।

4. मानव संसाधन विकास मंत्रालय:

भारत सरकार के अधीन 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय' का निर्माण वर्ष $1985$ में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के कौशल को बढ़ाना है।

5. प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PKVY):

इसे $2015$ में $1$ करोड़ भारतीय युवाओं को $2016$ से $2020$ तक प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।


9. निष्कर्ष

मानव संसाधन विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य अनिवार्य तत्व हैं। कुशल, उत्साही और आशावादी युवा किसी भी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। भारत जैसे देश के लिए, जहाँ एक बड़ी युवा आबादी है, यह आवश्यक है कि उन्हें योग्य और उत्पादक बनाने के लिए अवसर प्रदान किए जाएं।


CTET विशेष नोट: परीक्षा में अक्सर जनसंख्या पिरामिड के आकार और उससे जुड़े देश की स्थिति (जैसे विकासशील बनाम विकसित) पर प्रश्न पूछे जाते हैं। साथ ही, घनत्व और वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में 'सामाजिक कारक' और 'भौगोलिक कारक' के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।



मानव संसाधन

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