प्रथम साम्राज्य: मौर्य

Sunil Sagare
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मौर्य साम्राज्य: एक परिचय

मौर्य साम्राज्य भारत के इतिहास का पहला सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था। इसका विस्तार न केवल आधुनिक भारत के अधिकांश हिस्सों में था, बल्कि अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला हुआ था। CTET परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें से प्रशासन, अशोक के धम्म और ऐतिहासिक स्रोतों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।


1. ऐतिहासिक स्रोत (Sources of Information)

मौर्य काल के इतिहास को जानने के लिए हमारे पास दो मुख्य प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं: साहित्यिक और पुरातात्विक।

क. साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)

  • अर्थशास्त्र (Arthashastra):

    • रचयिता: चाणक्य (अन्य नाम: कौटिल्य या विष्णुगुप्त)।

    • विषय: यह राजनीति, प्रशासन, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर लिखी गई एक विस्तृत पुस्तक है।

    • इसमें राजा के कर्तव्यों, मंत्रियों के चुनाव और युद्ध की रणनीतियों का वर्णन है।

    • सप्तांग सिद्धांत (राज्य के 7 अंग) का उल्लेख इसी में मिलता है: राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र।

  • इंडिका (Indica):

    • रचयिता: मेगस्थनीज।

    • मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था जिसे सेल्युकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।

    • मूल पुस्तक अब उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके अंश बाद के यूनानी लेखकों के कार्यों में मिलते हैं।

    • इसमें पाटलिपुत्र नगर प्रशासन और सैन्य व्यवस्था का आँखों देखा वर्णन है।

  • मुद्राराक्षस:

    • रचयिता: विशाखदत्त।

    • यह एक नाटक है जो बताता है कि कैसे चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की मदद से नंद वंश का नाश किया।

  • बौद्ध और जैन ग्रंथ:

    • दीपवंश और महावंश: ये श्रीलंकाई बौद्ध ग्रंथ हैं जो अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार की जानकारी देते हैं।

    • दिव्यावदान: इसमें बिंदुसार और अशोक की कथाएं हैं।

    • परिशिष्टपर्वन: यह जैन ग्रंथ चंद्रगुप्त मौर्य के जैन धर्म स्वीकार करने की जानकारी देता है।

ख. पुरातात्विक स्रोत (Archaeological Sources)

  • अशोक के अभिलेख: ये सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं। इन्हें जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में सबसे पहले पढ़ा था।

  • भवन और स्मारक: कुम्हरार (पटना) में मिला 80 स्तंभों वाला राजमहल का अवशेष।

  • मृदभांड: उत्तरी काले पॉलिश वाले मृदभांड (NBPW) इस काल की विशेषता हैं।


2. प्रमुख शासक और उनकी उपलब्धियां

चंद्रगुप्त मौर्य (321 ई.पू. – 297 ई.पू.)

  • साम्राज्य की स्थापना: चंद्रगुप्त ने अपने गुरु चाणक्य की सहायता से मगध के अंतिम नंद शासक, घनानंद को हराकर 321 ई.पू. में मौर्य वंश की नींव रखी।

  • सेल्युकस से युद्ध: 305 ई.पू. में उन्होंने यूनानी शासक सेल्युकस निकेटर को हराया।

  • संधि: सेल्युकस ने काबुल, कंधार, हेरात और मकराान (बलूचिस्तान) के क्षेत्र चंद्रगुप्त को सौंप दिए।

  • विवाह संबंध: सेल्युकस की पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से हुआ।

  • जैन धर्म: जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने जैन धर्म अपनाया और भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) चले गए, जहां 'संलेखना' विधि से प्राण त्यागे।

बिंदुसार (297 ई.पू. – 273 ई.पू.)

  • चंद्रगुप्त का पुत्र और उत्तराधिकारी।

  • उपाधि: यूनानी लेखकों ने इसे 'अमित्रघात' (शत्रुओं का नाश करने वाला) कहा है।

  • इन्होंने दक्षिण भारत की ओर साम्राज्य का विस्तार किया (मैसूर तक)।

  • इनके दरबार में सीरिया के राजा एंटियोकस का राजदूत 'डायमेकस' आया था।

  • इन्होंने आजीवक संप्रदाय को संरक्षण दिया।

अशोक महान (269 ई.पू. – 232 ई.पू.)

  • बिंदुसार का पुत्र। इतिहास में सबसे महान शासकों में से एक।

  • राज्याभिषेक 269 ई.पू. में हुआ (पिता की मृत्यु के 4 वर्ष बाद)।

  • अभिलेखों में इनका नाम 'देवानांपिय पियदस्सी' (देवताओं का प्रिय और देखने में सुंदर) मिलता है।

  • 'अशोक' नाम केवल कुछ ही अभिलेखों (जैसे मास्की और गुर्जरा) में मिलता है।


3. कलिंग युद्ध और हृदय परिवर्तन

यह घटना मौर्य इतिहास और अशोक के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ थी।

  • समय: राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ई.पू.)।

  • स्थान: कलिंग (आधुनिक ओडिशा)। यह तटीय क्षेत्र था, जिसे जीतना दक्षिण भारत जाने वाले मार्गों पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण था।

  • परिणाम:

    • अशोक ने कलिंग को जीत तो लिया, लेकिन भीषण रक्तपात हुआ।

    • अभिलेखों के अनुसार, लगभग 1.5 लाख लोग बंदी बनाए गए और 1 लाख से अधिक लोग मारे गए।

    • युद्ध के मैदान में हुए विनाश को देखकर अशोक का हृदय ग्लानि से भर गया।

  • निर्णय: उन्होंने भविष्य में कभी युद्ध न करने का निर्णय लिया।

  • भेरीघोष से धम्मघोष: उन्होंने 'भेरीघोष' (युद्ध की नगाड़े) की नीति त्यागकर 'धम्मघोष' (धर्म की घोषणा) की नीति अपनाई।

  • उल्लेख: इस युद्ध का वर्णन अशोक के 13वें शिलालेख में मिलता है।


4. अशोक का धम्म (Ashoka's Dhamma)

CTET में यहां से सबसे अधिक वैचारिक प्रश्न आते हैं।

  • परिभाषा: अशोक का धम्म कोई नया धर्म या देवी-देवता की पूजा नहीं थी। यह संस्कृत शब्द 'धर्म' का प्राकृत रूप है। यह एक नैतिक संहिता (Code of Conduct) थी।

  • उद्देश्य: साम्राज्य में शांति, सामाजिक समरसता और नैतिक उत्थान करना।

  • धम्म के प्रमुख सिद्धांत:

    • बड़ों का आदर करना।

    • छोटों, दासों और सेवकों के साथ दयापूर्ण व्यवहार करना।

    • सत्य बोलना।

    • अहिंसा का पालन करना (जीव हत्या न करना)।

    • सभी धर्मों और संप्रदायों का सम्मान करना।

    • ब्राह्मणों और श्रमणों को दान देना।

  • धम्म महामात्र:

    • धम्म के प्रचार के लिए अशोक ने एक नए अधिकारी वर्ग की नियुक्ति की जिसे 'धम्म महामात्र' कहा गया।

    • इनका काम जगह-जगह जाकर लोगों को धम्म की शिक्षा देना था।

  • प्रचार के अन्य साधन:

    • अशोक ने अपने संदेश चट्टानों और स्तंभों पर खुदवाए ताकि आम लोग उन्हें पढ़ सकें।

    • जो पढ़ नहीं सकते थे, उनके लिए अधिकारी इन संदेशों को पढ़कर सुनाते थे।

    • उन्होंने सीरिया, मिस्र, ग्रीस और श्रीलंका में भी धम्म प्रचारक भेजे। (पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा)।


5. अशोक के अभिलेख (Inscriptions)

अशोक भारत का पहला शासक था जिसने अभिलेखों के माध्यम से सीधे प्रजा को संबोधित किया।

  • लिपि और भाषा:

    • भाषा: अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में हैं (जो आम लोगों की भाषा थी)।

    • लिपियां:

      1. ब्राम्ही: भारत के अधिकांश भागों में (बाएं से दाएं लिखी जाती थी)।

      2. खरोष्ठी: उत्तर-पश्चिम (पाकिस्तान) में (दाएं से बाएं लिखी जाती थी)।

      3. यूनानी और अरेमाइक: अफगानिस्तान के क्षेत्रों में।

  • स्थान: ये अभिलेख व्यापारिक मार्गों, धार्मिक स्थलों और सीमाओं पर लगाए गए थे।


6. मौर्य प्रशासन (Administration)

मौर्य प्रशासन अत्यधिक केंद्रीयकृत (Centralized) और सुव्यवस्थित था।

क. केंद्रीय प्रशासन

  • राजा: प्रशासन का केंद्र बिंदु। वह कार्यपालिका, न्यायपालिका और सेना का प्रमुख था।

  • मंत्री परिषद: राजा को सलाह देने के लिए एक छोटी संस्था।

  • जासूसी तंत्र: साम्राज्य में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी राजा को गुप्तचरों (Spies) द्वारा मिलती थी।

ख. प्रांतीय प्रशासन

साम्राज्य इतना विशाल था कि इसे एक जगह (पाटलिपुत्र) से संभालना मुश्किल था, इसलिए इसे 5 प्रमुख प्रांतों में बांटा गया था:

  1. उत्तरापथ: राजधानी तक्षशिला (उत्तर-पश्चिम का द्वार, मध्य एशिया जाने का मार्ग)।

  2. दक्षिणापथ: राजधानी सुवर्णगिरि (सोने की खदानों के लिए महत्वपूर्ण, कर्नाटक)।

  3. अवंति राष्ट्र: राजधानी उज्जैनी (उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच का मार्ग)।

  4. कलिंग: राजधानी तोसली

  5. प्राच्य (पूर्वी प्रांत): राजधानी पाटलिपुत्र (सीधे राजा के नियंत्रण में)।

नोट: अक्सर राजकुमारों को इन प्रांतों का राज्यपाल (Governor) बनाकर भेजा जाता था। वे स्थानीय परंपराओं और नियमों का पालन करते थे।

ग. नगर प्रशासन (पाटलिपुत्र का उदाहरण)

मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र के प्रशासन का विस्तृत वर्णन किया है:

  • नगर का प्रशासन 30 सदस्यों की एक समिति द्वारा चलाया जाता था।

  • यह समिति 6 उप-समितियों (Boards) में बंटी थी, प्रत्येक में 5 सदस्य होते थे।

  • कार्य:

    1. शिल्प कला की देखरेख।

    2. विदेशियों की देखरेख।

    3. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण।

    4. व्यापार और वाणिज्य।

    5. वस्तुओं का विनिर्माण और गुणवत्ता।

    6. बिक्री कर वसूलना (वस्तु के मूल्य का 10वां भाग)।

घ. सैन्य प्रशासन

  • सेना की देखरेख भी 30 सदस्यों की समिति और 6 उप-समितियों द्वारा होती थी:

    1. नौसेना

    2. यातायात और रसद

    3. पैदल सेना

    4. अश्वरोही (घोड़े)

    5. रथ सेना

    6. हस्ती सेना (हाथी)


7. कर और नजराना (Tax vs Tribute)

CTET में इन दोनों के बीच का अंतर अक्सर पूछा जाता है।

विशेषताकर (Tax)नजराना (Tribute)
प्रकृतिनियमित (Regular) होता था।अनियमित (Irregular) होता था।
बाध्यतादेना अनिवार्य था।स्वेच्छा से या जब भी संभव हो दिया जाता था।
उदाहरणउपज का हिस्सा (भाग), सिंचाई कर।कीमती पत्थर, हाथी, कंबल, शहद आदि।
मात्रानिश्चित (Fixed)।निश्चित नहीं।
  • भाग (Bhaga): यह मुख्य भू-राजस्व था। किसानों को अपनी उपज का $1/6$ या $1/4$ हिस्सा राजा को देना होता था।

  • अर्थशास्त्र के अनुसार: उत्तर-पश्चिम कंबल के लिए और दक्षिण भारत सोने और कीमती पत्थरों के लिए प्रसिद्ध था। ये चीजें नजराने के रूप में मिलती थीं।


8. मौर्यकालीन समाज और जीवन

  • कृषि: अधिकांश जनसंख्या कृषक थी। सिंचाई की व्यवस्था राज्य द्वारा की जाती थी (जैसे सुदर्शन झील का निर्माण)।

  • शिल्पकार: व्यापारी और शिल्पकार श्रेणियों (Guilds) में संगठित थे।

  • वनवासी: जंगलों में रहने वाले लोग काफी हद तक स्वतंत्र थे, लेकिन उनसे उम्मीद की जाती थी कि वे राजा को हाथी, लकड़ी, शहद और मोम नजराने के रूप में दें।


9. मौर्य कला (Art and Architecture)

  • स्तंभ: अशोक के एकाश्मक स्तंभ (Monolithic Pillars) चुनार के बलुआ पत्थर से बने हैं। इन पर बहुत चमकदार पॉलिश है।

    • सारनाथ स्तंभ: इसका शीर्ष (Lion Capital) हमारा 'राष्ट्रीय प्रतीक' है। इसमें चार शेर पीठ सटाकर बैठे हैं। नीचे चक्र (धर्मचक्र) है।

  • स्तूप: सांची का स्तूप (मध्य प्रदेश) मौर्य काल में ही ईंटों से बनवाया गया था (बाद में इसका विस्तार हुआ)।

  • यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियां: लोक कला का बेहतरीन उदाहरण (जैसे दीदारगंज की यक्षिणी)।

  • गुफाएं: बराबर की गुफाएं (बिहार) आजीवक संप्रदाय के साधुओं के लिए बनवाई गई थीं।


10. महत्वपूर्ण शब्दावली (Glossary for Revision)

  1. साम्राज्य (Empire): एक बहुत बड़ा राज्य, जिसे संभालने के लिए बड़ी सेना और अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।

  2. वंश (Dynasty): जब एक ही परिवार के लोग एक के बाद एक राजा बनते हैं।

  3. प्राकृत: जनसामान्य की भाषा।

  4. ब्राह्मी: अधिकांश भारतीय लिपियों की जननी।

  5. धम्म महामात्र: नैतिक शिक्षा देने वाला अधिकारी।

  6. संवहन: संदेश लाने-ले जाने वाले लोग।


11. मौर्य साम्राज्य का पतन

अशोक की मृत्यु (232 ई.पू.) के लगभग 50 वर्षों के भीतर साम्राज्य का पतन हो गया। इसके कारण थे:

  • कमजोर उत्तराधिकारी।

  • अत्यधिक केंद्रीयकृत प्रशासन (राजा कमजोर होते ही व्यवस्था ढह गई)।

  • वित्तीय संकट (बड़ी सेना और दान देने के कारण)।

  • प्रांतों में विद्रोह।

  • अंतिम शासक: बृहद्रथ। इसकी हत्या इसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ई.पू. में कर दी और शुंग वंश की स्थापना की।



प्रथम साम्राज्य: मौर्य

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